1
00:00:00,480 --> 00:00:03,720
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:30,040 --> 00:00:33,920
कहानियों की शुरुआत करेंगे। 
रामायण के कालखंड से रामायण की 

3
00:00:33,920 --> 00:00:38,120
कहानी हम सब ने कई बार सुनी है। 
भगवान राम की कहानी हम सब को 

4
00:00:38,120 --> 00:00:42,200
मोस्टली पता है। 
बट क्या हम सब जानते हैं कि राम 

5
00:00:42,200 --> 00:00:44,360
को इतना महान बनाने वाले गुरु कौन
थे? 

6
00:00:45,200 --> 00:00:49,040
और दी सरप्राइजिंग फैक्ट दट। 
भगवान राम के दोनों गुरुओं में एक

7
00:00:49,040 --> 00:00:53,000
तरफ़ा दुश्मनी थी। 
ये है हमारी पहली कहानी। 

8
00:00:53,880 --> 00:00:57,840
चलो सुनते हैं भगवान राम के दो 
गुरु थे। 

9
00:00:58,320 --> 00:01:03,680
ऋषि वशिष्ठ और ऋषि विश्वामित्र जब
तक राम छोटे थे, तब वशिष्ठ ने 

10
00:01:03,680 --> 00:01:07,880
उन्हें धर्म की शिक्षा दी और जब 
थोड़े बड़े हुए तो शस्त्रों का 

11
00:01:07,880 --> 00:01:11,800
ज्ञान उन्हें मिला। 
विश्वामित्र से भगवान राम का पहला

12
00:01:11,800 --> 00:01:17,000
युद्ध राम का सीतामा से मिलना और 
उसके बाद का पूरा इतिहास। 

13
00:01:17,080 --> 00:01:20,720
ये सब शुरू हुआ विश्वामित्र से 
उनके एक डिसीजन से। 

14
00:01:21,440 --> 00:01:26,520
1 डिसीजन और फ़ोर साइट दट गेव उस 
दी बिग्गेस्ट स्टोरी ऑफ दी 

15
00:01:26,520 --> 00:01:31,880
यूनिवर्स रामायण में विश्वामित्र 
का योगदान इतना बड़ा है कि बिना 

16
00:01:31,880 --> 00:01:35,560
उनकी ये कहानी शायद शुरू ही नहीं 
होती, लेकिन। 

17
00:01:35,760 --> 00:01:40,600
मेजोरिटी लोगों को उनकी एक ही बात
याद है एक ऋषि जिनकी तपस्या में 

18
00:01:40,600 --> 00:01:42,400
इनका नाम की एक अफसरा ने भंग की 
थी। 

19
00:01:43,920 --> 00:01:47,320
पर ये उनकी बहुत बड़ी कहानी की एक
छोटी सी घटना है। 

20
00:01:48,000 --> 00:01:53,440
बाकी पूरी कहानी इज़ ए स्टफ ऑफ 
लिजेंड्स बट लेट एस बेक अप ए बिट।

21
00:01:54,680 --> 00:01:58,280
ये दोनों ऋषि मिले कैसे और दुश्मन
क्यों बन गए? 

22
00:02:00,160 --> 00:02:05,120
तो ये समझने से पहले समझना होगा। 
विश्वामित्र कौन थे एंड द बिट इस 

23
00:02:05,960 --> 00:02:09,759
विश्वामित्र न जन्म से ऋषि थे, न 
ही उनका नाम विश्वामित्र था। 

24
00:02:11,000 --> 00:02:13,520
विश्वामित्र का असली नाम था राजा 
कौशिक। 

25
00:02:14,440 --> 00:02:18,760
जैसे भगवान राम रघु वंश के थे, 
वैसे ही प्राचीन भारत में और एक 

26
00:02:18,760 --> 00:02:24,320
वंश था कुश कुश वंश में कुछ 
14,000 साल पहले एक राजा थे कौशिक

27
00:02:24,960 --> 00:02:29,560
बहुत प्रभावशाली राजा पूरे भारत 
के राजा या तो उनके फॉलोअर्स थे 

28
00:02:29,640 --> 00:02:33,560
या उनसे डरते थे। 
राजा कौशिक के पास एक बहुत बड़ा 

29
00:02:33,560 --> 00:02:38,840
और बहुत सम्पन्न राज्य था सम्पन्न
मीनिंग रिच, जिसमें 1,00,000 से 

30
00:02:38,840 --> 00:02:43,160
ज्यादा सैनिक 50,000 से ज्यादा 
घोड़े और लगभग उतने ही हाथी थे। 

31
00:02:44,080 --> 00:02:47,600
ये राजा अपनी इतनी बड़ी सेना के 
साथ आये दिन भारत दर्शन पर निकल 

32
00:02:47,600 --> 00:02:51,440
जाता। 
और ये सब जीस प्रदेश जाते, वो 

33
00:02:51,440 --> 00:02:56,320
प्रदेश उनका भव्य स्वागत करता। 
वहाँ के लोग और राजा उनका खूब आदर

34
00:02:56,320 --> 00:03:00,920
सत्कार करते और ये सेना अपने राजा
के साथ आगे बढ़ते जाती। 

35
00:03:02,600 --> 00:03:07,160
बट एव्रीवन हैज़ दैट वन मोमेंट 
व्हेन एवरीथिंग चेंजेस फॉर एवर। 

36
00:03:08,800 --> 00:03:12,720
कौशिक के जीवन में वो घटना हुई जब
ऐसे अनेक प्रदेश पार करते करते 

37
00:03:12,720 --> 00:03:17,480
उनकी सेना जहाँ पहुंची एक आश्रम 
के पास वो था एक छोटा सा आश्रम 

38
00:03:17,680 --> 00:03:23,120
ऋषि वशिष्ट का वशिष्ट कौशिक को 
देखकर बहुत खुश हुए और पूरी सेना 

39
00:03:23,120 --> 00:03:26,800
का स्वागत किया। 
छोटे डिस्कॅशंस हुए। 

40
00:03:27,440 --> 00:03:32,560
एंड देन कौशिक गॉड अप टु लीव पर 
जैसे ही उठे हैरान हो गए। 

41
00:03:32,560 --> 00:03:38,000
ये देख कर कि उनकी पूरी सेना के 
पास बहुत सारा खाना आ चुका है, वो

42
00:03:38,000 --> 00:03:42,880
सोच में पड़ गए कि ये कृषि उनके 
थोड़े से स्टूडेंट्स ये छोटे से 

43
00:03:42,880 --> 00:03:46,560
आश्रम में इतनी बड़ी सेना का खाना
कैसे बना पाए? 

44
00:03:46,640 --> 00:03:51,000
वो भी इतनी जल्दी क्यूरियोसिटी 
में जब उन्होंने ऋषि से पूछा तब 

45
00:03:51,000 --> 00:03:53,040
वशिष्ठ ने दिखाया दी मैजिक ही 
हेल्ड। 

46
00:03:54,480 --> 00:03:59,720
उन्होंने कौशिक को मिलाया अपनी 
शबला से शबला एक विश फुलफिलिंग 

47
00:03:59,720 --> 00:04:06,040
गाऊ थी कौशिक के मन में वो गाय 
देखकर एक ओबव्यस सा आइडिया आया कि

48
00:04:06,040 --> 00:04:09,600
अगर। 
ये गाय हमेशा उनके साथ रहे तो 

49
00:04:09,600 --> 00:04:11,600
उन्हें लाइफ में कभी कोई चिंता ही
नहीं होगी। 

50
00:04:12,640 --> 00:04:17,399
उन्होंने वशिष्ठ से शबला की मांग 
की और कहा कि एक गाय के बदले वो 

51
00:04:17,399 --> 00:04:22,240
100, 1000 गाय, हाथी रत सोना, 
रत्न सब देने को तैयार है। 

52
00:04:22,800 --> 00:04:25,560
पर वशिष्ठ ने नम्र होकर मना कर 
दिया। 

53
00:04:26,640 --> 00:04:30,320
कहा कि शबला उनकी तपस्या है और वो
उसे नहीं दे सकते। 

54
00:04:31,840 --> 00:04:35,920
कौशिक निगोशिएट करते रहे वशिष्ठ 
उनको मना करते रहे। 

55
00:04:35,920 --> 00:04:42,200
ये कुछ देर चलता रहा। 
फाइनली कौशिक राजा का पेशेंस खत्म

56
00:04:42,200 --> 00:04:46,480
हो गया। 
उनके जैसे इतने बड़े सम्राट को एक

57
00:04:46,480 --> 00:04:50,320
ऋषि इतनी बार मना कर रहा है। 
ये बात उनसे सहन नहीं हुई। 

58
00:04:51,280 --> 00:04:55,120
गुस्से में उन्होंने शबला को 
जबरदस्ती ले जाने की कोशिश की। 

59
00:04:56,880 --> 00:05:00,600
वशिष्ट इससे पहले कुछ रियेक्ट कर 
पाते या समझ पाते कि चल क्या रहा 

60
00:05:00,600 --> 00:05:03,920
है? 
शबला के आस पास से हजारों डिवाइन 

61
00:05:03,920 --> 00:05:07,560
वॉरियर्स निकले और कौशिक की तरफ़ 
दौड़ पड़े। 

62
00:05:08,880 --> 00:05:12,960
इतने युद्धा देखकर कौशिक की सेना 
भी अपने राजा को बचाने युद्ध में 

63
00:05:12,960 --> 00:05:18,280
कूद पड़ी। 
एक छोटा सा युद्ध हुआ और शबला और 

64
00:05:18,280 --> 00:05:21,960
वशिष्ठ की सेना ने। 
इतनी बड़ी आर्मी को आसानी से हरा 

65
00:05:21,960 --> 00:05:25,880
दिया। 
उस आर्मी में कौशिक के पुत्र भी 

66
00:05:25,880 --> 00:05:34,080
थे, वो भी मारे गए कौशिक और उनकी 
सेना सिर्फ देखते रह गई अपने 

67
00:05:34,080 --> 00:05:39,520
बेटों की मृत्यु अपनी इतनी बड़ी 
हार ये सब देख कर। 

68
00:05:39,960 --> 00:05:45,840
कौशिक गुस्सा बहुत हुए, बट कुछ कर
नहीं पाए, अपने बेटों की मृत्यु 

69
00:05:45,840 --> 00:05:52,120
का दुःख लेकर अपने राज्य लौट गए। 
भारत भ्रमण बीच में ही रुक गया। 

70
00:05:55,320 --> 00:05:58,720
कौशिक अपने राज्य लौट तो गए थे पर
उनके मन में। 

71
00:05:58,840 --> 00:06:04,120
हार का दुःख घूमता रहा। 
बात हमेशा पता थी कि वो वशिष्ठ को

72
00:06:04,120 --> 00:06:09,360
युद्ध में नहीं हरा सकते। 
शबोला क्या कर सकती थी ये 

73
00:06:09,360 --> 00:06:15,720
उन्होंने देख लिया था पर हार को 
डाइजेस्ट कर बिना कुछ किये रह भी 

74
00:06:15,720 --> 00:06:21,800
नहीं सकते थे। 
रास्ता एक ही बचा था ऋषि से लड़ाई

75
00:06:22,040 --> 00:06:27,760
ऋषि बनकर एक ऋषि की तरह तपस्या 
शंकर भगवान को प्रसन्न करना और 

76
00:06:27,760 --> 00:06:31,000
वरदान में कुछ ऐसा मांगना कि 
वशिष्ठ को हराया जा सके। 

77
00:06:32,160 --> 00:06:37,760
दी प्लान वास् सेट तो कौशिक निकल 
गए हिमालय की ओर और साल भर तपस्या

78
00:06:37,760 --> 00:06:39,760
की। 
तपस्या पूर्ण हुई। 

79
00:06:40,240 --> 00:06:45,200
भगवान शंकर प्रसन्न हुए बोले 
मांगो जो वरदान मांगना है कौशिक 

80
00:06:45,200 --> 00:06:51,960
झट से बोले डिवाइन वेपन्स वरदान 
पूर्ण हुआ और बिना रुके कौशिक 

81
00:06:51,960 --> 00:06:56,560
निकल पड़े वशिष्ठ से युद्ध करने 
अपने सारे डिवाइन वेपन्स लेकर। 

82
00:06:57,640 --> 00:06:59,760
और वशिष्ठ के आश्रम को तोड़ने 
लगे। 

83
00:07:00,280 --> 00:07:05,320
अपने इतने साल से बनाए हुए आश्रम 
को टूटता बिखरता देख वशिष्ठ ने 

84
00:07:05,320 --> 00:07:10,680
अपने अस्त्र निकाले और देखते ही 
देखते कौशिक के सारे वेपन्स 

85
00:07:10,680 --> 00:07:15,440
डिस्ट्रॉय हो गए। 
कौशिक एक बार फिर हार गए। 

86
00:07:16,840 --> 00:07:22,640
एक बार फिर अपमानित हो गए। 
कौशिक का गुस्सा अब और ज्यादा था।

87
00:07:23,640 --> 00:07:31,800
हार का बोझ और बढ़ गया था। 
इसी दौरान कहीं और दूर एक और राजा

88
00:07:32,600 --> 00:07:36,680
जिसका नाम था त्रिशंकु शायद थोड़ा
कौशिक जैसा ही था। 

89
00:07:37,720 --> 00:07:43,400
वो एक अलग ही विचार लेकर वशिष्ठ 
के पास आया उस वर्ग जाना चाहता था

90
00:07:44,120 --> 00:07:48,640
पर बिना मरे वशिष्ठ ने त्रिशंकु 
को समझाया कि ये पॉसिबल नहीं है 

91
00:07:48,800 --> 00:07:54,400
क्योंकि ये नेचर के अगेंस्ट है। 
त्रिशंकु यही इच्छा लेकर कौशिक के

92
00:07:54,400 --> 00:07:58,320
पास गया। 
सोचा राइवल्री का फायदा उठाया जाए

93
00:07:58,320 --> 00:08:04,320
एंड आई एक्स्पेक्टड कौशिक 
रेस्पॉन्डेड पोसिटिवेली एंड 

94
00:08:04,320 --> 00:08:09,840
प्रॉमिस कि वो स्वर्ग यहीं 
बनायेंगे स्वर्ग बनाने के लिए 

95
00:08:09,840 --> 00:08:14,480
कौशिक ने फिर एक बहुत बड़ा यज्ञ 
रचा, सारे देवी देवताओं को 

96
00:08:14,480 --> 00:08:19,040
इन्विटेशन भेजा। 
जब यज्ञ पूरा हुआ तो एस 

97
00:08:19,040 --> 00:08:24,600
एक्सपेक्टेड स्वर्ग नहीं बना, 
त्रिशंकु की इच्छा पूरी नहीं हो 

98
00:08:24,600 --> 00:08:28,760
पाई। 
ये हार किसी वॉर में नहीं थी, पर 

99
00:08:28,760 --> 00:08:34,640
सबके सामने सबकी नजर में एक बार 
फिर वशिष्ठ जीत गए जो उन्होंने 

100
00:08:34,640 --> 00:08:37,120
कहा था पॉसिबल नहीं। 
वो नहीं हो पाया। 

101
00:08:38,159 --> 00:08:45,840
कौशिक अब तीसरी बार हारे थे और अब
समझ गए थे कि इन्ट्रोस्पेक्शन और 

102
00:08:45,840 --> 00:08:50,800
खुद में बदलाव जरूरी है। 
वो जानते थे, वशिष्ट एक 

103
00:08:50,800 --> 00:08:54,360
ब्रह्मर्षि है। 
माने ऋषियों के सबसे सुपरलेटिव 

104
00:08:54,360 --> 00:08:59,720
ग्रेड। 
सो, अब दो ही ऑप्शंस थे या तो हार

105
00:08:59,720 --> 00:09:06,800
मान लो या तो ब्रह्मर्षि बन के 
वशिष्ठ युद्ध करो, कौशिक जैसा 

106
00:09:06,800 --> 00:09:11,720
इतना बड़ा राजा हार मानने से रहा,
सो निकल पड़े पुष्कर की और 

107
00:09:12,520 --> 00:09:16,320
ब्रह्मर्षि बनने। 
साक्षात ब्रह्मदेव को प्रसन्न 

108
00:09:16,320 --> 00:09:23,080
करने, बट डेस्टिनी अनफोल इन 
मिस्टीरियस वेज़ उनकी तपस्या भंग 

109
00:09:23,080 --> 00:09:28,840
करने पहुंची। 
मेनका कौशिक फेल इन लव और तपस्या 

110
00:09:28,840 --> 00:09:31,600
छोड़ कौशिक और मेनका साथ रहने 
लगे। 

111
00:09:32,880 --> 00:09:39,120
कैंपेनियनशिप में 10 साल गुजर गए 
और 1 दिन अचानक रीयलाइज हुआ कि 

112
00:09:39,120 --> 00:09:42,080
तपस्या अधूरी रह गई। 
मन भटक गया। 

113
00:09:43,360 --> 00:09:47,680
कौशिक ने मेनका को उनका इतिहास 
बताया और तपस्या की। 

114
00:09:47,680 --> 00:09:51,960
फिर से शुरुआत की इस बार इस 
डेडिकेशन से। 

115
00:09:52,800 --> 00:09:56,600
की मोह को जीतना है। 
इस बार तपस्या और गहरी थी। 

116
00:09:57,360 --> 00:10:03,320
अब कोई डिस्ट्रैक्शन नहीं था। 
फिर कुछ साल बीत गए और जैसे 1 दिन

117
00:10:03,320 --> 00:10:08,160
कौशिक को मेनका दिखी थी, वैसे ही 
1 दिन एक और अप्सरा दिखाई थी। 

118
00:10:09,280 --> 00:10:13,320
उसका नाम था रम्भा। 
रम्भा को खुद इंद्र ने भेजा था टु

119
00:10:13,320 --> 00:10:19,040
सी इफ वी कैन डिस्ट्रैक्ट कौशिक 
कौशिक की नजर जब रम्भा पर पड़ी तो

120
00:10:19,040 --> 00:10:25,160
मोह नहीं हुआ। 
कोई अट्रैक्शन नहीं हुआ बट उनकी 

121
00:10:25,160 --> 00:10:30,480
इतनी कड़ी तपस्या को रोक नहीं आई।
रम्भा पर बहुत भयंकर गुस्सा आया। 

122
00:10:30,560 --> 00:10:32,680
और गुस्से में रंभा को श्राप दे 
दिया। 

123
00:10:34,280 --> 00:10:40,240
जैसे ही श्राप दिया, समझ गए कि 
ब्रह्मर्षि बनना थोड़ा दूर था। 

124
00:10:41,280 --> 00:10:43,120
उनकी तपस्या अभी पूरी नहीं हुई 
थी। 

125
00:10:44,160 --> 00:10:49,440
मोह पर विजय अगर पा भी लिया होगा 
तो क्रोध पर पाना बचा था। 

126
00:10:50,400 --> 00:10:54,520
अब कौशिक समझ गए थे वशिष्ठ इतने 
पावरफुल क्यों हैं? 

127
00:10:54,640 --> 00:11:00,920
ये जान गए थे तपस्या और कड़ी करने
के लिए उन्होंने ले लिया मौन व्रत

128
00:11:01,760 --> 00:11:08,280
नशब्द नश्राप और एक घोर तपस्वी की
तरह ही वास् सर्वाइविंग ऑन 

129
00:11:08,280 --> 00:11:13,800
ऑक्सीजन ओनली। 
10 वर्ष बीत गए, तपस्या पूरी हुई।

130
00:11:14,040 --> 00:11:20,040
कौशिक ने जब आंख खोली तो ही 
रियलाइज्ड कि वह खुद से जीत चूके 

131
00:11:20,040 --> 00:11:23,280
हैं। 
जब 10 वर्षो बाद कौशिक ने पहली 

132
00:11:23,280 --> 00:11:27,560
बार खाना खाने के लिए हाथ बढ़ाया,
उसी क्षण? 

133
00:11:28,080 --> 00:11:33,840
एक ब्राह्मण आकर बोला, 
भिक्षामदेही कौशिक ने बिना झिझक 

134
00:11:34,080 --> 00:11:39,240
बिना कुछ बोले अपना सारा खाना उस 
ब्राह्मण को दे दिया। 

135
00:11:40,440 --> 00:11:43,400
तपस्या पूरी हुई। 
यह देखकर ब्रह्मदेव प्रकट हुए। 

136
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और ब्रह्मदेव ने डिक्लेर किया। 
कौशिक को ब्रह्मर्षि एग्ज़ैक्ट्ली

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लाइक वशिष्ठ ब्रह्मदेव ने बोला 
ब्रह्मर्षि, कौशिक मांगो, जो 

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वरदान मांगना है, पर कौशिक ने कोई
वरदान नहीं मांगा। 

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बस हाथ जोड़े विनती की ओर बोले। 
कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए, बस 

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वशिष्ठ उनका स्वीकार करें। 
कौशिक के ब्रह्मश्री बनने की खबर 

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कुछ दिन बाद वशिष्ठ तक पहुंची और 
वह बहुत खुश होकर कौशिक से मिलने 

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आए। 
उन्हें गले लगाया। 

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और कहा कि आज से ये पूरा जग 
उन्हें विश्वामित्र के नाम से 

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जानेगा। 
मीनिंग दी वर्ल्ड फ्रेंड एक राजा 

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जो तपस्या में बैठा था, बदला लेने
वो महाज्ञानी ऋषि बनकर आगे बढ़ा। 

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इन्हीं विश्वामित्र ने। 
गायत्री मंत्र की रचना की और आगे 

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कई ग्रंथ लिखे। 
आगे चलकर भगवान राम को कई पाठ 

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पढ़ाये। 
सही शक्ति वो है जो पहले खुद पर 

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विजय पाये, खुद में बदलाव देखे। 
जौहर और जीत। 

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दोनों में विनम्र रहो। 
ये थी कहानी भगवान राम के दो 

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गुरुओं की अगली कहानी के साथ जल 
मिलते हैं।

