1
00:00:00,480 --> 00:00:03,720
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:34,520 --> 00:00:37,840
हम सब ने कभी ना कभी किसी अपनी के
लिए कुछ ना कुछ सैक्रिफ़ाइस किया 

3
00:00:37,840 --> 00:00:43,280
है, कभी कुछ छोटा, कभी कुछ बड़ा 
और वह त्याग करते वक्त हमें लगता 

4
00:00:43,280 --> 00:00:47,680
है कि हमारा सेलफ्लेसनेस सब कुछ 
ठीक कर देगा, किसी को खुशी देगा 

5
00:00:47,680 --> 00:00:49,640
और शायद सब की जिंदगी आसान हो 
जाएगी। 

6
00:00:51,320 --> 00:00:54,720
पर क्या हो अगर ये त्याग सिर्फ एक
इंसान के लिए कुछ पल का सुकून और 

7
00:00:54,720 --> 00:01:00,200
खुशी लाये और इस एक सैक्रिफ़ाइस 
से इतनी तबाही हो कि एक के बाद एक

8
00:01:00,200 --> 00:01:05,960
वंश मिट जाए, इतिहास का सबसे बड़ा
युद्ध हो और पूरी धरती लाल हो 

9
00:01:05,960 --> 00:01:08,840
जाए? 
आज की कहानी संसार के सबसे बड़े 

10
00:01:08,840 --> 00:01:14,520
युद्ध के ऊगम स्नान की। 
वो स्टार्टिंग पॉइंट हमारी पिछली 

11
00:01:14,520 --> 00:01:18,120
कहानी में हम मिले थे राजा 
दुष्यंत और भारत से उसी भारत के 

12
00:01:18,120 --> 00:01:23,160
वंश में आगे चलकर आये राजा हस्ती 
जिन्होंने बसाया हस्तिनापुर यही 

13
00:01:23,160 --> 00:01:26,400
हस्तिनापुर बना भारतवर्ष की 
सेंट्रल कैपिटल फॉर जनरेशन्स टु 

14
00:01:26,400 --> 00:01:31,560
कम और फिर आये महाराज गुरु। 
जिनके नाम पर इस वंश का नाम पड़ा,

15
00:01:31,560 --> 00:01:37,080
गौरव पीढ़ियां बढ़ती गई, 
साम्राज्य बढ़ता गया और फिर इसी 

16
00:01:37,080 --> 00:01:39,200
वंश में जन्म हुआ। 
राजा शांतनु का। 

17
00:01:40,280 --> 00:01:43,960
शांतनु अपने वंश के बाकी राजाओं 
की तरह ही एक महान और शक्तिशाली 

18
00:01:43,960 --> 00:01:47,400
राजा थे। 
उनके राज़ में भारतवर्ष की ख्याति

19
00:01:47,400 --> 00:01:51,080
और भी आगे बढ़ी। 
और जैसे दुष्यंत 1 दिन अचानक 

20
00:01:51,080 --> 00:01:54,640
शकुंतला से मिले थे, वैसे ही 
शांतनु को भी 1 दिन दिखी। 

21
00:01:54,640 --> 00:02:01,720
गंगा गंगा इतनी रेडिएंट और सुंदर 
थी कि उसे देखकर वो पृथ्वी से है,

22
00:02:01,720 --> 00:02:05,520
ये सोचना कठिन था। 
संतनु उसे देखकर इतने प्रभावित और

23
00:02:05,520 --> 00:02:07,960
आकर्षित हो गए कि विवाह का 
प्रस्ताव रखे। 

24
00:02:09,479 --> 00:02:12,920
और जैसे शकुंतला ने विवाह की 
कंडीशन रखी थी, वैसे ही गंगा ने 

25
00:02:12,920 --> 00:02:16,920
भी रखी पर कंडीशन उसके पुत्र को 
राजा बनाने की नहीं थी। 

26
00:02:18,000 --> 00:02:22,200
कुछ अलग थी। 
गंगा की कंडीशन थी कि शांतनु उसे 

27
00:02:22,840 --> 00:02:26,480
कभी कुछ करने से न रोके और कभी 
उससे कोई सवाल न पूछे। 

28
00:02:27,480 --> 00:02:30,960
अगर उसे रोका गया या क्वेश्चन 
किया गया तो वो चली जाएगी। 

29
00:02:33,720 --> 00:02:39,240
संतनु ने कंडीशन स्वीकार की और उन
दोनों का जल्द ही विवाह हुआ दी 

30
00:02:39,240 --> 00:02:43,600
हैप्पिली एवर आफ्टर वास् सून 
ब्रोकन इन दी मोस्ट ट्रेजिक वे। 

31
00:02:44,960 --> 00:02:48,880
इसके बाद जो घटा। 
वो हमारी कल्पना से बाहर है। 

32
00:02:50,880 --> 00:02:55,600
शांतनु और गंगा को पुत्र हुआ और 
इससे पहले कि राजकुमार के जन्म की

33
00:02:55,600 --> 00:03:00,600
खुशी हो, गंगा ने अपने नन्हे से 
बेटे को नदी में बहा दिया। 

34
00:03:02,880 --> 00:03:08,520
शांतनु बस देखते रह गए। 
ना वो इसका कारण समझ पाए, ना पूछ 

35
00:03:08,520 --> 00:03:14,720
पाए ना ही गंगा को रोक पाए। 
जो शर्त मानकर उन्होंने विवाह 

36
00:03:14,720 --> 00:03:18,320
किया था। 
शायद उन्होंने कभी सोचा भी नहीं 

37
00:03:18,320 --> 00:03:21,520
होगा कि वही शर्त उन्हें 1 दिन 
इतना हेल्पलेस बना देगी। 

38
00:03:23,960 --> 00:03:26,960
कुछ दिन बीते। 
वो फिर पिता बने। 

39
00:03:27,640 --> 00:03:30,800
शायद इस बार उन्हें लगा हो कि वो 
अपने पुत्र को अपने सामने बड़ा 

40
00:03:30,800 --> 00:03:36,520
होता देख पाएंगे। 
1 दिन उसे अपना राज़ सौंपेंगे और 

41
00:03:36,520 --> 00:03:41,040
फिर वही हुआ। 
गंगा ने उस पुत्र को भी नदी में 

42
00:03:41,040 --> 00:03:45,440
बहा दिया। 
शांतनु फिर एक बार बस देखते रह 

43
00:03:45,440 --> 00:03:50,840
गया। 
अनफारचुनेटली ये बेबसी राजा 

44
00:03:50,840 --> 00:03:53,120
शांतनु के जीवन में आखिरी बार 
नहीं आई थी। 

45
00:03:54,360 --> 00:03:57,240
गंगा ने एक एक करके अपने सात 
पुत्र नदी में बहा दिए। 

46
00:03:59,520 --> 00:04:05,120
शांतनु सातों बार बस देखते रह गए 
और आठवीं बार। 

47
00:04:06,000 --> 00:04:14,640
ये सब फिर -1 आखिरी बार शांतनु और
गंगा को आठवा पुत्र हुआ। 

48
00:04:15,520 --> 00:04:20,640
पर इस बार संतनु ने गंगा को रोका।
उसे उस पुत्र को नदी में बहाने 

49
00:04:20,640 --> 00:04:25,600
नहीं दिया और। 
पूछा कि वो इन नन्हे बच्चों को 

50
00:04:25,600 --> 00:04:30,120
नदी में क्यों बहा रही है? 
पर इस क्वेश्चन में दिया हुआ वचन 

51
00:04:30,280 --> 00:04:35,320
और विवाह की कंडीशन टूटी। 
गंगा ने उनके पुत्र को नदी में 

52
00:04:35,320 --> 00:04:38,280
नहीं बहाया, पर वह उसे लेकर चली 
गई। 

53
00:04:39,480 --> 00:04:44,320
कहाँ ये कोई नहीं जानता? 
इस बार राजा शांतनु ने अपने पुत्र

54
00:04:44,320 --> 00:04:49,760
के साथ अपनी पत्नी भी खो दी। 
एक तरफ सात पुत्रों की मृत्यु का 

55
00:04:49,760 --> 00:04:56,320
दुःख और दूसरी तरफ उस आठवें पुत्र
के होते हुए भी दूरी समय बीतता 

56
00:04:56,320 --> 00:05:00,320
गया। 
हस्तिनापुर चलता रहा, राज्य बढ़ता

57
00:05:00,320 --> 00:05:03,800
रहा। 
और कहीं दूर वह आठवां पुत्र पढ़ 

58
00:05:03,800 --> 00:05:09,320
रहा था पर न गंगा कोई सामान्य 
स्त्री थी, न वह बच्चा, कोई 

59
00:05:09,320 --> 00:05:13,280
साधारण लड़का। 
वह अलग अलग आश्रमों में भारतवर्ष 

60
00:05:13,280 --> 00:05:16,840
के महान ऋषियों और योद्धाओं से 
शिक्षा प्राप्त कर रहा था। 

61
00:05:18,800 --> 00:05:23,840
उसे वेदों और धर्म की शिक्षा दे 
रहे थे साक्षात ऋषि वशिष्ठ अस्त्र

62
00:05:23,920 --> 00:05:29,080
शस्त्र युद्ध नीती उसने सीखी 
विष्णु के छटे और चिरंजीवी अवतार 

63
00:05:29,080 --> 00:05:34,440
भगवान परशुराम से। 
धीरे धीरे शांतनु और गंगा का यह 

64
00:05:34,440 --> 00:05:39,000
बेटा भारतवर्ष का सबसे शक्तिशाली 
युद्ध कुशल ज्ञानी युवराज बन चुका

65
00:05:39,000 --> 00:05:42,680
था। 
गंगा ने इस बेटी का नाम रखा था 

66
00:05:42,680 --> 00:05:48,920
देवव्रत और जो नाम हमें पता है वो
इसे मिला, उसके वही त्याग से 

67
00:05:48,920 --> 00:05:55,080
जिससे हमारा इतिहास बदल गया। 
पर वो इतिहास बदलने से पहले जरूरी

68
00:05:55,080 --> 00:05:57,480
था। 
देवव्रत का अपने पिता से मिलना। 

69
00:05:58,720 --> 00:06:02,800
1 दिन राजा शांतनु गंगा नदी के 
किनारे टहल रहे थे जब उनकी नजर 

70
00:06:02,800 --> 00:06:07,560
गयी एक युवा योद्धा पर जिसने अपने
बाणों से गंगा नदी का प्रवाह रोक 

71
00:06:07,560 --> 00:06:13,680
रखा था। 
शांतनु आश्चर्यचकित रह गए। 

72
00:06:15,040 --> 00:06:18,760
उन्होंने उस युवा को ध्यान से 
देखा वो कौन है? 

73
00:06:18,760 --> 00:06:20,880
ये शांतनु जानने की कोशिश शुरू कर
पाते। 

74
00:06:20,880 --> 00:06:23,640
तब तक उनके सामने आई उनकी पत्नी 
गंगा। 

75
00:06:24,280 --> 00:06:27,520
इतने वर्षों बाद जब शांतनु और 
गंगा फिर से एक दूसरे के सामने 

76
00:06:27,520 --> 00:06:30,160
आए। 
तो उन दोनों के बीच क्या बात हुई 

77
00:06:30,160 --> 00:06:34,120
यह हमें नहीं पता। 
पर गंगा ने संतनों को यह जरूर 

78
00:06:34,120 --> 00:06:38,080
बताया कि नदी का प्रभार रोकने 
वाला उन्हीं का बेटा है। 

79
00:06:38,560 --> 00:06:44,480
देवव्रत गंगा ने यह भी बताया कि 
देवव्रत एक असामान्य लड़का है जो 

80
00:06:44,480 --> 00:06:47,320
युद्ध शास्त्र, राजनीति सब में 
कुशल है। 

81
00:06:47,920 --> 00:06:50,160
और अब बड़ी जिम्मेदारियों के लिए 
तैयार है। 

82
00:06:51,480 --> 00:06:54,760
राजा को अपना पुत्र सौंप कर गंगा 
हमेशा के लिए चली गई। 

83
00:06:55,680 --> 00:07:00,840
गंगा मिलते ही जाने का दुख संतनों
को जरूर होगा पर अपने पुत्र के 

84
00:07:00,840 --> 00:07:04,640
मिलने की खुशी भी थी। 
संतनु देवव्रत को हस्तिनापुर ले 

85
00:07:04,640 --> 00:07:08,280
आए। 
इस इतने ऐतिहासिक वंश को अपना 

86
00:07:08,280 --> 00:07:12,600
राजकुमार मिला। 
देवव्रत ने आते ही सबक मन जीत 

87
00:07:12,600 --> 00:07:16,840
लिया। 
उसका ज्ञान, उसका आचरण देखकर सब 

88
00:07:16,840 --> 00:07:21,440
लोग उसका आदर करने लगे। 
शांतनु अब शायद सुकून में थे, 

89
00:07:22,240 --> 00:07:24,280
उन्हें सिर्फ अपना युवराज ही नहीं
मिला था। 

90
00:07:24,440 --> 00:07:27,720
उन्हें मिला था अपना पुत्र। 
उन्होंने अपनी प्रजा को बड़े गर्व

91
00:07:27,720 --> 00:07:31,000
से बताया कि देवव्रत उनका अगला 
राजा हो। 

92
00:07:32,560 --> 00:07:36,320
धीरे धीरे इतने वर्षों की ये दूरी
पिता और पुत्र के बीच एक गहरे 

93
00:07:36,320 --> 00:07:40,480
रिश्ते में बदल गई और इन दोनों के
जीवन में कुछ और घटना बचा था। 

94
00:07:42,760 --> 00:07:45,760
1 दिन राजा शांतनु फिर किसी नदी 
के किनारे टहल रहे थे। 

95
00:07:47,520 --> 00:07:53,080
जब उनकी नजर पड़ी एक नाव चलाती 
हुई सत्यवती पर जैसे वर्षों पहले 

96
00:07:53,080 --> 00:07:56,960
गंगा को देख कर हुआ था वैसे ही 
फिर एक बार शांतनु का मन आकर्षित 

97
00:07:56,960 --> 00:08:01,200
हो गया। 
पर इस बार संतो ने विवाह की बात 

98
00:08:01,200 --> 00:08:05,320
सीधे सत्यवती से नहीं की इनस्टेड 
उन्होंने सत्यवती के पिता से 

99
00:08:05,320 --> 00:08:09,720
मुलाकात की। 
सत्यवती के पिता थे दाशराज वो 

100
00:08:09,720 --> 00:08:13,600
संतनु के विवाह के प्रस्ताव को 
लेकर खुश बहुत हुए। 

101
00:08:14,360 --> 00:08:16,960
पर ये कंडीशन्स का सिलसिला अभी 
खत्म नहीं हुआ था। 

102
00:08:17,720 --> 00:08:19,760
सत्यवती के पिता ने भी एक कंडीशन 
रखी। 

103
00:08:21,280 --> 00:08:25,160
उन्होंने कहा कि देवव्रत ऑलरेडी 
अगला राजा घोषित हो चुका है। 

104
00:08:26,080 --> 00:08:29,600
ऐसे में सत्यवती का पुत्र सिर्फ 
एक राजा का भाई बन के रह जाएगा। 

105
00:08:30,600 --> 00:08:34,559
अगर शंतनु सत्यवती के बेटे को 
राजा बनाने के लिए तैयार है तो वो

106
00:08:34,559 --> 00:08:36,280
अपने पुत्री के विवाह के लिए 
तैयार है। 

107
00:08:37,840 --> 00:08:41,919
जो गलती शंतनु एक बार कर चूके थे,
उन्होंने दोबारा नहीं। 

108
00:08:43,559 --> 00:08:45,720
उन्होंने किसी कंडीशन को स्वीकार 
नहीं किया। 

109
00:08:47,280 --> 00:08:50,200
इतने साल बाद मिले पुत्र से वो 
बहुत प्यार करते थे। 

110
00:08:51,240 --> 00:08:54,280
देवव्रत में वो सारे गुण थे जो 
हस्तिनापुर के राजा में होनी 

111
00:08:54,280 --> 00:08:58,080
चाहिए। 
उनका अब उत्तराधिकारी बदलना सही 

112
00:08:58,080 --> 00:09:02,360
नहीं होता। 
वो निराश होकर हस्तिनापुर वापस 

113
00:09:02,360 --> 00:09:07,000
पहुंचे। 
और किसी को कुछ नहीं बताया और 

114
00:09:07,000 --> 00:09:10,280
उनकी निराशा, उदासीनता सब लोग देख
पा रहे थे। 

115
00:09:11,920 --> 00:09:15,680
थोड़ी छानबीन करने पर देव व्रत को
अपने पिता के दुख का कारण समझ आया

116
00:09:17,400 --> 00:09:21,520
और अपने पिता के सुख के लिए वो 
खुद पहुंचा दासराज के पास। 

117
00:09:23,400 --> 00:09:25,560
अपने पिता के लिए सत्यवती का हाथ 
मांगा। 

118
00:09:27,800 --> 00:09:33,000
दाशराज ने अपनी कंडीशन फिर रखी और
यहाँ से शुरू हुआ देवव्रत का 

119
00:09:33,000 --> 00:09:37,800
त्याग उसने दाशराज की तरफ देखा और
कहा अगर समस्या सिर्फ राजगद्दी की

120
00:09:37,800 --> 00:09:40,760
है। 
तो आज से हस्तिनापुर के सिंहासन 

121
00:09:40,760 --> 00:09:45,320
पर उनका कोई अधिकार नहीं। 
सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर 

122
00:09:45,320 --> 00:09:49,960
का अगला राजा हो पर यह सुनकर 
दासराज नहीं माने। 

123
00:09:50,440 --> 00:09:54,560
उन्होंने कहा, राजकुमार आप नहीं 
पर आपके पुत्र 1 दिन राजगद्दी 

124
00:09:54,560 --> 00:10:01,680
मांग सकते हैं, अब क्या? 
सत्यवती एक युवराज को अपने पिता 

125
00:10:01,680 --> 00:10:05,880
की इच्छा के लिए तरसता देख रही थी
और कुछ नहीं बोली। 

126
00:10:09,400 --> 00:10:14,760
देवव्रत ने शायद एक लंबी सांस ली 
और कहा कि मैं सबके सामने प्रति 

127
00:10:14,760 --> 00:10:18,960
क्या करता हूँ? 
कि जीवन भर विवाह नहीं करूँगा। 

128
00:10:20,360 --> 00:10:25,200
जीवन भर ब्रह्मचारी रहूँ 
हस्तिनापुर की राजगद्दी पर सिर्फ 

129
00:10:25,200 --> 00:10:27,160
सत्यवती के पुत्र का ही अधिकार 
होगा। 

130
00:10:27,920 --> 00:10:31,240
मैं आजन में इस राज्य की सेवा 
करूँगा पर अधिकार कभी नहीं 

131
00:10:31,240 --> 00:10:35,080
मांगूंगा। 
उस युवा देवव्रत की प्रतिज्ञा 

132
00:10:35,080 --> 00:10:42,800
भीषण थी, सबको कुछ पल असह्य करने 
वाली थी, उसने सिर्फ राजगद्दी 

133
00:10:42,800 --> 00:10:47,360
नहीं त्यागी थी। 
उसने अपना वंश, अपना जीवन साथी सब

134
00:10:47,360 --> 00:10:51,080
कुछ त्याग दिया था और अब दाशराज 
मान चूके थे। 

135
00:10:53,200 --> 00:10:55,160
अब मांगने के लिए कुछ बचा भी नहीं
था। 

136
00:10:55,760 --> 00:10:58,440
देवव्रत सत्यवती के साथ 
हस्तिनापुर पहुंचा। 

137
00:10:59,720 --> 00:11:04,440
शांतनु को सत्यवती को देखने के 
सुख से ज्यादा अपने बेटे के त्याग

138
00:11:04,440 --> 00:11:08,400
का दुख था पर वह त्याग अब हो चुका
था। 

139
00:11:11,120 --> 00:11:15,160
शांतनु उसे बदल नहीं पाते। 
इस त्याग के बदले उन्होंने अपने 

140
00:11:15,160 --> 00:11:17,320
बेटे को इच्छा मृत्यु का वरदान 
दिया। 

141
00:11:18,880 --> 00:11:25,920
अंतनु सत्यवती का विवाह हुआ। 
इस भीषण प्रतिज्ञा लेने वाले 

142
00:11:25,920 --> 00:11:28,080
देवरत का नाम प्रसिद्ध हुआ। 
एस। 

143
00:11:28,640 --> 00:11:31,120
भीष्म। 
और ये है महाभारत युद्ध के 

144
00:11:31,120 --> 00:11:37,440
कॉनफ्लिक्ट का ऊगम स्थान शांतनूवर
सत्यवती को दो पुत्र हुए 

145
00:11:38,080 --> 00:11:41,560
चित्रांगन और विचित्रवीरय 
चित्रांगन। 

146
00:11:41,560 --> 00:11:45,760
जब युवा थे तभी एक युद्ध में मारे
गए और फिर राज्य की जिम्मेदारी आई

147
00:11:45,760 --> 00:11:49,280
विचित्रवीर्य पर भीष्म ने अपनी 
प्रतिज्ञा निभाते हुए। 

148
00:11:49,360 --> 00:11:52,680
हस्तिनापुर की राजगद्दी और 
पूर्ववंश की रक्षा का पूरा भार 

149
00:11:52,680 --> 00:11:57,400
अपने कंधों पर ले लिया। 
विचित्रवीर्य के विवाह के लिए 

150
00:11:57,400 --> 00:12:01,840
भीष्म अकेले ही काशी तक जाकर कई 
राजाओं से लड़कर दो राज़ कन्या ले

151
00:12:01,840 --> 00:12:04,600
आए। 
पर विवाह के कुछ ही दिनों बाद 

152
00:12:04,840 --> 00:12:09,960
विचित्रवीर्य का निधन हो गया। 
जो राजगद्दी देवव्रत ने त्यागी 

153
00:12:09,960 --> 00:12:14,600
थी, वो अब पूरी तरह खाली थी। 
पूर्ववंश का सबसे योग्य पुरुष 

154
00:12:15,120 --> 00:12:20,080
सबसे शक्तिशाली योद्धा, सबसे उचित
उत्तराधिकारी खुद अपनी ही 

155
00:12:20,080 --> 00:12:24,040
प्रतिज्ञा से बंधा हुआ था। 
सत्यवती अपने आपको अपने पिता को 

156
00:12:24,040 --> 00:12:27,640
दोषी मानती रही। 
कई बार भीष्म को बनाती रही कि वो 

157
00:12:27,640 --> 00:12:30,160
अपनी प्रतिज्ञा तोड़ दे, विवाह 
करें। 

158
00:12:30,160 --> 00:12:33,960
वंश आगे बढ़ाये पर भीष्म नहीं 
माने। 

159
00:12:35,440 --> 00:12:39,280
आखिरकार हार मान कर सत्यवती ने 
अपने उस बेटी की मदद मांगी जो 

160
00:12:39,280 --> 00:12:43,120
राजा संतनों का पुत्र नहीं था। 
भेदव्यास। 

161
00:12:45,880 --> 00:12:49,520
और फिर वेद व्यास के बच्चे बने। 
इस राजगद्दी के उत्तराधिकारी 

162
00:12:50,520 --> 00:12:57,600
धृतराष्ट्र, पंडू और विदुर जिनके 
बच्चे हुए दुर्योधन और बाकी 100 

163
00:12:57,600 --> 00:13:02,240
कौरव पंडू के बच्चे युधिष्ठिर, 
अर्जुन, भीम यानी पाण्डव। 

164
00:13:02,320 --> 00:13:08,360
जिनके बीच हुआ महाभारत का युद्ध 
इसी महाभारत युद्ध ने वंश मिटा 

165
00:13:08,360 --> 00:13:11,600
दिए। 
इतना रक्त संहार हुआ कि 

166
00:13:11,600 --> 00:13:17,120
कुरुक्षेत्र की धरती लाल हो गई। 
भीष में इस युद्ध के योद्धा थे और

167
00:13:17,880 --> 00:13:24,920
आखिरी गौरव नहोश। 
जयादि पुरु दुष्यंत भारत पुरु का 

168
00:13:24,920 --> 00:13:31,600
यह वंश भीष्म पर आकर थम गया। 
वो जो भीष्म के साथ भाई गंगा ने 

169
00:13:31,600 --> 00:13:37,480
नदी में बहा दिए थे वह श्रापित 
वसु थे और गंगा उन्हें इस जीवन के

170
00:13:37,480 --> 00:13:41,240
दुख से मुक्ति दे रही थी। 
वो एक माँ थी। 

171
00:13:42,200 --> 00:13:47,080
कठोर कैसे बनती? 
पराठवें वसु का भाग्य अलग था। 

172
00:13:48,760 --> 00:13:54,880
उसे जीना था एक पूरा जीवन कर्तव्य
का, त्याग का और शायद दुःख का। 

173
00:13:55,600 --> 00:14:00,120
शायद इसलिए देव व्रत को भीष्म 
बनना पड़ा और शायद महाभारत हमें 

174
00:14:00,120 --> 00:14:03,600
यही सीखाता है। 
ये कर्तव्य और त्याग भी हमेशा सुख

175
00:14:03,600 --> 00:14:07,720
तक नहीं ले जाते। 
अगली कहानी में जल्द मिलते।

