1
00:00:00,520 --> 00:00:03,680
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:35,020 --> 00:00:38,980
जैसी हमारी विष्णु के द्वारपालों 
की मतलब जय और विजय की कहानी में 

3
00:00:38,980 --> 00:00:44,140
तीन युग थे, वैसे ही आज की कहानी 
भी मल्टिपल युगों में है। 

4
00:00:46,240 --> 00:00:51,880
पर जय और विजय जैसे पुनर्जन्म 
नहीं एक ही व्यक्ति जो युगों 

5
00:00:51,880 --> 00:00:58,520
युगों से जीवित है, चिरंजीवी है। 
हमारे ग्रंथों में ऐसे सात 

6
00:00:58,520 --> 00:01:03,240
चिरंजीवियों का उल्लेख है। 
चिरंजीवी मतलब वो लोग? 

7
00:01:03,720 --> 00:01:09,680
जो बहुत साल या बहुत सारे युग 
जीते हैं या जियेंगे नेससेरली 

8
00:01:09,680 --> 00:01:16,680
इम्मोर्टल नहीं ये सातों के कारण 
अलग अलग है जैसे अश्वत्थामा 

9
00:01:16,680 --> 00:01:20,400
चिरंजीवी है, नॉट एज़ ए बोन ऑर ए 
वरदान, बट एज़ ए पनिशमेंट। 

10
00:01:21,320 --> 00:01:24,800
वो जीते रहेंगे। 
एक ना ठीक होने वाली जख्म के साथ 

11
00:01:25,240 --> 00:01:29,920
ताकि उनकी सजा कभी कंप्लीट ना हो।
ये सजा उन्हें क्यों मिली? 

12
00:01:30,840 --> 00:01:32,640
ये कोई अगली कहानी में जरूर 
सुनेंगे। 

13
00:01:33,600 --> 00:01:39,720
पर इन सातों चिरंजीवियों में सबसे
यूनिक है परशुराम परशुराम भगवान 

14
00:01:39,720 --> 00:01:45,480
विष्णु के छठे अवतार हैं। 
सिक्स्थ, राम और कृष्ण से पहले और

15
00:01:45,480 --> 00:01:51,200
बहुत इंटरेस ये रामायण और महाभारत
दोनों इतिहास में सबस्टैन्शली 

16
00:01:51,200 --> 00:01:55,120
प्रेसेंट भी है। 
व्हाट मेक्स परशुराम मोर 

17
00:01:55,120 --> 00:01:59,720
इंटरेस्टिंग इस दट वो जन्मे एक 
ऋषि की तरह एक ऋषि के घर में। 

18
00:02:00,840 --> 00:02:03,360
पर उनके काफी कर्म क्षत्रिय वाले 
है। 

19
00:02:06,160 --> 00:02:10,479
विष्णु के राम अवतार का पर्पस था 
रावण का वध जो पूर्ण हुआ। 

20
00:02:11,520 --> 00:02:14,400
कृष्ण का पर्पस था धार्मिक बैलेंस
को रिस्टोर करना। 

21
00:02:14,560 --> 00:02:19,520
कंस का वध और महाभारत के बाकी 
सारे इवेंट्स से वो भी पूर्ण हुआ।

22
00:02:20,360 --> 00:02:25,560
इसीलिए राम और कृष्ण ने अपने शरीर
त्याग दिए लेकिन परशुराम का पर्पस

23
00:02:25,600 --> 00:02:30,360
अब भी बाकी है। 
इसीलिए माना जाता है की वो आज भी 

24
00:02:30,360 --> 00:02:33,840
हमारे बीच है। 
हिमालय के किसी कोने में तपस्या 

25
00:02:33,840 --> 00:02:39,320
में बैठे हैं जब परशुराम युवा थे।
और अपने पिता के साथ ऋषि विद्या 

26
00:02:39,320 --> 00:02:44,040
सीख रहे थे। 
तब हमारी पहली कहानी की तरह जैसे 

27
00:02:44,040 --> 00:02:47,120
वशिष्ठ और राजा कौशिक के बीच एक 
लड़ाई शुरू हुई थी। 

28
00:02:47,800 --> 00:02:53,000
बस वैसे ही उस वक्त के एक राजा 
कर्ता वीर अर्जुन और परशुराम के 

29
00:02:53,000 --> 00:02:58,320
पिता जमदग्नि के बीच शुरू हुई थी।
इस लड़ाई में उस राजा ने परशुराम 

30
00:02:58,320 --> 00:03:03,240
के पिता की हत्या कर दी। 
ऋषि बन रहे परशुराम ने उस दिन 

31
00:03:03,240 --> 00:03:09,040
शस्त्र उठाए और कसम खाली कि वो 
पूरी पृथ्वी से क्षत्रिय का विनाश

32
00:03:09,040 --> 00:03:13,760
कर देंगे और ये ऋषि बन गए खुद एक 
क्षत्रिय। 

33
00:03:15,200 --> 00:03:19,880
उनका गुस्सा इतना ज्यादा था कि 
उन्होंने अपने जीवनकाल में एक 

34
00:03:19,880 --> 00:03:23,160
नहीं दो नहीं 21 बार सारे 
क्षत्रिय को हराया। 

35
00:03:25,360 --> 00:03:33,240
फिर समय बीता, परशुराम गुरु बन गए
और मिले हमारे राम से कैन यू गेस 

36
00:03:33,320 --> 00:03:37,720
कहा। 
जब विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को

37
00:03:37,720 --> 00:03:40,480
अहल्या से मिलाने के बाद मिथिला 
ले गए। 

38
00:03:40,920 --> 00:03:47,480
राजा जनक की सभा में वहाँ जब 
भगवान राम ने जनक को मिला शिव 

39
00:03:47,480 --> 00:03:51,280
धनुष तोड़ दिया तब वहाँ पहुंचे 
परशुराम। 

40
00:03:52,280 --> 00:03:56,120
और गुस्से में राम से बोले कि कौन
है जिसने शिव धनुष तोड़ा है? 

41
00:03:56,880 --> 00:04:00,880
अगर वो सच में बलवान है तो मेरे 
भी धनुष को प्रतिंदिता लगाकर 

42
00:04:00,880 --> 00:04:05,200
दिखाया। 
जैसे राजाजनक के पास शिव धनुष था,

43
00:04:05,600 --> 00:04:08,320
वैसे ही परशुराम के हाथ में था 
विष्णु धनुष। 

44
00:04:10,960 --> 00:04:15,680
भगवान राम ने हम्बल होकर वो 
चैलेंज एक्सेप्ट किया, परशुराम से

45
00:04:15,680 --> 00:04:20,000
उनका धनुष मांगा और बड़ी आसानी से
उस पर प्रति जंचा लगा दी। 

46
00:04:21,240 --> 00:04:28,960
मतलब ही स्ट्रिंग दी बाउ राम का 
कमाल देखकर परशुराम समझ गए कि ये 

47
00:04:28,960 --> 00:04:34,440
विष्णु धनुष विष्णु के ही हाथ में
है और उनका गुस्सा शांत हुआ। 

48
00:04:35,800 --> 00:04:40,240
युग बदला और परशुराम का दर्शन 
इतिहास ने फिर किया। 

49
00:04:41,120 --> 00:04:46,880
महाभारत में महाभारत में पांडवों 
और कौरवों के गुरु थे द्रोणाचार्य

50
00:04:48,160 --> 00:04:54,520
और पिता भीष्म। 
और इन दोनों के गुरु परशुराम जब 

51
00:04:54,520 --> 00:04:58,880
परशुराम ने सारे क्षत्रिय को हरा 
दिया था तो उन्होंने धीरे धीरे 

52
00:04:58,880 --> 00:05:03,920
अपनी सारी वेल्थ और अपने पास का 
सब कुछ लोगों में और बाकी ऋषियों 

53
00:05:03,920 --> 00:05:08,960
में बांट दिया जब एक युवा 
द्रोणाचार्य उनके पास पहुंचे। 

54
00:05:09,200 --> 00:05:14,280
अपनी भेंट लेने तो परशुराम के पास
ऐसा कुछ भी नहीं था जो वो उन्हें 

55
00:05:14,280 --> 00:05:22,400
दे सके, सिवाय अपने नॉलेज के तो 
उन्होंने अपना डिवाइन वेपन्स का 

56
00:05:22,400 --> 00:05:27,600
ज्ञान शस्त्रविद्या युद्धविद्या 
ये सब द्रोणाचार्य को सिखाई और 

57
00:05:27,600 --> 00:05:31,200
द्रोणाचार्य बन गए। 
इतिहास के सबसे आइकॉनिक गुरु 

58
00:05:33,400 --> 00:05:37,440
भीष्म सिमिलरली वास ट्रेन्ड 
प्राइमेरिली बाय परशुराम। 

59
00:05:38,800 --> 00:05:41,720
उस वजह से भीष्म भी एक बहुत बड़े 
योद्धा थे। 

60
00:05:42,480 --> 00:05:47,520
इंटरेस इस गुरु शिष्य में एक डुएल
भी हुआ था। 

61
00:05:47,600 --> 00:05:52,440
एंड एक्सपेक्टेडली नो वॅन कुड विन
महाभारत में एक और रिफरेन्स है 

62
00:05:52,600 --> 00:05:59,600
परशुराम का इन रिलेशन टु कर्ण। 
कर्ण पहुंचे परशुराम से 

63
00:05:59,600 --> 00:06:03,240
विद्यालयने ताकि दुनिया के सबसे 
बड़े वॉरियर से युद्ध और शस्त्र 

64
00:06:03,240 --> 00:06:06,880
विद्या सीखी जाए। 
परशुराम ने कर्ण को सब कुछ 

65
00:06:06,880 --> 00:06:09,560
सिखाया। 
पर करण पहुंचे थे। 

66
00:06:09,600 --> 00:06:14,680
झूठ बोलकर ये बोलकर की वो 
क्षत्रिय नहीं है जबकि हम सब 

67
00:06:14,680 --> 00:06:18,320
जानते है। 
कर्ण वाज़ अक्षत्रिय जब ये झूठ 

68
00:06:18,320 --> 00:06:22,880
पकड़ा गया तो परशुराम ने कर्ण को 
श्राप दिया। 

69
00:06:24,280 --> 00:06:29,240
की युद्ध के सबसे इम्पोर्टेन्ट और
क्रूशियल मूवमेंट में कर्ण सभी 

70
00:06:29,240 --> 00:06:34,800
शस्त्रों का ज्ञान भूल जाएंगे। 
व्हिच बिकेम दी इनेविटेबल एंड फॉर

71
00:06:34,800 --> 00:06:40,040
कर्ण महाभारत युद्ध के बाद 
परशुराम एक गुरु की तरह भारत भर 

72
00:06:40,040 --> 00:06:43,080
घूमते रहे। 
लोकल लिजेंड्स कहते हैं। 

73
00:06:43,120 --> 00:06:47,960
कि कोंकण से केरला तक का सारा भाग
इंडियास, वेस्टर्न, कोस्टल लाइन, 

74
00:06:48,680 --> 00:06:52,080
ये सब परशुराम ने बसाया है। 
बिकॉज़ ऑफ़ विच? 

75
00:06:52,480 --> 00:06:54,240
इस भाग में उनके कुछ मन्दिर भी 
हैं। 

76
00:06:55,240 --> 00:06:58,280
उन्हें यहाँ एक गार्डियन डीईटी की
तरह पूजा जाता है। 

77
00:07:00,240 --> 00:07:04,680
युग बीत गए। 
पर माना जाता है कि परशुराम अब भी

78
00:07:04,680 --> 00:07:10,320
जीवित है। 
अपने पर्पस के लिए कहा जाता है कि

79
00:07:10,320 --> 00:07:13,520
विष्णु के परशुराम अवतार का 
अल्टीमेट पर्पस है। 

80
00:07:13,520 --> 00:07:21,560
कल की अवतार का गुरु बनना एस पर 
आवर टेक्स्ट्स इट विल बी परशुराम।

81
00:07:21,640 --> 00:07:25,600
जो कलयुग में सारे अनरिचेस 
फोर्सेज के अगेंस्ट कलकी को 

82
00:07:25,600 --> 00:07:31,280
ट्रेनिंग देंगे और जब कलयुग खत्म 
होगा तो आने वाले नए युग के 

83
00:07:31,280 --> 00:07:36,720
आर्किटेक्ट भी परशुराम होंगे। 
और जब तक ये पर्पस फुलफिल नहीं 

84
00:07:36,720 --> 00:07:41,840
होता वो जीवित है। 
परशुराम हमारे बीच जीवित है या 

85
00:07:41,840 --> 00:07:46,400
नहीं ये तो हम शायद हमारे मोर्टल 
लाइफ में पता नहीं कर पाएंगे। 

86
00:07:47,520 --> 00:07:51,840
बट उनका रामायण और महाभारत का 
प्रेसेंस एक बड़ा इंटरेस्टिंग 

87
00:07:51,840 --> 00:07:56,400
लेसन है। 
हिस्टोरिकल ऐक्यूरेसी का इमेजिन 

88
00:07:57,000 --> 00:08:04,040
तोसन्डस ऑफ़ इयर्स ऑफ़ टेक्स्ट पर
एवरी पीस फिट्स परफेक्टली युगों 

89
00:08:04,040 --> 00:08:08,600
से युगों तक अगली कहानी में जल्द 
मिलेंगे।

