1
00:00:00,520 --> 00:00:03,680
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:32,420 --> 00:00:35,700
आज की कहानी किसी ऋषि या राजा की 
नहीं, एक लड़के की है। 

3
00:00:36,500 --> 00:00:40,860
एक ऐसा लड़का जो अपने ज्ञान और 
क्लैरिटी ऑफ़ थॉट से अमर हो गया। 

4
00:00:41,960 --> 00:00:44,560
हमारी कहानी शुरू होती है राजाजनक
की सभा से। 

5
00:00:45,400 --> 00:00:50,200
ये जनक सीता माता के पिता नहीं, 
कोई और राजा थे, किसी और कालखंड 

6
00:00:50,200 --> 00:00:55,480
में, लेकिन उतनी ही प्रभावशाली। 
उनकी राज्यसभा भारत की सबसे 

7
00:00:55,480 --> 00:00:57,840
विद्वान स्वभाव में से एक मानी 
जाती थी। 

8
00:00:58,520 --> 00:01:03,080
हर दिन पंडित ब्रह्मर्षि और 
ज्ञानी लोग वहाँ अलग अलग विषयों 

9
00:01:03,080 --> 00:01:07,200
पर चर्चा करते थे। 
ऐसे ही 1 दिन सभा में चर्चा का 

10
00:01:07,200 --> 00:01:12,400
विषय था गुरु कौन हो सकता है और 
ज्ञान की असली पहचान क्या है? 

11
00:01:13,760 --> 00:01:18,120
सभा में जब में सारे पंडित अपने 
वेद, उपनिषद और प्राणों का नॉलेज 

12
00:01:18,120 --> 00:01:21,120
डिस्कॅस कर रहे थे। 
अपना अपना पॉइंट ऑफ क्यूँ रख रहे 

13
00:01:21,120 --> 00:01:25,040
थे और सभा एक हसलिंग बसलिंग बाजार
जैसे लगने लगी। 

14
00:01:26,320 --> 00:01:32,000
डिबेट जब अपनी पीक पर थी तब एक 
लड़का धीरे धीरे सभा में एंटर हुआ

15
00:01:33,840 --> 00:01:37,360
शरीर और हाइट में छोटा था, 
विचारों में नहीं। 

16
00:01:38,360 --> 00:01:43,000
वो जैसे जैसे अंदर आता गया, सभा 
के लोग या तो उसे देख कर हंस रहे 

17
00:01:43,000 --> 00:01:46,400
थे या उसकी तरफ एक अजीब ढंग से 
देख रहे थे। 

18
00:01:47,520 --> 00:01:51,880
जानते हो क्यों? 
क्योंकि उसका शरीर आठ अलग अलग 

19
00:01:51,880 --> 00:01:55,120
जगहों से विकृत था। 
विकृत्या ने देफोरमेड़। 

20
00:01:57,440 --> 00:02:00,560
और उसकी डेफॉर्मिटी की वजह से 
उसका नाम पड़ा था अष्टवक्र। 

21
00:02:02,120 --> 00:02:06,320
उसे देख कर सब लोगों को लगा कि वो
इस सभा में बिलौंग नहीं करता। 

22
00:02:08,360 --> 00:02:13,720
पर वो लड़का वो सारे जजमेंटल लुक 
और सरकास्टिक सी हँसी इग्नोर कर 

23
00:02:13,720 --> 00:02:20,720
सीधा जा पहुंचा सबा के बीचों बीच।
राजा जनक के सामने और राजा की 

24
00:02:20,720 --> 00:02:27,000
आँखों में आंखें डालकर बोला राजन 
ये सभा देह की पहचान करती है या 

25
00:02:27,000 --> 00:02:32,920
ज्ञान की? 
उसकी आवाज सुनते ही पूरी सभा 

26
00:02:32,920 --> 00:02:36,160
अचानक शांत हो गई। 
जनक? 

27
00:02:36,520 --> 00:02:38,680
बीइंग दी किंग ही वास ऑफन नहीं 
हुए। 

28
00:02:39,520 --> 00:02:42,200
ये नहीं सोचा कि इस बच्चे की 
हिम्मत कैसे हुई। 

29
00:02:42,320 --> 00:02:47,240
सीधे आकर सवाल पूछने की बट 
इंस्टेड ये सोच कर इम्प्रेस हो गए

30
00:02:47,760 --> 00:02:51,800
कि एक भरी सभा जब हँस रही थी, 
अपमान की नजरों से उस लड़के को 

31
00:02:51,800 --> 00:02:56,240
देख रही थी तो इन ऑल ऑफ दिस 
एडवर्सिटी अष्टावक्र। 

32
00:02:56,520 --> 00:03:03,080
वास् कम्पोज़्ड काम एंड 
कॉन्फिडेंट जनक ने अष्टवक्र से 

33
00:03:03,080 --> 00:03:12,480
पेशेंटली पूछा, बेटा कौन हो तुम 
अष्टवक्र उसी कॉन्फिडेंस से बोला 

34
00:03:13,280 --> 00:03:18,200
मैं ऋषि कहूर का पुत्र हूँ। 
कभी मेरे पिता भी यहाँ आए थे और 

35
00:03:18,200 --> 00:03:20,560
ये सभा ने उनका भी अपमान ही किया 
था। 

36
00:03:21,440 --> 00:03:25,760
मैं देख सकता हूँ मुझे बिना जाने 
मुझे बिना पहचाने ये सभा मेरा भी 

37
00:03:25,760 --> 00:03:30,960
अपमान कर चुकी है। 
राजन ये सभा ज्ञान और गुरुओं की 

38
00:03:30,960 --> 00:03:35,080
बातें कर रही है लेकिन मेरे शरीर 
पर हँस रही है। 

39
00:03:35,160 --> 00:03:40,120
ज्ञान शरीर में नहीं होता, विवेक 
में होता है और गुरुत्व व्यवहार 

40
00:03:40,120 --> 00:03:46,440
में अपने दो ही सेंटेंसेस में 
अष्टवक्र ने सभा का रुख अपनी और 

41
00:03:46,440 --> 00:03:52,120
मोड़ लिया था। 
अब सभा में कोई हँसी नहीं थी पर 

42
00:03:52,120 --> 00:03:56,880
एक बहुत इंतरिगुएड राजा था। 
जनक ने एक ऑब्वियस क्यूरियोसिटी 

43
00:03:56,880 --> 00:04:03,680
में फिर एक प्रश्न पूछा बोले बेटा
ये बताओ जब तुम अंदर आए और ये सब 

44
00:04:03,680 --> 00:04:06,360
तुम पर हंस रहे थे, तुम्हें बुरा 
नहीं लगा? 

45
00:04:08,160 --> 00:04:12,280
अगर सोने का एक टुकड़ा थोड़ा 
तेड़ा हो तो वो क्या सोना नहीं 

46
00:04:12,280 --> 00:04:17,440
होता? 
अष्टवक्र झट से बोला, राजा जनक और

47
00:04:17,440 --> 00:04:19,760
पूरी तरह अष्टवक्र के फन हो गए 
थे। 

48
00:04:21,839 --> 00:04:27,000
बोले बेटा तुम तो अभी बच्चे हो, 
फिर इतना ज्ञान कैसे अष्टवक्र 

49
00:04:27,000 --> 00:04:30,720
अगेन वास् वेरी क्विक टु 
रेस्पॉन्ड ज्ञान कभी उमर देख कर 

50
00:04:30,720 --> 00:04:34,320
नहीं आता राजन। 
मैं हर रोज़ खुद से ऐसे कई सवाल 

51
00:04:34,320 --> 00:04:41,600
पूछता हूँ, कभी सही होता हूँ, कभी
गलत पर रोज़ सीखता हूँ जब इंसान 

52
00:04:41,600 --> 00:04:45,840
अपने आप को समझने लगता है, अपनी 
गलतियों से सीखता है, उसे लोग 

53
00:04:45,840 --> 00:04:49,760
क्या कहते हैं, उसकी उम्र कितनी 
है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। 

54
00:04:50,800 --> 00:04:56,000
थिस क्लैरिटी ऑफ़ थॉट टोल्ड चाणक 
कि उनके सामने जो खड़ा है वो कोई 

55
00:04:56,000 --> 00:05:00,160
साधारण लड़का नहीं है। 
इन दोनों का ये कन्वर्सेशन उस सभा

56
00:05:00,160 --> 00:05:03,240
में आए, सारे पंडित और ज्ञानी 
मग्न हो कर सुन रहे थे। 

57
00:05:04,000 --> 00:05:09,160
जनक एक के बाद एक सवाल पूछते गए 
और अष्टवक्र हर बार। 

58
00:05:09,240 --> 00:05:14,160
कॉन्फिडेंटली जवाब देता गया। 
ये सवाल थे बड़े बड़े विषयों पर 

59
00:05:14,520 --> 00:05:21,160
पेन एनतंगलेमेंट सफरिंग से लेकर 
आत्मा तक अष्टवक्र के पास हर सवाल

60
00:05:21,160 --> 00:05:26,640
का जवाब था और जवाब हमेशा सही था।
इस कन्वर्सेशन में अष्टवक्र ने दो

61
00:05:26,640 --> 00:05:32,000
बहुत इंटरेस्टिंग चीजें बोली। 
ही सैड जो सच में ज्ञानी होता है,

62
00:05:32,440 --> 00:05:37,480
ना किसी को दोष देता है, ना किसी 
की तारीफ करता है, ना खुशी में 

63
00:05:37,480 --> 00:05:44,040
उड़ने लगता है, ना दुख में टूट 
जाता है एंड ही सैड राजन अगर आप 

64
00:05:44,040 --> 00:05:47,800
कोई कपड़ा बहुत पास से देखो, तो 
आपको सिर्फ उसके थ्रेड्स दिखाई 

65
00:05:47,800 --> 00:05:51,680
देंगे। 
वैसे ही अगर आप बहुत पास से 

66
00:05:51,680 --> 00:05:56,480
ब्रह्मांड के क्रियेशन को देखो तो
आप हमेशा खुद को देखेंगे। 

67
00:05:58,520 --> 00:06:03,400
ये एक एनालॉजी हमारे हजारों वर्ष 
पुराने उपनिषदों की सीख है। 

68
00:06:04,000 --> 00:06:09,400
लुक क्लोजली ऐट दी क्लॉथ। 
यू सी ओनली थ्रेट्स लुक क्लोजली 

69
00:06:09,400 --> 00:06:12,320
ऐट दी क्रियेशन एंड यू सी ओनली 
सेल्फ। 

70
00:06:13,960 --> 00:06:17,960
जब तक ये कॉन्वर्सेशन खत्म हुआ, 
तब तक पूरी सभा अष्टवक्र को अपना 

71
00:06:17,960 --> 00:06:22,400
गुरु मान चुकी थी। 
जीस टॉपिक पर सब चर्चा कर रहे थे,

72
00:06:22,840 --> 00:06:26,080
उसका जवाब उनके सामने खुद चल कर आ
गया। 

73
00:06:27,240 --> 00:06:31,080
अष्टवक्र की जो कोई डिफॉर्मिटी 
थी, वो उसके ज्ञान के सामने छोटी 

74
00:06:31,080 --> 00:06:34,640
पड़ गई। 
ये पूरा कन्वर्सेशन बिटवीन दी 

75
00:06:34,640 --> 00:06:39,440
किंग एंड दी बॉय इस कॉल्ड 
अष्टवक्र गीता जैसे भगवद गीता, 

76
00:06:40,200 --> 00:06:44,720
भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच का 
संवाद है, वैसे ही ये राजा जनक और

77
00:06:44,720 --> 00:06:48,520
अष्टवक्र का। 
आज की जेनरेशन के बड़े बड़े 

78
00:06:48,520 --> 00:06:53,800
टेकजाइंस, उबर, ट्विटर जैसे बड़े 
बड़े कंपनीस के इन्वेस्टर इस गीता

79
00:06:53,800 --> 00:06:57,200
को स्पिरिचुअलिटी सीखने का सबसे 
अच्छा तरीका मानते हैं। 

80
00:06:57,480 --> 00:07:03,600
अष्टवक्र बाद में ऋषि अष्टवक्र हो
गए और हजारों साल बाद भी गुरु 

81
00:07:03,600 --> 00:07:07,120
हैं। 
हम कैसे जन्में, वो हमारे हाथ में

82
00:07:07,120 --> 00:07:10,320
नहीं। 
दुनिया हमें कैसे देखती है, ये 

83
00:07:10,320 --> 00:07:15,480
हमारे बारे में क्या सोचती है? 
इससे हमारी पहचान नहीं बनती, हम 

84
00:07:15,480 --> 00:07:18,840
कौन हैं ये हमारे ज्ञान और 
बिहेव्यर से पता चलता है। 

85
00:07:20,680 --> 00:07:24,960
आई होप आपको ये कहानी अच्छी लगी, 
अगली कहानी और भी इंटरेस्टिंग है।

86
00:07:25,360 --> 00:07:26,160
जल्द मिलते हैं।
