1
00:00:00,480 --> 00:00:03,720
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:34,060 --> 00:00:37,940
ऐसा कहा जाता है कि 14 सालों के 
वनवास में लक्ष्मण कभी चैन की 

3
00:00:37,940 --> 00:00:42,380
नींद नहीं सो पाए। 
वो जागते रहे ताकि भगवान राम पर 

4
00:00:42,380 --> 00:00:47,680
उनकी नजर बनी रहे। 
न रावण, न इंद्रजीत, न उनके और 

5
00:00:47,680 --> 00:00:53,680
लंका के बीच का समुद्र, न राक्षस,
न युद्ध, न वनवास की कठिनाइयां। 

6
00:00:54,600 --> 00:00:59,440
इन दो भाइयों को कोई दूर नहीं कर 
पाया कि दूर हुए अपने ही वचन से। 

7
00:01:00,560 --> 00:01:04,280
जो छोटा भाई बिना पनिशमेंट सिर्फ 
अपने बड़े भाई के लिए वनवास में 

8
00:01:04,280 --> 00:01:08,000
निकल गया, 14 सालों तक जंगलों में
घूमता रहा। 

9
00:01:08,480 --> 00:01:12,360
उसने अपने प्राण उसी भाव में उसी 
बड़े भाई के लिए निस्वार्थ होकर 

10
00:01:12,360 --> 00:01:17,160
त्याग दिए। 
हम सब मोस्टली रामायण का अंत रावण

11
00:01:17,160 --> 00:01:19,760
के वध। 
और भगवान राम के राम राज्य 

12
00:01:19,760 --> 00:01:25,360
एस्टाब्लिश होने तक जानते है हाउ 
मेनी ऑफ एस नो कि भगवान राम और 

13
00:01:25,360 --> 00:01:28,200
लक्ष्मण ने अपना शरीर कैसे और 
क्यों त्याग दिया? 

14
00:01:29,040 --> 00:01:32,960
हाउ मेनी ऑफ एस नो कि लक्ष्मण का 
छोटे भाई की तरह लिया हुआ एक 

15
00:01:32,960 --> 00:01:36,120
डिसीजन? 
वुड मीन उनका खुद का अंत। 

16
00:01:38,080 --> 00:01:44,800
आज की कहानी रामायण के उस अंत की 
ये वो समय था जब राम राज्य 

17
00:01:44,800 --> 00:01:49,520
एस्टब्लिश हो चुका था। 
शायद आज जहाँ राम मंदिर खड़ा है 

18
00:01:49,920 --> 00:01:54,800
वहीं कहीं आसपास उसी अयोध्या में 
राजा राम और सूर्यवंश का एक बहुत 

19
00:01:54,800 --> 00:01:58,800
बड़ा महल होगा। 
कहा जाता है इस दौर में अयोध्या 

20
00:01:58,800 --> 00:02:05,240
में और पूरे भारतवर्ष में सुख था,
सब संतुष्ट थे, हेल्दी थे, कहीं 

21
00:02:05,240 --> 00:02:10,280
कोई भूखा नहीं था, कहीं कोई दुखी 
नहीं था, ना कोई संकट था, ना 

22
00:02:10,280 --> 00:02:16,200
राज्य के सामने कोई चुनौती। 
जब विश्वामित्र पहली बार युवा राम

23
00:02:16,200 --> 00:02:20,360
और लक्ष्मण को अपने साथ 
सिद्धाश्रम लेकर गए थे, तब चलते 

24
00:02:20,360 --> 00:02:24,560
चलते उन्होंने दोनों भाइयों को 
राजधर्म और राजा होने का मतलब 

25
00:02:24,560 --> 00:02:28,960
बताया था। 
विश्वामित्र ने कहा था कि राजा वो

26
00:02:29,720 --> 00:02:33,520
जो अपनी प्रजा, अपने प्रांत के 
लिए जो सही है वो करे। 

27
00:02:34,680 --> 00:02:39,360
अगर वो निर्णय कठोर लगे या 
कंट्रोवर्शियल लगे तो भी सही पर 

28
00:02:39,360 --> 00:02:43,360
एक राजा का हर निर्णय प्रजा और 
धर्म के लिए होना चाहिए। 

29
00:02:45,560 --> 00:02:50,800
राम राज्य इसी नीव पर खड़ा था। 
सोशल हारमनी एंड धर्म अबव 

30
00:02:50,800 --> 00:02:56,800
एवरीथिंग इवन। 
अबव पर्सनल सैक्रिफ़ाइस इसी नीव 

31
00:02:56,800 --> 00:02:59,320
पर भगवान राम को सीता मा को 
त्यागना पड़ा। 

32
00:03:00,520 --> 00:03:03,000
लव और कुश को अपने से दूर रखना 
पड़ा। 

33
00:03:04,080 --> 00:03:08,560
इसी नीव पर लक्ष्मण अब भी राम के 
साथ हर पल निष्ठा में खड़े थे। 

34
00:03:09,880 --> 00:03:13,640
कुछ साल ऐसे ही बीत गए। 
और फिर भगवान राम ने 1 दिन 

35
00:03:14,080 --> 00:03:19,760
अयोध्या में अश्वमेध यज्ञ रचा। 
उस यज्ञ में दूर दूर से लोग आए और

36
00:03:19,760 --> 00:03:25,080
ऋषि वाल्मीकि के साथ आए दो युवा 
जिन्होंने वाल्मीकि ने लिखी 

37
00:03:25,080 --> 00:03:30,840
रामायण मतलब भगवान राम की कहानी 
पूरी सभा के सामने सुनाई भरत। 

38
00:03:31,080 --> 00:03:36,880
लक्ष्मण, शत्रुघ्न, ऋषि वशिष्ट। 
पूरी सभा इन दो बच्चों ने सुनाई 

39
00:03:36,880 --> 00:03:41,080
हुई कहानी में मंत्रमुग्ध हो गए। 
सबकी आँखें भर आई। 

40
00:03:42,560 --> 00:03:46,600
कहानी जैसे चली थी। 
राम समझ गए थे कि ये उन्हीं के 

41
00:03:46,600 --> 00:03:52,600
बेटे हैं लव और खुश बेटे। 
जो अपने पिता की कहानी बता रहे 

42
00:03:52,600 --> 00:03:56,520
हैं। 
बड़े गर्व से भगवान राम अपने 

43
00:03:56,520 --> 00:04:02,880
बेटों से पहली बार मिले एक इतना 
आदर्श राजा राजधर्म के लिए अपनी 

44
00:04:02,880 --> 00:04:05,080
पत्नी अपने बेटों से दूर हो गया 
था। 

45
00:04:06,520 --> 00:04:09,880
उस वक्त के राजाओं के लिए एक से 
ज्यादा विवाह करना आम बात थी। 

46
00:04:11,000 --> 00:04:16,040
राम के पिता दशरथ की भी तीन 
पत्नियां थी पर राम सिर्फ सीता के

47
00:04:16,040 --> 00:04:19,440
लिए थे और सीता माँ सिर्फ उनके 
लिए। 

48
00:04:21,399 --> 00:04:26,840
अपने बेटों को देख कर राम खुश 
बहुत हुए होंगे पर वो खुशी ज्यादा

49
00:04:26,840 --> 00:04:31,880
देर टिकने वाली नहीं थी। 
कुछ देर बाद उसी सभा में सीता माँ

50
00:04:31,880 --> 00:04:35,080
आई। 
जिन लोगों ने उन पर आरोप लगाए थे,

51
00:04:35,280 --> 00:04:40,600
लांछन लगाए थे, उन्हीं के सामने 
एक आखिरी बार धरती माँ से बोली की

52
00:04:40,600 --> 00:04:45,360
अगर उन्होंने सच में सिर्फ और 
सिर्फ राम का विचार किया है, अगर 

53
00:04:45,360 --> 00:04:48,000
वो सिर्फ और सिर्फ भगवान राम की 
है। 

54
00:04:49,040 --> 00:04:56,200
तो ये धरती उन्हें संभाले क्षण भर
में इससे पहले कोई कुछ समझ पाता 

55
00:04:57,200 --> 00:05:03,880
धरती ने अपना सीना खोला और सीता 
माँ हमेशा हमेशा के लिए उनके अंदर

56
00:05:03,880 --> 00:05:10,160
समा गई। 
राम राज्य प्रस्थापित करने वाला 

57
00:05:10,480 --> 00:05:16,560
समुद्र पार कर रावण का वध करने 
वाला इतना बलवान राजा फूट फूट कर 

58
00:05:16,560 --> 00:05:24,640
रोने लगा पर राम के जीवन का दुःख 
अभी खत्म नहीं हुआ था। 

59
00:05:27,080 --> 00:05:31,600
कुछ और समय बीता। 
लव और कुश अपने पिता के साथ 

60
00:05:31,600 --> 00:05:35,600
अयोध्या में रहने लगे। 
शुद्ध विद्या, राजधर्म, 

61
00:05:35,800 --> 00:05:41,320
एडमिनिस्ट्रेशन सब सीखने लगे एंड 
दी लास्ट ट्रेजडी हैप्पेनेड 

62
00:05:42,640 --> 00:05:48,280
अनेक्सपेक्टेडली। 
1 दिन अयोध्या में एक तपस्वी आए। 

63
00:05:49,360 --> 00:05:52,120
उन्हें देखकर हर किसी में 
क्यूरियोसिटी सी थी। 

64
00:05:53,320 --> 00:05:56,000
वो कोई साधारण ऋषि या तपस्वी नहीं
लग रहे थे। 

65
00:05:57,040 --> 00:06:02,080
उनमें कुछ अलग बात थी। 
उन्होंने सीधे लक्ष्मण को ढूंढा 

66
00:06:02,080 --> 00:06:06,120
और बड़े अथॉरिटी के साथ कहा कि 
उन्हें राम से मिलना है। 

67
00:06:07,120 --> 00:06:11,280
जब लक्ष्मण उन्हें राम के पास ले 
गए तो वो राम को उसी अथॉरिटी से 

68
00:06:11,280 --> 00:06:16,320
बोले की मैं आपसे अकेले में बात 
करना चाहता हूँ और ऐसी जगह जहाँ 

69
00:06:16,320 --> 00:06:20,080
हमें कोई सुन ना सके। 
अगर हमें बात करते वक्त किसी ने 

70
00:06:20,080 --> 00:06:24,600
सुना या बीच में रोका तो आपको एक 
राजा होने की खातिर। 

71
00:06:25,120 --> 00:06:30,480
उसे मृत्यु दंड देना पड़ेगा। 
भगवान राम ने वचन दिया और जिन पर 

72
00:06:30,480 --> 00:06:35,080
वो सबसे ज्यादा विश्वास करते थे 
उस लक्ष्मण को देखरेख करने को 

73
00:06:35,080 --> 00:06:37,880
कहा। 
वो ऋषि और राम महल के किसी कमरे 

74
00:06:37,880 --> 00:06:43,640
में चले गए और लक्ष्मण निगरानी 
में लग गए जब राम और वो तपस्वी 

75
00:06:43,640 --> 00:06:49,840
बातें कर रहे थे। 
तो पैरलली एक ऋषि दुर्वासा जो 

76
00:06:49,840 --> 00:06:53,400
अपने बहुत एक्स्ट्रीम क्रोध के 
लिए माने जाते हैं, वो भी महल में

77
00:06:53,400 --> 00:06:58,520
आए ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगे की 
मुझे अब भी राम से मिलना है। 

78
00:06:59,440 --> 00:07:04,040
लक्ष्मण ने उनके सामने हाथ जोड़े,
विनम्रता से प्रणाम किया और विनती

79
00:07:04,040 --> 00:07:08,320
की। 
की बस वो थोड़ी देर रुक जाए पर हर

80
00:07:08,320 --> 00:07:10,600
पल दूर्वास का गुस्सा बढ़ते जा 
रहा था। 

81
00:07:11,480 --> 00:07:15,120
वो महल में घूमते घूमते राम को 
ढूंढ़ते ढूंढ़ते ज़ोर ज़ोर से 

82
00:07:15,120 --> 00:07:19,120
चिल्ला रहे थे। 
आखिर उन्होंने लक्ष्मण को चेतावनी

83
00:07:19,120 --> 00:07:23,040
दी कहा की अगर उन्हें अब भी राम 
से नहीं मिलाया। 

84
00:07:23,120 --> 00:07:28,000
तो पूरी अयोध्या और राम के वंश को
श्राप दे देंगे और सब राह कर 

85
00:07:28,000 --> 00:07:32,280
देंगे। 
लक्ष्मण के सामने अब दो रास्ते 

86
00:07:32,280 --> 00:07:36,320
थे। 
एक तरफ उनका अपना जीवन और दूसरी 

87
00:07:36,320 --> 00:07:41,240
तरफ पूरी अयोध्या का विनाश। 
उन्होंने एक पल भी देरी नहीं की। 

88
00:07:41,920 --> 00:07:47,480
उनके लिए उनका त्याग छोटा था और 
अयोध्या का हित बहुत बड़ा। 

89
00:07:49,520 --> 00:07:53,200
उन्होंने झट से कमरे का दरवाजा 
खोला, राम और तपस्वी से क्षमा 

90
00:07:53,200 --> 00:07:55,920
मांगी और दूर्वासा ऋषि के आने की 
खबर राम को दी। 

91
00:07:57,480 --> 00:08:00,880
भगवान राम का दिल बैठ गया वो अब 
तक। 

92
00:08:01,160 --> 00:08:06,560
सीतामा के जाने से उभरे भी नहीं 
थे उन्हें ना दुर्भाषा ऋषि समझे 

93
00:08:07,560 --> 00:08:14,200
ना वो तपस्वी बस अपना छोटा भाई 
लक्ष्मण आँखों के सामने दिखा और 

94
00:08:14,200 --> 00:08:18,720
शायद सिर्फ अँधेरा। 
वो तपस्वी मुस्कुराए। 

95
00:08:19,680 --> 00:08:22,080
उनके अयोध्या आने का कारण सफल हो 
गया था। 

96
00:08:23,600 --> 00:08:30,840
ये तपस्वी कोई और नहीं साक्षात यम
थे दी गॉड ऑफ़ टाइम एंड डेथ हिज़ 

97
00:08:30,840 --> 00:08:34,520
अराइवल इन अयोध्या वास् एन 
इंडिकेशन कि भगवान राम के विष्णु 

98
00:08:34,520 --> 00:08:39,360
अवतार का पर्पस फुलफिल हो गया है।
भगवान राम ध्रुवसा से मिले। 

99
00:08:41,080 --> 00:08:45,680
और उनके जाते ही अपने मंत्रियों 
की सभा भरपाई पूरी सभा को जो घटा 

100
00:08:45,680 --> 00:08:50,360
वो बताया और लक्ष्मण को बुलाकर 
आँखों में आंसू लिए भगवान राम 

101
00:08:50,360 --> 00:08:56,480
बोले जाओ लक्ष्मण, मैं तुम्हारा 
त्याग करता हूँ धर्म की रक्षा और 

102
00:08:56,480 --> 00:09:00,960
अपने वचन को निभाने के लिए। 
मुझे तुम्हें त्यागना ही होगा। 

103
00:09:03,320 --> 00:09:09,880
त्याग जो मृत्यु के समान था 
लक्ष्मण बीइंग लक्ष्मण एक्सेप्टेड

104
00:09:09,880 --> 00:09:14,600
दी पनिशमेंट इन ए हार्टबीट कुछ 
नहीं बोले, किसी से नहीं मिले। 

105
00:09:15,680 --> 00:09:19,360
अपने बड़े भाई के चरण स्पर्श किए 
और निकल गए सरयू नदी की ओर। 

106
00:09:22,280 --> 00:09:25,960
एक योगी की तरह सरयू नदी में 
जलसमाध हिली। 

107
00:09:26,880 --> 00:09:34,400
लक्ष्मण नहीं रहे ना सीता माँ ना 
लक्ष्मण राम क्या करते हैं? 

108
00:09:37,320 --> 00:09:40,920
उन्होंने अपना राज्य कोसला, लव, 
कुश और लक्ष्मण के बच्चों में 

109
00:09:40,920 --> 00:09:44,720
बाँट दिया। 
भरत और शत्रुघ्न को राज्य की सारी

110
00:09:44,720 --> 00:09:50,080
जानकारी दी ताकि उनके बाद अयोध्या
और कोसला राज्य वैसे ही चले जैसा 

111
00:09:50,080 --> 00:09:54,200
था। 
फिर वो भी अपने छोटे भाई की तरह 

112
00:09:54,200 --> 00:10:00,240
उसी सरयू नदी में जलसमाति लेने 
चले गए जब राम नदी के तट पर 

113
00:10:00,240 --> 00:10:05,080
पहुंचे तो सारी अयोध्या उनके पीछे
थी और आकाश में साक्षात ब्रह्मदेव

114
00:10:05,720 --> 00:10:12,040
उनका स्वागत करने के लिए खड़े थे।
लक्ष्मण की ही तरह राम भी सरयू 

115
00:10:12,040 --> 00:10:18,440
में समा गए। 
राम, लक्ष्मण, सीता ये तीनो हमेशा

116
00:10:18,440 --> 00:10:20,640
एक दूसरे के लिए सैक्रिफ़ाइस करते
रहे। 

117
00:10:21,400 --> 00:10:25,840
धर्म का पालन करते रहे। 
हर चीज़, हर डिसीजन निस्वार्थ हो 

118
00:10:25,840 --> 00:10:32,720
कर लिया पल भर में। 
रामायण की पंक्तियाँ शायद यहीं 

119
00:10:32,720 --> 00:10:44,600
खत्म हो गई पर ये कहानी अमर है। 
दी स्टोरी लाइव्स ऑन फॉर एवर अगली

120
00:10:44,600 --> 00:10:45,760
कहानी में जल्द मिलते हैं।
