1
00:00:00,040 --> 00:00:05,160
नमस्कार, स्वागत है आपका महाभारत,
दी कंप्लीट सागा सीज़न 3 में आज 

2
00:00:05,160 --> 00:00:08,440
हम कुरुक्षेत्र युद्ध के दूसरे 
दिन की घटनाओं की गहराइयों में 

3
00:00:08,440 --> 00:00:11,000
उतरेंगे। 
पहले दिन का अंत पांडव खेमे के 

4
00:00:11,000 --> 00:00:16,880
लिए एक बहुत भारी सदमे जैसा था। 
एक तरफ युधिष्ठिर का बड़ों से 

5
00:00:16,880 --> 00:00:19,480
आशीर्वाद लेकर वो धर्म का शिखर 
छूना। 

6
00:00:19,480 --> 00:00:22,360
और दूसरी तरफ युद्ध की वो क्रूर 
सच्चाई। 

7
00:00:22,360 --> 00:00:26,880
बिलकुल जहाँ उन्होंने अपने दो 
युवा राजकुमार उत्तर और श्वेत 

8
00:00:27,080 --> 00:00:30,800
दोनों को खो दिया तो पहले दिन का 
सूरज पांडवों के लिए। 

9
00:00:30,880 --> 00:00:33,200
एक गहरी चिंता लेकर डूबा था। 
बिल्कुल। 

10
00:00:33,440 --> 00:00:36,800
और यही वो पॉइंट है जहाँ से दूसरा
दिन शुरू होता है। 

11
00:00:37,040 --> 00:00:41,200
ये सिर्फ एक नई सुबह नहीं थी। 
ये हताशा से निकलकर एक नई रणनीति 

12
00:00:41,200 --> 00:00:43,000
बनाने का दिन था। 
सही कहा। 

13
00:00:43,360 --> 00:00:46,920
पहले दिन के नुकसान ने पांडवों को
ये एहसास करा दिया था। 

14
00:00:47,000 --> 00:00:49,520
कि ये युद्ध सिर्फ भावनाओं से 
नहीं जीता जाएगा। 

15
00:00:49,520 --> 00:00:52,280
इसके लिए रणनीति और पराक्रम दोनों
लगेंगे। 

16
00:00:52,320 --> 00:00:54,560
तो चलिए इसी पर विस्तार से बात 
करते हैं। 

17
00:00:54,560 --> 00:00:58,080
पहले दिन की हार के बाद युधिष्ठिर
की मनोदशा क्या थी? 

18
00:00:58,440 --> 00:01:02,440
ज़ाहिर है वो धर्मराज है, भावनाओं
को बहुत गहराई से महसूस करते हैं।

19
00:01:02,600 --> 00:01:05,960
आप सही कह रहे हैं। 
युधिष्ठिर मतलब पूरी तरह से टूट 

20
00:01:05,960 --> 00:01:08,760
चूके थे। 
उन्हें लग रहा था कि भीष्म और 

21
00:01:08,760 --> 00:01:12,240
द्रोण जैसे अजेय योद्धाओं के 
सामने वो कैसे जीतेंगे? 

22
00:01:12,240 --> 00:01:14,480
अपनी सेना का मनोबल भी गिरतावा 
देख रहे होंगे। 

23
00:01:14,480 --> 00:01:19,520
हाँ और वो खुद भी निराश थे और 
यहीं पर श्रीकृष्ण की भूमिका वो 

24
00:01:19,520 --> 00:01:22,640
सिर्फ एक सारथी से कहीं ज्यादा 
बड़ी हो जाती है। 

25
00:01:22,720 --> 00:01:25,800
वो एक तरह से क्राइसिस मैनेजर 
बनकर सामने आते हैं। 

26
00:01:25,880 --> 00:01:29,440
ये दिलचस्प है मतलब वो सिर्फ 
अर्जुन के लिए नहीं, पूरे पांडव 

27
00:01:29,440 --> 00:01:32,920
पक्ष के लिए एक मार्गदर्शक थे। 
उन्होंने युधिष्ठिर से क्या कहा? 

28
00:01:32,960 --> 00:01:36,400
देखिए श्री कृष्ण ने उन्हें कोई 
झूठी तसल्ली नहीं दी। 

29
00:01:36,680 --> 00:01:40,320
उन्होंने युधिष्ठिर को उनकी अपनी 
ताकत याद दिलाई। 

30
00:01:40,440 --> 00:01:43,160
उन्होंने कहा। 
आप निराश क्यों होते हैं? 

31
00:01:43,240 --> 00:01:46,040
आपके पास भीम और अर्जुन जैसे भाई 
हैं। 

32
00:01:46,040 --> 00:01:47,680
जिनकी बराबरी करने वाला कोई नहीं।
है। 

33
00:01:47,680 --> 00:01:52,640
एग्ज़ैक्ट्ली आपके पास जैसे 
सेनापति है, जो सीधे द्रोण से 

34
00:01:52,640 --> 00:01:56,840
लोहा लेने के लिए जन्मा है। 
ये आज की लीडरशिप साइकोलॉजी का एक

35
00:01:56,840 --> 00:02:00,800
बेहतरीन उदाहरण है। 
सही बात, एक अच्छा लीडर अपनी टीम 

36
00:02:00,800 --> 00:02:03,400
को। 
ये नहीं बताता कि वो क्या करें 

37
00:02:03,640 --> 00:02:07,400
बल्कि उन्हें उनकी अपनी क्षमताओं 
का एहसास कराता है। 

38
00:02:08,039 --> 00:02:12,280
श्री कृष्ण ने उन्हें याद दिलाया 
कि ये युद्ध धर्म की स्थापना के 

39
00:02:12,280 --> 00:02:15,080
लिए है। 
और अंत में, जीत धर्म की ही होगी।

40
00:02:15,080 --> 00:02:18,920
बिल्कुल। 
और इन शब्दों का असर तो मतलब जरूर

41
00:02:18,920 --> 00:02:21,360
हुआ होगा। 
एक डूबते हुए इंसान को तिनके का 

42
00:02:21,360 --> 00:02:25,480
नहीं एक जहाज का सहारा मिल गया। 
बिल्कुल श्री कृष्ण के इन शब्दों 

43
00:02:25,480 --> 00:02:30,960
ने जैसे पाण्डव सेना में एक नई 
ऊर्जा भर दी और सेनापति दृष्टुम 

44
00:02:31,560 --> 00:02:35,760
वो तो जैसे दुगनी शक्ति से भर गए।
अच्छा उन्होंने तुरंत एक आक्रामक 

45
00:02:35,760 --> 00:02:39,440
रणनीति बनाई। 
पांडव सेना को एक खास क्यूँ में 

46
00:02:39,440 --> 00:02:42,880
संगठित किया? 
जिसे क्रोंचारुन क्यूँ कहा गया? 

47
00:02:42,880 --> 00:02:46,000
क्रोंचारुन क्यूँ? 
ये नाम सुनने में बहुत शक्तिशाली 

48
00:02:46,000 --> 00:02:48,080
लगता है, ये असल में था क्या? 
मतलब? 

49
00:02:48,080 --> 00:02:51,720
इसकी क्या खासियत थी? 
क्रोंच एक पक्षी होता है तो ये 

50
00:02:51,760 --> 00:02:55,320
क्यूँ उसी पक्षी के आकार का था जो
उड़ान भर रहा हो? 

51
00:02:55,560 --> 00:03:00,280
फ्लाइंग बर्ड फॉर्मेशन हाँ। 
ये एक बेहद आक्रामक फॉर्मेशन है 

52
00:03:00,480 --> 00:03:04,280
जिसका मकसद ही दुश्मन की सेना को 
चीरकर अंदर घुसना होता है। 

53
00:03:04,400 --> 00:03:06,600
तो मतलब अब वो डिफेंसिव नहीं खेल 
रहे थे। 

54
00:03:06,760 --> 00:03:11,640
नहीं, बिलकुल नहीं, और सोचिए इस 
पक्षी की चोंच की नोक पर। 

55
00:03:11,880 --> 00:03:16,000
सबसे खतरनाक जगह पर खुद अर्जुन को
रखा गया था। 

56
00:03:16,440 --> 00:03:21,360
दृष्टद्युम्न और भीम को इस पक्षी 
की आंखें बनाया गया था जो दोनों 

57
00:03:21,360 --> 00:03:25,200
तरफ से हमला कर सके। 
ये व्यूह रचना पांडवों की बदली 

58
00:03:25,200 --> 00:03:29,320
हुई मानसिकता को दिखाती थी। 
अब वो ऑल आउट अटैक के मूड में थे।

59
00:03:29,440 --> 00:03:33,120
मतलब, हर योद्धा को उसकी काबिलियत
के हिसाब से एक स्ट्रैटेजिक 

60
00:03:33,120 --> 00:03:37,000
पोज़ीशन दी गई। 
इसके जवाब में ने क्या तैयारी की?

61
00:03:37,280 --> 00:03:41,160
ज़ाहिर है, भीष्म जैसी अनुभवी नजर
से ये क्यूँ छिपा नहीं होगा? 

62
00:03:41,200 --> 00:03:44,720
बिलकुल नहीं। 
भीष्म ने इस आक्रामक को देखा और 

63
00:03:44,720 --> 00:03:48,400
उन्होंने भी अपनी सेना को एक 
विशाल और मजबूत संरचना में खड़ा 

64
00:03:48,400 --> 00:03:51,880
किया। 
उस के सबसे आगे उसकी रक्षा करते 

65
00:03:51,880 --> 00:03:56,440
हुए खुद पितामह भीष्म खड़े थे। 
उनके पीछे द्रोण, दुर्योधन और 

66
00:03:56,440 --> 00:03:59,600
बाकी महारत थी। 
तो दोनों सेनाएं आमने सामने थी। 

67
00:03:59,800 --> 00:04:04,160
एक तरफ आक्रामक क्रूज पक्षी दूसरी
तरफ एक अभेद्य दीवार। 

68
00:04:04,200 --> 00:04:07,760
हाँ, और फिर शंखनाद और सिंघनाथ 
से। 

69
00:04:07,960 --> 00:04:10,480
पूरा कुरुक्षेत्र का मैदान गूंज 
उठा। 

70
00:04:10,680 --> 00:04:13,040
दूसरे दिन का महायुद्ध शुरू हो 
चुका था। 

71
00:04:13,080 --> 00:04:18,279
ये पोते अर्जुन आमने सामने उफ़ 
मुझे ये सोचकर ही हैरानी होती है 

72
00:04:18,399 --> 00:04:22,200
कि अर्जुन ने अपने प्रिय पितामह 
पर पहला बाण कैसे चलाया होगा? 

73
00:04:22,800 --> 00:04:24,960
उस पल उनके मन में क्या चल रहा 
होगा? 

74
00:04:25,000 --> 00:04:29,080
ये सवाल इस युद्ध का सार है। 
ये सिर्फ शस्त्रों का युद्ध नहीं 

75
00:04:29,080 --> 00:04:33,640
था, ये भावनाओं का संबंधों का 
धर्म का युद्ध था। 

76
00:04:34,200 --> 00:04:36,760
अर्जन और भीष्म का मुकाबला 
अविश्वसनीय था। 

77
00:04:37,200 --> 00:04:41,560
दोनों अपने अपने रथ पर थे और कुछ 
ही पलों में उनके बाणों से आसमान 

78
00:04:41,560 --> 00:04:44,720
ढक गया। 
ऐसा वर्णन आता है कि सूरज की 

79
00:04:44,720 --> 00:04:47,760
रौशनी भी उन बाणों के जाल से छनकर
आ रही थी। 

80
00:04:48,280 --> 00:04:52,200
ये सिर्फ एक लड़ाई नहीं थी। 
ये गुरु और शिष्य के बीच कौशल की 

81
00:04:52,200 --> 00:04:54,840
पराकाष्ठा थी। 
मतलब कोई किसी से कम नहीं। 

82
00:04:54,840 --> 00:04:59,160
कोई किसी से कम नहीं। 
भीष्म जो भी अस्त्र चलाते, अर्जन 

83
00:04:59,160 --> 00:05:02,280
उसे काट देते, अर्जुन जो भी बाण 
चलाते। 

84
00:05:02,400 --> 00:05:04,680
भीष्म उसे हवा में ही नष्ट कर 
देते। 

85
00:05:04,680 --> 00:05:07,920
तो एक तरह का डेडलॉक था। 
कोई किसी पर भारी नहीं पड़ रहा 

86
00:05:07,920 --> 00:05:10,720
था। 
बिल्कुल ये एक सम्मानजनक द्वंद्व 

87
00:05:10,720 --> 00:05:12,960
था। 
दोनों एक दूसरे को मारना नहीं 

88
00:05:12,960 --> 00:05:16,440
चाहते थे, लेकिन दोनों ही अपनी 
अपनी प्रतिज्ञा और कर्तव्य से 

89
00:05:16,440 --> 00:05:19,640
बंधे थे। 
ये युद्ध का सबसे सुंदर और सबसे 

90
00:05:19,640 --> 00:05:21,680
दुखद दृश्य था। 
और जहाँ। 

91
00:05:21,760 --> 00:05:26,040
एक तरफ यह गुरु और शिष्य का 
भावनात्मक युद्ध चल रहा था, वहीं 

92
00:05:26,040 --> 00:05:29,640
युद्ध क्षेत्र में एक और गुरु 
शिष्य की जोड़ी आमने सामने थी 

93
00:05:29,840 --> 00:05:33,920
लेकिन उनके बीच सम्मान नहीं बल्कि
प्रतिशोध की ज्वार जल रही थी। 

94
00:05:34,120 --> 00:05:37,200
मैं बात कर रहा हूँ द्रोणाचार्य 
और दृष्टि। 

95
00:05:37,200 --> 00:05:40,480
सही पकड़ा आपने। 
यह एक पर्सनल बैटल थी। 

96
00:05:40,560 --> 00:05:43,440
एक ऐसी लड़ाई जिसका नतीजा पहले से
तय था। 

97
00:05:43,440 --> 00:05:47,440
क्योंकि दृष्टि धुम का जन्म ही। 
हाँ, उनका जन्म ही यज्ञ की अग्नि 

98
00:05:47,440 --> 00:05:49,800
से द्रोण का वध करने के लिए हुआ 
था। 

99
00:05:50,040 --> 00:05:52,720
ये बात द्रोण भी जानते थे और 
दृष्टि धुम ने भी। 

100
00:05:52,880 --> 00:05:55,760
ऊ बापरे। 
अब आप उस मनोवैज्ञानिक दबाव की 

101
00:05:55,760 --> 00:05:58,920
कल्पना कीजिए। 
द्रोण उस व्यक्ति से लड़ रहे हैं।

102
00:05:58,960 --> 00:06:01,360
जो उनकी मृत्यु का साक्षात रूप 
है। 

103
00:06:01,360 --> 00:06:05,560
ये तो बहुत बड़ा मेन्टल प्रेशर है
मतलब आप अपनी ही मौत से लड़ रहे। 

104
00:06:05,600 --> 00:06:07,600
हैं। 
नियति को पूरा करने के लिए लड़ 

105
00:06:07,600 --> 00:06:11,160
रहा था। 
उसने द्रोण पर इतने तीखे बांड 

106
00:06:11,160 --> 00:06:14,040
चलाए कि द्रोण को भी पीछे हटना 
पड़ा। 

107
00:06:14,280 --> 00:06:18,400
द्रोण ने भी पलट कर वार किया। 
लेकिन उस लड़ाई में एक अजीब सी 

108
00:06:18,400 --> 00:06:22,200
तीव्रता थी जो भीष्म और अर्जुन के
युद्ध में नहीं थी। 

109
00:06:22,200 --> 00:06:25,680
वो पर्सनल हो चुकी थी। 
हाँ, ये युद्ध कौशल से ज्यादा 

110
00:06:25,680 --> 00:06:28,840
नियति का खेल लग रहा था। 
जहाँ ये बड़े बड़े महारथी दूसरे 

111
00:06:28,840 --> 00:06:32,080
से उलझे हुए थे, वहीं। 
भीमसेन क्या कर रहे थे उनका तो 

112
00:06:32,080 --> 00:06:35,160
स्वभावी तूफानी है। 
भीमसेन सचमुच एक तूफान की तरह 

113
00:06:35,160 --> 00:06:39,160
गौरव सेना पर टूट पड़े थे। 
अच्छा उनका सामना हुआ कलिंग और 

114
00:06:39,160 --> 00:06:43,200
निषादों की सेना से, जिसका 
नेतृत्व कलिंग राज़ कर रहे थे। 

115
00:06:43,360 --> 00:06:48,000
भीम ने अपनी गदा उठाई और उस सेना 
में ऐसा हाहाकार मचाया कि भगदड़ 

116
00:06:48,000 --> 00:06:49,160
मच गई। 
मतलब? 

117
00:06:49,400 --> 00:06:52,840
कोई सामने टिक ही नहीं पा रहा था।
कोई नहीं उनका गधायुद्ध इतना 

118
00:06:52,840 --> 00:06:57,760
भयंकर था कि हाथी, घोड़े, रथ, 
सैनिक जो भी सामने आता वो उसे 

119
00:06:57,760 --> 00:07:00,960
उड़ा देते। 
हम हमेशा भीम के क्रोध और बल की 

120
00:07:00,960 --> 00:07:05,680
बात करते हैं, लेकिन क्या ये 
सिर्फ अंधाधुंध गुस्सा था या इसके

121
00:07:05,680 --> 00:07:08,520
पीछे कोई रणनीति भी थी? 
ये बहुत अच्छा सवाल है। 

122
00:07:08,600 --> 00:07:12,760
ये सिर्फ गुस्सा नहीं था। 
ये एक सोंची समझी शॉक एंड और 

123
00:07:12,760 --> 00:07:14,520
टैक्टिक थी। 
अच्छा। 

124
00:07:14,680 --> 00:07:19,280
भीम कौरव सेना के एक खास हिस्से 
को निशाना बना रहे थे ताकि उनकी 

125
00:07:19,320 --> 00:07:22,880
क्यूँ रचना को तोड़ा जा सके। 
उन्होंने कलिंग राज़ के कई 

126
00:07:22,880 --> 00:07:26,600
पुत्रों शकदेव, भानुमान, केतुमान।
सबको मार गिराया। 

127
00:07:26,600 --> 00:07:29,440
हाँ। 
और कई बड़े योद्धाओं को एक एक 

128
00:07:29,440 --> 00:07:32,800
करके मार गिराया। 
देखिये, जब सेना का नेतृत्व ही 

129
00:07:32,800 --> 00:07:34,760
खत्म हो जाता है तो सेना का मनोबल
टूट। 

130
00:07:34,760 --> 00:07:38,120
जाता है। 
भीम सिर्फ मार नहीं रहे थे। 

131
00:07:38,400 --> 00:07:40,680
वो कौरवों के मोराल को तोड़ रहे 
थे। 

132
00:07:40,960 --> 00:07:45,400
वो सचमुच एक वॅन मैन आर्मी की तरह
पूरी बटालियन पर भारी पड़ रहे थे।

133
00:07:45,520 --> 00:07:48,200
मतलब उन्होंने कलिंग सेना को लगभग
खत्म ही कर दिया। 

134
00:07:48,200 --> 00:07:49,920
इसका कौरवों पर क्या असर पड़ा 
होगा? 

135
00:07:49,920 --> 00:07:55,160
बहुत गहरा असर जब बाकी कौरव 
योद्धाओं ने देखा कि भीम अकेले ही

136
00:07:55,160 --> 00:07:59,320
पूरी सेना का संर कर रहे हैं तो 
उनमें भय फैल गया। 

137
00:07:59,360 --> 00:08:02,360
भीष्म को खुद भीम को रोकने के लिए
आना पड़ा। 

138
00:08:02,360 --> 00:08:05,840
इससे पता चलता है कि भीम का 
पराक्रम कितना विनाशकारी था। 

139
00:08:05,840 --> 00:08:09,840
हमने दिग्गजों की बात की। 
भीष्म, अर्जुन, द्रोण, भीम लेकिन 

140
00:08:10,120 --> 00:08:13,080
दूसरा दिन अगली पीढ़ी के उदय का 
भी गवाह बना है। 

141
00:08:13,080 --> 00:08:17,360
ना मेरा मतलब अभिमन्यु से है। 
बिल्कुल अभिमन्यु का पराक्रम 

142
00:08:17,360 --> 00:08:21,720
दूसरे दिन देखने लायक था। 
वो अभी सिर्फ एक किशोर था लेकिन 

143
00:08:21,720 --> 00:08:24,960
उसका युद्ध कौशल किसी भी महारथी 
से कम नहीं था। 

144
00:08:25,000 --> 00:08:28,040
उसने क्या किया? 
उसने गौरव सेना में घुसकर तबाही 

145
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मचा दी। 
उसका सामना दुर्योधन के पुत्र 

146
00:08:30,680 --> 00:08:35,159
लक्ष्मण से हुआ और उसने लक्ष्मण 
को बड़ी आसानी से हरा दिया। 

147
00:08:35,480 --> 00:08:38,120
मतलब दुर्योधन के बेटे को हराया 
ये तो कौरवों के लिए एक बड़ी 

148
00:08:38,120 --> 00:08:40,400
शर्मिंदगी। 
और पांडवों के लिए बहुत बड़े 

149
00:08:40,400 --> 00:08:44,320
मोराल बूस्ट की बात रही होगी। 
यकीनन सोचिए पांडवों को यह देखकर 

150
00:08:44,320 --> 00:08:47,920
कितना गर्व हुआ होगा कि उनकी अगली
पीढ़ी भी इतनी पराक्रमी है? 

151
00:08:48,320 --> 00:08:52,440
अभिमन्यु का पराक्रम ये दिखा रहा 
था कि पांडवों का भविष्य सुरक्षित

152
00:08:52,440 --> 00:08:55,160
है। 
उसने भीष्म, द्रोण और कृपाचार्य 

153
00:08:55,160 --> 00:09:00,320
जैसे महारथियों को भी चुनौती दी। 
उसका साहस और उसकी फुर्ती देखकर 

154
00:09:00,600 --> 00:09:05,600
गौरव सेना में डर बैठ गया था। 
दूसरे दिन अभिमन्यु का प्रदर्शन। 

155
00:09:05,880 --> 00:09:11,160
उस महा पराक्रम की एक झलक थी जो 
वो आगे दिखाने वाला था तो कुल 

156
00:09:11,160 --> 00:09:13,800
मिला के दूसरा दिन बहुत ही भीषण 
रहा। 

157
00:09:13,800 --> 00:09:17,440
हर मोर्चे पर घमासान युद्ध हुआ। 
दिन का अंत कैसे हुआ? 

158
00:09:17,640 --> 00:09:22,080
जैसे जैसे सूरज ढलने लगा, युद्ध 
का शोर भी शांत होने लगा। 

159
00:09:22,400 --> 00:09:25,560
सूर्यास्त के साथ ही युद्ध के 
नियमों के अनुसार। 

160
00:09:25,800 --> 00:09:28,440
दोनों सेनाएं अपने अपने शिविरों 
की ओर लौट। 

161
00:09:28,440 --> 00:09:30,800
गईं और दिन बहुत विनाशकारी रहा 
होगा। 

162
00:09:30,880 --> 00:09:35,400
बहुत हजारों सैनिक मारे गए। 
बड़े बड़े महारत ही एक दूसरे से 

163
00:09:35,400 --> 00:09:38,240
टकराए, लेकिन नतीजा नतीजा कुछ 
नहीं। 

164
00:09:38,240 --> 00:09:41,000
निकला मतलब पलड़ा अभी भी किसी एक 
तरफ झुका नहीं था। 

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00:09:41,000 --> 00:09:44,040
नहीं। 
दूसरा दिन खत्म होने पर ये साफ हो

166
00:09:44,040 --> 00:09:46,640
गया था। 
कि ये युद्ध कुछ दिनों में खत्म 

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00:09:46,640 --> 00:09:50,600
नहीं होगा। 
ये एक लंबी सता देने वाली और 

168
00:09:50,600 --> 00:09:54,720
विनाशकारी लड़ाई होने वाली थी। 
पांडवों ने पहले दिन के मुकाबले 

169
00:09:54,720 --> 00:09:59,520
बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन 
कौरवों की सेना अभी भी बहुत मजबूत

170
00:09:59,520 --> 00:10:02,880
थी और भीष्म जैसा पहाड़ उनके आगे 
खड़ा था। 

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00:10:02,880 --> 00:10:08,120
तो दूसरे दिन की समाप्ति पर। 
ये स्पष्ट था की ये युद्ध भावनाओं

172
00:10:08,120 --> 00:10:10,960
और व्यक्तिगत संबंधों की भी एक 
अग्निपरीक्षा बन चुका था। 

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00:10:10,960 --> 00:10:15,320
बिलकुल और हर बड़ा मुकाबला किसी 
रिश्तेदार, गुरु या शिष्य के बीच 

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00:10:15,320 --> 00:10:15,800
हो रहा। 
था। 

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00:10:15,800 --> 00:10:18,680
बिलकुल। 
और यही सवाल हमें तीसरे दिन की ओर

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00:10:18,680 --> 00:10:21,880
ले जाता है। 
क्या हुआ जब भीष्म दूसरे दिन के 

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प्रदर्शन से असंतुष्ट होकर? 
तीसरे दिन एक नए संकल्प के साथ 

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मैदान में उतरे। 
और ऐसी क्या वजह बनी की श्री 

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00:10:28,200 --> 00:10:32,800
कृष्ण जिन्होंने शस्त्र न उठाने 
की अपनी प्रतिज्ञा ली थी, इतने 

180
00:10:32,800 --> 00:10:36,120
क्रोधित हो गए कि वो अपनी 
प्रतिज्ञा तोड़ने को तैयार हो गए?

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00:10:36,200 --> 00:10:39,080
इन सभी सवालों के जवाबों के साथ 
हम आपसे फिर मिलेंगे। 

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00:10:39,080 --> 00:10:41,440
जल्द ही महाभारत कंप्लीट सागा 
मिले।

