1
00:00:00,080 --> 00:00:04,960
नमस्कार, स्वागत है आपका महाभारत,
दी कंप्लीट सागा सीज़न 4 में 

2
00:00:05,440 --> 00:00:09,280
बारहवीं दिन के युद्ध में जो कुछ 
भी हुआ ना मतलब उसने कुरुक्षेत्र 

3
00:00:09,280 --> 00:00:11,440
के पूरे समीकरण को हिलाकर रख दिया
था। 

4
00:00:11,440 --> 00:00:14,480
बिल्कुल। 
अगर हम थोड़ा पीछे जाकर देखें तो 

5
00:00:14,560 --> 00:00:18,040
द्रोणाचार्य ने बहुत ही चालाक 
मिलिट्री स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल 

6
00:00:18,040 --> 00:00:20,560
किया था। 
उन्होंने अर्जुन को मुख्य युद्ध 

7
00:00:20,560 --> 00:00:24,720
भूमि से दूर ले जाने के लिए 
संक्षिप्त सेना को आगे कर दिया। 

8
00:00:24,720 --> 00:00:29,720
हाँ और सुनने वालों के लिए जानना 
बहुत दिलचस्प होगा कि ये संशप्तक 

9
00:00:29,720 --> 00:00:35,360
ना कोई आम सैनिक नहीं थे। 
यह एक तरह से सुसाइड स्क्वाड की 

10
00:00:35,360 --> 00:00:40,200
तरह थे, जिन्होंने कसम खाई थी कि 
या तो वो अर्जुन को मारेंगे या 

11
00:00:40,200 --> 00:00:43,320
खुद मर जाएंगे। 
और जब अर्जुन वहाँ उलझे हुए थे ना

12
00:00:43,400 --> 00:00:47,320
तब पीछे से द्रोणाचार्य और राजा 
भगत ने पांडव सेना पर धावा बोल 

13
00:00:47,320 --> 00:00:49,880
दिया। 
उन्होंने इतना भयंकर हमला किया। 

14
00:00:49,960 --> 00:00:53,240
कि इट वास् एब्सोल्यूट हैवक। 
एकदम तबाही मच गई थी। 

15
00:00:53,240 --> 00:00:56,880
हाँ, लेकिन फिर बिल्कुल सही वक्त 
पर अर्जुन ने वापसी की। 

16
00:00:57,080 --> 00:01:01,880
उन्होंने संशप्तकों को हराया और 
भगदड़ जैसे दिग्गज का वध कर दिया।

17
00:01:02,440 --> 00:01:07,680
और वो दिन खत्म होते होते गौरव 
खेमे में एक अजीब सी खामोशी छा गई

18
00:01:07,680 --> 00:01:09,880
थी। 
अर्जुन की इस वापसी में ना? 

19
00:01:10,040 --> 00:01:14,280
ये साबित कर दिया था कि उन्हें 
सीधे युद्ध में हराना मतलब लगभग 

20
00:01:14,280 --> 00:01:17,720
नामुमकिन है। 
लेकिन आज हम अपनी इस गहराई से 

21
00:01:17,720 --> 00:01:22,080
चर्चा में जीस विषय पर बात करने 
वाले हैं वो है महाभारत के युद्ध 

22
00:01:22,080 --> 00:01:25,160
का तेरहवां दिन। 
ये सिर्फ एक और दिन नहीं था। 

23
00:01:25,400 --> 00:01:29,120
रणनीति रूप से। 
मनोवैज्ञानिक रूप से और अगर 

24
00:01:29,120 --> 00:01:33,320
एमोशनली देखें तो ये दिन पूरे 
महाकाव्य का एक टर्निंग पॉइंट है।

25
00:01:33,520 --> 00:01:37,880
तो मैं ये सोच रहा था कि तेरहवें 
दिन की शुरुआत आखिर किस माहौल में

26
00:01:37,880 --> 00:01:41,080
होती है क्योंकि पिछले दिन तो 
कौरवों की योजना पूरी तरह फैल हो 

27
00:01:41,080 --> 00:01:43,480
गई थी। 
बिल्कुल क्या द्रोणाचार्य पर कोई 

28
00:01:43,480 --> 00:01:45,480
दबाव था? 
बहुत ज्यादा दबाव था। 

29
00:01:45,560 --> 00:01:49,040
मतलब अगर हम सोर्स मटेरियल को 
ध्यान से पड़े ना तो द्रोणाचार्य 

30
00:01:49,040 --> 00:01:51,200
बहुत बुरी तरह से फ्रस्ट्रेट हो 
चुका था। 

31
00:01:51,320 --> 00:01:54,000
उसने सीधे द्रोणाचार्य पर ताने 
कसने शुरू कर दिए। 

32
00:01:54,000 --> 00:01:56,840
ओहो हाँ। 
उसका मानना था कि द्रोणाचार्य 

33
00:01:56,880 --> 00:02:00,000
पांडवों के प्रति सॉफ्ट हैं, 
क्योंकि पांडव आखिर उनके शिष्य ही

34
00:02:00,000 --> 00:02:00,880
तो रहे। 
हैं। 

35
00:02:00,960 --> 00:02:04,840
बात तो सही है और दुर्योधन के इन 
तानों से द्रोणाचार्य को गहरी ठेस

36
00:02:04,840 --> 00:02:07,440
पहुंची। 
अपने सम्मान को बचाने के लिए और 

37
00:02:07,440 --> 00:02:10,880
दुर्योधन को गलत साबित करने के 
लिए द्रोणाचार्य में एक बहुत ही 

38
00:02:10,880 --> 00:02:13,000
खौफनाक प्रतिज्ञा ली। 
प्रतिज्ञा? 

39
00:02:13,000 --> 00:02:17,520
हाँ कि आज वो हर हाल में 
युधिष्ठिर को बंदी बनाकर रहेंगे। 

40
00:02:17,520 --> 00:02:19,520
पर। 
युधिष्ठिर तक पहुंचना इतना आसान 

41
00:02:19,520 --> 00:02:22,280
तो नहीं था मतलब अर्जुन माँ मौजूद
थे और पांडवों की सेना भी कोई 

42
00:02:22,280 --> 00:02:25,000
छोटी मोटी सेना नहीं थी। 
यही तो कैच है। 

43
00:02:25,120 --> 00:02:29,160
तेरहवें दिन भी संछपथकों का जो 
बचा हुआ हिस्सा था ना वो अर्जुन 

44
00:02:29,160 --> 00:02:32,520
को चुनौती देने आ गया। 
अच्छा तो अर्जुन को एक बार फिर 

45
00:02:32,520 --> 00:02:37,280
युद्ध भूमि के दूसरे छोर पर जाना 
पड़ा और जैसे ही अर्जुन आँखों से 

46
00:02:37,280 --> 00:02:40,520
ओझल हुए द्रोणाचार्य ने अपना 
मास्टर स्ट्रोक चला। 

47
00:02:40,520 --> 00:02:43,560
मास्टर स्ट्रोक मतलब। 
उन्होंने अपनी पूरी सेना को एक 

48
00:02:43,560 --> 00:02:47,880
बेहद जटिल और अभेदय फॉर्मेशन में 
खड़ा कर दिया, जिसे हम चक्रव्यूह 

49
00:02:47,880 --> 00:02:51,560
कहते हैं। 
ये चक्रव्यूह एग्ज़ैक्ट्ली काम 

50
00:02:51,560 --> 00:02:53,480
कैसे करते हैं? 
मतलब हमने बचपन से कहानियों में 

51
00:02:53,480 --> 00:02:56,600
सुना तो है लेकिन मिलिट्री 
स्ट्रेटेजी के नज़रिए से कितना 

52
00:02:56,600 --> 00:02:58,520
खतरनाक? 
था, वो लाइन नहीं थी। 

53
00:02:58,760 --> 00:03:03,520
ये कई लेयर्स में बंटी हुई एक 
घूमती हुई भूल भुलैया थी। 

54
00:03:03,920 --> 00:03:06,800
ये फॉर्मेशन ना लगातार मोशन में 
रहता था। 

55
00:03:06,800 --> 00:03:08,320
अच्छा मतलब एक जगह खड़ा नहीं 
रहता। 

56
00:03:08,320 --> 00:03:11,960
था बिल्कुल नहीं। 
हर लेयर में अलग अलग तरह के सैनिक

57
00:03:11,960 --> 00:03:16,200
होते थे पैदल सैनिक, घुड़सवार रथ 
और हाथी। 

58
00:03:16,440 --> 00:03:20,560
अगर आप किसी तरह बाहरी लेयर को 
तोड़कर अंदर घुस भी जाए ना तो 

59
00:03:20,560 --> 00:03:24,440
अंदर के लेयर्स के सैनिक अपनी जगह
बदलकर आपको चारों तरफ से फंसा 

60
00:03:24,440 --> 00:03:26,960
लेंगे। 
द्रोणाचार्य का प्लान बहुत 

61
00:03:26,960 --> 00:03:29,840
कैल्कुलेटेड था। 
वो जानते थे कि अर्जुन के अलावा 

62
00:03:29,840 --> 00:03:33,400
पांडव खेमे में कोई भी इस क्यूँ 
को तोड़ना नहीं जानता। 

63
00:03:33,480 --> 00:03:36,600
ऐसे में युधिष्ठिर के पास बचने का
कोई रास्ता नहीं होगा। 

64
00:03:36,600 --> 00:03:41,040
तो जब युधिष्ठिर ने इस विशाल मतलब
घूमती हुई मौत की भूलभुलैया को 

65
00:03:41,040 --> 00:03:42,920
अपनी तरफ आते देखा तो उनका 
रिएक्शन क्या था? 

66
00:03:43,000 --> 00:03:45,480
युधिष्ठिर पूरी तरह से पैनिक में 
आ गए। 

67
00:03:45,720 --> 00:03:49,280
उन्हें समझ आ गया कि अगर वो बंदी 
बन गए तो युद्ध यही खत्म हो 

68
00:03:49,280 --> 00:03:52,320
जाएगा। 
और पांडव हमेशा के लिए हार जाएंगे

69
00:03:52,480 --> 00:03:57,680
और उस धर्मसंकट की घड़ी में उनकी 
नजर 16 साल के युवा अभिमन्यु पर 

70
00:03:57,680 --> 00:04:01,760
पड़ती है और वो अभिमन्यु से इस 
क्यूँ को तोड़ने की गुजारिश करते 

71
00:04:01,760 --> 00:04:03,320
हैं? 
अच्छा एक सेकंड यहाँ पे एक बहुत 

72
00:04:03,320 --> 00:04:06,560
बड़ा सवाल है मतलब बचपन से हम 
टीवी सीरियल्स और लोक कथाओं में 

73
00:04:06,560 --> 00:04:09,280
यही सुनते आए हैं। 
कि अभिमन्यु ने चक्रव्यूह भेड़ना 

74
00:04:09,280 --> 00:04:12,680
तब सीखा था जब वो अपनी माँ 
सुभद्रा के गर्भ में था। 

75
00:04:12,680 --> 00:04:16,519
हाँ, ये कहानी बहुत फेमस है। 
और ये भी कि जब बाहर निकलने का 

76
00:04:16,519 --> 00:04:19,399
तरीका बताने की बारी आई तो 
सुभद्रा सो गई थी। 

77
00:04:19,839 --> 00:04:23,200
क्या हमारे ओरिजिनल सोर्स मटेरियल
में इस जादुई कहानी का कोई जिक्र 

78
00:04:23,200 --> 00:04:25,680
है? 
नहीं, हमें इस चर्चा में ना उस 

79
00:04:26,000 --> 00:04:30,680
माँ के गर्भ में सोने वाली कहानी 
को पूरी तरह से खारिज करना होगा। 

80
00:04:30,680 --> 00:04:32,240
ओके तो सच क्या? 
है। 

81
00:04:32,240 --> 00:04:36,720
वेद व्यास जी की मूल महाभारत में 
ऐसा कोई चमत्कारी या जादुई जिक्र 

82
00:04:36,720 --> 00:04:40,440
नहीं है। 
असली सच बहुत ही प्रैक्टिकल है और

83
00:04:40,440 --> 00:04:43,280
वो एक अधूरी मिलिट्री ट्रेनिंग से
जुड़ा हुआ है। 

84
00:04:43,280 --> 00:04:47,280
अधूरी ट्रेनिंग। 
हाँ सॉस मटेरियल में एकदम स्पष्ट 

85
00:04:47,280 --> 00:04:52,960
लिखा है कि जब युधिष्ठिर अभिमन्यु
से बात करते हैं तो अभिमन्यु साफ 

86
00:04:52,960 --> 00:04:57,920
तौर पर कहता है कि उसके पिता 
अर्जुन ने उसे इस क्यूँ को भेदने 

87
00:04:57,960 --> 00:05:02,520
यानी उसे पेनिट्रेट करने का तरीका
तो सिखाया है वो अंदर जाकर मार 

88
00:05:02,520 --> 00:05:06,640
काट कर सकता है लेकिन अगर। 
अंदर कोई भारी खतरा आ जाए तो 

89
00:05:06,680 --> 00:05:10,480
क्यूँ से बाहर कैसे आना है? 
वो एग्ज़िट प्रोटोकोल उसे नहीं 

90
00:05:10,480 --> 00:05:12,720
सिखाया गया। 
मतलब ये किसी नींद या जादू का 

91
00:05:12,720 --> 00:05:15,760
नतीजा नहीं था, बल्कि अर्जुन की 
तरफ से दी गई ट्रेनिंग का एक 

92
00:05:15,760 --> 00:05:16,520
अधूरा हिस्सा। 
था। 

93
00:05:16,520 --> 00:05:19,960
एग्ज़ैक्ट्ली। 
आप इसे आज के मॉडर्न समय के एक 

94
00:05:20,040 --> 00:05:22,680
इलीट एथिकल हैकर से जोड़कर देख 
सकते हैं। 

95
00:05:22,680 --> 00:05:25,800
हैकर वो कैसे? 
मान लीजिए एक बहुत ही टेलेन्टेड 

96
00:05:25,800 --> 00:05:30,320
हैकर है वो ये तो जानता है कि 
दुनिया के सबसे मुश्किल साइबर 

97
00:05:30,320 --> 00:05:32,920
सिक्योरिटी फायरवॉल को जो की 
हमारा चक्रव्यूह है। 

98
00:05:33,160 --> 00:05:36,320
उसे क्रैक करके सिस्टम के अंदर 
कैसे घुसना है? 

99
00:05:36,400 --> 00:05:39,080
सही बात है। 
लेकिन अगर अंदर जाने के बाद 

100
00:05:39,200 --> 00:05:42,720
सिस्टम का अलार्म बज जाए, 
सिक्योरिटी ट्रिगर हो जाए और 

101
00:05:42,720 --> 00:05:47,080
सिस्टम अचानक लॉक हो जाए तो उस 
हैकर के पास बाहर निकलने का या 

102
00:05:47,080 --> 00:05:49,280
लोगआउट करने का कोई एग्ज़िट प्लान
नहीं। 

103
00:05:49,280 --> 00:05:53,040
है। 
अभिमन्यु ठीक उसी एथिकल हैकर की 

104
00:05:53,040 --> 00:05:55,600
तरह था। 
ये हैकर वाली नॉलेज बहुत कुछ साफ 

105
00:05:55,600 --> 00:06:00,120
कर देती है एकदम सही, लेकिन मैं 
सोच रहा था कि अगर अभिमन्यु को 

106
00:06:00,120 --> 00:06:04,240
पता था कि उसके पास एग्ज़िट प्लान
नहीं है, तो फिर उसने सुसाइड मिशन

107
00:06:04,240 --> 00:06:06,640
के लिए हाँ क्यों बोला? 
क्या उस पर कोई दबाव था? 

108
00:06:06,880 --> 00:06:09,720
दबाव से ज्यादा ना ये एक भरोसा 
था। 

109
00:06:09,720 --> 00:06:12,960
कैसा भरोसा? 
जब अभिमन्यु ने अपनी ये कमजोरी 

110
00:06:12,960 --> 00:06:16,880
युधिष्ठिर को बताई तो युधिष्ठिर 
ने उसे एक बहुत बड़ा आश्वासन 

111
00:06:16,880 --> 00:06:19,240
दिया। 
उन्होंने कहा कि तुम्हें बाहर 

112
00:06:19,240 --> 00:06:21,760
निकलने की चिंता करने की जरूरत 
नहीं है। 

113
00:06:22,080 --> 00:06:26,160
तुम्हारा काम सिर्फ उस फायरवॉल 
में छेद करना है। 

114
00:06:26,240 --> 00:06:29,640
जैसे ही तुम उस व्यूह को तोड़कर 
अंदर घुसोगे। 

115
00:06:29,720 --> 00:06:34,760
तुम्हारे ठीक पीछे पीछे मैं भीम 
साते की और बाकी सारे पांडव 

116
00:06:34,760 --> 00:06:37,240
महारथी उसी रास्ते से अंदर आ 
जाएंगे? 

117
00:06:37,320 --> 00:06:41,680
अच्छा मतलब बैकअप प्लान तैयार था।
हाँ, युधिष्ठिर ने कहा कि हम 

118
00:06:41,680 --> 00:06:43,760
तुम्हें चारों तरफ से कवर कर 
लेंगे। 

119
00:06:44,080 --> 00:06:47,520
अभिमन्यु को लगा कि उसका बैकअप 
उसके ठीक पीछे रहेगा। 

120
00:06:47,600 --> 00:06:50,000
इसलिए उसने इस चुनौती को स्वीकार 
कर लिया। 

121
00:06:50,040 --> 00:06:54,440
और इसके बाद जो होता है मतलब वो 
शायद युद्ध के इतिहास के सबसे 

122
00:06:54,440 --> 00:06:57,920
इंटेंस पलों में से एक है। 
मैंने पढ़ा है कि अभिमन्यु अपने 

123
00:06:57,920 --> 00:07:01,960
सारथी सुमित्र से रद्द को सीधे 
द्रोणाचार्य की सेना की तरफ ले 

124
00:07:01,960 --> 00:07:06,320
जाने को कहता है और सुमित्र वहाँ 
थोड़ा झिझकता है, वो अभिमन्यु को 

125
00:07:06,320 --> 00:07:08,880
चेतावनी भी देता है। 
के सामने दिग्गज खड़े हैं। 

126
00:07:08,920 --> 00:07:13,080
हाँ, सुमित्र जानता था कि 
द्रोणाचार्य युद्ध कला के महासागर

127
00:07:13,080 --> 00:07:15,640
हैं और अभिमन्यु अभी बहुत युवा 
है। 

128
00:07:15,680 --> 00:07:20,280
लेकिन अभिमन्यु का जो आत्मविश्वास
था ना वो देखने लायक था, बिल्कुल।

129
00:07:20,560 --> 00:07:23,880
वो पूरे जोश में अपने सारथी को रथ
आगे बढ़ाने का आदेश देता है। 

130
00:07:23,880 --> 00:07:27,640
और फिर वो जीस पीर और आक्रामकता 
के साथ उस चक्रव्यूह में घुसता 

131
00:07:27,640 --> 00:07:30,720
है। 
हे भगवान मतलब सुनने वालों के लिए

132
00:07:30,720 --> 00:07:33,200
ये इमेजिन करना भी रोंगटे खड़े कर
देने वाला है। 

133
00:07:33,200 --> 00:07:37,200
एकदम ऐसा लग रहा था जैसे हाथियों 
के एक विशाल झुंड में अचानक से एक

134
00:07:37,200 --> 00:07:40,480
भूखा शेर का बच्चा कूद पड़ा हो। 
गौरव सेना को तो रिएक्ट करने का 

135
00:07:40,480 --> 00:07:44,400
मौका ही नहीं मिला। 
वो अंदर घुसते ही साक्षात प्रलय 

136
00:07:44,400 --> 00:07:47,880
बन गया था। 
उसने कौरवों की चतुरंगिनी सेना 

137
00:07:47,920 --> 00:07:53,280
यानी उनके हाथी, घोड़े, रथ और 
पैदल सैनिकों का ऐसा भयंकर संहार 

138
00:07:53,280 --> 00:07:56,200
शुरू किया। 
कि वो विशाल चक्रव्यूह अंदर से 

139
00:07:56,200 --> 00:07:59,640
कांपने लगा। 
बाप रे उसकी फुर्ती इतनी तेज थी 

140
00:07:59,800 --> 00:08:04,040
कि लोगों को सिर्फ उसका धनुष 
मंडलाकार घूमता हुआ दिखाई दे रहा 

141
00:08:04,040 --> 00:08:07,120
था। 
वो कब बाण निकालता था और कब चलाता

142
00:08:07,120 --> 00:08:11,040
था, किसी को नजर ही नहीं आता था। 
ओह, मैं गॉड 16 साल का एक अकेला 

143
00:08:11,040 --> 00:08:13,160
लड़का और सामने उस युग के सबसे 
बड़े दिग्गज। 

144
00:08:13,400 --> 00:08:16,880
मुझे ये बताइए कि जब वो अंदर घुसा
तो कौरव महराथियों के साथ उसके 

145
00:08:16,880 --> 00:08:19,720
स्पेसिफिक एनकाउंटर्स कैसे रहे? 
क्योंकि अंदर तो पूरी कौरव 

146
00:08:19,720 --> 00:08:22,600
लीडरशिप मौजूद थी ना? 
हाँ, और उसके एनकाउंटर्स इतने 

147
00:08:22,600 --> 00:08:25,880
भयानक थे कि गौरव सेना का पूरा 
मनोबल ही टूट गया। 

148
00:08:25,960 --> 00:08:30,000
सबसे पहले हम मध्यदेश के राजा 
शल्य की बात करते। 

149
00:08:30,000 --> 00:08:31,280
हैं। 
शल्य तो बहुत सीनियर थे। 

150
00:08:31,400 --> 00:08:34,720
हाँ। 
शल्या एक बहुत ही खूंखार योद्धा 

151
00:08:34,720 --> 00:08:40,039
थे लेकिन जब वो अभिमन्यु के सामने
आए तो अभिमन्यु ने अपने तीरों की 

152
00:08:40,039 --> 00:08:43,520
ऐसी बौछार की कि शल्य बुरी तरह 
घायल हो गए। 

153
00:08:44,039 --> 00:08:47,680
वो दर्द के मारे अपने ही रथ पर 
मूर्छित हो गए। 

154
00:08:47,800 --> 00:08:51,880
मतलब पूरी तरह बेहोश। 
और जब शल्य के भाई ने गुस्से में 

155
00:08:51,880 --> 00:08:56,480
आकर अभिमन्यु पर हमला किया तो 
अभिमन्यु ने पलक झपकते ही उसका वध

156
00:08:56,480 --> 00:08:58,560
कर दिया। 
ये तो बहुत बड़ी बेइज्जती है। 

157
00:08:58,560 --> 00:09:01,920
इतने सीनियर योद्धा की ये हालत? 
बेइज्जती की तो ये सिर्फ शुरुआत 

158
00:09:01,920 --> 00:09:04,440
थी। 
इसके बाद दुशासन अभिमन्यु से 

159
00:09:04,440 --> 00:09:07,920
भिड़ने आ गया। 
दुशासन तो खुद को अजय मानता था। 

160
00:09:07,920 --> 00:09:10,880
बिल्कुल। 
दोनों के बीच एक बहुत ही क्रूर 

161
00:09:10,880 --> 00:09:15,040
युद्ध हुआ लेकिन अभिमन्यु की 
युद्ध कला के सामने दुशासन टेक 

162
00:09:15,040 --> 00:09:18,160
नहीं पाया। 
वो तीरों से इतना बुरी तरह बिंद 

163
00:09:18,160 --> 00:09:21,320
गया कि वो भी लहूलुहान होकर होश 
खो बैठा। 

164
00:09:21,320 --> 00:09:24,360
क्या बात कर रही? 
है हाँ उसके सारथी को पैनिक में 

165
00:09:24,360 --> 00:09:28,760
आकर दुशासन की जान बचाने के लिए। 
रथ को युद्ध के मैदान से दूर 

166
00:09:28,760 --> 00:09:31,240
भगाना पड़ा। 
दुशासन को मैदान छोड़कर भागना 

167
00:09:31,240 --> 00:09:32,800
पड़ा। 
ये तो दुर्योधन के लिए बहुत बड़ा 

168
00:09:32,800 --> 00:09:35,360
झटका होगा। 
दुर्योधन तो ये सब अपनी आँखों के 

169
00:09:35,360 --> 00:09:38,960
सामने देख रहा था ना दुर्योधन के 
लिए सबसे बड़ा सदमा तो अभी बाकी 

170
00:09:38,960 --> 00:09:42,160
था। 
दुशासन के हारने के बाद दुर्योधन 

171
00:09:42,160 --> 00:09:45,560
का अपना बेटा लक्ष्मण अभिमन्यु को
रोकने के लिए आगे आया। 

172
00:09:45,560 --> 00:09:49,120
लक्ष्मण? 
लक्ष्मण भी बहुत वीर था और 

173
00:09:49,120 --> 00:09:53,280
अभिमन्यु की ही उम्र का था। 
दोनों युवा योद्धाओं में भीषण 

174
00:09:53,280 --> 00:09:57,680
टक्कर हुई और फिर लेकिन अभिमन्यु 
की स्किल बहुत सुपीरियर थी। 

175
00:09:58,000 --> 00:10:02,000
उसने एक ऐसा अचूक वार किया कि 
दुर्योधन के बेटे लक्ष्मण का सिर 

176
00:10:02,000 --> 00:10:05,920
धड़ से अलग हो गया। 
अपने ही बेटे को। 

177
00:10:06,320 --> 00:10:08,080
अपनी आँखों के सामने मरते हुए 
देखना। 

178
00:10:08,080 --> 00:10:12,240
हाँ और इस घटना ने दुर्योधन को 
पूरी तरह से तोड़ दिया। 

179
00:10:12,520 --> 00:10:17,040
वो एक ही पल में गहरे डर, सदमे और
भयंकर गुस्से से भर गया। 

180
00:10:17,400 --> 00:10:21,960
उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि इस 
एक लड़के को रोका कैसे जाए? 

181
00:10:21,960 --> 00:10:24,440
ये सुनकर मुझे एक स्पोर्ट्स 
एनालॉजी याद आ रही है। 

182
00:10:24,560 --> 00:10:28,080
और ये एकदम सटीक बैठती है। 
क्या ये सिचुएशन बिलकुल वैसी ही 

183
00:10:28,080 --> 00:10:32,720
है जैसे कोई नया रुकी एथलीट जिसने
अभी अभी अपना डेब्यू किया हो? 

184
00:10:32,880 --> 00:10:37,160
वो किसी वर्ल्ड चैंपियनशिप के 
फाइनल मैच में उतरे और सामने वाली

185
00:10:37,160 --> 00:10:41,000
टीम कोई आम टीम नहीं है। 
उसमें सारे हॉल ऑफ़ फेमस दुनिया 

186
00:10:41,000 --> 00:10:44,000
के सबसे दिग्गज और लेजेंडरी 
खिलाड़ी मौजूद हैं। 

187
00:10:44,080 --> 00:10:48,080
लेकिन वो अकेला रोकी उस पूरी 
लेजेंड्री टीम को बुरी तरह से 

188
00:10:48,080 --> 00:10:50,640
डोमिनेट कर रहा। 
है बिलकुल सही एनालॉजी है ये। 

189
00:10:50,760 --> 00:10:52,800
वो उनके हर दांव को फील कर रहा 
है। 

190
00:10:53,080 --> 00:10:57,360
उनके डिफेंस को तोड़ रहा है और 
सामने वाली पूरी टीम पूरी तरह से 

191
00:10:57,360 --> 00:11:00,760
पैनिक में आ गई है। 
उनके पास इस को रोकने का कोई जवाब

192
00:11:00,760 --> 00:11:03,560
ही नहीं है। 
एकदम यही हो रहा था। 

193
00:11:03,640 --> 00:11:07,440
कौरवों की लीडरशिप पूरी तरह से उस
पैनिक वाली स्थिति में थी। 

194
00:11:07,640 --> 00:11:13,000
उनके बड़े बड़े हौल ऑफ़ फेमस 116 
साल के लड़के से पिट रहे थे और जब

195
00:11:13,000 --> 00:11:18,040
दुर्योधन ने देखा कि उसकी पूरी 
सेना का आत्मविश्वास ढहरा है तो 

196
00:11:18,040 --> 00:11:21,240
उसने हताशा में अपने सबसे बड़े 
हथियार। 

197
00:11:21,480 --> 00:11:25,880
सूर्यपुत्र कर्ण को आगे किया कर्ण
कर्ण को अर्जुन का सबसे बड़ा 

198
00:11:25,880 --> 00:11:29,480
प्रतिद्वंदी माना जाता था। 
दुर्योधन को लगा कि कर्ण इस लड़के

199
00:11:29,480 --> 00:11:32,880
को तो आसानी से रोक ही लेगा। 
तो जब कर्ण और अभिमन्यु आमने 

200
00:11:32,880 --> 00:11:36,240
सामने आए तब क्या हुआ? 
क्या कर्ण ने उस हैकर को रोक? 

201
00:11:36,240 --> 00:11:38,400
लिया। 
हैरान करने वाली बात यह है कि 

202
00:11:38,400 --> 00:11:43,360
कर्ण भी उस युवा तूफान को नहीं 
रोक पाए जब उन दोनों का आमना 

203
00:11:43,360 --> 00:11:48,120
सामना हुआ तो अभिमन्यु ने कर्ण को
भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। 

204
00:11:48,120 --> 00:11:51,400
सच में। 
हाँ, अभिमन्यु ने कर्ण के धनुष 

205
00:11:51,400 --> 00:11:54,360
काट दिए, उसके सारथी को मार 
गिराया। 

206
00:11:54,440 --> 00:11:58,160
कर्ण को युद्ध भूमि में अपना बचाव
करना मुश्किल हो रहा था। 

207
00:11:58,200 --> 00:12:01,360
बाप रे। 
और सबसे बड़ा मानसिक प्रहार तो तब

208
00:12:01,360 --> 00:12:05,560
हुआ जब अभिमन्यु ने कर्ण की आँखों
के सामने उसके भाइयों का वध कर 

209
00:12:05,560 --> 00:12:06,560
दिया। 
वेइट् सीरियसली? 

210
00:12:06,720 --> 00:12:08,560
कर्ण जैसे महारथी को भी हार माननी
पड़ी। 

211
00:12:08,560 --> 00:12:13,560
बिल्कुल और जब गौरव सेना ने देखा 
कि कर्ण, दुशासन और शल्य जैसे 

212
00:12:13,560 --> 00:12:16,440
दिग्गज। 
एक लड़के के सामने बेबस है तो 

213
00:12:16,440 --> 00:12:20,920
पूरी सेना में खौफ दौड़ गया। 
सैनिक मैदान छोड़कर भागने लगे। 

214
00:12:21,320 --> 00:12:23,800
इसे युद्ध की भाषा में पलायन कहते
हैं। 

215
00:12:24,120 --> 00:12:28,160
वहाँ एक पूरी भगदड़ मच गई। 
रथ आपस में टकराकर टूट रहे थे। 

216
00:12:28,240 --> 00:12:31,120
हाथी चिंघाड़कर अपनी सेना को कुचल
रहे थे। 

217
00:12:31,120 --> 00:12:33,840
और हर तरफ सिर्फ अभिमन्यु के 
तीरों की बारिश हो रही थी। 

218
00:12:33,880 --> 00:12:37,200
बिल्कुल अच्छा, यहाँ सोर्स 
मटेरियल में एक बहुत ही अजीब सी 

219
00:12:37,200 --> 00:12:40,680
चीज़ देखने को मिलती है। 
मैंने पढ़ा है कि द्रोणाचार्य जो 

220
00:12:40,680 --> 00:12:44,280
कौरवों के मुख्य सेनापति थे और 
जिन्होंने ये क्यूँ बनाया था? 

221
00:12:44,360 --> 00:12:47,840
वो खुद इस तबाही के बीच अभिमन्यु 
की तारीफ कर रहे थे। 

222
00:12:48,040 --> 00:12:50,800
ऐसा क्यों? 
ये ना इस पूरे प्रसंग का एक बहुत 

223
00:12:50,800 --> 00:12:54,680
ही शानदार साइकोलॉजिकल 
मास्टरक्लास है द्रोणाचार्य आखिर 

224
00:12:54,680 --> 00:12:59,640
एक गुरु थे जब उन्होंने देखा कि 
कैसे ये युवा योद्धा उनके बनाए 

225
00:12:59,640 --> 00:13:03,920
सबसे जटिल क्यूँ में घुसकर? 
उनके सबसे बड़े योद्धाओं को धूल 

226
00:13:03,920 --> 00:13:06,760
चटा रहा है। 
तो एक योद्धा और गुरु होने के 

227
00:13:06,760 --> 00:13:10,280
नाते वो अभिमन्यु की कला से मंत्र
मुग्ध हो गए। 

228
00:13:11,160 --> 00:13:15,120
उन्होंने खुलेआम दुर्योधन से कहा 
कि देखो इस लड़के की फुर्ती, देखो

229
00:13:15,280 --> 00:13:19,560
इसकी युद्ध कला ये अर्जुन से भी 
एक कदम आगे निकल गया। 

230
00:13:19,560 --> 00:13:21,080
है। 
लेकिन दुर्योधन तो वैसे ही अपने 

231
00:13:21,080 --> 00:13:24,160
बेटे की मौत से बौखलाया हुआ था। 
द्रोणाचार्य की इन बातों ने तो आग

232
00:13:24,160 --> 00:13:27,800
में घी का काम किया होगा। 
बिल्कुल दुर्योधन के लिए ये सबसे 

233
00:13:27,800 --> 00:13:31,200
बड़ा मानसिक प्रहार था। 
एक तरफ उसकी सेना कट रही है और 

234
00:13:31,200 --> 00:13:35,400
दूसरी तरफ उसका अपना सेनापति 
दुश्मन की तारीफ कर रहा है। 

235
00:13:35,520 --> 00:13:38,360
दुर्योधन का ईगो पूरी तरह से टूट 
चुका था। 

236
00:13:38,440 --> 00:13:42,240
उसे लगने लगा कि द्रोणाचार्य 
जानबूझकर अभिमन्यु को नहीं मार 

237
00:13:42,240 --> 00:13:45,320
रहे हैं क्योंकि वो उनके प्रिय 
शिष्य अर्जुन का बेटा। 

238
00:13:45,320 --> 00:13:48,320
है। 
1 मिनट हम अभिमन्यु की इस तबाही 

239
00:13:48,320 --> 00:13:51,400
की बात कर रहे हैं, लेकिन यहाँ एक
बहुत बड़ा मिसिंग पीस है। 

240
00:13:51,520 --> 00:13:54,320
क्या युधिष्ठिर का वो बैकअप प्लान
कहाँ गया? 

241
00:13:54,600 --> 00:13:58,120
उन्होंने तो वादा किया था कि वो 
भीम और साथी के साथ। 

242
00:13:58,200 --> 00:14:01,000
ठीक अभिमन्यु के पीछे पीछे क्यूँ 
में घुसेंगे? 

243
00:14:01,560 --> 00:14:03,400
तो फिर ये लड़का अंदर अकेला कैसे 
पड़ गया? 

244
00:14:03,400 --> 00:14:08,000
ये ये इस दिन की सबसे बड़ी और 
खौफनाक त्रासदी है। 

245
00:14:08,640 --> 00:14:10,800
वो बेक अप नाक कभी अंदर पहुँच ही 
नहीं पाया। 

246
00:14:10,800 --> 00:14:11,760
क्यों? 
क्या हुआ था? 

247
00:14:11,880 --> 00:14:17,920
और इसकी वजह था एक अकेला इंसान। 
जयद्रत ने भगवान शिव की कठोर 

248
00:14:17,920 --> 00:14:20,040
तपस्या करके एक वरदान प्राप्त 
किया। 

249
00:14:20,040 --> 00:14:23,320
था। 
वरदान यह था कि वो 1 दिन के लिए 

250
00:14:23,320 --> 00:14:28,320
अर्जुन को छोड़कर बाकी सभी 
पांडवों को युद्ध में रोक सकेगा। 

251
00:14:28,440 --> 00:14:33,320
और तेरहवें दिन जब अभिमन्यु ने 
क्यूँ में छेद किया और अंदर घुसा।

252
00:14:33,400 --> 00:14:37,680
तो जयद्रत उस टूटे हुए दरवाजे पर 
एक विशाल चट्टान की तरह के खड़ा 

253
00:14:37,680 --> 00:14:39,560
हो गया। 
मतलब जयद्रत ने अकेले ही 

254
00:14:39,560 --> 00:14:42,680
युधिष्ठिर, भीम और सती के जैसे 
महारतियों को रोक लिया। 

255
00:14:42,680 --> 00:14:46,000
हाँ भीम अपनी गदा लेकर जयद्रत पर 
टूट पड़े। 

256
00:14:46,000 --> 00:14:50,680
सती की ने अपने सारे अस्त्र चला 
दिए, लेकिन शिव के उस वरदान के 

257
00:14:50,680 --> 00:14:53,200
कारण कोई भी जयद्रत को पार नहीं 
कर पाया। 

258
00:14:53,560 --> 00:14:58,880
वो दीवार अभेद्य हो गई और कुछ ही 
देर में कौरव सेना ने उस क्यूँ के

259
00:14:58,880 --> 00:15:02,560
छेद को वापस भर दिया? 
दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो गया 

260
00:15:02,560 --> 00:15:04,520
वो। 
मतलब जैसे एग्ज़िट प्लान की कमी 

261
00:15:04,520 --> 00:15:08,640
की, हम शुरुआत में बात कर रहे थे,
अब वो एक डरावनी सचाई बन चुकी थी।

262
00:15:08,960 --> 00:15:11,880
वो हैकर जो सिस्टम के अंदर तो 
पहुँच गया था, अब पूरी तरह से 

263
00:15:11,880 --> 00:15:14,680
ट्रैप हो चुका था। 
उसकी पीछे की सारी दीवारें बंद हो

264
00:15:14,680 --> 00:15:16,840
चुकी थी। 
कोई मदद नहीं, कोई बैकअप नहीं। 

265
00:15:16,920 --> 00:15:21,120
और यही वो पल है जहा इस महाकाव्य 
का टोन पूरी तरह से बदल जाता है। 

266
00:15:21,200 --> 00:15:24,640
अभिमन्यु को भी अंदर ये एहसास हो 
गया होगा की कोई मदद नहीं आ रही 

267
00:15:24,640 --> 00:15:26,320
है। 
वो पूरी तरह से अकेला। 

268
00:15:26,320 --> 00:15:30,320
है और अगर हम इसे आज की जिंदगी से
जोड़कर देखें तो ये कितना रीलेटबल

269
00:15:30,320 --> 00:15:31,680
है। 
ना कैसे? 

270
00:15:31,920 --> 00:15:35,000
कई बार हमारी जिंदगी में ऐसे 
मैसिव क्राइसिस आ खड़े होते हैं 

271
00:15:35,000 --> 00:15:38,360
जहाँ हम किसी चुनौती में कूद तो 
पड़ते हैं, लेकिन अचानक हमें लगता

272
00:15:38,360 --> 00:15:40,040
है कि हमारे पास आगे का कोई 
रास्ता नहीं है। 

273
00:15:40,040 --> 00:15:42,400
बिल्कुल हमारा सारा बैकअप फैल हो 
जाता है। 

274
00:15:42,480 --> 00:15:44,160
हमारे पास कोई एग्ज़िट प्लान नहीं
होता। 

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उस वक्त इंसान के पास दो ही 
रास्ते होते हैं। 

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या तो हार मान ले या फिर अपनी 
आखिरी सांस तक लड़ता रहे। 

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और अभिमन्यु ने दूसरा रास्ता 
चुना। 

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वो जानता था कि वो एक ऐसी भूल 
भुलैया में फंसाए जहाँ से वो 

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जिंदा वापस नहीं जाएगा। 
उसे ये भी देख रहा था कि जीस 

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बैकअप का उसे वादा किया गया था। 
वो नहीं आया लेकिन फिर भी उसने 

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हथियार नहीं डाले। 
उसने अपने डर को खुद पर हावी नहीं

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होने दिया। 
बल्कि उसने अकेले ही पूरी कौरव 

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लीडरशिप की नींद उड़ा दी और मेरी 
नजर में यही अभिमन्यु की असली 

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महानता है। 
यह सच में रोंगटे खड़े कर देने 

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वाली बहादुरी है। 
लेकिन इस बहादुरी के बीच से और इस

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सोर्स मटेरियल की गहराई से एक 
बहुत ही चुभने वाला सवाल निकलता 

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है। 
ज़रा सोचिए जब सत्ता। 

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अनुभव और अहंकार से भरे पुराने 
दिग्गजों को उन वेटरन लीडर्स को 

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एक अकेले 16 साल के बच्चे के 
हाथों इतनी बड़ी सार्वजनिक हार और

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बेइज़्ज़ती का सामना करना पड़ता 
है तो फिर उनकी नैतिकता का क्या 

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होता है? 
सही सवाल है। 

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जब कण द्रोण, कृपाचार्य और 
दुर्योधन जैसे महारथी एक अकेले 

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लड़के से वॅन वॅन फाइट में हार 
जाते है। 

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तो क्या उनका ईगो उन्हें युद्ध के
सारे धर्म और नियम तोड़ने पर 

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मजबूर कर देगा? 
क्या वो अपनी इस शर्मिंदगी को 

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मिटाने के लिए इंसानियत की सारी 
हदें पार कर जाएंगे? 

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ये सोचना भी डरावना है। 
हाँ, विल अभिमन्यु हैंडल ऑल दी 

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महारथीस अलोन। 
विल धर्म प्रीवेल? 

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ऑर विल इट बी किल्ड ब्रूटली ब्य 
दी हैंड्स ऑफ कौरवास? 

300
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हम आपसे फिर मिलेंगे। 
जल्दी महाभारत दी कंप्लीट सागा 

301
00:17:12,119 --> 00:17:12,400
में।
