1
00:00:00,040 --> 00:00:05,720
नमस्कार, स्वागत है आपका महाभारत,
दी कंप्लीट सागा सीज़न 4 में। 

2
00:00:06,200 --> 00:00:10,080
आज के इस विस्तृत चर्चा में हम 
कुछ बहुत ही इंटेंस पहलुओं पर बात

3
00:00:10,080 --> 00:00:12,880
करने वाले हैं। 
बिलकुल, आज का हमारा जो मिशन है 

4
00:00:12,880 --> 00:00:16,760
वह बहुत ही क्लियर है। 
हमें कुरुक्षेत्र युद्ध के 

5
00:00:16,760 --> 00:00:20,520
चौदहवीं दिन के। 
सबसे निर्णायक और रोंग के खड़े कर

6
00:00:20,520 --> 00:00:23,200
देने वाले हिस्से का गहराई से 
विश्लेषण करना है। 

7
00:00:24,200 --> 00:00:27,960
हमारे पास जो सोर्सेज हैं जो 
महाभारत के मूल श्लोक हैं वो इस 

8
00:00:27,960 --> 00:00:30,400
दिन के बारे में बहुत ही 
इन्क्रेडिबल डीटेल्स देते हैं। 

9
00:00:30,400 --> 00:00:33,400
हाँ। 
और अपनी चर्चा शुरू करने से पहले 

10
00:00:33,680 --> 00:00:37,680
अगर हम शुरुआती पलों का 115 सेकंड
का क्विक रीकैप लें। 

11
00:00:37,840 --> 00:00:40,160
तो चौदहवीं दिन की सुबह बैटल शुरू
हुई। 

12
00:00:40,360 --> 00:00:44,080
अर्जुन ने पूरी ताकत से कौरवों की
बैटल फॉर्मेशन को तोड़ा। 

13
00:00:44,200 --> 00:00:48,640
दुर्योधन को बुरी तरह हराया और 
जयद्रथ को खोजने के लिए सत्याकी 

14
00:00:48,640 --> 00:00:52,120
के साथ फोर्सस जॉइन की। 
एग्ज़ैक्ट्ली और हमारी आज की 

15
00:00:52,120 --> 00:00:55,720
चर्चा का मेन पॉइंट वहीं से शुरू 
होता है जहाँ सत्याकी और अर्जुन। 

16
00:00:56,000 --> 00:00:58,680
गौरव सेना के फॉर्मेशन में बहुत 
गहराई तक घुस चूके हैं। 

17
00:00:58,680 --> 00:01:00,880
मतलब वो एकदम सेंटर में पहुँच गए।
थे। 

18
00:01:00,880 --> 00:01:04,400
हाँ और वहाँ वो भारी डिस्ट्रक्शन 
मचा रहे हैं। 

19
00:01:04,879 --> 00:01:07,800
हमारे सोर्सेस के अनुसार, ये कोई 
आम दिन नहीं था। 

20
00:01:07,960 --> 00:01:12,640
दोनों योद्धा शत्रु सेना के बीचो 
बीच तबाही का एक ऐसा मंजर खड़ा कर

21
00:01:12,640 --> 00:01:15,080
देते हैं जो किसी ने पहले नहीं 
देखा था। 

22
00:01:16,160 --> 00:01:19,120
यहाँ सथ्यकी की स्थिति को समझना। 
बहुत जरूरी है। 

23
00:01:19,360 --> 00:01:22,840
सथ्यकी जीस तरह से। 
लड़ रहे हैं उसे देखकर आज की 

24
00:01:22,840 --> 00:01:25,920
मॉडर्न डे की टैग टीम रेसलिंग का 
कॉन्सेप्ट याद आता। 

25
00:01:25,920 --> 00:01:29,320
है। 
ज़रा सोचिए टैग टीम रेसलिंग में। 

26
00:01:29,520 --> 00:01:31,560
एक रेसलर। 
रिंग के अंदर है। 

27
00:01:31,880 --> 00:01:35,280
वो पूरी तरह से थक। 
चुका है, पसीने से लथपथ है। 

28
00:01:35,400 --> 00:01:38,840
और उसका पार्टनर कहीं दूर दूसरे 
विरोधियो से घिरा है। 

29
00:01:39,080 --> 00:01:43,000
वो अकेला ही एक के बाद एक कई 
ओप्पोनेंट्स से भिड़ रहा है। 

30
00:01:43,120 --> 00:01:45,880
सत्य की हालत इस वक्त। 
बिल्कुल वैसी ही है। 

31
00:01:46,000 --> 00:01:49,920
सही कहा वो लगातार लड़ते हुए पूरी
तरह से निढाल हो चूके हैं। 

32
00:01:49,920 --> 00:01:55,160
हाँ, लेकिन फिर भी फिर भी वो हार 
नहीं मान रहे हैं वो कृत वर्मा। 

33
00:01:55,240 --> 00:01:59,120
और गुरु द्रोणाचार्य जैसे 
महारथियों को अकेले ही कड़ी टक्कर

34
00:01:59,120 --> 00:02:02,080
दे रहे हैं। 
और सत्तीकी का ये जो संघर्ष था ना

35
00:02:02,160 --> 00:02:05,600
वो पांडव कैंप में बहुत बड़ी 
बैचैनी पैदा कर रहा था। 

36
00:02:05,680 --> 00:02:09,680
युधिष्ठिर की वजह से बिल्कुल। 
सोर्सेस बताते हैं कि युधिष्ठिर 

37
00:02:09,680 --> 00:02:13,440
की चिंता लगातार बढ़ रही थी, 
उन्हें अर्जुन और सत्तीकी की कोई 

38
00:02:13,440 --> 00:02:16,640
खबर नहीं मिल रही थी। 
क्योंकि युद्ध का शोर और धूल बहुत

39
00:02:16,640 --> 00:02:19,320
ज्यादा थी। 
तो युधिष्ठिर ने क्या किया? 

40
00:02:19,800 --> 00:02:23,880
वह उनका स्ट्रेस लेवल इतना बढ़ 
जाता है कि वो भीम को बुलाते हैं 

41
00:02:23,960 --> 00:02:27,400
और उन्हें ऑर्डर देते हैं कि वो 
गौरव सेना के अंदर जाएं और अर्जुन

42
00:02:27,400 --> 00:02:31,080
तथा सतकी का पता लगाएं। 
और फिर जो होता है मतलब भीम की 

43
00:02:31,080 --> 00:02:35,240
एंट्री हाँ? 
भीम किसी बुलडोजर से कम नहीं थे। 

44
00:02:35,440 --> 00:02:39,360
वो एक बुलडोजर की तरह कौरव सेना 
को रौंदते हुए अंदर घुसते हैं। 

45
00:02:39,680 --> 00:02:42,400
वो किसी स्ट्रेटेजी या प्लानिंग 
का इंतजार नहीं करते। 

46
00:02:42,840 --> 00:02:44,920
उनका तो स्टाइल ही यही था रॉ 
पावर। 

47
00:02:45,000 --> 00:02:49,440
बिल्कुल और सबसे हैरान करने वाली 
डीटेल जो मिलती है वो ये है। 

48
00:02:49,560 --> 00:02:52,960
कि भीम द्रोणाचार्य के रथ को 
चकनाचूर कर देते हैं। 

49
00:02:53,280 --> 00:02:57,520
एक बार नहीं वो द्रोणाचार्य के रथ
को उठाकर आठ बार फेंकते हैं। 

50
00:02:57,520 --> 00:03:01,800
आठ बार ये कौरवों के मुराण को 
पूरी तरह से तोड़ने वाला दृश्य 

51
00:03:01,800 --> 00:03:04,400
था। 
सेनापति के रथ को ऐसे खिलौने की 

52
00:03:04,400 --> 00:03:06,520
तरह फेंक देना ये कोई छोटी बात 
नहीं थी। 

53
00:03:06,520 --> 00:03:10,400
हाँ। 
और इसके बाद भीम और कण का आमना 

54
00:03:10,400 --> 00:03:13,760
सामना होता है। 
ये इस दिन के सबसे भयानक कॉम्बैट 

55
00:03:13,760 --> 00:03:16,760
में से एक था। 
दोनों ही योद्धा अपनी पूरी लिमिट 

56
00:03:16,760 --> 00:03:19,640
तक पुश कर रहे थे। 
सोर्सेस में इसका बहुत डीटेल में 

57
00:03:19,640 --> 00:03:21,200
वर्णन है। 
बिल्कुल है। 

58
00:03:21,560 --> 00:03:24,000
कण और भीम के बीच तीरों की बारिश 
होती है। 

59
00:03:24,200 --> 00:03:26,760
दोनों एक दूसरे के रथ नष्ट कर 
देते हैं। 

60
00:03:26,920 --> 00:03:31,040
भीम की एग्रेसिव एप्रोच इतनी 
भयानक थी कि वो धृतराष्ट्र के कई 

61
00:03:31,040 --> 00:03:33,080
पुत्रों का भी इसी बीच वध कर देते
हैं। 

62
00:03:33,080 --> 00:03:37,880
वो एक तरह से अनस्टोपबल थे। 
हाँ, और अंततः भीम की इसी पावर के

63
00:03:37,880 --> 00:03:40,560
कारण कारण को पीछे हटने पर मजबूर 
होना पड़ता है। 

64
00:03:40,560 --> 00:03:43,600
एक। 
तरफ भीम ये सब कर रहे थे और दूसरी

65
00:03:43,600 --> 00:03:48,880
तरफ सत्य की अपने युद्ध के सबसे। 
नाजुक दौर से गुजर रहे थे। 

66
00:03:48,960 --> 00:03:51,240
सत्य की और भूरश्रवा का युद्ध, 
हाँ। 

67
00:03:51,560 --> 00:03:56,560
सत्य की पूरी तरह से एग्ज़ॉस्ट हो
चूके हैं भूरश्रवा उन पर हावी हो 

68
00:03:56,560 --> 00:03:59,240
जाते हैं। 
वो सत्य की को बालों से घसीटते। 

69
00:03:59,240 --> 00:04:02,840
हैं एकदम सही वो उन्हें बालों से 
घसीटते हैं और उनका सर काटने ही 

70
00:04:02,840 --> 00:04:05,640
वाले होते हैं। 
ये मोमेंट बहुत ही डार्क था। 

71
00:04:05,720 --> 00:04:08,720
और इसी मोमेंट पर दूर से अर्जुन 
ये सब देख लेते हैं। 

72
00:04:08,720 --> 00:04:13,720
और अर्जुन बिना समय गंवाए एक तीर 
छोड़ते हैं और भूरी श्रव का वो 

73
00:04:13,720 --> 00:04:16,360
हाथ काट देते हैं जिससे उन्होंने 
तलवार पकड़ी थी। 

74
00:04:16,399 --> 00:04:20,160
और यहीं से युद्ध के नियमों और 
एथिक्स की एक बहुत बड़ी डिबेट 

75
00:04:20,160 --> 00:04:23,160
शुरू होती है। 
इस डिबेट को अगर हम बिना किसी 

76
00:04:23,160 --> 00:04:27,200
पक्ष को लिए एकदम इम्पार्शियल 
तरीके से रिपोर्ट करें तो दोनों 

77
00:04:27,200 --> 00:04:29,280
साइड्स के अपने अपने वैलिड 
पॉइंट्स थे। 

78
00:04:29,280 --> 00:04:33,480
बिल्कुल भूरी का तर्क ये था कि 
अर्जुन ने युद्ध के नियम तोड़े 

79
00:04:33,520 --> 00:04:35,640
हैं। 
उनका कहना था कि जब दो योद्धा 

80
00:04:35,640 --> 00:04:39,320
आमने सामने लड़ रहे हो तो किसी 
तीसरे व्यक्ति का दूर से अटैक 

81
00:04:39,320 --> 00:04:43,080
करना नियमों के सख्त खिलाफ़ है। 
लेकिन अर्जुन का आर्गुमेंट भी 

82
00:04:43,080 --> 00:04:46,760
उतना ही स्ट्रांग था। 
अर्जुन कहते हैं कि एक थके हुए 

83
00:04:46,880 --> 00:04:50,960
निडाल और निहत्थे योद्धा को 
बेरहमी से मारना भी तो नियमों के 

84
00:04:50,960 --> 00:04:53,640
खिलाफ़ है। 
अर्जुन का मानना था कि उन्होंने 

85
00:04:53,640 --> 00:04:57,720
सिर्फ अपने मित्र की जान बचाई है।
और इसके बाद जो हुआ वो और भी 

86
00:04:57,720 --> 00:05:00,560
शॉकिंग था। 
भूरी शोभा इस घटना से आहत होकर। 

87
00:05:00,880 --> 00:05:05,200
वहीं युद्ध भूमि में आमरण अनशन पर
बैठ जाते हैं, जिसे प्रायोपवेश 

88
00:05:05,200 --> 00:05:06,240
कहा जाता है। 
हाँ। 

89
00:05:06,240 --> 00:05:11,280
वो ध्यान मग्न हो जाते हैं और तभी
सत्य की जो हार मान चूके थे, 

90
00:05:11,480 --> 00:05:16,320
अचानक उठते हैं और भूरी श्रव का 
सिर धड़ से अलग कर देते हैं। 

91
00:05:16,320 --> 00:05:18,920
ये घटना वहाँ मौजूद हर किसी को 
चौंका देती। 

92
00:05:18,920 --> 00:05:21,440
है। 
लेकिन इस सबके बीच सूरज तेजी से 

93
00:05:21,440 --> 00:05:24,000
ढल रहा था। 
हाँ टाइम निकलता जा रहा था। 

94
00:05:24,120 --> 00:05:29,200
और अर्जुन का जो मेन टारगेट है 
जयद्रत वो अभी भी दूर था। 

95
00:05:29,520 --> 00:05:32,760
अर्जुन और कृष्ण फाइनली जयद्रत के
करीब पहुंचते हैं। 

96
00:05:32,760 --> 00:05:35,080
लेकिन जयद्रत अकेला नहीं था। 
बिल्कुल नहीं। 

97
00:05:36,280 --> 00:05:41,200
अगर हम इसे आज के मॉडर्न टर्म्स 
में समझे तो को एक ज़ी प्लस 

98
00:05:41,200 --> 00:05:43,080
वीआइपी सिक्योरिटी मिली हुई। 
थी। 

99
00:05:43,080 --> 00:05:47,680
एकदम सही एनालॉजी है। 
कर्ण द्रोण, शल्य, कृपाचार्य और 

100
00:05:47,680 --> 00:05:52,160
अश्वथामा जैसे महारथियों ने उसे 
एक अभेद्य घेरे में सुरक्षित रखा 

101
00:05:52,160 --> 00:05:54,560
हुआ। 
था और सूरज ढलने ही वाला था। 

102
00:05:54,600 --> 00:05:57,840
अर्जुन की प्रतिज्ञा टूटने का 
खतरा साफ दिख रहा था। 

103
00:05:58,160 --> 00:06:03,280
अगर सूर्यास्त तक नहीं मारा गया 
तो अर्जुन को अग्नि समाधि लेनी 

104
00:06:03,280 --> 00:06:05,760
पड़ती। 
गौरव सेना को बस कुछ ही मिनट और 

105
00:06:05,760 --> 00:06:07,920
उस ज़ेड प्लस सिक्योरिटी को बनाए 
रखना था। 

106
00:06:08,000 --> 00:06:11,000
उनका गार्ड पूरी तरह से अब था। 
लेकिन तभी। 

107
00:06:11,320 --> 00:06:14,080
कृष्ण का वो मास्टर स्ट्रोक सामने
आता है। 

108
00:06:14,120 --> 00:06:18,240
ये एक ब्रिलियंट टैक्टिकल मूव था।
कृष्ण अपने प्रभाव से आसमान में 

109
00:06:18,240 --> 00:06:21,040
एक गहरा अंधकार पैदा कर देते हैं।
एक इल्ल्यूशन। 

110
00:06:21,480 --> 00:06:25,320
एक इल्ल्यूशन जिसे गौरव सेना असली
सूर्यास्त समझ लेती है। 

111
00:06:25,320 --> 00:06:28,840
बिल्कुल उनकी साइकोलॉजी पर उसका 
बहुत गहरा असर पड़ता है। 

112
00:06:28,920 --> 00:06:30,440
उन्हें लगता है कि सूरज ढल गया 
है। 

113
00:06:30,560 --> 00:06:33,720
और वो युद्ध जीत गए हैं। 
उनका फोकस हट जाता है। 

114
00:06:33,840 --> 00:06:36,040
वो सिक्योरिटी रिंग रिलैक्स हो 
जाती है। 

115
00:06:36,040 --> 00:06:39,680
और यहाँ सबसे बड़ी गलती खुद जयादत
करता है वो खुशी के मारे अपने 

116
00:06:39,680 --> 00:06:42,000
छिपने की जगह से बाहर आकर आसमान 
देखने लगता है। 

117
00:06:42,040 --> 00:06:45,120
जैसे ही वो बाहर आता है कृष्ण 
अर्जुन को इशारा करते हैं। 

118
00:06:45,280 --> 00:06:48,800
और यहाँ हमारे सोर्सेस से एक बहुत
ही क्रिटिकल क्लैरिफिकेशन देना 

119
00:06:48,800 --> 00:06:51,240
जरूरी है। 
हाँ, वो दिव्यास्त्र वाला पॉइंट। 

120
00:06:51,240 --> 00:06:55,520
बिलकुल अर्जुन ने जयद्रथ को मारने
के लिए एक बेहद शक्तिशाली 

121
00:06:55,520 --> 00:06:59,240
दिव्यास्त्र का प्रयोग किया था। 
लेकिन और ये बहुत इम्पोर्टेन्ट 

122
00:06:59,240 --> 00:07:02,080
है। 
वो दिव्यास्त्र पशुपथास्त्र नहीं 

123
00:07:02,080 --> 00:07:04,000
था। 
ये क्लैरिफी करना जरूरी है 

124
00:07:04,000 --> 00:07:06,640
क्योंकि कई बार लोग इसे 
पशुपथास्त्र समझ लेते हैं। 

125
00:07:06,640 --> 00:07:10,920
हाँ, अर्जुन ने एक दूसरा बहुत ही 
अचूक दिव्यास्त चुना था और उसकी 

126
00:07:10,920 --> 00:07:13,880
खास वजह थी। 
वजह थी जयद्रत के पिता 

127
00:07:13,880 --> 00:07:16,000
वृद्धशस्त्र का वरदान। 
सही कहा। 

128
00:07:16,040 --> 00:07:19,840
वृद्धशस्त्र ने वरदान पाया था कि 
जो भी जयद्रत का सिर काटकर जमीन 

129
00:07:19,840 --> 00:07:22,320
पर गिराएगा। 
उसके अपने सिर के 100 टुकने हो 

130
00:07:22,320 --> 00:07:25,120
जाएंगे। 
यानी अगर अर्जुन सिर्फ जयद्रत का 

131
00:07:25,120 --> 00:07:28,840
सिर काटते थे और वो सिर 
कुरुक्षेत्र की मिट्टी पर गिर 

132
00:07:28,840 --> 00:07:30,680
जाता। 
तो वरदान के प्रभाव से अर्जुन की 

133
00:07:30,680 --> 00:07:34,240
भी तुरंत मृत्यु हो जाती। 
ये तो एक नामुमकिन सा ट्रैप था। 

134
00:07:34,320 --> 00:07:37,040
इसी ट्रैप को तोड़ने के लिए उस 
विशिष्ट दिव्यास्त्र का इस्तेमाल 

135
00:07:37,040 --> 00:07:39,920
किया गया। 
अर्जुन का वो जाता है और की गर्दन

136
00:07:39,920 --> 00:07:42,800
काट देता है। 
लेकिन वो तीर सिर को जमीन पर 

137
00:07:42,800 --> 00:07:44,320
गिरने नहीं देता। 
बिल्कुल नहीं। 

138
00:07:44,520 --> 00:07:47,840
वो दिव्यास्त्र उस कटे हुए सिर को
हवा में उड़ाते हुए सीधा युद्ध 

139
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भूमि से दूर ले जाता। 
है सीधा समंत पंच क्षेत्र में। 

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जहाँ वृद्धशस्त्र गहरे ध्यान में 
बैठे थे। 

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तीर उस सिर को ले जाकर एकदम 
सटीकता से वृद्धशस्त्र की गोद में

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गिरा देता है। 
और वृद्धशस्त्र को तो अंदाजा ही 

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नहीं था कि उनकी गोद में क्या 
गिरा है। 

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हाँ, जैसे ही वह ध्यान से उठने के
लिए खड़े होते हैं का सिर जमीन पर

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गिर जाता है। 
और वरदान अक्टिवेट हो जाता है। 

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वृद्ध क्षत्र का अपना सिर उसी 
क्षण फट जाता है। 

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और इसके तुरंत बाद कृष्ण उस 
अंधकार के इल्यूश़न को हटा लेते 

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हैं। 
आसमान साफ हो जाता है और गौरव 

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सेना देखती है कि सूरज अभी भी चमक
रहा है। 

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ये कौरवों के लिए भयंकर मेन्टल 
शौक था। 

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पांडव कैंप में अर्जुन के शंख की 
गूंज सुनाई देती है। 

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युधिष्ठिर की खुशी का कोई ठिकाना 
नहीं रहता। 

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लेकिन दूसरी तरफ कौरव खेमे में 
भारी हताशा थी। 

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दुर्योधन अपनी फ्रस्ट्रेशन में 
सीधा गुरु द्रोणाचार्य के पास 

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जाता। 
है और हमेशा की तरह ब्लामे गेम 

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शुरू कर देता। 
है। 

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हाँ, वह द्रोणाचार्य पर आरोप 
लगाता है। 

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कि उनके सेनापति रहते हुए और इतनी
भारी सुरक्षा के बावजूद जयद्रथ 

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कैसे मारा गया। 
द्रोणाचार्य ने इसका क्या जवाब 

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दिया? 
द्रोणाचार्य भी दिनभर के युद्ध से

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थके हुए थे और उन्हें दुर्योधन की
ये बातें बिल्कुल पसंद नहीं आई। 

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उन्होंने बहुत कड़ा उत्तर दिया। 
उन्होंने कहा कि अर्जुन और कृष्ण 

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को हराना असंभव है। 
और ये दुर्योधन की खुद की नीतियां

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हैं जो उन्हें इस हार की तरफ ले 
जा रही हैं। 

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ये इस चौदहवीं दिन के युद्ध का एक
बहुत ही ड्रामेटिक एंड था। 

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सच कहूं तो इस पूरी घटना को 
एनालाइज करने के बाद एक बहुत ही 

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प्रोवोकेटिव थॉट दिमाग में आता 
है। 

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वो क्या है? 
सोचने वाली बात ये है कि। 

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कई बार पूरे फिजिकल स्ट्रेंथ से 
ज्यादा साइकोलॉजिकल वारफेयर काम 

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आता है। 
बिल्कुल कौरवों के पास उस दिन 

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ताकत और हथियारों की कोई कमी नहीं
थी, उनकी फॉर्मेशन अभेद्य थी। 

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हाँ, बिल्कुल। 
लेकिन कृष्ण के एक छोटे से 

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इल्ल्यूशन ने एक माइंड गेम ने 
पूरी कौरव सेना के दिमाग को हरा 

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दिया, जो जीत बाहुबल से संभव नहीं
थी। 

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वो उस मेन्टल ट्रिक से मुमकिन हो 
गई। 

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ये सच में सोचने वाली बात है की 
वास्तविक जीवन में भी माइन गेम्स 

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और परसेप्शन का खेल कितना पावरफुल
होता है। 

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बहुत पावरफुल। 
खैर युद्ध में आज सूर्यास्त तो हो

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गया है लेकिन ये कुरुक्षेत्र का 
मैदान है और यहाँ शांति इतनी 

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जल्दी नहीं मिलने वाली। 
बिल्कुल नहीं। 

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व्हाट विल हैपन्ड व्हेन 
कुरुक्षेत्र वॉर सीस, इट्स फर्स्ट

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नाइट बैटल रात्रि युद्ध और कौन 
होने वाला है? 

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एम वीपी पांडवास और कौरवास के लिए
इस नाइट बैटल में हम आपसे फिर 

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मिलेंगे। 
जल्द ही महाभारत दी कंप्लीट सागा 

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में।
