1
00:00:00,480 --> 00:00:03,720
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:34,200 --> 00:00:37,240
अगर मैं आपसे कहूं कि अगर 
विश्वामित्र नहीं होते तो न 

3
00:00:37,240 --> 00:00:41,920
रामायण होता, ना ही महाभारत तो 
शायद ऐसा लगेगा कि मैं स्टोरीज़ 

4
00:00:41,920 --> 00:00:45,840
को मिक्स कर रहा हूँ। 
या कोई मन घडंत बात कर रहा हूँ 

5
00:00:46,840 --> 00:00:50,800
लेकिन ये सच है। 
हमारे ये दोनों इतिहास घटने के 

6
00:00:50,800 --> 00:00:56,640
लिए विश्वामित्र सेंट्रल है 
इनर्गुएब्ली हमने अपनी कहानियों 

7
00:00:56,640 --> 00:00:59,360
की शुरुआत इसी कारण ऋषि 
विश्वामित्र से की थी। 

8
00:01:00,440 --> 00:01:03,040
एक चक्रवर्ती जग जीतने वाले राजा 
कौशिक। 

9
00:01:03,880 --> 00:01:07,400
गायत्री मंत्र रचने वाले राम को 
योद्धाराम बनाने वाले ऋषि 

10
00:01:07,400 --> 00:01:11,200
विश्वामित्र कैसे बने ये हमने 
हमारी पहली कहानी में सुना है। 

11
00:01:12,320 --> 00:01:16,480
उसी कहानी में हमने ये भी सुना था
कि राजा कौशिक ऋषि वशिष्ठ को 

12
00:01:16,480 --> 00:01:19,560
हराने तपस्या करने के लिए हिमालय 
में कहीं चले गए थे। 

13
00:01:20,760 --> 00:01:23,360
और वहाँ उनकी तपस्या भंग करने 
पहुंची थी। 

14
00:01:23,360 --> 00:01:29,440
इंद्र ने भेजी हुई एक अप्सरा, 
मेनका राजा, कौशिक फेल इन लव और 

15
00:01:29,440 --> 00:01:34,000
मेनका और वो साथ रहने लगे। 
कुछ साल बीत गए और कौशिक प्यार 

16
00:01:34,000 --> 00:01:39,400
में मग्न होकर तपस्या भूल गए। 
ये भूल गए कि वो अपना राज्य 

17
00:01:39,400 --> 00:01:41,880
छोड़कर इतनी दूर हिमालय में क्यों
आए थे? 

18
00:01:43,240 --> 00:01:47,880
फिर 1 दिन जब अचानक नींद खुली और 
रियलाइजेशन आया के सुख में उनका 

19
00:01:47,880 --> 00:01:52,880
लक्ष्य पीछे छूट गया है तो पल भर 
में मेनका को अपना धैर्य बताकर 

20
00:01:52,880 --> 00:01:57,400
छोड़कर चले गए। 
राजा कौशिक से ऋषि विश्वामित्र 

21
00:01:57,400 --> 00:02:04,160
बनने पर जब तक ये दिन आया था तब 
तक कौशिक पिता बन चूके थे। 

22
00:02:04,880 --> 00:02:07,360
उनको और मेनका को एक बेटी हो चुकी
थी। 

23
00:02:08,960 --> 00:02:13,280
जब कौशिक ही निकल गए तो इंद्र ने 
मेनका को वापस बुला लिया। 

24
00:02:13,400 --> 00:02:16,640
स्वर्ग के अप्सराओ के लिए पृथ्वी 
पर बच्चे बड़े करने की जिम्मेदारी

25
00:02:16,640 --> 00:02:20,440
कभी थी ही नहीं। 
इंद्र का बुलावा आने पर मालिनी 

26
00:02:20,440 --> 00:02:24,400
नदी के किनारे एक आश्रम के पास 
मेनका भी उस बेटी को छोड़कर चली 

27
00:02:24,400 --> 00:02:28,240
गई। 
जब भी नसीब बिना किसी दोष के किसी

28
00:02:28,240 --> 00:02:32,840
को कठिनाइयों में ढकेल देता है तब
तब वो कठिनाइयां इतिहास बनाती है।

29
00:02:34,240 --> 00:02:39,680
उस बच्चे की कोई भी गलती ना होने 
के बावजूद भी एक छोटे से समय में 

30
00:02:39,680 --> 00:02:46,120
उसे दो बार त्याग आ गया था। 
पहली बार उसे उसके पिता ने त्याग 

31
00:02:46,880 --> 00:02:52,000
और फिर माता ने जितनी बड़ी कठिनाई
उतना बड़ा इतिहास। 

32
00:02:53,240 --> 00:03:00,080
इसी बेटी ने रचा भविष्य भारत का 
आज की कहानी विश्वामित्र और मेनका

33
00:03:00,080 --> 00:03:07,560
के इस बेटी की रामायण और महाभारत 
के कनेक्शन की जीस आश्रम के पास 

34
00:03:07,560 --> 00:03:11,200
मेनका ने उस बच्ची को छोड़ा था। 
वह आश्रम था ऋषि कंव का। 

35
00:03:12,600 --> 00:03:16,400
वो जब अपने आश्रम लौटे तो उन्हें 
कहीं दूर से किसी एक बच्चे के 

36
00:03:16,400 --> 00:03:21,320
रोने की आवाज सुनाई दी। 
जब वो उस आवाज तक पहुंचे तो देखा 

37
00:03:21,320 --> 00:03:24,080
एक ट्रैजिक और बहुत ही अद्भुत 
दृश्य। 

38
00:03:25,280 --> 00:03:30,080
नदी के किनारे कुछ शाकुन्त पक्षी 
एक छोटी सी बच्ची को घेरे हुए थे।

39
00:03:31,320 --> 00:03:34,840
ऐसे जैसे उस घने जंगल में वो उस 
बच्ची की सुरक्षा कर रहे हो। 

40
00:03:36,680 --> 00:03:40,160
कन्व समझ गए थे कि ये बच्ची किसी 
माता पिता ने त्यागी हुई है। 

41
00:03:41,800 --> 00:03:46,480
वो उस बच्ची को आश्रम ले आए और 
निर्णय लिया कि वे उसे अपनी बेटी 

42
00:03:46,480 --> 00:03:49,920
की तरह बढ़ाएंगे। 
और क्योंकि वह बच्ची शाकुंत 

43
00:03:49,920 --> 00:03:53,000
पक्षियों के बीच मिली थी, उसका 
नाम रखा गया। 

44
00:03:53,000 --> 00:03:56,760
शकुंतला कन्वे ने शकुंतला को 
वेदों की शिक्षा दी। 

45
00:03:57,560 --> 00:04:01,680
उस आश्रम में वह किसी राजपुत्री 
की तरह नहीं बल्कि कृषि कुमारी की

46
00:04:01,680 --> 00:04:05,680
तरह बढ़ने लगी। 
उसके आसपास का वातावरण गुरुकुल का

47
00:04:05,680 --> 00:04:09,320
था। 
कणव नहीं जानते होंगे कि ये बच्ची

48
00:04:09,320 --> 00:04:11,560
भारत के इतिहास का इतना बड़ा 
हिस्सा बनेगी। 

49
00:04:12,320 --> 00:04:15,480
उसकी कहानी हजारों वर्षों तक सुनी
और सुनाई जाएगी। 

50
00:04:15,760 --> 00:04:20,519
शकुंतला विश्वामित्र मीनका ये 
रामायण के किरदारों को महाभारत से

51
00:04:20,519 --> 00:04:24,600
जोड़ने वाला था राजा ययादि का 
वंशज दुष्ण। 

52
00:04:26,080 --> 00:04:30,600
अगर आपको हमारे चंद्रवंशी राजा 
यती की कहानी याद हो तो यती राजा 

53
00:04:30,600 --> 00:04:33,440
अपने पांच पुत्रों से यूथ 
एक्स्चेंज की मांग करते हैं। 

54
00:04:34,560 --> 00:04:38,360
उनके चार बेटे मना कर देते हैं और
ययाती उन्हें अपने मेन साम्राज्य 

55
00:04:38,360 --> 00:04:43,280
से हटा देते हैं। 
जो सबसे छोटा बेटा होता है वो मान

56
00:04:43,280 --> 00:04:47,600
जाता है और ययाती। 
अपना पूरा साम्राज्य उसे सौंप 

57
00:04:47,600 --> 00:04:51,520
देते हैं। 
इसी पुरु के वंश में जन्मे राजा 

58
00:04:51,520 --> 00:04:57,120
दुष्यंत उसी ययाति और पुरु के 
साम्राज्य के राजा दुष्यंत अपने 

59
00:04:57,120 --> 00:05:02,440
एंसेस्टर्स की ही तरह वास् एन एबल
किंग एंड ए वारियर पर जैसे हमने 

60
00:05:02,440 --> 00:05:05,680
सुना है। 
हर किसी की स्टोरी में एक मोमेंट 

61
00:05:05,680 --> 00:05:11,120
आता है जब सब बदल जाता है। 
दुष्यंत के जीवन में वो दिन आया 

62
00:05:11,120 --> 00:05:15,840
जब 1 दिन अपनी पूरी आर्मी के साथ 
वो शिकार पे निकले। 

63
00:05:16,840 --> 00:05:21,120
शिकार करते करते घने जंगलों से 
गुजरते गुजरते वो पहुंचे ऋषि कन्व

64
00:05:21,120 --> 00:05:25,360
के आश्रम के पास। 
यहाँ आते आते उन्होंने जंगल का 

65
00:05:25,360 --> 00:05:29,840
रूप बदलते देखा था। 
जैसे जैसे आश्रम के पास आते गए 

66
00:05:30,280 --> 00:05:33,400
वैसे वैसे सब शान पीसफुल सा लगने 
लगा। 

67
00:05:34,560 --> 00:05:38,800
जो धूल, उनकी आर्मी के घोड़े और 
हाथी उड़ा रहे थे, वो यहाँ तक आते

68
00:05:38,800 --> 00:05:44,760
आते अब शांत हो गई थीं। 
अपनी आर्मी को पीछे छोड़कर एन 

69
00:05:44,760 --> 00:05:51,160
इंट्री दुष्यंत वेन्ट इंटू दी 
आश्रम उस आश्रम के पेड़ फलों से 

70
00:05:51,160 --> 00:05:55,480
भरे हुए थे। 
हर तरफ मंत्र पढ़े जा रहे थे। 

71
00:05:56,920 --> 00:05:59,600
ऋषि कन्व के शिष्य यज्ञ में मग्न 
थे। 

72
00:06:00,800 --> 00:06:06,640
दुष्यंत इस पवित्र से वातावरण में
कहीं गुम से हो गए और जैसे उन्हें

73
00:06:06,640 --> 00:06:10,600
कन्व के शिष्य दिखे। 
वो फलों से भरे हुए पेड़ दिखे, 

74
00:06:11,240 --> 00:06:17,880
अग्नि से भरे यज्ञ कुंड दिखे, 
वैसे ही दिखी शकुंतला और फिर शायद

75
00:06:18,040 --> 00:06:22,560
कुछ नहीं। 
शकुंतला को देखकर दुष्यंत को लव 

76
00:06:22,560 --> 00:06:25,840
ऐट फर्स्ट साइट नहीं हुआ बल्कि 
आश्चर्य हुआ। 

77
00:06:26,840 --> 00:06:29,520
वो दिखने में बहुत ही सुंदर और 
तेज में थी। 

78
00:06:30,600 --> 00:06:33,840
उसे देखकर वो कोई आश्रमकुमारी या 
ऋषिकुमारी नहीं लग रही थी। 

79
00:06:34,600 --> 00:06:37,200
किसी रॉयल लिनेयज की राजकन्या लग 
रही थी। 

80
00:06:39,760 --> 00:06:42,960
दुष्यंत उसके पास गए और उसी 
आश्चर्य में उससे पूछा कि वो कौन 

81
00:06:42,960 --> 00:06:44,440
है? 
इसकी बेटी है। 

82
00:06:45,160 --> 00:06:49,160
शकुंतला ने अपने बारे में जो था 
वो बड़ी सरलता से बताया कि वह 

83
00:06:49,160 --> 00:06:52,960
विश्वामित्र और मेनका की बेटी है,
जिसे ऋषिकंद ने अपनी पुत्री की 

84
00:06:52,960 --> 00:06:57,840
तरह इसी आश्रम में बढ़ाया है। 
ये उत्तर सुनकर राजा का इंट्रेस्ट

85
00:06:57,840 --> 00:07:01,360
और बढ़ा। 
ये दोनों में बातचीत जारी रही। 

86
00:07:02,880 --> 00:07:07,600
शकुंतला ने ये भी बताया कि उनका 
नाम शकुंतला कैसे रखा गया, उनकी 

87
00:07:07,600 --> 00:07:11,600
बातें खत्म होते होते। 
दुष्यंत राजा समझ गए कि ये कोई 

88
00:07:11,600 --> 00:07:16,120
साधारण लड़की नहीं, एक रॉयल 
प्रिंसेस है और वो भी ऋषि 

89
00:07:16,120 --> 00:07:21,160
विश्वामित्र जैसे लेजेंड की। 
मेनका जैसी अप्सराखी उन्होंने 

90
00:07:21,160 --> 00:07:23,520
शकुंतला से प्रभावित होकर विवाह 
की मांग की। 

91
00:07:24,840 --> 00:07:28,440
इस वक्त ऋषिकन व आश्रम में नहीं 
थे और कुछ दिनों तक आने वाले नहीं

92
00:07:28,440 --> 00:07:32,440
थे। 
राजा दुष्यंत ने शकुंतला के सामने

93
00:07:32,440 --> 00:07:36,640
गंधर्व विवाह का प्रस्ताव रखा। 
हमारे टेक्स्ट में आठ तरह के 

94
00:07:36,640 --> 00:07:39,760
विवाह हैं। 
उसमें से जो सिर्फ दो लोगों के 

95
00:07:39,760 --> 00:07:41,840
म्यूच्यूअल कंसेंट और अट्रैक्शन 
पर बेस्ड है। 

96
00:07:41,840 --> 00:07:45,120
दट। 
इस गंधर्व विवाह शकुंतला को भी 

97
00:07:45,120 --> 00:07:49,280
दुष्यंत पसंद आ गए थे। 
बट शी डीड नॉट लेट अट्रैक्शन 

98
00:07:49,280 --> 00:07:54,320
क्लाउड हर जजमेंट शकुंतला ने मांग
रखी कि वो विवाह का प्रस्ताव तब 

99
00:07:54,320 --> 00:07:56,680
स्वीकार करेगी, जब दुष्यंत वचन 
दे। 

100
00:07:57,240 --> 00:08:00,600
इन दोनों का बेटा ही राजा दुष्यंत
का राज़ संभालेगा। 

101
00:08:01,800 --> 00:08:07,920
उनका असली उत्तराधिकारी होगा। 
दुष्यंत ने ये कंडीशन हँसी खुशी 

102
00:08:07,920 --> 00:08:13,080
स्वीकार कर ली और इन दोनों का 
बिना किसी बड़े सेरेमनी उसी आश्रम

103
00:08:13,080 --> 00:08:18,080
में एक सिंपल विवाह हुआ। 
दोनों खुशी खुशी उसी आश्रम में 

104
00:08:18,080 --> 00:08:21,640
रहने लगे। 
कुछ दिन बीत गए और दुष्यंत को 

105
00:08:21,640 --> 00:08:26,840
अपने राज्य की चिंता सताने लगी। 
उन्होंने निर्णय लिया कि वो अपने 

106
00:08:26,840 --> 00:08:31,400
राज्य जाकर शकुंतला को लेने के 
लिए पूरा पथक भेजेंगे और जोरों 

107
00:08:31,400 --> 00:08:34,200
शोरों से अपनी पत्नी का राज्य में
स्वागत करेंगे। 

108
00:08:35,679 --> 00:08:42,000
बट नो लेजेंडरी स्टोरी इस एवर दट।
सिंपल दुष्यंत अपने राज्य वापस 

109
00:08:42,000 --> 00:08:47,520
जाकर युद्ध राज्य का कारोबार सभा 
राजनीति मंत्री एडमिनिस्ट्रेशन 

110
00:08:47,520 --> 00:08:53,600
में उलझ गए और धीरे धीरे ऋषिक्व 
के आश्रम में दिया गया वो वचन। 

111
00:08:54,240 --> 00:08:57,240
राज्य और राजनीति के शोर में दबता
चला गया। 

112
00:08:59,560 --> 00:09:02,680
शकुंतला ने जो घटा वो ऋषिकन्वा को
बताया और रुकी रही। 

113
00:09:03,560 --> 00:09:08,360
राह देखती रही की दुष्यंत अपना 
वचन जरूर पूरा करेंगे, पर दुष्यंत

114
00:09:08,360 --> 00:09:12,920
नहीं आए। 
शकुंतला जीवन में तीसरी बार 

115
00:09:12,920 --> 00:09:18,040
त्यागी गई थी। 
पर इस बार शकुंतला पक्षियों के 

116
00:09:18,040 --> 00:09:24,760
बीच वो अकेली नहीं थी। 
वो अब खुद माँ बनने वाली थी और वो

117
00:09:24,760 --> 00:09:27,560
किसी हालत में अपने बच्चे को 
त्यागना वाली नहीं थी। 

118
00:09:30,440 --> 00:09:36,760
कुछ महीनों बाद उसे एक बेटा हुआ। 
आश्रम में हर तरफ उस बेटे के आगमन

119
00:09:36,760 --> 00:09:43,440
की खुशी ही खुशी थी ऋषिकन वह उसे 
अपने पोते की तरह बढ़ा रहे थे और 

120
00:09:43,440 --> 00:09:50,080
दुष्यंत इस आश्रम से अब भी दूर सब
लोग बहुत जल्द समझ गए थे कि ये 

121
00:09:50,080 --> 00:09:53,880
बच्चा साधारण नहीं है। 
और होता भी कैसे? 

122
00:09:55,240 --> 00:10:00,120
वो शेर और बाकी जानवरों के बीच 
ऐसे चलता जैसे जंगल भी उसे 

123
00:10:00,120 --> 00:10:04,000
पहचानना हो। 
जंगली जानवरों से शेरों से ऐसे 

124
00:10:04,000 --> 00:10:09,280
खेलता जैसे वो उसके खिलौने हों, 
हर विषय में अपनी प्रबलता दिखाता,

125
00:10:09,800 --> 00:10:14,600
अपनी कुशलता दिखाता। 
उसको हर दिन देखकर सारे ऋषि यही 

126
00:10:14,600 --> 00:10:18,000
कहते कि ये बड़ा होकर कुछ 
असामान्य करेगा। 

127
00:10:19,880 --> 00:10:25,840
उसे हर दिन बढ़ता देख कन्व ने 
शकुंतला को सलाह दी कि वो दुष्यंत

128
00:10:25,840 --> 00:10:30,840
के राज्य में जाए और उस राजा को 
अपने बेटे से अवगत कराए। 

129
00:10:31,040 --> 00:10:34,440
आखिरकार यही बेटा तो दुष्यंत के 
राज़ का उत्तराधिकारी था। 

130
00:10:35,440 --> 00:10:41,160
होने वाला राजा था अपने पिता 
स्वरूप ऋषि की बात शकुंतला कैसे न

131
00:10:41,160 --> 00:10:45,840
मानती? 
वो 1 दिन अपने बेटे को लेकर राजा 

132
00:10:45,840 --> 00:10:50,600
दुष्यंत की नगरी में पहुंची और 
फिर उसकी सभा में। 

133
00:10:50,680 --> 00:10:53,160
और सीधे दुष्यंत के सामने जाकर 
खड़ी रही। 

134
00:10:55,200 --> 00:10:59,240
राजा के इतने बड़े महल की इतनी 
बड़ी सभा में एक अंजान तेजस्वी 

135
00:10:59,240 --> 00:11:03,000
स्त्री और एक बच्चा देख कर सब 
कॅन्फ़्यूज़न में थे। 

136
00:11:04,000 --> 00:11:10,040
सब क्यूरियोसिटी में थे। 
शकुंतला न गुस्से में थी न उदास। 

137
00:11:10,640 --> 00:11:15,360
ना किसी बेतरेल में उसने खुद की 
पहचान आगे लाने में कोई समय नहीं 

138
00:11:15,360 --> 00:11:18,680
बिताया। 
पूरी सभा के सामने उसने अनाउंस 

139
00:11:18,680 --> 00:11:23,520
किया कि राजा दुष्यंत ने ऋषिकंव 
के आश्रम में उससे गंधर्व विवाह 

140
00:11:23,520 --> 00:11:28,520
किया था और ये छोटा सा लड़का उन 
दोनों का पुत्र है। 

141
00:11:31,000 --> 00:11:34,880
बिफोर एन्योने कुड रेस्पॉन्ड उसने
दुष्यंत को यह भी याद दिलाया कि 

142
00:11:34,880 --> 00:11:39,160
उन्होंने वचन दिया था कि यही बेटा
उनका उत्तराधिकारी बनेगा। 

143
00:11:40,200 --> 00:11:43,760
पूरी सभा शांत थी। 
राजा दुष्यंत की सभा में ऐसा कुछ 

144
00:11:43,760 --> 00:11:49,160
होगा किसी ने कभी नहीं सोचा था। 
सब लोग आतुर थे ये सुनने के लिए 

145
00:11:49,160 --> 00:11:55,000
कि हौ वुड दुष्यंत रेस्पॉन्ड क्या
ये सामने खड़ी लड़की उस सभा की 

146
00:11:55,000 --> 00:11:58,560
महारानी थी? 
ये छोटा लड़का, उनका होने वाला 

147
00:11:58,560 --> 00:12:05,840
राजा या ये कोई धोखेबाज थे पर 
जिनका जीवन कठिन पथ पर हो? 

148
00:12:06,560 --> 00:12:13,000
वो आसानी से ठीक नहीं होता। 
शकुंतला अब चौथी बार त्यागी गई। 

149
00:12:14,960 --> 00:12:21,000
दुष्यंत अपने सिंहासन से उठे उस 
बेटे को और शकुंतला को देखा। 

150
00:12:22,680 --> 00:12:29,000
ना प्यार दिखाया ना पहचान। 
एक राजा की तरह प्रश्न किया पूछा 

151
00:12:30,000 --> 00:12:35,880
मैं तुम्हारी बात कैसे मान लूँ? 
दुष्यंत के शब्दों में क्रोध नहीं

152
00:12:35,880 --> 00:12:41,560
था और दूरी थी ऐसे जैसे वो अपनी 
पत्नी से नहीं किसी पोलिटिकल 

153
00:12:41,560 --> 00:12:47,320
सिचुएशन से डील कर रहे हो। 
पूरी सभा चुप थी। 

154
00:12:49,000 --> 00:12:52,280
कुछ लोग शायद शकुंतला को सिम्पथी 
की नजर से देख रहे होंगे। 

155
00:12:53,320 --> 00:12:59,440
कुछ लोग उसे शायद ढोंगी समझ रहे 
होंगे और शकुंतला कुछ पल चुप रही।

156
00:13:01,200 --> 00:13:04,640
शायद उसे भी विश्वास नहीं हो रहा 
था कि जीस व्यक्ति ने वन में उसका

157
00:13:04,640 --> 00:13:08,440
हाथ पकड़कर वचन दिया था। 
वहीं आज किसी अनजान इंसान की तरह 

158
00:13:08,440 --> 00:13:13,360
उसके सामने खड़ा होगा। 
पर वो स्थिर थी। 

159
00:13:14,960 --> 00:13:17,440
उसने दुष्यंत की आँखों में देख कर
कहा। 

160
00:13:18,600 --> 00:13:21,760
वन में दिया गया वचन राज्यसभा में
आकर बदल नहीं जाता। 

161
00:13:21,760 --> 00:13:28,560
राजा मनुष्य दुनिया से छुप सकता 
है, पर खुद से नहीं, अपनी आत्मा 

162
00:13:28,560 --> 00:13:32,120
से नहीं। 
क्या आप सच में सत्य से दूर हो 

163
00:13:32,120 --> 00:13:34,760
रहे हैं? 
राजा और जब राजा ही सत्य से मुँह 

164
00:13:34,760 --> 00:13:37,320
मोड़ने लगे तो प्रजाधर्म किस्से 
सीखेगी? 

165
00:13:39,440 --> 00:13:43,480
जब शकुंतला बोलने लगी तो ऐसा लग 
रहा था कि वो अकेले ही राजा की 

166
00:13:43,480 --> 00:13:49,120
पूरी सेना प्रभारी है। 
शकुंतला के प्रश्न सुनकर राजा अब 

167
00:13:49,120 --> 00:13:55,120
गुस्सा होने लगे। 
क्रोध ही होकर कहा, वन में किए 

168
00:13:55,120 --> 00:14:00,920
हुए विवाह का प्रमाण क्या है? 
यह सुनकर भी शकुंतला का स्वर नहीं

169
00:14:00,920 --> 00:14:06,920
बदला। 
उसने धीरे से कहा, राजा सत्य को 

170
00:14:06,920 --> 00:14:10,280
स्वीकार करने के लिए प्रमाण नहीं,
साहस चाहिए होता है। 

171
00:14:11,800 --> 00:14:16,920
सत्य आप भी जानते हो मैं भी। 
प्रमाण मांगने से उसके होने या न 

172
00:14:16,920 --> 00:14:23,080
होने से सत्य नहीं बदलेगा। 
यह सुनकर दुष्यंत का गुस्सा और 

173
00:14:23,080 --> 00:14:27,040
बढ़ गया। 
राज्य प्रमाण पर चलता है, कथाओं 

174
00:14:27,040 --> 00:14:30,920
पर नहीं। 
राजा की बढ़ती आवाज सुनकर सभा समझ

175
00:14:30,920 --> 00:14:34,200
चुकी थी कि राजा को शकुंतला 
स्वीकार नहीं। 

176
00:14:35,080 --> 00:14:38,480
उनकी सभा के रक्षक शकुंतला और 
उसके बेटे को सभा से निकालने के 

177
00:14:38,480 --> 00:14:43,280
लिए आगे बढ़े। 
एक सैनिक जब उनका हाथ पकड़ने ही 

178
00:14:43,280 --> 00:14:50,080
वाला था, उतने में अचानक एक 
जोरदार आवाज हुई और सब सुन हो गया

179
00:14:52,040 --> 00:14:54,800
समय। 
अचानक धीरे चलने लगा। 

180
00:14:56,480 --> 00:15:00,640
खुद की सांसों की धीमी आवाज के 
अलावा कोई कुछ सुन नहीं पा रहा था

181
00:15:02,840 --> 00:15:10,880
और दूर कहीं आकाश से एक बिजली 
गरजी और आवाज आई शकुंतला सत्य कह 

182
00:15:10,880 --> 00:15:15,240
रही है। 
ये बेटा दुष्यंत का ही पुत्र है 

183
00:15:15,800 --> 00:15:22,520
और वो उसकी पत्नी राजा अपनी पत्नी
और पुत्र को स्वीकार करो। 

184
00:15:24,080 --> 00:15:27,440
इस आवाज के फेर होते ही समय फिर 
स्थिर हो गया। 

185
00:15:29,720 --> 00:15:32,560
दुष्यंत हल्के हल्के मुस्कुराए। 
एस। 

186
00:15:32,560 --> 00:15:38,240
इफ वो जानते थे कि यही होगा वो 
शकुंतला के पास गए, उसकी तरफ अपना

187
00:15:38,240 --> 00:15:43,280
हाथ बढ़ाया और अपनी सभा से कहा कि
वो अपनी पत्नी को पहचानते थे और 

188
00:15:43,280 --> 00:15:48,160
एक राजा का धर्म उन्हें रोक रहा 
था अगर वो बिना प्रमाण। 

189
00:15:48,200 --> 00:15:52,480
शकुंतला को अपना लेते तो कल प्रजा
उनके बेटे के जन्म पर और शकुंतला 

190
00:15:52,480 --> 00:15:59,080
के चरित्र पर सवाल उठाती। 
आज आकाश ने वाणी देकर उस वचन को 

191
00:15:59,080 --> 00:16:05,840
पवित्र कर दिया था। 
शकुंतला इस देश की महारानी हो गई।

192
00:16:06,680 --> 00:16:09,840
उस देश की जीस देश का नाम उन्हीं 
के बेटे ने प्रसिद्ध किया। 

193
00:16:10,920 --> 00:16:16,400
दुष्यंत शकुंतला का वो बेटा था 
भारत वो इतना तेजस्वी चक्रवर्ती 

194
00:16:16,400 --> 00:16:20,840
और जग जीतने वाला था कि हमारे देश
की ख्याति दुनिया भर में फैली एस 

195
00:16:21,560 --> 00:16:26,160
भारतवर्ष इसी भारत के वंश से आए 
गुरु। 

196
00:16:26,480 --> 00:16:31,800
शांतनु भीष्म जैसे योद्धा और फिर 
उनसे कौरव और पांडव और आगे 

197
00:16:31,800 --> 00:16:35,600
महाभारत। 
राजा कौशिक ने ऋषि वशिष्ठ को 

198
00:16:35,600 --> 00:16:40,120
हराने के लिए जो तपस्या ली थी, 
उसी तपस्या से हमें मिले रामायण 

199
00:16:40,120 --> 00:16:45,040
और महाभारत दोनों कुछ कठिनाइयां 
हमें तोड़ती हैं। 

200
00:16:46,080 --> 00:16:51,400
और शायद उन्हीं टुकड़ों से हम 
इतिहास बनाते हैं, अगली कहानी में

201
00:16:51,400 --> 00:16:52,160
जल्द मिलते हैं।
