1
00:00:00,480 --> 00:00:03,720
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:32,470 --> 00:00:39,270
आज की कहानी एक युग में नहीं तीन 
युगों में है वराह, नरसिंहा, राम 

3
00:00:39,270 --> 00:00:42,630
और कृष्ण। 
इनमें कॉमन क्या है ये हम सब 

4
00:00:42,630 --> 00:00:46,840
जानते हैं। 
ऑफ कोर्स दी कमोनलिटी इस ये सब 

5
00:00:46,840 --> 00:00:52,960
भगवान विष्णु के अवतार हैं पर ए 
लेसर नोन कमोनलिटी इस ऑल्सो दट। 

6
00:00:53,480 --> 00:00:57,160
इन अवतारों के जो विलेन थे वो भी 
किसी के अवतार थे। 

7
00:00:57,640 --> 00:01:02,880
आज की कहानी उन विलेन्स के अवतार 
की भगवान विष्णु के गेटकीपर की। 

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00:01:05,160 --> 00:01:10,000
विष्णु भगवान जहाँ रहते हैं उसे 
कहा जाता है वैकुंठ वैकुंठ एक ऐसी

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00:01:10,000 --> 00:01:14,680
जगह है जहाँ कुंठ मतलब दुःख या 
चिंता एग्ज़िस्ट नहीं करती। 

10
00:01:15,640 --> 00:01:18,600
इस वैकुंठ के दो द्वारपाल थे जय 
और विजय। 

11
00:01:19,360 --> 00:01:24,240
द्वारपाल मीनिंग गेटकीपर। 
जय और विजय न तो कोई देवता थे न 

12
00:01:24,240 --> 00:01:28,160
राक्षस। 
वो सिर्फ सेवक थे और किसी आइडियल 

13
00:01:28,160 --> 00:01:30,840
गेटकीपर की तरह लॉयल और पावरफुल 
थे। 

14
00:01:31,800 --> 00:01:37,840
दी ओनली प्रॉब्लम इस थोड़े घमंडी 
थे 1 दिन ब्रह्मदेव के चार मानस 

15
00:01:37,840 --> 00:01:41,240
पुत्र जो ऋषि थे पर दिखते उम्र 
में छोटे थे। 

16
00:01:41,520 --> 00:01:43,440
वो विष्णु भगवान से मिलने वैकुंठ 
आये। 

17
00:01:43,960 --> 00:01:48,240
चारों तेजस्वी थे, लेकिन वैकुंठ 
के दरवाजे पर जब आये तो उन्हें 

18
00:01:48,240 --> 00:01:52,800
बिना किसी कंसिडरेशन अग्रेशन में 
जय और विजय ने दरवाजे पर ही रोक 

19
00:01:52,800 --> 00:01:56,480
दिया। 
ये बोलकर कि विष्णु भगवान आराम कर

20
00:01:56,480 --> 00:02:02,000
रहे हैं और अंदर जाना मना है। 
चारों ऋषियों ने उन दोनों गेटकीपर

21
00:02:02,000 --> 00:02:05,680
को समझाने की कोशिश की। 
उन्होंने बताया कि उनका विष्णु 

22
00:02:05,680 --> 00:02:10,520
भगवान से मिलना जरूरी है। 
वो दूर से आए हैं पर ऐसे कोई 

23
00:02:10,520 --> 00:02:12,440
रीसनस, जय और विजय पर काम नहीं 
आए। 

24
00:02:13,280 --> 00:02:15,560
उन्होंने फिर भी ऋषियों को अंदर 
जाने नहीं दिया। 

25
00:02:16,720 --> 00:02:19,880
ऋषियों को ऑब्वियस्ली ये उनका 
बहुत बड़ा अपमान लगा। 

26
00:02:20,160 --> 00:02:24,840
और इस अपमान के बदले उन्होंने जय 
और विजय को दे दिया श्राप क्योंकि

27
00:02:24,840 --> 00:02:29,560
ऋषियों को भगवान से दूर रखा था। 
श्राप ये था कि वे दोनों द्वारपाल

28
00:02:29,560 --> 00:02:37,320
भी उसी भगवान से दूर रहे। 
उनका अगला जन्म हो एस असुर जो जय 

29
00:02:37,320 --> 00:02:40,320
विजय उग्रेशन में थे। 
वो अब घबरा गए। 

30
00:02:41,160 --> 00:02:45,120
वो डरकर विष्णु भगवान के पास गए, 
ये सोचकर कि वो श्राप से बचा 

31
00:02:45,120 --> 00:02:48,280
लेंगे। 
विष्णु भगवान ने पूरी कहानी सुनी 

32
00:02:48,280 --> 00:02:55,000
और बोले गलती तो हुई है, अहंकार 
भी दिखाया है, अपमान भी हुआ है तो

33
00:02:55,000 --> 00:02:59,400
श्राप तो सहना पड़ेगा। 
पर विष्णु भगवान ये भी जानते थे 

34
00:02:59,400 --> 00:03:04,640
कि जय और विजय सिर्फ सेवक नहीं 
थे, उनके भक्त भी थे तो थोड़ा 

35
00:03:04,640 --> 00:03:11,840
सोचकर भगवान ने उनको दो ऑप्शंस 
दिए अगले सात जनम लो सिर्फ भक्त 

36
00:03:11,840 --> 00:03:17,840
बनकर या तीन जनम दुश्मन बनकर। 
और अगर दुश्मन बने तो तीनों 

37
00:03:17,840 --> 00:03:20,320
जन्मों में विष्णु भगवान खुद 
उन्हें मुक्ति देंगे। 

38
00:03:23,200 --> 00:03:27,640
जय और विजय बहुत आस लेकर गए थे। 
भगवान के पास पर आप पूरी तरह फंस 

39
00:03:27,640 --> 00:03:34,000
गए थे, अपनी गलती का पछतावा तो था
पर अब सजा से मुक्ति का रास्ता 

40
00:03:34,000 --> 00:03:39,240
नहीं दिख रहा था। 
जो दो ऑप्शन्ज़ उनके पास थे वो 

41
00:03:39,240 --> 00:03:44,520
थोड़े कॉम्पलिकेटेड भी थे। 
अगर दूसरा ऑप्शन चूस करते और तीन 

42
00:03:44,520 --> 00:03:48,520
जन्म लेते तो भगवान के पास 
पहुंचने का समय कम लगता। 

43
00:03:49,320 --> 00:03:54,240
साथ लेते तो बहुत ज्यादा, लेकिन 
अगर तीन जन्म लेते। 

44
00:03:54,480 --> 00:03:58,800
तो जिन भगवान की भक्ति की थी, 
जिनकी सेवा की थी, उनसे अब 

45
00:03:58,800 --> 00:04:03,960
दुश्मनी करनी पड़ती, वो भी इतनी 
कि युद्ध में हार से मुक्ति मिले।

46
00:04:05,480 --> 00:04:10,080
सात जन्मो में ये प्रॉब्लम नहीं 
था, पर भक्त बन के साथ जन्म 

47
00:04:10,080 --> 00:04:13,000
निकालना मतलब सात जन्मो तक दूर 
रहना। 

48
00:04:13,880 --> 00:04:18,360
बहुत कॅन्फ़्यूज़न था। 
काफी डिस्कॅशंस हुए और बहुत 

49
00:04:18,360 --> 00:04:23,840
डिस्कॅशन के बाद दोनों ने डिसाइड 
किया तीन जन्म कारण साफ था समय कम

50
00:04:24,760 --> 00:04:29,760
और दुश्मन बनकर ही सही, विष्णु 
भगवान के दर्शन तो होंगे, उनसे 

51
00:04:29,760 --> 00:04:33,920
सात जन्म दूर नहीं रहना पड़ेगा। 
वो निराश होकर पहुंचे। 

52
00:04:33,920 --> 00:04:36,600
विष्णु भगवान के पास और अपना 
फैसला बताया। 

53
00:04:38,400 --> 00:04:42,200
श्राप के पहले प्रभाव के रूप में 
दोनों ने अपना पहला जन्म लिया। 

54
00:04:42,360 --> 00:04:49,640
सुरों में जय बने हिरण्यकश्यप और 
विजय हिरण्यकश्यप दोनों सिबलिंग्स

55
00:04:51,040 --> 00:04:55,120
ये था सत्ययुग। 
हिरण नक्ष ने सारी पृथ्वी को 

56
00:04:55,120 --> 00:05:00,240
समुद्र में डुबो दिया था और उस 
समय विष्णु वराह अवतार लेकर 

57
00:05:00,240 --> 00:05:05,080
पृथ्वी को बचाने आए समुद्र के तल 
में दोनों के बीच एक महायुद्ध हुआ

58
00:05:05,720 --> 00:05:09,120
और अंत में वराह ने अपने प्रहार 
से हिरण नक्ष का वध किया। 

59
00:05:10,600 --> 00:05:14,920
हिरण नक्ष के मरने के बाद? 
उसके भाई हिरण्यकश्यपु ने विष्णु 

60
00:05:14,920 --> 00:05:18,920
से बदला लेने की कसम खाई और 
तपस्या करके ब्रह्मदेव से वरदान 

61
00:05:18,920 --> 00:05:24,400
मांगा कि न उसे कोई मनुष्य मार 
सके, न पशु, न दिन में, न रात 

62
00:05:24,400 --> 00:05:29,160
में, न घर के अंदर, न बाहर। 
और इसलिए हिरण्यकश्यपु बन गया 

63
00:05:29,160 --> 00:05:33,360
देओताओं का सबसे बड़ा दुश्मन। 
विष्णु भगवान ने उसका वध किया, 

64
00:05:33,360 --> 00:05:39,120
नरसिंहा बनकर अपनी गोदी में 
सुलाकर और इस तरह श्राप ने उन्हें

65
00:05:39,120 --> 00:05:44,160
अगले युग में धकेल दिया। 
त्रेतायुग, जय और विजय ने फिर 

66
00:05:44,160 --> 00:05:49,800
जन्म लिया दिस टाइम एस रावण एंड 
कुंभकरण अगेन एस सिबलिंग्स। 

67
00:05:50,600 --> 00:05:54,240
विष्णु, भगवान की राम अवतार और 
रावण और कुंभकर्ण के वध की स्टोरी

68
00:05:54,240 --> 00:05:59,440
हमें पता है हमारी दूसरी कहानी 
में हमने हाल ही में सुना भी है। 

69
00:05:59,560 --> 00:06:05,160
फिर आया द्वापर युग जय बने 
शिशुपाल विजय बने दंतवकर दिस टाइम

70
00:06:05,160 --> 00:06:09,480
बोर्न एस कज़िन्स। 
महाभारत काल में घटे राजसूया यज्ञ

71
00:06:09,480 --> 00:06:13,120
में सबके सामने शिशुपाल कृष्ण की 
निंदा करता रहा। 

72
00:06:13,760 --> 00:06:18,640
कृष्ण ने शिशुपाल की एक एक करके 
100 गलतियाँ माफ़ की, पर जैसे ही 

73
00:06:18,640 --> 00:06:24,080
101 भी हुई, सुदर्शन चक्र घूमा और
एक पल में शिशुपाल का मस्तक धड़ 

74
00:06:24,080 --> 00:06:26,720
से अलग हो गया। 
जय। 

75
00:06:27,360 --> 00:06:33,480
श्राप से फाइनली मुक्त हुआ तीन 
जन्मोबाद तीन युगोंबाद फिर आया 

76
00:06:33,480 --> 00:06:38,120
दंतवक्र वो एक युद्ध में भगवान 
कृष्ण के पीछे गदा लेकर भागा। 

77
00:06:39,520 --> 00:06:44,280
भगवान कृष्ण ने उसे टक्कर दी 
सामने से और एक घुमाव में उसकी 

78
00:06:44,280 --> 00:06:47,000
गदा तोड़ दी। 
और दूसरे वार में अपनी कथा से 

79
00:06:47,000 --> 00:06:50,520
उसका हृदय तोड़ दिया और इस तरह से
विजय भी मुक्त हुआ। 

80
00:06:50,720 --> 00:06:55,720
तीन युगवार जैसे राम और कृष्ण 
भगवान को एक लिनेयज है, विष्णु के

81
00:06:55,720 --> 00:06:58,600
अवतार हैं। 
वैसे ही उन स्टोरीज़ के शत्रुओं 

82
00:06:58,600 --> 00:07:02,840
का भी एक बैकग्राउंड और लिनेयज 
है, वो है बैकग्राउंड इन दो गेट 

83
00:07:02,840 --> 00:07:06,120
कीपर्स का। 
जय और विजय दोनों भगवान विष्णु के

84
00:07:06,120 --> 00:07:12,240
भक्त थे और विष्णु के सबसे करीब। 
लेकिन अहंकार आया और तीन जन्मों 

85
00:07:12,240 --> 00:07:18,160
तक भटकते रहे। 
हम कहीं भी हो, कोई भी हो, हमारे 

86
00:07:18,160 --> 00:07:21,000
कर्म घूम कर हमारे पास आ ही जाते 
हैं। 

87
00:07:21,720 --> 00:07:26,360
अच्छे और बुरे दोनों। 
आशा करता हूँ आपको ये कहानी अच्छी

88
00:07:26,360 --> 00:07:29,120
लगी अगली कहानी में जल्द मिलते 
हैं।

