1
00:00:00,040 --> 00:00:05,840
नमस्कार, स्वागत है आपका महाभारत 
कंप्लीट सागा सीज़न 3 में तो आज 

2
00:00:05,840 --> 00:00:10,960
से हम महाभारत के सबसे निर्णायक 
सबसे ड्रामेटिक हिस्से में प्रवेश

3
00:00:10,960 --> 00:00:14,240
कर रहे हैं। 
कुरुक्षेत्र का महायुद्ध लेकिन हम

4
00:00:14,240 --> 00:00:18,280
इसे किसी पर्व के तौर पर नहीं 
बल्कि दिन ब दिन समझेंगे। 

5
00:00:18,400 --> 00:00:21,680
मतलब एक 1 दिन की घटनाओं पर गहरी 
नजर डालेंगे। 

6
00:00:21,680 --> 00:00:24,800
बिल्कुल। 
और ऐसा करने की खास वजह देखो 

7
00:00:24,800 --> 00:00:29,040
महाभारत के युद्ध में सिर्फ 
पांडव, कौरव, भीष्म या द्रोण ही 

8
00:00:29,040 --> 00:00:31,960
नहीं थे। 
कई ऐसे महान योद्धा थे जिनके बारे

9
00:00:31,960 --> 00:00:35,400
में पॉपुलर कल्चर में ज्यादा बात 
नहीं होती, लेकिन उनके बिना युद्ध

10
00:00:35,400 --> 00:00:37,880
का नतीजा शायद कुछ और ही होता। 
सही कहा। 

11
00:00:37,920 --> 00:00:42,200
जैसे एक सवाल है मेरे मन में 
सत्यकी का नाम हम सुनते हैं पर वो

12
00:00:42,200 --> 00:00:45,040
असल में कितने शक्तिशाली थे या एक
राजा थे? 

13
00:00:45,040 --> 00:00:50,280
भगदड़ जिनकी सेना में कुछ ऐसा था 
जो इंद्र को भी डरा देता था या वो

14
00:00:50,280 --> 00:00:54,920
कौन सी सेना थी जिसने कसम खाई थी 
कि वो या तो अर्जुन को मारेंगे या

15
00:00:54,920 --> 00:00:58,720
खुद मर जाएंगे? 
ये वो नाम है जिन्होंने युद्ध का 

16
00:00:58,720 --> 00:01:03,400
रुख कई बार बदला त्रिग्रत देश के 
संशप्तक योद्धा थे वो और 

17
00:01:03,400 --> 00:01:07,600
दृष्टिद्युम्न हाँ सेनापति। 
वो पाण्डव सेना के सेनापति थे। 

18
00:01:07,600 --> 00:01:10,360
पर उनकी शक्ति के बारे में लोग 
कितना कम जानते हैं? 

19
00:01:10,480 --> 00:01:13,960
इन सभी अनसुने नायकों के कारनामों
पर हम आने वाले दिनों में बात 

20
00:01:13,960 --> 00:01:16,080
करेंगे। 
और ये जरूरी भी है। 

21
00:01:16,120 --> 00:01:20,120
क्योंकि युद्ध सिर्फ बड़े नामों 
से नहीं बल्कि ऐसे ही किरदारों के

22
00:01:20,120 --> 00:01:25,720
बलिदान से जीता या हारा जाता है। 
तो चलिए इसी रोमांच के साथ शुरू 

23
00:01:25,720 --> 00:01:29,240
करते हैं कुरुक्षेत्र युद्ध के 
पहले दिन की कहानी। 

24
00:01:29,280 --> 00:01:33,760
देखते हैं कि जब दो विशाल सेनाएं 
पहली बार टकराई तो क्या हुआ? 

25
00:01:33,760 --> 00:01:38,280
तो युद्ध की सुबह हो चुकी है। 
दोनों तरफ की सेनाएं आमने सामने 

26
00:01:38,280 --> 00:01:42,080
खड़ी है। 
शंख, नगाड़े, हाथियों की चिंघाड़ 

27
00:01:42,360 --> 00:01:46,760
आसमान गूंज रहा है। 
माहौल में एक अजीब सी खामोशी है 

28
00:01:46,760 --> 00:01:52,800
और भयंकर तनाव, लेकिन तभी। 
युधिष्ठिर ने कुछ ऐसा किया जिसकी 

29
00:01:52,800 --> 00:01:55,480
किसी को मतलब किसी को भी उम्मीद 
नहीं थी। 

30
00:01:55,480 --> 00:01:59,640
वो। 
अपना कवच और हथियार उतारकर पैदल 

31
00:01:59,640 --> 00:02:05,160
ही गौरव सेना की तरफ चल पड़े। 
सब हैरान अर्जुन भीम सब ने रोकने 

32
00:02:05,160 --> 00:02:07,680
की कोशिश की। 
कि आप क्या कर रहे हैं भैया पर वो

33
00:02:07,680 --> 00:02:10,479
नहीं माने और कृष्ण? 
चुपचाप मुस्कुराते रहे। 

34
00:02:10,880 --> 00:02:13,680
वो जानते थे कि युधिष्ठिर के मन 
में क्या चल रहा है? 

35
00:02:14,000 --> 00:02:18,440
ये सिर्फ धर्म का पालन नहीं था। 
ये एक अचूक साइकोलॉजिकल मूव थी। 

36
00:02:18,480 --> 00:02:20,440
कैसे? 
युद्ध शुरू होने से पहले 

37
00:02:20,440 --> 00:02:24,360
युधिष्ठिर ने भीष्म और द्रोण को 
एक नैतिक दुविधा में डाल दिया। 

38
00:02:24,480 --> 00:02:28,680
वो सबसे पहले पितामह भीष्म के पास
गए, उनके पैर छुए और उनसे युद्ध 

39
00:02:28,680 --> 00:02:32,680
करने की आज्ञा और और विजय होने का
आशीर्वाद मांगा। 

40
00:02:32,680 --> 00:02:37,880
सोचो ज़रा जो आदमी आप से लड़ने 
आया है, आप उसी से जीत का 

41
00:02:37,880 --> 00:02:41,800
आशीर्वाद मांग रहे हो ये तो 
अविश्वसनीय है और भीष्म का क्या 

42
00:02:41,800 --> 00:02:43,840
रिएक्शन था? 
भीष्म भावुक हो गए। 

43
00:02:44,160 --> 00:02:48,280
उन्होंने कहा, पुत्र मैं अर्थ का 
यानी हस्तिनापुर के धन का गुलाम 

44
00:02:48,280 --> 00:02:51,400
हूँ, इसलिए विवश होकर मुझे कौरवों
की तरफ से लड़ना पड़। 

45
00:02:51,400 --> 00:02:53,880
रहा। 
है लेकिन मैं तुम्हारी इस 

46
00:02:53,880 --> 00:02:56,600
धर्मिष्ठा से बहुत खुश हूँ। 
तुम विजयी होगे। 

47
00:02:57,360 --> 00:03:00,000
इस एक घटना ने युद्ध की मर्यादा 
तय कर दी। 

48
00:03:00,000 --> 00:03:05,080
वाह और इसके बाद वो द्रोणाचार्य। 
कृपाचार्य और अपने मामा शैले के 

49
00:03:05,080 --> 00:03:08,320
पास भी गए। 
और कमाल की बात यह है कि सबने 

50
00:03:08,320 --> 00:03:10,760
उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया। 
सबने। 

51
00:03:10,760 --> 00:03:15,240
मतलब लड़ाई शुरू होने से पहले ही 
पांडवों ने एक मोरल विक्टरी तो 

52
00:03:15,240 --> 00:03:16,160
हासिल कर ली। 
थी। 

53
00:03:16,160 --> 00:03:19,120
बिल्कुल उन्होंने याद दिलाया कि 
ये युद्ध धर्म के लिए है। 

54
00:03:19,200 --> 00:03:22,400
व्यक्तिगत दुश्मनी के लिए नहीं। 
इससे गौरव खेमे के सबसे बड़े 

55
00:03:22,400 --> 00:03:25,560
योद्धाओं का मनोबल लड़ाई शुरू 
होने से पहले ही थोड़ा कमजोर पड़ 

56
00:03:25,560 --> 00:03:28,280
गया। 
तो आशीर्वाद लेकर युधिष्ठिर वापस 

57
00:03:28,280 --> 00:03:31,960
आए और फिर युद्ध का ऐलान हुआ। 
दोनों तरफ से शंखनाद हुआ। 

58
00:03:32,000 --> 00:03:35,360
कहते हैं वो आवाज़ ऐसी थी मानो 
ब्राह्मांड फट पड़ेगा। 

59
00:03:35,360 --> 00:03:37,800
और। 
फिर महायुद्ध का आरंभ हुआ। 

60
00:03:37,800 --> 00:03:41,760
पहले ही पल में। 
दोनों सेनाएं एक दूसरे पर ऐसे टूट

61
00:03:41,760 --> 00:03:48,000
पड़ी जैसे दो सागर टकरा गए हों। 
तलवारें, गदाएं, भाले बाण हर तरफ 

62
00:03:48,000 --> 00:03:50,560
बस मार काट थी। 
चारों तरफ किआस। 

63
00:03:50,560 --> 00:03:54,920
हाँ, पर ये सिर्फ किआस नहीं था 
जैसा ज्यादातर लोग सोचते हैं। 

64
00:03:55,040 --> 00:03:58,440
इसके पीछे भी एक स्ट्रेटेजी थी। 
क्यूँ रचना थी? 

65
00:03:58,440 --> 00:04:01,680
अच्छा क्यूँ मतलब? 
इतनी मारकाट में भी कोई फॉर्मेशन 

66
00:04:01,680 --> 00:04:03,280
था? 
कौन से क्यूँ बनाए गए थे? 

67
00:04:03,280 --> 00:04:07,600
हाँ, पहले दिन पांडवों ने वज्र 
क्यूँ बनाया था, अभेद्य माना जाता

68
00:04:07,600 --> 00:04:12,200
था लेकिन भीष्म ने अपनी सेना को 
सर्वतोभद्र क्यूँ में खड़ा किया? 

69
00:04:12,320 --> 00:04:15,640
जिसकी खासियत ये थी? 
कि वो हर दिशा से आक्रमण कर सकता 

70
00:04:15,640 --> 00:04:18,839
था। 
अरे बाप रे और इस क्यूँ की लड़ाई 

71
00:04:18,839 --> 00:04:24,040
में पहला बड़ा वार किसने किया? 
पितामह भीष्म ने वो अपने रथ पर 

72
00:04:24,040 --> 00:04:26,600
ऐसे घूम रहे थे जैसे आग का गोला 
हो। 

73
00:04:26,880 --> 00:04:31,960
जो भी सामने आता भस्म हो जाता 
उनकी गति और उनके बाणों की सटीकता

74
00:04:31,960 --> 00:04:34,200
देखकर। 
पांडव सेना में भगदड़ मच गई। 

75
00:04:34,560 --> 00:04:38,640
लेकिन भीष्म तो पांडवों से प्रेम 
करते थे, क्या वो सच में पूरे मन 

76
00:04:38,640 --> 00:04:39,440
से लड़ रहे? 
थे। 

77
00:04:39,440 --> 00:04:40,880
पहले दिन तो ऐसा बिल्कुल नहीं 
लगा। 

78
00:04:41,320 --> 00:04:44,960
वो अपने सेनापति के कर्तव्य का 
पूरी तरह से पालन कर रहे थे। 

79
00:04:45,200 --> 00:04:48,360
उन्होंने पांडव सेना को पीछे 
धकेलना शुरू कर दिया और तभी। 

80
00:04:48,480 --> 00:04:50,840
तभी क्या? 
भीष्म के इस आक्रमण को रोकने के 

81
00:04:50,840 --> 00:04:54,440
लिए अर्जुन के बेटे। 
अभिमन्यु सामने आए एक युवा 

82
00:04:54,440 --> 00:04:57,120
योद्धा, एक लिविंग लेजेंड को 
चुनौती देने के लिए। 

83
00:04:57,160 --> 00:05:01,840
ये तो अविश्वसनीय लगता है। 
11617 साल का लड़का पितामा भीष्म 

84
00:05:01,840 --> 00:05:05,080
को चैलेंज कर रहा है। 
इसका पांडव सेना के मुरैल पर क्या

85
00:05:05,080 --> 00:05:08,320
असर पड़ा होगा? 
जबरदस्त सब रुककर देखने लगे। 

86
00:05:08,400 --> 00:05:12,880
और क्या मुकाबला था, वो क्या हुआ?
अभिमन्यु ने आते ही भीष्म के रथ 

87
00:05:12,920 --> 00:05:15,200
के ध्वज को काट दिया। 
क्या बात है? 

88
00:05:15,200 --> 00:05:19,600
उन्होंने भीष्म के सारथी को घायल 
किया और भीष्म पर बाणों की ऐसी 

89
00:05:19,600 --> 00:05:23,720
बौछार कर दी कि एक पल के लिए 
भीष्म को भी पीछे हटना पड़ा। 

90
00:05:23,840 --> 00:05:27,360
मतलब कमाल ही हो गया, भीष्म पीछे 
हटे। 

91
00:05:27,480 --> 00:05:30,280
ये सुनकर तो गौरव सेना में खलबली 
मच गई होगी। 

92
00:05:30,280 --> 00:05:34,520
बिल्कुल खुद भीष्म भी हैरान थे और
मन ही मन अभिमन्यु की तारीफ कर 

93
00:05:34,520 --> 00:05:36,680
रहे थे कि वाह अर्जुन का पुत्र 
है। 

94
00:05:37,040 --> 00:05:39,280
ये पहले दिन का एक बहुत बड़ा 
मोमेंट था। 

95
00:05:39,360 --> 00:05:42,960
इसने साबित कर दिया कि पांडवों की
अगली पीढ़ी भी तैयार है। 

96
00:05:43,040 --> 00:05:46,760
युद्ध का पहला दिन युवा पीढ़ी के 
शौर्य के नाम तो रहा। 

97
00:05:46,800 --> 00:05:50,720
लेकिन इसकी एक बहुत बड़ी कीमत भी 
चुकानी पड़ी। 

98
00:05:51,120 --> 00:05:56,880
विराट के बेटे उत्तर जोश में भरकर
सीधे कौरव सेना के एक महारत थी। 

99
00:05:57,000 --> 00:06:01,760
मध्यदेश के राजा शल्य से भिड़ गए।
उत्तर एक बहादुर योद्धा थे, इसमें

100
00:06:01,760 --> 00:06:05,080
कोई शक नहीं, लेकिन अनुभव की बहुत
कमी थी और शल्य। 

101
00:06:05,400 --> 00:06:09,720
वो एक बहुत ही अनुभवी योद्धा थे 
तो उन्होंने बहुत आसानी से उत्तर 

102
00:06:09,720 --> 00:06:12,920
के घोड़े और सारथी को मारकर उनका 
रथ तोड़ दिया। 

103
00:06:12,960 --> 00:06:17,760
रथ टूटने के बाद भी उत्तर ने हार 
नहीं मानी, निहत्थे होकर उन्होंने

104
00:06:17,760 --> 00:06:22,160
अपनी गधा उठाई और शल्य की तरफ 
दौड़े, लेकिन शल्य ने? 

105
00:06:22,200 --> 00:06:25,880
दूर से ही एक भाले के वार से उनके
प्राण ले लिए। 

106
00:06:25,880 --> 00:06:27,920
ये पांडव खेमे की पहली बड़ी खती 
थी। 

107
00:06:28,040 --> 00:06:30,760
पहले दिन एक राजकुमार का मारा 
जाना ये बहुत बड़ा झटका। 

108
00:06:30,760 --> 00:06:34,680
था और अपने भाई को अपनी आँखों के 
सामने मरता देख विराट के दूसरे 

109
00:06:34,680 --> 00:06:37,640
बेटे श्वेत। 
वो गुस्से से पागल हो गए। 

110
00:06:38,240 --> 00:06:41,760
उन्होंने एक और सेना में ऐसी 
तबाही मचाई की हजारों सैनिक मारे 

111
00:06:41,760 --> 00:06:43,760
गए। 
उनका रौद्र रूप देखकर खुद 

112
00:06:43,760 --> 00:06:47,400
दुर्योधन भी डर गया था। 
श्वेत अपने भाई की मौत का बदला 

113
00:06:47,400 --> 00:06:51,960
लेने के लिए शल्य की तरफ बढ़ रहे 
थे, लेकिन गौरव सेना का एक स्तंभ 

114
00:06:52,080 --> 00:06:54,320
उनके रास्ते में आ। 
गया पितामह भीष्म? 

115
00:06:54,320 --> 00:07:00,040
हाँ, अब सवाल ये था कि क्या एक 
युवा योद्धा का गुस्सा एक अनुभवी 

116
00:07:00,040 --> 00:07:02,360
महायोद्धा के कर्तव्य पर भारी पड़
सकता। 

117
00:07:02,360 --> 00:07:05,360
है और यहीं से पहले दिन का सबसे 
विनाशकारी द्वंद शुरू हुआ। 

118
00:07:05,360 --> 00:07:08,920
क्या हुआ उस द्वंद में? 
श्वेत ने भीष्म पर इतने बाण चलाए 

119
00:07:09,120 --> 00:07:11,440
कि उनका रथ और कवच बाणों से ढक 
गया। 

120
00:07:11,720 --> 00:07:14,240
एक पल के लिए लगा कि आज भीष्म हार
जाएंगे। 

121
00:07:14,240 --> 00:07:17,600
अरे? 
मतलब श्वेत भीष्म पर हावी हो गए 

122
00:07:17,600 --> 00:07:18,920
थे। 
पूरी तरह से। 

123
00:07:19,200 --> 00:07:21,600
श्वेत ने भीष्म का धनुष तक काट 
दिया था। 

124
00:07:21,600 --> 00:07:24,960
सच में। 
हाँ, भीष्म ने एक के बाद एक कई 

125
00:07:24,960 --> 00:07:27,440
धनुष बदले लेकिन श्वेत ने उन सब 
को काट दिया। 

126
00:07:27,640 --> 00:07:29,320
वो भीष्म को कोई मौका ही नहीं दे 
रहे थे। 

127
00:07:29,400 --> 00:07:33,760
ये एक वेटरन जनरल और एक फ्यूरियस 
यंग वारियर की लड़ाई थी जहाँ जोश 

128
00:07:33,760 --> 00:07:37,640
अनुभव पर भारी पड़ रहा था। 
देखिए, भीष्म तो भीष्म थे। 

129
00:07:38,480 --> 00:07:41,600
जब भीष्म को लगा कि सामान्य 
अस्त्रों से बात नहीं बनेगी तो 

130
00:07:41,600 --> 00:07:44,800
उन्होंने एक दिव्यास्त्र निकाला। 
1 मिनट ये दिव्यास्त्र क्या होता 

131
00:07:44,800 --> 00:07:45,400
है? 
मतलब? 

132
00:07:45,400 --> 00:07:48,080
क्या ये बस एक बहुत पावरफुल बाण 
है? 

133
00:07:48,080 --> 00:07:51,240
नहीं, दिव्यास्त्र का मतलब कोई 
साधारण बाण नहीं है। 

134
00:07:51,240 --> 00:07:54,880
ये मंत्रों से सिद्ध किया हुआ एक 
विनाशकारी अस्त्र होता है जिसका 

135
00:07:54,880 --> 00:07:58,640
प्रभाव अलौकिक होता है। 
उन्होंने उस दिव्यास्त्र का संधान

136
00:07:58,640 --> 00:08:02,400
किया और श्वेत की तरफ चला दिया। 
उस एक बाण ने श्वेत का कवच भेज 

137
00:08:02,400 --> 00:08:04,680
दिया और वो अपने रथ से नीचे गिर 
पड़े। 

138
00:08:05,400 --> 00:08:09,040
उनकी मृत्यु पांडवों के लिए एक 
बहुत बड़ा साइकोलॉजिकल ब्लो था। 

139
00:08:09,360 --> 00:08:13,160
उन्होंने पहले दिन ही अपने दो 
सबसे बड़े युवा योद्धाओं उत्तर और

140
00:08:13,160 --> 00:08:17,520
श्वेत को खो दिया था। 
विराट के एक और बेटे शंख ने भी 

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00:08:17,520 --> 00:08:22,480
अद्भुत वीरता दिखाई, लेकिन दिन 
ढलते ढलते भीष्म का पल्ला बहुत 

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00:08:22,480 --> 00:08:25,720
भारी रहा। 
कहते हैं कि अकेले भीष्म नहीं 

143
00:08:25,920 --> 00:08:29,880
पांडव सेना के 10,000 से ज्यादा 
सैनिकों को मार गिराया था। 

144
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ये दिखाता है कि भीष्म सिर्फ एक 
महान योद्धा ही नहीं। 

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00:08:33,280 --> 00:08:37,559
बल्कि एक वॅन मैन आर्मी थे। 
सूरज ढलने लगा और युद्ध के नियमों

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के अनुसार लड़ाई रोक दे गई। 
दोनों सेनाएं अपने अपने शिविर में

147
00:08:41,320 --> 00:08:45,000
लौट गई। 
रणभूमि, लाशों, टूटे रथों और खून 

148
00:08:45,000 --> 00:08:47,520
से सनी हुई थी। 
पहला दिन पूरी तरह से कौरवों के 

149
00:08:47,520 --> 00:08:50,120
नाम रहा। 
भीष्म ने साबित कर दिया कि उन्हें

150
00:08:50,120 --> 00:08:53,880
क्यों अजेय माना जाता है। 
पांडवों को भारी नुकसान हुआ था। 

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उनका मनोबल बहुत नीचे था, 
बिल्कुल। 

152
00:08:56,560 --> 00:08:59,160
शिविर में उदासी और चिंता का 
माहौल था। 

153
00:08:59,520 --> 00:09:03,880
उनका सबसे बड़ा डर सच साबित हो 
गया था कि भीष्म को कोई नहीं रोक 

154
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सकता। 
पहले ही दिन उनकी स्ट्रेटेजी फैल 

155
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हो गई थी। 
युधिष्ठिर बहुत दुखी थे। 

156
00:09:09,320 --> 00:09:12,360
वो श्री कृष्ण के पास गए और अपनी 
चिंता व्यक्त की। 

157
00:09:12,520 --> 00:09:15,840
उन्हें लग रहा था कि भीष्म को 
हराना नामुमकिन है। 

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00:09:16,240 --> 00:09:19,800
और यही एक दिलचस्प बात है, पहले 
दिन की लड़ाई ने एक स्टैन्डर्ड 

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सेट कर दिया था। 
ये कोई छोटी मोटी लड़ाई नहीं थी। 

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00:09:22,880 --> 00:09:27,240
ये टोटल वॉर था जहाँ हर दिन 
हजारों जाने जाएंगे और हर दिन का 

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00:09:27,240 --> 00:09:29,400
अंत। 
एक नई स्ट्रेटेजी की मांग करेगा। 

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00:09:29,400 --> 00:09:34,000
पांडवों ने पहला दिन हारा जरूर 
था, लेकिन अभिमन्यु जैसे युवाओं 

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00:09:34,000 --> 00:09:39,280
ने भविष्य की एक झलक भी दिखा दी 
थी तो ये दिन हार और उम्मीद दोनों

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00:09:39,280 --> 00:09:44,360
का मिश्रण था तो पहले दिन पांडवों
को करारी हार का सामना करना पड़ा।

165
00:09:44,640 --> 00:09:47,160
भीष्म एक ऐसी दीवार की तरह खड़े 
थे। 

166
00:09:47,280 --> 00:09:50,080
जिसे तोड़ना लगभग नामुमकिन लग रहा
था। 

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00:09:50,160 --> 00:09:52,440
अब सवाल ये उठता है कि दूसरे दिन 
क्या होगा? 

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00:09:52,920 --> 00:09:56,880
क्या पांडव इस हार से उभर पाएंगे?
क्या वो भीषण को रोकने के लिए कोई

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00:09:56,880 --> 00:10:00,520
नई रणनीति बनाएंगे? 
और युवा पीढ़ी का शौर्य जो हमने 

170
00:10:00,520 --> 00:10:04,880
अभिमन्यु और श्वेत में देखा, क्या
वो युद्ध के मैदान में यूं ही 

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00:10:04,880 --> 00:10:08,400
जारी रहेगा? 
या पहले दिन की मौतें उन्हें डरा 

172
00:10:08,400 --> 00:10:11,120
देंगी? 
भीष्म को हराने का रास्ता क्या 

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00:10:11,120 --> 00:10:13,760
है? 
इस सवाल का जवाब पांडवों को 

174
00:10:13,760 --> 00:10:15,960
ढूंढना ही होगा और जल्दी ढूंढना 
होगा। 

175
00:10:15,960 --> 00:10:21,320
समापन के अंदाज में इन सभी सवालों
के जवाब मिलेंगे हमें अगले पड़ाव 

176
00:10:21,320 --> 00:10:23,440
में। 
हम आपसे फिर मिलेंगे। 

177
00:10:23,480 --> 00:10:26,600
जल्द ही महाभारत दी कंप्लीट सागा 
में।

