1
00:00:00,040 --> 00:00:05,760
नमस्कार, स्वागत है आपका महाभारत 
कंप्लीट सागा सीज़न 3 में आज हम 

2
00:00:05,760 --> 00:00:10,760
कुरुक्षेत्र युद्ध के तीसरे दिन 
की घटनाओं पर एक गहरी मतलब बहुत 

3
00:00:10,760 --> 00:00:15,360
ही डिटेल्ड चर्चा करने वाले हैं। 
और तीसरा दिन ये सिर्फ युद्ध का 

4
00:00:15,360 --> 00:00:18,240
एक और दिन नहीं था। 
ये वो दिन था जहाँ रणनीति से 

5
00:00:18,240 --> 00:00:20,800
ज्यादा। 
आप कह सकते हैं, साइकोलॉजी ने 

6
00:00:20,920 --> 00:00:23,320
युद्ध का रुख तय किया। 
बिल्कुल सही कहा। 

7
00:00:23,600 --> 00:00:28,240
दूसरा दिन तो भयानक था ही। 
एक तरफ अर्जुन और भीष्म तो दूसरी 

8
00:00:28,240 --> 00:00:32,320
तरफ दृष्ट्युम और द्रोण। 
और भीम ने तो कलिंग और निषाद सेना

9
00:00:32,320 --> 00:00:36,560
का लगभग सफाया ही कर दिया था। 
अब तीसरे दिन की सुबह हो चुकी है 

10
00:00:36,560 --> 00:00:39,960
और दोनों सेनाएं एक बार फिर आमने 
सामने खड़ी है। 

11
00:00:40,240 --> 00:00:44,320
एक नए जोश और शायद एक नई रणनीति 
के साथ। 

12
00:00:44,440 --> 00:00:48,720
और यही से कहानी शुरू होती है 
फोरमतीओन्स् की मतलब क्यूँ रचना 

13
00:00:48,720 --> 00:00:51,440
की? 
तो चलिए इसे समझते हैं तीसरे दिन 

14
00:00:51,440 --> 00:00:55,440
की सुबह दोनों सेनाओं की क्या 
स्ट्रेटेजी थी, कौरवों ने क्या 

15
00:00:55,440 --> 00:00:58,680
फॉर्मेशन बनाया था। 
कौरवों ने पितामह भीष्म के 

16
00:00:58,680 --> 00:01:02,760
नेतृत्व में गरुड़ बनाया। 
मतलब ईगल फॉर्मेशन। 

17
00:01:02,800 --> 00:01:06,920
ईगल फॉर्मेशन हाँ। 
ये एक बहुत ही आक्रामक ओफेन्सिव 

18
00:01:07,080 --> 00:01:10,240
रचना है। 
इसका एक ही मकसद होता है दुश्मन 

19
00:01:10,240 --> 00:01:13,480
की डिफेंस लाइन को एक ही झटके में
चीरते हुए अंदर घुस जाना। 

20
00:01:13,480 --> 00:01:17,040
गरुड़ क्यूँ? 
ये नाम भी तो दिलचस्प है गरुड़ 

21
00:01:17,040 --> 00:01:20,800
भगवान विष्णु का वाहन है। 
तो क्या गौरव यहाँ एक तरह का 

22
00:01:20,800 --> 00:01:23,880
साइकोलॉजिकल मैसेज देने की कोशिश 
कर रहे थे? 

23
00:01:24,560 --> 00:01:29,600
ये एक मनोवैज्ञानिक संदेश ही था 
कि हम अजय हैं पर विडंबना देखिए। 

24
00:01:29,920 --> 00:01:33,040
विष्णु स्वयं कृष्ण के रूप में 
दूसरी तरफ थे। 

25
00:01:33,040 --> 00:01:35,880
सही? 
जहाँ तक बनावट की बात है, पितामह 

26
00:01:35,880 --> 00:01:40,560
भीष्म खुद उस गरुड़ की चौंच पर थे
ए टिप ऑफ़ थिस पियर अच्छा उनकी 

27
00:01:40,560 --> 00:01:43,800
आँखों की जगह थे गुरु द्रोणाचार्य
और कृत वर्मा। 

28
00:01:43,880 --> 00:01:48,560
अश्वथमा और कृपाचार्य सिरकी जगह 
थे और दुर्योधन अपने भाइयों के 

29
00:01:48,560 --> 00:01:51,560
साथ उस फॉर्मेशन की पूंछ की रक्षा
कर रहा था। 

30
00:01:51,640 --> 00:01:56,680
मतलब ए स्ट्रांग रेयर गार्ड। 
ये तो एक ऑल आउट अटैक फॉर्मेशन 

31
00:01:56,680 --> 00:01:58,840
है। 
आज की मिलिट्री टर्म्स में देखे 

32
00:01:58,840 --> 00:02:02,480
तो ये ब्लडस्क्रीन जैसा है। 
एक लाइटनिंग फास्ट हमला। 

33
00:02:02,480 --> 00:02:05,200
एग्ज़ैक्ट्ली बिलकुल। 
लेकिन इस गरुड़ क्यूँ की सबसे 

34
00:02:05,200 --> 00:02:09,880
बड़ी ताकत इसकी चौंच यानी भीष्म 
थी और यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी 

35
00:02:09,880 --> 00:02:10,880
भी थी? 
कैसे? 

36
00:02:11,000 --> 00:02:16,240
अगर आप टिप ऑफ़ दी स्फेयर को ही 
घेर ले या उसे रोक दे तो पूरा 

37
00:02:16,240 --> 00:02:18,560
फॉर्मेशन अपना मोमेंटम खो देता 
है। 

38
00:02:18,760 --> 00:02:23,440
अच्छा तो इस ब्लिचक्रीक का जवाब 
पांडवों ने कैसे दिया? 

39
00:02:24,040 --> 00:02:27,640
उन्होंने भी कोई जवाबी हमला करने 
वाला फोर्मेशन बनाया होगा। 

40
00:02:27,680 --> 00:02:31,480
नहीं, उन्होंने बिल्कुल उल्टा 
किया और यही उनकी चतुराई दिखती 

41
00:02:31,480 --> 00:02:34,240
है। 
पांडवों ने अर्जुन और दृष्टध्युम 

42
00:02:34,240 --> 00:02:38,800
के नेतृत्व में अर्धचंद्र व्यूह 
यानी क्रेसेंट मून फोर्मेशन 

43
00:02:38,800 --> 00:02:42,160
बनाया। 
अर्धचंद्र व्यूह मतलब क्रेसेंट 

44
00:02:42,160 --> 00:02:43,280
मून। 
हाँ। 

45
00:02:43,360 --> 00:02:47,080
ये एक बहुत ही स्मार्ट, डिफेंसिव,
ओफेन्सिव स्ट्रेटेजी है। 

46
00:02:47,200 --> 00:02:51,600
तो उन्होंने कौरवों की सबसे बड़ी 
ताकत को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत 

47
00:02:51,600 --> 00:02:55,640
बनाने की सोंची। 
मतलब उन्होंने गरुड़ की चोंच को 

48
00:02:55,640 --> 00:02:59,640
फंसाने के लिए एक जाल बिछाया। 
आपने बिल्कुल सही पकड़ा। 

49
00:02:59,720 --> 00:03:02,600
इसकी संरचना एक आधे चाँद की तरह 
होती है। 

50
00:03:02,680 --> 00:03:06,920
जो दुश्मन को अपने अंदर आने का 
लालच देता है और फिर किनारों से 

51
00:03:06,920 --> 00:03:08,880
उसे घेर लेता है। 
अरे वाह। 

52
00:03:09,160 --> 00:03:14,400
इस अर्धचंद्र के दाहिने सिरे पर 
थे महाबली भीमसेन और बाएं सिरे पर

53
00:03:14,400 --> 00:03:17,480
थे अर्जुन। 
युधिष्ठिर बिल्कुल केंद्र में थे 

54
00:03:17,520 --> 00:03:22,280
और उनके साथ नकुल और सहदेव। 
तो ये एक तरह का पिंजर मूवमेंट 

55
00:03:22,280 --> 00:03:25,200
है। 
दुश्मन को फंसाओ और फिर दोनों तरफ

56
00:03:25,200 --> 00:03:29,160
से हमला कर दो कमाल की रणनीति। 
बिल्कुल तो मंच तैयार है। 

57
00:03:29,280 --> 00:03:33,760
एक तरफ गरुड़ का सीधा हमला, दूसरी
तरफ अर्धचंद्र का घेराव, शंख बजते

58
00:03:33,760 --> 00:03:36,640
हैं और युद्ध शुरू होता। 
है और शुरू होते ही घमासान मच गया

59
00:03:36,640 --> 00:03:39,080
होगा। 
दो विशाल महासागरों के टकराने 

60
00:03:39,080 --> 00:03:42,200
जैसा दृश्य। 
बिल्कुल आकाश, सच में। 

61
00:03:42,440 --> 00:03:44,880
हजारों लाखों तीरों से काला हो 
गया था। 

62
00:03:45,200 --> 00:03:50,080
शंख, नगाड़े, भेरी और योद्धाओं के
दहाड़ से धरती कांप उठी थी। 

63
00:03:50,440 --> 00:03:53,760
जैसा की उम्मीद थी, कौरवों ने 
पूरी ताकत से हमला किया। 

64
00:03:53,880 --> 00:03:57,120
भीष्म अपनी पूरी गति से पांडवों 
के क्यूँ में घुसने लगे? 

65
00:03:57,360 --> 00:03:59,800
लेकिन अर्जुन ने इसका करारा जवाब 
दिया। 

66
00:03:59,960 --> 00:04:04,000
उन्होंने अपने से बाणों की ऐसी 
वर्षा की कि गौरव सेना में तबाही 

67
00:04:04,000 --> 00:04:06,200
मच गई। 
और यहाँ से बात सच में दिलचस्प 

68
00:04:06,240 --> 00:04:09,240
जाती है। 
शुरुआत में कौन से बड़े योद्धा 

69
00:04:09,240 --> 00:04:12,200
आमने सामने आए? 
कौरवों की तरफ से शकुनी और उसके 

70
00:04:12,200 --> 00:04:16,040
पुत्रों ने हमला बोला लेकिन उनका 
सामना करने के लिए सत्य की और 

71
00:04:16,040 --> 00:04:17,880
अभिमन्यु आगे आए। 
अच्छा? 

72
00:04:17,920 --> 00:04:20,959
इन दोनों ने मिलकर शगुनी की पूरी 
सेना को रौंद डाला। 

73
00:04:21,320 --> 00:04:24,320
लेकिन असली संकट कहीं और पैदा हो 
रहा था। 

74
00:04:24,320 --> 00:04:27,800
कहाँ पर? 
क्यूँ के केंद्र में भीष्म, 

75
00:04:28,080 --> 00:04:33,160
द्रोणाचार्य, जयद्रत और दुर्योधन 
के भाइयों ने एक साथ मिलकर सीधे 

76
00:04:33,160 --> 00:04:35,560
युधिष्ठिर को निशाना बनाया? 
ओह। 

77
00:04:35,560 --> 00:04:39,680
ये एक क्लासिक मिलिट्री मूव है। 
लीडर को खत्म करो और सेना का मुरल

78
00:04:39,720 --> 00:04:43,480
अपने आप टूट जाता है। 
बाप रे पांडवों के राजा पर सीधा 

79
00:04:43,480 --> 00:04:45,920
हमला ये तो बहुत खतरनाक स्थिति 
थी। 

80
00:04:45,960 --> 00:04:50,040
बहुत ज्यादा युधिष्ठिर को गिरता 
देख नकुल और सहदेव उनकी रक्षा के 

81
00:04:50,040 --> 00:04:53,840
लिए आए लेकिन भीष्म और द्रोण की 
संयुक्त शक्ति के सामने वो ज्यादा

82
00:04:53,840 --> 00:04:57,640
देर टिक नहीं पा रहे थे। 
युधिष्ठिर की सेना पीछे हटने लगी।

83
00:04:58,120 --> 00:05:02,240
एक पल के लिए ऐसा लगा के पांडवों 
का अर्धचंद्रव्यू टूट जाएगा और 

84
00:05:02,240 --> 00:05:04,320
उनकी रणनीति पूरी तरह से फैल हो 
जाएगी। 

85
00:05:04,440 --> 00:05:08,720
भीष्म और द्रोण का एक साथ हमला ये
तो किसी भी सेना के लिए एक 

86
00:05:08,720 --> 00:05:12,160
नाइटमेयर जैसा होगा। 
पांडवों ने इसका सामना कैसे किया?

87
00:05:12,160 --> 00:05:15,440
यहाँ पर एंट्री होती है भीमसेन और
उनके राक्षस पुत्र। 

88
00:05:15,560 --> 00:05:20,480
घटोत कच की अच्छा जब उन्होंने 
देखा की युधिष्ठिर संकट में है तो

89
00:05:20,480 --> 00:05:25,680
वो दोनों अपनी अपनी गदा लेकर गौरव
सेना पर ऐसे टूटे जैसे भूखे शेर 

90
00:05:25,960 --> 00:05:29,480
शिकार पर टूटते हैं। 
भीम और घटोत कच ये तो प्रलय और 

91
00:05:29,480 --> 00:05:32,480
महाप्रलय की जुगलबंदी हो गई। 
एक तरफ बाहुबल? 

92
00:05:32,760 --> 00:05:36,800
दूसरी तरफ मायावी शक्ति। 
और कौरवों के लिए ये नाइटमेयर बन 

93
00:05:36,800 --> 00:05:40,160
गया। 
भीमसेन ने दुर्योधन के भाइयों को 

94
00:05:40,160 --> 00:05:42,720
निशाना बनाया और उन्हें बुरी तरह 
घायल कर दिया। 

95
00:05:42,840 --> 00:05:46,040
उधर घटोतकच ने अपनी मायावी 
शक्तियां का इस्तेमाल करना शुरू 

96
00:05:46,040 --> 00:05:48,240
कर दिया। 
उन्होंने और उनकी राक्षस सेना ने 

97
00:05:48,240 --> 00:05:52,440
कौरव सेना में ऐसी खलबली मचाई की 
सैनिक अपनी पंक्तियाँ। 

98
00:05:52,480 --> 00:05:55,080
अपना फॉर्मेशन सब कुछ तोड़कर 
भागने लगे। 

99
00:05:55,080 --> 00:05:57,880
तो उनका गरुड़ क्यूँ टूट गया? 
टूट गया तितर बितर हो गया। 

100
00:05:57,880 --> 00:06:01,760
किसी भी सेना के लिए अपनी रणनीति 
का इस तरह फैल होना और वो भी 

101
00:06:01,760 --> 00:06:06,320
युद्ध के बीच में ये तो के लिए 
बहुत बड़ा झटका होता है और जब एक 

102
00:06:06,320 --> 00:06:10,600
सेनापति की रणनीति ही फैल हो जाए 
तो वो अक्सर अपनी हताशा किसी और 

103
00:06:10,600 --> 00:06:13,200
पर निकालता है। 
दुर्योधन की फ्रस्ट्रेशन का 

104
00:06:13,200 --> 00:06:16,080
निशाना कौन बना? 
उसका निशाना बने उसके अपने ही 

105
00:06:16,080 --> 00:06:22,080
सेनापति पितामह भीष्म दुर्योधन का
गुस्सा और उसकी हताशा दोनों चरम 

106
00:06:22,080 --> 00:06:25,360
पर थे। 
वो सीधा पितामह भीष्म के पास गया 

107
00:06:25,440 --> 00:06:29,600
और वहाँ पहुँचकर उसने जो कहा। 
उसने युद्ध का रुख ही बदल दिया। 

108
00:06:29,680 --> 00:06:32,320
ऐसा क्या कहा? 
उसने दुर्योधन ने गुस्से में 

109
00:06:32,320 --> 00:06:35,240
पितामह भीष्म पर सीधा सीधा आरोप 
लगाया। 

110
00:06:35,240 --> 00:06:39,920
उसने कहा पितामह आप और गुरु 
द्रोणों पांडवों से प्रेम करते 

111
00:06:39,920 --> 00:06:42,600
हैं, आप उनके प्रति सॉफ्ट हैं 
क्या? 

112
00:06:42,600 --> 00:06:45,480
हाँ। 
उसने कहा इसीलिए आप अपनी पूरी 

113
00:06:45,480 --> 00:06:49,400
शक्ति से नहीं लड़ रहे हैं। 
अगर आप चाहते तो पांडव सेना अब तक

114
00:06:49,400 --> 00:06:53,080
खत्म हो गई होती, ऐसा लगता है आप 
हमें धोखा दे रहे हैं। 

115
00:06:53,080 --> 00:06:56,160
ये तो बहुत बड़ा आरोप है। 
ये सिर्फ दुर्योधन का गुस्सा नहीं

116
00:06:56,160 --> 00:06:58,320
था। 
ये उसकी एक सोंची समझी। 

117
00:06:58,320 --> 00:07:02,360
मनोवैज्ञानिक चाल भी हो सकती थी। 
वो जानता था कि भीष्म को उनकी 

118
00:07:02,360 --> 00:07:05,680
निष्ठा पर सवाल उठाकर ही। 
उन्हें उकसाया जा सकता है। 

119
00:07:05,680 --> 00:07:07,880
बिल्कुल। 
उनकी पूरी क्षमता से लड़ने पर 

120
00:07:07,880 --> 00:07:12,560
मजबूर किया जा सकता है। 
भीष्म जैसे महान योद्धा की निष्ठा

121
00:07:12,560 --> 00:07:16,680
पर उनकी लॉयल्टी पर सवाल उठाना, 
उन्होंने क्या जवाब दिया? 

122
00:07:16,680 --> 00:07:20,680
पितामह को ये सुनकर बहुत दुख हुआ।
कहते हैं उनकी आँखों में आंसू आ 

123
00:07:20,680 --> 00:07:23,920
गए। 
लेकिन साथ ही उन पर लगे इस झूठे 

124
00:07:23,920 --> 00:07:27,320
आरोप ने उनके अंदर क्रोध की 
ज्वाला भी भड़का दी। 

125
00:07:27,560 --> 00:07:31,240
उन्होंने दुर्योधन से कहा 
दुर्योधन तुम मेरे घावों को अपने 

126
00:07:31,240 --> 00:07:33,440
तीखे शब्दों से और गहरा कर रहे 
हो। 

127
00:07:33,600 --> 00:07:35,880
बिल्कुल। 
मैं बूढ़ा हो सकता हूँ, लेकिन मैं

128
00:07:35,880 --> 00:07:39,920
अपनी पूरी शक्ति से लड़ रहा हूँ। 
आज मैं तुम्हारे लिए ऐसा पराक्रम 

129
00:07:39,920 --> 00:07:43,120
दिखाऊंगा। 
जो सब याद रखेंगे आज मैं पांडव 

130
00:07:43,120 --> 00:07:47,400
सेना में ऐसा संहार मचाऊंगा कि या
तो मैं रहूँगा या वो एक। 

131
00:07:47,400 --> 00:07:51,600
क्रोधित भीष्म ये पांडवों के लिए 
अच्छी खबर नहीं हो सकती। 

132
00:07:52,160 --> 00:07:54,680
ये महाभारत में एक रिकरिंग थीम है
ना? 

133
00:07:54,800 --> 00:07:58,880
कि कैसे महान योद्धाओं को उनके 
एमोशनल ट्रिगर्स का इस्तेमाल करके

134
00:07:58,880 --> 00:08:02,120
मैनिपुलेट किया जाता है। 
बिल्कुल और ये प्रलंककारी था। 

135
00:08:02,160 --> 00:08:06,440
दुर्योधन के शब्द भीष्म के दिल 
में तीर की तरह झुक गए थे और वो 

136
00:08:06,440 --> 00:08:10,200
सिर्फ एक सेनापति नहीं बल्कि एक 
क्रोधित योद्धा थे जिन्हें अपनी 

137
00:08:10,200 --> 00:08:13,840
वफादारी साबित करनी थी। 
पितामह भीष्म ने पांडव सेना का 

138
00:08:13,840 --> 00:08:17,320
ऐसा संहार शुरू किया जैसे आग जंगल
को जलाती है। 

139
00:08:17,320 --> 00:08:21,240
ओह। 
वो अपने रथ पर फिर भी जाते लाशों 

140
00:08:21,240 --> 00:08:24,280
के ढेर लग जाते। 
उन्होंने अपने दिव्यास्त्रो से 

141
00:08:24,280 --> 00:08:27,920
हजारों सैनिकों को मार गिराया। 
पांडव सेना में हाहाकार मच। 

142
00:08:27,920 --> 00:08:29,480
गया। 
अर्जुन कहाँ थे? 

143
00:08:29,600 --> 00:08:31,600
क्या उन्होंने रोकने की कोशिश 
नहीं की? 

144
00:08:31,600 --> 00:08:34,600
ये अर्जन की वही दुविधा है जो 
गीता के शुरू में थी। 

145
00:08:35,000 --> 00:08:37,159
अपने प्रिय जनों पर कैसे वार 
करें? 

146
00:08:37,200 --> 00:08:42,000
अर्जुन सामने आए लेकिन वो भी अपने
दादा के इस रौद्र रूप को देखकर 

147
00:08:42,000 --> 00:08:46,800
कुछ हिचकचा रहे थे वो भीष्म पर। 
पूरे मन से प्रहार नहीं कर पा रहे

148
00:08:46,800 --> 00:08:47,760
थे। 
अच्छा। 

149
00:08:47,800 --> 00:08:51,920
और उनकी यही हिचकिचाहट पांडवों पर
भारी पड़ रही थी। 

150
00:08:52,160 --> 00:08:55,360
पांडव सेना बस कट रही थी, भाग रही
थी। 

151
00:08:55,560 --> 00:09:00,680
हर तरफ बस मौत का तांडव था और 
यहीं पर श्रीकृष्ण ने हस्तक्षेप 

152
00:09:00,680 --> 00:09:03,120
किया। 
हाँ, एक तरफ भीष्म का विनाश और 

153
00:09:03,120 --> 00:09:07,200
दूसरी तरफ अर्जुन की हिचकिचाहट। 
ये देखकर श्री कृष्ण अपना क्रोध 

154
00:09:07,200 --> 00:09:11,000
रोक नहीं पाए। 
उन्होंने सोचा अगर अर्जुन मोह में

155
00:09:11,000 --> 00:09:15,320
पड़कर अपना कर्तव्य नहीं निभाएगा 
तो मुझे ही इन सब का संहार करना 

156
00:09:15,320 --> 00:09:20,720
पड़ेगा और फिर उन्होंने वो किया 
जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की 

157
00:09:20,720 --> 00:09:23,400
थी। 
श्री कृष्ण ने युद्ध में हथियार 

158
00:09:23,400 --> 00:09:25,480
ना उठाने की अपनी प्रतिज्ञा तोड़ 
दी। 

159
00:09:25,480 --> 00:09:28,280
क्या? 
हाँ वो रथ से कूद गए, अपना 

160
00:09:28,280 --> 00:09:31,640
सुदर्शन चक्र हाथ में लिया और 
भीष्म को मारने के लिए उनकी तरफ 

161
00:09:31,640 --> 00:09:34,600
दौड़ पड़े। 
भगवान ने अपनी प्रतिज्ञा तोड़ दी।

162
00:09:35,000 --> 00:09:38,600
उनकी इस रूप को देखकर तो दोनों 
सेनाओं की योद्धा कांप उठे होंगे।

163
00:09:39,040 --> 00:09:42,600
ऐसा लगा होगा मानुष स्वयं महाकाल 
युद्धभूमि में उतर आए हो। 

164
00:09:42,600 --> 00:09:47,400
बिल्कुल लेकिन भीष्म वो डरे नहीं,
वो आनंद से भर गए। 

165
00:09:47,400 --> 00:09:50,440
आनंद से। 
हाँ, जैसे ही उन्होंने श्री कृष्ण

166
00:09:50,440 --> 00:09:53,920
को सुदर्शन चक्र लेकर अपनी और आते
देखा, उन्होंने अपने धनुष बाण 

167
00:09:53,920 --> 00:09:57,160
फेंक दिए। 
वो रथ से उतरकर हाथ जोड़कर जमीन 

168
00:09:57,160 --> 00:09:58,440
पर खड़े हो गए। 
अरे? 

169
00:09:58,840 --> 00:10:03,320
और बोले प्रभु आइए आपके हाथों 
मृत्यु पाना तो मेरा सबसे बड़ा 

170
00:10:03,320 --> 00:10:06,600
सौभाग्य होगा। 
आज आप मुझे मार कर मोक्ष प्रदान 

171
00:10:06,600 --> 00:10:08,920
कीजिए। 
वो कृष्ण के हाथों मरने के लिए 

172
00:10:08,920 --> 00:10:12,680
पूरी तरह से तैयार थे। 
एक भक्त के लिए इससे बड़ा सौभाग्य

173
00:10:12,680 --> 00:10:16,960
और क्या हो सकता है पर यहाँ एक पल
के लिए रुकना जरूरी है। 

174
00:10:17,040 --> 00:10:20,800
ये महाभारत के सबसे आइकॉनिक 
दृश्यों में से एक है। 

175
00:10:20,840 --> 00:10:25,080
ये सिर्फ एक घटना नहीं है, ये एक 
फिलॉसोफिकल स्टेटमेंट है। 

176
00:10:25,080 --> 00:10:29,640
सही कहा कि कभी कभी नियमों और 
व्यक्तिगत प्रतिज्ञाओं से भी बड़ा

177
00:10:29,640 --> 00:10:33,680
होता है धर्म का पालन करना, कृष्ण
के लिए शायद। 

178
00:10:33,840 --> 00:10:37,320
अर्जुन को उसके क्षत्रिय धर्म का 
बोध कराना ज्यादा जरूरी था। 

179
00:10:37,360 --> 00:10:40,040
बिल्कुल तो फिर श्री कृष्ण को 
किसने रोका? 

180
00:10:40,120 --> 00:10:44,280
अर्जुन ने जैसे ही अर्जुन ने 
कृष्ण को रथ से कूदते देखा उन्हें

181
00:10:44,280 --> 00:10:48,760
अपनी गलती का अहसास हुआ, वो भी 
उनके पीछे भागे और दसवें कदम पर 

182
00:10:48,760 --> 00:10:52,480
उन्होंने कृष्ण को पकड़ लिया। 
अर्जुन उनके पैरों में गिर गए और 

183
00:10:52,480 --> 00:10:55,640
बोले। 
हे केशव रुक जाइए, अपनी प्रतिज्ञा

184
00:10:55,640 --> 00:10:58,320
मत तोड़िए। 
उन्होंने कृष्ण को उनकी प्रतिज्ञा

185
00:10:58,320 --> 00:11:01,000
याद दिलाई। 
हाँ, आप युद्ध नहीं करेंगे। 

186
00:11:01,080 --> 00:11:04,680
ये वचन आपने दिया था। 
अगर आपने वचन तोड़ा तो लोग आपको 

187
00:11:04,680 --> 00:11:07,280
झूठा कहेंगे, मैं मैं शपथ लेता 
हूँ। 

188
00:11:07,600 --> 00:11:10,560
कौन सी शपथ? 
अर्जुन ने शपथ ली हे केशव। 

189
00:11:10,760 --> 00:11:14,640
मैं अपने सभी प्रियजनों की शपथ 
लेकर कहता हूँ कि अब मैं पूरे 

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00:11:14,640 --> 00:11:17,880
सामर्थ्य से युद्ध करूँगा, मैं 
पितामह को रोकूंगा। 

191
00:11:17,880 --> 00:11:22,160
आप वापस रथ पर चलिए। 
और ये सुनकर कृष्ण का क्रोध शांत 

192
00:11:22,160 --> 00:11:25,160
हुआ। 
हाँ, वो कुछ बोले नहीं, बस वापस 

193
00:11:25,160 --> 00:11:28,080
रथ पर आकर बैठ गए। 
तो क्या अर्जुन ने अपनी शपथ पूरी 

194
00:11:28,080 --> 00:11:30,520
की? 
उन्होंने अपनी शपथ से भी बढ़कर 

195
00:11:30,520 --> 00:11:33,760
किया। 
कृष्ण के उस रूप को देखकर अर्जुन 

196
00:11:33,760 --> 00:11:38,160
का सारा मोह भंग हो गया था। 
उन्होंने अपने गांडीव पर बाण 

197
00:11:38,160 --> 00:11:42,720
चढ़ाया और गौरव सेना पर तीरों की 
ऐसी वर्षा की जैसी पहले कभी नहीं 

198
00:11:42,720 --> 00:11:45,600
देखी गई थी। 
भीष्म के प्रलय का जवाब? 

199
00:11:45,640 --> 00:11:50,920
अर्जुन के महाप्रलय से दिया गया। 
मतलब अब असली युद्ध शुरू हुआ था। 

200
00:11:51,360 --> 00:11:54,360
अर्जुन ने अकेले ही भीष्म को आगे 
बढ़ने से रोक दिया। 

201
00:11:54,760 --> 00:11:57,760
उन्होंने गौरव सेना पर इतने बाण 
चलाए की भगदड़ मच गई। 

202
00:11:58,040 --> 00:12:02,480
भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य कोई भी 
अर्जुन के सामने टिक नहीं पा रहा 

203
00:12:02,480 --> 00:12:04,960
था। 
उन्होंने अकेले ही पूरी गौरव सेना

204
00:12:04,960 --> 00:12:07,840
को पीछे धकेल दिया। 
और इस तरह तीसरे दिन का युद्ध 

205
00:12:07,840 --> 00:12:11,400
समाप्त हुआ हाँ। 
अर्जुन का वो भयानक रूप देखकर 

206
00:12:11,720 --> 00:12:14,960
भीष्म भी समझ गए कि आज का युद्ध 
समाप्त हो गया है। 

207
00:12:15,320 --> 00:12:19,040
सूरज ढल रहा था। 
युद्ध के नियम के अनुसार शंखनाद 

208
00:12:19,040 --> 00:12:22,320
हुआ और दोनों सेनाएं अपने अपने 
शिविरों में लौट गई। 

209
00:12:22,880 --> 00:12:27,640
तीसरा दिन समाप्त हो गया। 
तो कुल मिलाकर तीसरा दिन सिर्फ 

210
00:12:27,640 --> 00:12:32,880
वस्त्रों का नहीं बल्कि वस्त्रों 
के पीछे के मनोविज्ञान का युद्ध 

211
00:12:32,880 --> 00:12:36,400
था। 
क्यूँ बने और टूटे वफादारी पर 

212
00:12:36,400 --> 00:12:41,440
सवाल उठे और यहाँ तक के एक दिव्य 
प्रतिज्ञा भी टूटने की कगार पर आ 

213
00:12:41,440 --> 00:12:44,040
गई। 
ये युद्ध के साइकोलॉजिकल प्रेशर 

214
00:12:44,040 --> 00:12:47,040
को दिखाता है। 
दुर्योधन का एक ताना भीष्म को 

215
00:12:47,040 --> 00:12:50,840
विनाशक बना सकता है और कृष्ण का 
क्रोध अर्जुन को उसकी सारी 

216
00:12:50,840 --> 00:12:55,400
हिचकिचाहट से बाहर निकाल सकता है।
अब अर्जुन पूरी तरह से युद्ध के 

217
00:12:55,400 --> 00:12:58,760
लिए तैयार है। 
हाँ, लेकिन पितामा भीष्म अभी भी 

218
00:12:58,760 --> 00:13:03,160
एक अजय चट्टान की तरह खड़े हैं। 
दिन खत्म हो गया है, लेकिन सवाल 

219
00:13:03,160 --> 00:13:06,480
अभी बाकी है। 
भीम का सामना जब दुर्योधन के 

220
00:13:06,480 --> 00:13:10,840
भाइयों से होगा तो उस युद्ध का 
क्या परिणाम होगा और आने वाला नया

221
00:13:10,840 --> 00:13:15,120
दिन और कौन सी तबाही लेकर आएगा? 
इसके लिए हमें चौथे दिन का इंतजार

222
00:13:15,120 --> 00:13:17,200
करना होगा। 
हम आपसे फिर मिलेंगे। 

223
00:13:17,280 --> 00:13:20,640
जल्द ही महाभारत दी कंप्लीट सागा 
में।

