1
00:00:00,040 --> 00:00:06,440
नमस्कार, स्वागत है आपका महाभारत,
दी कंप्लीट सागा सीज़न 3 में आज 

2
00:00:06,440 --> 00:00:10,840
हम भीष्म पर्व की शुरुआत कर रहे 
हैं, लेकिन लड़ाई शुरू होने से 

3
00:00:10,960 --> 00:00:16,040
ठीक पहले कहानी एक ऐसा मोड़ लेती 
है जिसके बारे में कोई सोच भी 

4
00:00:16,040 --> 00:00:19,520
नहीं सकता। 
पिछले सत्र में हमने उद्योग पर्व 

5
00:00:19,520 --> 00:00:24,400
पर बात की थी जहाँ शांति की आखिरी
कोशिशों भी नाकाम हो गई। 

6
00:00:24,400 --> 00:00:28,160
जी हाँ, भगवान कृष्ण का शांति 
प्रस्ताव भी दुर्योधन ने ठुकरा 

7
00:00:28,160 --> 00:00:30,760
दिया था। 
और अब कुरुक्षेत्र के मैदान में 

8
00:00:30,920 --> 00:00:35,840
दोनों तरफ की सेनाएं खड़ी हैं। 
माहौल में एक अजीब सी खामोशी और 

9
00:00:35,840 --> 00:00:37,600
तनाव है। 
युद्ध अब तय है। 

10
00:00:37,680 --> 00:00:43,160
लेकिन हम बात करेंगे जम्मू खंड 
विनिर्माण और भूमि पर्व की मतलब 

11
00:00:43,440 --> 00:00:47,640
युद्ध के मैदान से कहानी सीधे 
पहुँच जाती है दुनिया के नक्शे 

12
00:00:47,640 --> 00:00:50,880
तक। 
बिल्कुल ऐसा लगता है जैसे एक बहुत

13
00:00:50,880 --> 00:00:54,280
बड़े तूफान के आने से ठीक पहले। 
वक्त थम सा गया हो। 

14
00:00:54,280 --> 00:00:58,840
हाँ, और इसी थमे हुए वक्त में 
महर्षि व्यास हमें युद्ध की 

15
00:00:58,840 --> 00:01:02,720
मारकाट दिखाने के बजाय उस मंच को 
दिखाते हैं जीस पर ये सब होने 

16
00:01:02,720 --> 00:01:05,560
वाला है। 
और वो मंच सिर्फ कुरुक्षेत्र की 

17
00:01:05,560 --> 00:01:08,440
जमीन नहीं है। 
नहीं, वो पूरी दुनिया है। 

18
00:01:08,480 --> 00:01:12,320
पूरा ब्रह्मांड है। 
तो चलिए इसी अजीब लेकिन दिलचस्प 

19
00:01:12,320 --> 00:01:15,120
पड़ाव को समझते हैं। 
सेनाएं तैयार है। 

20
00:01:15,160 --> 00:01:20,280
योद्धा अपने अपने रथ पर है, लेकिन
पहला तीर चलने से पहले क्या होता 

21
00:01:20,280 --> 00:01:22,840
है? 
पहला तीर चलने से पहले नियम बनाए 

22
00:01:22,840 --> 00:01:26,240
जाते हैं। 
नियम हाँ, दोनों पक्ष भीष्म और 

23
00:01:26,240 --> 00:01:29,840
पांडव। 
मिलकर युद्ध की एक आचार संहिता एक

24
00:01:29,840 --> 00:01:33,800
कोड ऑफ़ कंडक्ट तैयार करते हैं। 
अच्छा मतलब यह कोई अंधी मार्काट 

25
00:01:33,800 --> 00:01:37,360
नहीं होने वाली थी। 
इसे एक धर्म युद्ध के तौर पर जाना

26
00:01:37,360 --> 00:01:41,000
था जिसके अपने सिद्धांत थे। 
यह जानना तो दिलचस्प है कि 

27
00:01:41,000 --> 00:01:44,480
उन्होंने नियम बनाए। 
लेकिन क्या ये सिर्फ एक औपचारिकता

28
00:01:44,480 --> 00:01:46,800
थी? 
मतलब मतलब क्या उन्हें वाकई लगता 

29
00:01:46,800 --> 00:01:50,920
था कि इतने बड़े पैमाने पर होने 
वाली हिंसा को कुछ नियमों में 

30
00:01:50,920 --> 00:01:53,400
बांधा जा सकता है? 
ये सवाल बहुत गहरा है। 

31
00:01:53,600 --> 00:01:57,040
एक स्तर पर ये उस समय की क्षत्रिय
नैतिकता को दिखाता है। 

32
00:01:57,360 --> 00:02:00,800
नियम बहुत साफ थे, जैसे की बराबरी
का मुकाबला होगा। 

33
00:02:00,920 --> 00:02:04,960
रथी सिर्फ रथी से लड़ेगा। 
हाथी पर सवार योद्धा दूसरे हाथी 

34
00:02:04,960 --> 00:02:08,800
सवार से ठीक है। 
किसी निहत्थे, डरे हुए या मैदान 

35
00:02:08,840 --> 00:02:10,840
छोड़कर भाग रहे सैनिक पर हमला 
नहीं होगा। 

36
00:02:11,440 --> 00:02:15,920
यहाँ तक कि जो लोग लड़ नहीं रहे 
जैसे सारथी या शंख और नगाड़े 

37
00:02:15,920 --> 00:02:18,600
बजाने वाले उन्हें भी नहीं मारा 
जाएगा। 

38
00:02:18,680 --> 00:02:22,440
एक तरह से ये उस समय के 
कन्वेंशन्स जैसे थे। 

39
00:02:22,440 --> 00:02:24,520
हाँ, ये एक अच्छा मॉडर्न पैरेलल 
है। 

40
00:02:24,680 --> 00:02:27,400
कमजोर और गैर लड़कों को सुरक्षा 
देना। 

41
00:02:27,400 --> 00:02:31,080
बिलकुल पर आपके सवाल के दूसरे 
हिस्से पर आएं तो शायद कहीं ना 

42
00:02:31,080 --> 00:02:33,800
कहीं। 
वे जानते थे कि जब नफरत और हिंसा 

43
00:02:34,200 --> 00:02:36,640
चरम पर होगी। 
तो ये नियम टूटेंगे? 

44
00:02:36,640 --> 00:02:38,680
और हम आगे देखेंगे कि ऐसा होता भी
है। 

45
00:02:38,680 --> 00:02:43,440
जी हाँ, पर नियमों को बनाना ही इस
बात का सबूत है कि वे धर्म और 

46
00:02:43,440 --> 00:02:47,800
अधर्म के फर्क को समझते थे। 
वो इस युद्ध को एक जरूरी बुराइ 

47
00:02:47,800 --> 00:02:50,680
मानते थे। 
और ये सब कुछ ये नियम ये 

48
00:02:50,680 --> 00:02:54,040
तैयारियां। 
नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र तक कैसे

49
00:02:54,040 --> 00:02:56,800
पहुँच रही थी? 
वो तो हस्तिनापुर के महल में थे। 

50
00:02:56,800 --> 00:03:00,040
यहीं पर कहानी में महर्षि वेद 
व्यास का प्रवेश होता है। 

51
00:03:00,040 --> 00:03:02,680
अच्छा। 
वो धृतराष्ट्र के पास आते हैं। 

52
00:03:02,800 --> 00:03:06,160
और उन्हें युद्ध देखने के लिए 
दिव्य दृष्टि देने का प्रस्ताव 

53
00:03:06,160 --> 00:03:08,440
रखते। 
हैं, लेकिन धृतराष्ट्र मना कर 

54
00:03:08,440 --> 00:03:10,800
देते हैं। 
मैं बस कल्पना करने की कोशिश कर 

55
00:03:10,800 --> 00:03:14,720
रही हूँ। 
हाँ, एक पिता के तौर पर यह जानते 

56
00:03:14,720 --> 00:03:18,960
हुए कि आपके अपने बच्चे, आपके 
भतीजे सब एक दूसरे को मारने जा 

57
00:03:18,960 --> 00:03:21,600
रहे हैं। 
उस सच को अपनी आँखों से देखने से 

58
00:03:21,600 --> 00:03:24,320
इंकार कर देना। 
ये बहुत ही मानवीय और दुखद है। 

59
00:03:24,440 --> 00:03:28,000
वो कहते हैं कि मैं अपने ही कुल 
का विनाश नहीं देख सकता। 

60
00:03:28,120 --> 00:03:32,920
ये उनकी बेबसी और उनके अपराध बोध 
दोनों को दिखाता है तो व्यास जी 

61
00:03:32,920 --> 00:03:37,040
ये दिव्य दृष्टि उनके साथी और 
मंत्री संजय को प्रदान करते हैं। 

62
00:03:37,080 --> 00:03:38,320
संजय को। 
हाँ। 

63
00:03:38,360 --> 00:03:42,240
संजय को वरदान मिलता है कि वो महल
में बैठे बैठे ही कुरुक्षेत्र में

64
00:03:42,240 --> 00:03:46,440
होने वाली हर घटना को देख और सुन 
सकेंगे चाहे वो दिन में हो या रात

65
00:03:46,440 --> 00:03:50,040
में मन में सोंची गई। 
बात हो या ज़ाहिर में कही गई सब 

66
00:03:50,040 --> 00:03:52,880
कुछ। 
और युद्ध का कोई भी अस्त्र शस्त्र

67
00:03:52,920 --> 00:03:56,440
उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा।
बिल्कुल तो संजय अब एक तरह से 

68
00:03:56,440 --> 00:03:59,400
दुनिया के पहले लाइव वॉर 
कोरेस्पोंडेंट बन गए, जिनके पास 

69
00:03:59,400 --> 00:04:01,560
सुपर ह्यूमन एबिलिटीज थी। 
कह सकते हैं। 

70
00:04:01,680 --> 00:04:05,120
तो उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से
सबसे पहले क्या देखा? 

71
00:04:05,240 --> 00:04:09,280
निश्चय, सेनाओं की विशालता और। 
बड़े बड़े योद्धाओं का जोश देखा 

72
00:04:09,280 --> 00:04:12,040
होगा। 
नहीं, और यही बात इसे और रहस्यमयी

73
00:04:12,040 --> 00:04:13,720
बनाती है। 
तो फिर क्या? 

74
00:04:13,720 --> 00:04:19,360
संजय सबसे पहले धृतराष्ट्र को उन 
अशुभ संकेतों, उन बुरे वूमेंस के 

75
00:04:19,360 --> 00:04:21,720
बारे में बताते हैं जो प्रकृति 
में दिख रहे थे। 

76
00:04:21,720 --> 00:04:24,880
वो। 
बताते हैं कि आकाश से उल्कापिंड 

77
00:04:24,880 --> 00:04:28,360
गिर रहे हैं। 
तेज और धूल भरी हवाएं चल रही हैं,

78
00:04:28,400 --> 00:04:31,280
जिनमें पत्थर बरस रहे। 
हैं और जानवर भी अजीब व्यवहार कर 

79
00:04:31,280 --> 00:04:34,320
रहे होंगे। 
हाँ, जैसे सिया रो रहे हों और 

80
00:04:34,320 --> 00:04:37,920
घोड़े आंसू बहा रहे। 
हों तो ये सिर्फ एक मौसम की 

81
00:04:37,920 --> 00:04:41,320
रिपोर्ट नहीं है। 
ये एक तरह से प्रकृति का कॉसमोस 

82
00:04:41,320 --> 00:04:44,600
का फैसला है। 
एकदम सही जो पहली तलवार चलने से 

83
00:04:44,600 --> 00:04:47,680
पहले ही सुनाया जा रहा है। 
व्यास जी खुद धृतराष्ट्र को इन 

84
00:04:47,680 --> 00:04:50,160
संकेतों का मतलब समझाते हैं। 
क्या कहते हैं वो? 

85
00:04:50,200 --> 00:04:53,680
वो कहते हैं कि ये सारे संकेत बता
रहे हैं कि इस युद्ध में भयंकर 

86
00:04:53,680 --> 00:04:58,200
विनाश होगा और ये गौरवों के पतन। 
और पांडवों की विजय का सूचक। 

87
00:04:58,200 --> 00:05:00,160
है। 
इसे सुनकर तो धृतराष्ट्र की चिंता

88
00:05:00,160 --> 00:05:03,040
और बढ़ गई होगी। 
ज़ाहिर है कोई भी राजा ऐसे अशुभ 

89
00:05:03,040 --> 00:05:06,840
संकेत सुनकर अपनी सेना की ताकत 
उनकी रणनीति के बारे में जानना 

90
00:05:06,840 --> 00:05:08,720
चाहेगा। 
लेकिन धृतराष्ट्र ऐसा नहीं करते। 

91
00:05:08,720 --> 00:05:12,800
हैं नहीं करते हैं। 
वो उस भयानक सच से जो सामने खड़ा 

92
00:05:12,840 --> 00:05:15,920
है उससे बचने की कोशिश करते हैं 
और घबराहट में। 

93
00:05:16,200 --> 00:05:19,120
वो संजय से एक बहुत ही अजीब सवाल 
पूछते। 

94
00:05:19,120 --> 00:05:22,800
हैं, सेना के बारे में नहीं। 
नहीं वो इस भूमि के बारे में 

95
00:05:22,800 --> 00:05:28,160
पूछते हैं वो कहते हैं, संजय मुझे
इस पृथ्वी के बारे में बताओ, इसका

96
00:05:28,160 --> 00:05:31,560
आकार कैसा है? 
इस पर कौन सी द्वीप, पर्वत, 

97
00:05:31,640 --> 00:05:35,080
नदियां और देश हैं? 
ये बहुत अजीब लगता है। 

98
00:05:35,160 --> 00:05:38,800
विनाश के इतने करीब होकर कोई 
दुनिया का नक्शा क्यों जानना 

99
00:05:38,800 --> 00:05:41,480
चाहेगा? 
ये उनका मन भटकाने का एक तरीका 

100
00:05:41,480 --> 00:05:44,080
था। 
या फिर व्यास हमें ये दिखाना 

101
00:05:44,080 --> 00:05:49,000
चाहते हैं कि जीस भूमि के लिए ये 
युद्ध लड़ा जा रहा है वो सिर्फ एक

102
00:05:49,000 --> 00:05:51,800
राज्य नहीं। 
बल्कि एक पूरी दुनिया है। 

103
00:05:51,800 --> 00:05:55,000
आपने बिल्कुल सही नब्ज़ पकड़ी है 
ये दोनों ही। 

104
00:05:55,000 --> 00:05:56,040
है। 
अच्छा। 

105
00:05:56,040 --> 00:06:00,160
एक तरफ ये धृतराष्ट्र का 
स्केपिज्म है लेकिन दूसरी ओर 

106
00:06:00,480 --> 00:06:05,160
ज्यादा गहरी बात ये है की महर्षि 
व्यास यहाँ कहानी के स्केल को। 

107
00:06:05,400 --> 00:06:08,160
उसके पैमाने को अचानक बहुत बड़ा 
कर देते हैं। 

108
00:06:08,160 --> 00:06:12,320
वो हमें याद दिला रहे हैं कि इस 
लड़ाई का असर उस पूरी भूमि पर 

109
00:06:12,320 --> 00:06:15,440
पड़ेगा जिसका वर्णन संजय अब करने 
वाले हैं। 

110
00:06:15,440 --> 00:06:18,680
बिल्कुल जैसे आज की बड़ी फैंटसी 
कहानियों में होता है। 

111
00:06:18,680 --> 00:06:21,480
हाँ। 
जैसे लॉर्ड ऑफ दी रिंग्स या गेम 

112
00:06:21,480 --> 00:06:24,600
ऑफ थ्रोन्स में जहाँ कहानी शुरू 
होने से पहले। 

113
00:06:24,680 --> 00:06:27,800
हमें दुनिया का एक विस्तृत नक्शा 
दिखाया जाता है। 

114
00:06:27,840 --> 00:06:33,000
बिल्कुल ये वही तकनीक है तो संजय 
धृतराष्ट्र के सवाल का जवाब देना 

115
00:06:33,000 --> 00:06:35,200
शुरू करते हैं। 
कहाँ से शुरू करते हैं? 

116
00:06:35,360 --> 00:06:39,400
वो सृष्टि के मूल तत्वों 
पंचमहाभूतों से बात शुरू करते हैं

117
00:06:39,560 --> 00:06:45,680
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश।
फिर वो बताते हैं कि इस पृथ्वी पर

118
00:06:45,760 --> 00:06:49,880
सात द्वीप हैं। 
और उनमें से एक है जंबुद्वीप। 

119
00:06:49,960 --> 00:06:55,600
जी जिसका आकार एक पहिए की तरह गोल
है और इसके केंद्र में है सोने का

120
00:06:55,600 --> 00:06:59,400
बना मेरु पर्वत जो 84,000 योजन 
ऊँचा है। 

121
00:06:59,400 --> 00:07:03,120
दुनिया की धुरी अक्सेस मुंडी। 
कह सकते हैं। 

122
00:07:03,240 --> 00:07:07,440
संजय बताते हैं कि इस मेरु पर्वत 
के चारों ओर अलग अलग वर्ष या 

123
00:07:07,480 --> 00:07:11,680
क्षेत्र हैं जैसे उत्तर में उत्तर
गुरु और दक्षिण में भारतवर्ष। 

124
00:07:12,080 --> 00:07:16,360
तो यहाँ हमारा भारतवर्ष आता है। 
संजय इसका वर्णन कैसे करते हैं? 

125
00:07:16,400 --> 00:07:20,840
वो कहते हैं कि भारतवर्ष का आकार 
एक धनुष जैसा है फिर वो भारतवर्ष 

126
00:07:20,840 --> 00:07:23,000
के साथ मुख्य पर्वतों के नाम 
गिनाते हैं। 

127
00:07:23,080 --> 00:07:28,960
महेंद्र मलाई, सहायक शक्तिमान 
विंध्य और पारिपात्र ये सिर्फ 

128
00:07:28,960 --> 00:07:32,560
पहाड़ों के नाम नहीं है। 
ये उस भूमि की भौगोलिक पहचान को 

129
00:07:32,560 --> 00:07:34,560
स्थापित कर रहा है। 
और नदियां? 

130
00:07:34,880 --> 00:07:37,040
भारत तो हमेशा से नदियों का देश 
रहा है। 

131
00:07:37,040 --> 00:07:40,640
हाँ, और संजय नदियों की एक बहुत 
लंबी सूची देते हैं। 

132
00:07:40,720 --> 00:07:44,960
गंगा, सिंधु, सरस्वती जैसी 
महानदियो से लेकर गोदावरी, 

133
00:07:44,960 --> 00:07:49,560
नर्मदा, यमुना, कावेरी। 
कृष्णा ईरावती विस्थता। 

134
00:07:49,560 --> 00:07:53,960
अनगिनत नदियों का जिक्र करते हैं।
हर नदी उस समय एक सभ्यता की लाइफ 

135
00:07:53,960 --> 00:07:55,720
लाइन थी। 
और फिर जनपद। 

136
00:07:55,760 --> 00:07:59,080
हाँ, उस समय के राज्यों और कबीलों
के नाम गिनाते हैं। 

137
00:07:59,240 --> 00:08:04,320
गुरु पांचाल मत्स्य, मगध, कलिंग 
अंग, बंग और दक्षिण में द्रविड़ 

138
00:08:04,320 --> 00:08:07,200
प्रदेश। 
तो ये सिर्फ एक फिजिकल मैप नहीं 

139
00:08:07,200 --> 00:08:10,040
है। 
ये एक तरह से उस समय के पूरे भारत

140
00:08:10,040 --> 00:08:14,280
का कल्चरल और पोलिटिकल मैप है। 
बिल्कुल संजय ये बता रहे हैं कि 

141
00:08:14,280 --> 00:08:16,600
राजन। 
आप जीस युद्ध को लड़ने जा रहे 

142
00:08:16,600 --> 00:08:18,840
हैं? 
उसमें इन सभी का भविष्य दाव पर 

143
00:08:18,840 --> 00:08:21,160
लगा है। 
ये वर्णन युद्ध के दावों को 

144
00:08:21,160 --> 00:08:25,960
पर्सनल से यूनिवर्सल बना देता है।
सही कहा, ये बताता है कि इस युद्ध

145
00:08:25,960 --> 00:08:29,880
का परिणाम सिर्फ कौरवों या 
पांडवों को नहीं बल्कि भारतवर्ष 

146
00:08:29,880 --> 00:08:33,440
के हर एक वासी को प्रभावित करेगा।
तो संजय ने सिर्फ स्पेस यानी 

147
00:08:33,440 --> 00:08:37,960
भूगोल का ही वर्णन नहीं किया। 
नहीं क्या महाभारत टाइम यानी समय 

148
00:08:37,960 --> 00:08:41,960
की भी कोई भूमिका दिखाता है? 
बहुत अच्छा सवाल भूगोल का वर्णन 

149
00:08:41,960 --> 00:08:44,920
करने के बाद संजय समय की अवधारणा 
पर आते हैं। 

150
00:08:45,400 --> 00:08:48,040
वो धृतराष्ट्र को युगों के चक्कर 
के बारे में बताते हैं। 

151
00:08:48,080 --> 00:08:51,320
चार युग, हाँ। 
कृत जिसे सतयुग भी कहते हैं। 

152
00:08:51,400 --> 00:08:54,080
फिर त्रेता, द्वापर, और अंत में 
कलयुग। 

153
00:08:54,280 --> 00:08:56,680
और इन युगों में मूल अंतर क्या 
है? 

154
00:08:56,680 --> 00:09:01,680
नैतिकता और धर्म का संजय बताते 
हैं कि कैसे हर युग में धर्म 

155
00:09:01,960 --> 00:09:04,760
मनुष्यों की उम्र और उनके गुणों 
में गिरावट आती है। 

156
00:09:04,840 --> 00:09:07,480
सतयुग में धर्म 100% स्थापित होता
है। 

157
00:09:07,520 --> 00:09:10,080
बिलकुल। 
फिर त्रेता में एक चौथाई कम हो 

158
00:09:10,080 --> 00:09:13,720
जाता है जी द्वापर में आधा धर्म 
और आधा अधर्म होता है। 

159
00:09:13,720 --> 00:09:18,200
ये वही युग है जिसमें महाभारत की 
कहानी हो रही है जी और कलयुग में 

160
00:09:18,480 --> 00:09:22,200
धर्म का सिर्फ एक चौथाई हिस्सा 
बचता है और अधर्म हावी हो जाता 

161
00:09:22,200 --> 00:09:24,640
है। 
मनुष्यों की आयु बहुत कम हो जाती 

162
00:09:24,640 --> 00:09:27,000
है। 
ये एक तरह से समाज के उत्थान और 

163
00:09:27,000 --> 00:09:30,440
पतन का सिद्धांत है। 
लेकिन इसमें एक सिकलिकल क्यूँ भी 

164
00:09:30,440 --> 00:09:31,080
है? 
है ना? 

165
00:09:31,120 --> 00:09:35,120
हाँ, और यही इसकी खूबसूरती है। 
ये एक सीधी रेखा में पतन नहीं है।

166
00:09:35,120 --> 00:09:37,200
कलयुग के बाद फिर से सतयुग आता 
है। 

167
00:09:37,240 --> 00:09:39,760
जी हाँ, समय एक चक्र में घूमता 
है। 

168
00:09:39,800 --> 00:09:43,760
ये बताकर व्यास जी ये भी संकेत दे
रहे हैं कि ये युद्ध जो द्वापर के

169
00:09:43,760 --> 00:09:46,960
अंत में हो रहा है। 
ये एक युग के अंत और कलयुग की 

170
00:09:46,960 --> 00:09:49,680
शुरुआत का प्रतीक है। 
तो व्यास जी हमें सिर्फ ये नहीं 

171
00:09:49,680 --> 00:09:54,280
बता रहे कि युद्ध कहाँ हो रहा है 
बल्कि ये भी बता रहे हैं कि ये कब

172
00:09:54,280 --> 00:09:56,400
हो रहा है? 
एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ पर। 

173
00:09:56,400 --> 00:09:59,240
क्या ये ब्रह्मांड का वर्णन यहीं 
खत्म हो जाता है? 

174
00:09:59,240 --> 00:10:01,640
नहीं। 
संजय इसे और भी बड़ा करते हैं। 

175
00:10:01,800 --> 00:10:04,920
वह जम्मू द्वीप के अलावा दूसरे 
द्वीपों का भी वर्णन करते हैं 

176
00:10:05,120 --> 00:10:08,360
जैसे शाक, कुश, क्रोंच। 
और पुष्कर द्वीप। 

177
00:10:08,400 --> 00:10:12,760
हाँ, जो अलग अलग तरह के सागरों से
घिरे हैं और अंत में वो उस समय की

178
00:10:12,760 --> 00:10:16,600
खगोलिया समझ के हिसाब से सूर्य, 
चंद्रमा और राहु ग्रह के आकार के 

179
00:10:16,600 --> 00:10:19,160
बारे में भी बताते हैं। 
ये तो कमाल है। 

180
00:10:19,200 --> 00:10:23,000
ऐसा लगता है जैसे कैमरा पहले 
कुरुक्षेत्र के मैदान पर फोकस था।

181
00:10:23,000 --> 00:10:27,840
हाँ, फिर वो ज़ूम आउट करके पूरे 
भारतवर्ष को दिखाता है, फिर पूरी 

182
00:10:27,840 --> 00:10:30,280
पृथ्वी को और फिर पूरे ब्राह्मण 
को। 

183
00:10:30,560 --> 00:10:35,480
एक कॉस्मिक डॉली शॉट की तरह ये 
सबसे बेहतरीन एनालॉजी है। 

184
00:10:35,480 --> 00:10:38,240
व्यास जी युद्ध शुरू करने से 
पहले। 

185
00:10:38,480 --> 00:10:40,560
हमें ब्रह्मांड में हमारी जगह 
दिखा रहे हैं। 

186
00:10:40,560 --> 00:10:45,480
तो पहले हथियार के टकराने से भी 
पहले हमें दुनिया, उसके लोग, समय 

187
00:10:45,480 --> 00:10:48,520
की अवधारणा, सबकी पूरी तस्वीर 
मिलती है। 

188
00:10:48,680 --> 00:10:50,000
इसका सार क्या? 
है। 

189
00:10:50,000 --> 00:10:53,640
इसका सार ये है कि महाभारत सिर्फ 
एक पारिवारिक कला है या जमीन की 

190
00:10:53,640 --> 00:10:56,800
लड़ाई नहीं है। 
ये धर्म की स्थापना का संघर्ष है।

191
00:10:56,840 --> 00:10:59,800
और धर्म किसी एक कोल या राज्य तक 
सीमित नहीं होता। 

192
00:10:59,800 --> 00:11:04,320
बिल्कुल उसका प्रभाव पूरे 
भारतवर्ष पर, पूरे युग पर और पूरी

193
00:11:04,320 --> 00:11:07,520
मानवता पर पड़ता है। 
ये वर्णन हमें उस महाविनाश की 

194
00:11:07,520 --> 00:11:10,400
भयावहता के लिए मानसिक रूप से 
तैयार करता है। 

195
00:11:10,400 --> 00:11:14,160
ये सोचने वाली बात है। 
कि ये घटना कैसे पूरी दुनिया और 

196
00:11:14,200 --> 00:11:19,120
आने वाले समय का भविष्य तय कर 
सकती है तो मंच तैयार है, नक्शा 

197
00:11:19,120 --> 00:11:21,440
बेच चुका है। 
अब आगे क्या होता है? 

198
00:11:21,480 --> 00:11:26,720
अब शंख बजने ही वाले हैं। 
सेनाएं आमने सामने हैं लेकिन तभी 

199
00:11:26,800 --> 00:11:31,520
पांडव सेना का सबसे बड़ा योद्धा 
अर्जुन अपने सारथि कृष्ण से। 

200
00:11:31,680 --> 00:11:34,920
रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले
जाने को कहता है। 

201
00:11:34,920 --> 00:11:39,600
अच्छा, जब वो उस पार अपने दादा 
भीष्म अपने गुरु द्रोणाचार्य और 

202
00:11:39,600 --> 00:11:43,600
अपने ही भाइयों को खड़ा देखता है 
तो उसकी हिम्मत जवाब दे जाती है 

203
00:11:43,600 --> 00:11:48,840
क्या हाँ उसका शरीर कांपने लगता 
है, मुँह सूख जाता है और हाथ से 

204
00:11:48,840 --> 00:11:52,440
उसका महान धनुष। 
फिसल कर नीचे गिर जाता है। 

205
00:11:52,560 --> 00:11:57,920
1 मिनट मतलब युद्ध शुरू होने से 
ठीक पहले पांडवों का सबसे बड़ा 

206
00:11:57,920 --> 00:12:01,880
योद्धा हथियार डाल देता है। 
जी ये तो पूरी रणनीति को ही खत्म 

207
00:12:01,880 --> 00:12:05,120
कर देने वाली बात है। 
बिल्कुल अर्जुन युद्ध करने से 

208
00:12:05,120 --> 00:12:09,800
इनकार कर देता है और तब उस हताश 
अर्जुन को उसके सार थी। 

209
00:12:09,960 --> 00:12:14,520
भगवान कृष्ण एक ऐसा उपदेश देते 
हैं जो न सिर्फ अर्जुन के भ्रम को

210
00:12:14,520 --> 00:12:17,080
दूर करता है। 
बल्कि आने वाली हजारों पीढ़ियों 

211
00:12:17,080 --> 00:12:21,240
के लिए दर्शन और आध्यात्मिकता का 
सबसे बड़ा ग्रंथ बन जाता है। 

212
00:12:21,280 --> 00:12:25,960
और वो है श्रीमद् भगवद् गीता। 
जी हाँ, अपने अगले सत्र में हम 

213
00:12:25,960 --> 00:12:29,640
श्रीमद् भगवद् गीता पर्व के गहरे 
दर्शन में उतरेंगे। 

214
00:12:29,840 --> 00:12:34,400
हम मुक्ति के मार्ग अर्जुन के 
देखे हुए विराट रूप और तीन गुणों 

215
00:12:34,680 --> 00:12:39,640
सत्व, रजस और तमस के माध्यम से 
वास्तविकता के स्वरूप को समझने की

216
00:12:39,640 --> 00:12:41,880
कोशिश करेंगे। 
हम आपसे फिर मिलेंगे। 

217
00:12:41,880 --> 00:12:44,360
जल्दी महाभारत दी कंप्लीट सागा 
में।

