1
00:00:00,520 --> 00:00:03,680
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:34,060 --> 00:00:38,940
व्हॉट इफ़ आई टोल्ड यू कि थॉर्की 
हैमर के जैसा ही थंडरबोल्ट या 

3
00:00:38,940 --> 00:00:42,420
बिजली जैसा प्रहार करने वाला एक 
वेपन हमारे भी प्राणों में है। 

4
00:00:44,000 --> 00:00:48,480
एंड व्हाट इफ आई टोल्ड यू हम सब 
ने ये वेपन काफी बार देखा है। 

5
00:00:50,080 --> 00:00:53,440
नॉर्स गॉड थॉर की हैमर किस तरह से
अटैक करती है? 

6
00:00:53,640 --> 00:00:57,720
ये अब कॉमन नॉलेज है। 
ऐसा ही एक वेपन देवो के राजा 

7
00:00:57,720 --> 00:01:02,720
इन्द्र के पास भी है एंड यही वेपन
बहुत डिपिक्शन में दुर्गा देवी के

8
00:01:02,720 --> 00:01:09,040
हाथ में होता है। 
ये वेपन है व्र व्र एक तरफ बिजली 

9
00:01:09,040 --> 00:01:13,760
या थंडर बोल्ट की तरफ प्रहार या 
अटैक करता है, झटके में एनिमीज़ 

10
00:01:13,760 --> 00:01:18,800
की राख कर देता है, वहीं दूसरी 
तरफ वो पत्थर से भी ज्यादा कठोर 

11
00:01:18,800 --> 00:01:24,760
है इसलिए कभी टूट नहीं सकता। 
वज्र को अजेय कहा गया है। 

12
00:01:25,000 --> 00:01:29,360
मीनिंग इट्स इनविंसिबल। 
ये वज्र बना कैसे और क्यों? 

13
00:01:29,840 --> 00:01:32,400
इसकी कहानी एक अल्टीमेट 
सैक्रिफ़ाइस की कहानी है। 

14
00:01:33,120 --> 00:01:36,480
हमारे प्राणों में देवों और 
असुरों के बीच बहुत वार्स का 

15
00:01:36,480 --> 00:01:39,520
डिस्क्रिप्षन है। 
शास्त्रों के हिसाब से देव का 

16
00:01:39,520 --> 00:01:45,280
मतलब नेससेरली भगवान नहीं होता। 
देव वो होते हैं जो प्रकृति में 

17
00:01:45,280 --> 00:01:49,560
बैलेंस बनाए रखते हैं। 
हर एक देव की अलग अलग जिम्मेदारी 

18
00:01:49,560 --> 00:01:54,200
होती है, वैसे ही असुर नेससेरली 
डोंट मीन राक्षस। 

19
00:01:54,600 --> 00:01:59,160
क्या टीवी सीरियल्स में अजीब से 
दिखने वाले लोग इट्स मोर ए ट्रेट 

20
00:01:59,440 --> 00:02:04,080
ऑर ए कैरेक्टर। 
वो लोग जो सिर्फ पावर और ग्रिड से

21
00:02:04,080 --> 00:02:08,840
ड्राइवन होते हैं, जैसे हमारे 
रावण की कहानी में हमने समझा कि 

22
00:02:08,840 --> 00:02:15,720
रावण वास् ए ब्राह्मण ब्य बर्थ पर
ही वास् एन असुर ब्य कैरेक्टर एक 

23
00:02:15,720 --> 00:02:19,440
समय था, जब देवो और असुरों के बीच
एक बहुत बड़ा युद्ध शुरू हुआ। 

24
00:02:20,880 --> 00:02:26,040
इस युद्ध में असोरो का लीडर था। 
वृत्र वृत्र ने देवों को हराने के

25
00:02:26,040 --> 00:02:30,520
लिए और उनको डिसट्रैक्ट करने के 
लिए स्ट्रेटेजी के तौर पर कई 

26
00:02:30,520 --> 00:02:35,360
इलाकों में पानी रोक रखा था। 
जैसे आज हम डैम्स बनाते हैं और 

27
00:02:35,360 --> 00:02:38,920
पानी का फ्लो कंट्रोल करते हैं, 
वैसे ही वृत्र ने। 

28
00:02:39,120 --> 00:02:44,080
पानी का बहाव बंद कर दिया था। 
देव और मनुष्य सब परेशान हो गए 

29
00:02:44,080 --> 00:02:50,440
थे, हर जगह सूखा पड़ा था, लोग मर 
रहे थे, बेहाल हो रहे थे, हर जगह 

30
00:02:50,440 --> 00:02:55,440
दुःख ही दुःख था पर वृत नहार रहा 
था, न पानी बहने दे रहा था। 

31
00:02:56,320 --> 00:03:00,400
इन्द्र जो देवताओं के राजा है। 
उन्होंने भी बहुत कोशिश की वृत्त 

32
00:03:00,400 --> 00:03:05,080
को मनाने की, पर वो नहीं माना और 
इसी वजह से ये युद्ध बन गया। 

33
00:03:05,080 --> 00:03:11,000
एक बहुत बड़ा महायुद्ध वृत्त खुद 
बहुत बलवान भी था एंड टु टॉप इट। 

34
00:03:11,560 --> 00:03:15,560
उसे एक वरदान मिला था कि उसे कोई 
मेटल, आग या पानी या ऐसी कोई 

35
00:03:15,560 --> 00:03:20,400
शक्ति मार नहीं सकती। 
हर दिन देव हार रहे थे और वृत्त 

36
00:03:20,400 --> 00:03:25,160
और भी मजबूत होता जा रहा था। 
जीत के साथ असुरों की सेना में और

37
00:03:25,160 --> 00:03:28,440
लोग भर्ती हो रहे थे। 
पानी रुका ही था। 

38
00:03:29,680 --> 00:03:32,680
ये घमासान युद्ध रोज़ असुरों के 
फेवर में जा रहा था। 

39
00:03:33,800 --> 00:03:36,320
1 दिन एस दी अल्टीमेट डिफीट 
फरेन्द्र। 

40
00:03:36,760 --> 00:03:39,240
वृत्र ने इंद्र का सिंहासन भी छीन
लिया। 

41
00:03:41,280 --> 00:03:46,400
इतने दिन युद्ध में सिर्फ नुकसान 
देखकर 1 दिन इन्द्र की हिम्मत टूट

42
00:03:46,400 --> 00:03:50,080
गयी। 
देवों के राजा होने के बावजूद 

43
00:03:50,720 --> 00:03:55,200
पहली बार उन्होंने अपने आप को 
बिलकुल हेल्पलेस महसूस किया। 

44
00:03:55,280 --> 00:03:58,240
उन्हें लगा कि शायद स्वर्ग हमेशा 
के लिए खत्म हो जाएगा। 

45
00:03:59,160 --> 00:04:03,920
पृथ्वी हमेशा के लिए सूखी पड़ 
जाएगी और वो कुछ नहीं कर पाएंगे। 

46
00:04:06,400 --> 00:04:11,240
एस ए लास्ट रिसॉर्ट मदद मांगने 
बेचैनी में इंद्र गए भगवान विष्णु

47
00:04:11,240 --> 00:04:18,720
के पास और पूछा कि क्या करे? 
ऐसा क्या हो जिससे ये युद्ध जीता 

48
00:04:18,720 --> 00:04:23,680
जा सके? 
भगवान विष्णु ने पूरी कहानी सुनी 

49
00:04:24,080 --> 00:04:26,840
और इन्द्र को वृत के बारे में 
बताया। 

50
00:04:27,320 --> 00:04:33,280
उसके वरदान के बारे में बताया और 
बोले कि उसे हराना मुश्किल है पर 

51
00:04:33,280 --> 00:04:37,920
अगर एक नया शस्त्र बनाया जाए। 
जो कोई मेटल वुड या स्टोन से न 

52
00:04:37,920 --> 00:04:41,680
बना हो तो उसे हराना पॉसिबल हो 
सकता है। 

53
00:04:43,360 --> 00:04:48,560
ये सुनकर देव और निराश हो गए। 
सोचा अगर मेटल या वुड या स्टोन न 

54
00:04:48,560 --> 00:04:54,320
हो तो वेपन बनेगा कैसे? 
तब विष्णु ने एक सुझाव दिया। 

55
00:04:54,520 --> 00:05:00,320
ऑफ ए वेपन मेड विथ बोन्स, 
हड्डियों ऐसी हड्डियों जो किसी 

56
00:05:00,320 --> 00:05:04,840
महा तपस्वी और ब्रह्मर्षि की हो, 
जिनका सारा जीवन तपस्या में गया 

57
00:05:04,840 --> 00:05:08,640
हो, शरीर तेज और ब्रह्म विद्या से
भरा हो। 

58
00:05:10,920 --> 00:05:14,280
विष्णु भगवान के इस जवाब से देवों
में थोड़ी उम्मीद वापस आई। 

59
00:05:15,320 --> 00:05:20,280
पर रियलाइजेशन भी आया कि वो ऐसे 
किसी महातपस्वी को नहीं जानते और 

60
00:05:20,280 --> 00:05:24,760
अगर जानते भी हो, तो ऐसा कोई 
महातपस्वी जिसने अपना पूरा जीवन 

61
00:05:24,760 --> 00:05:29,200
तपस्या में झोंक दिया हो, वो एक 
वेपन के लिए अपना जीवन क्यों 

62
00:05:29,200 --> 00:05:34,280
त्याग करेगा? 
विष्णु भगवान इंद्र की उलझन समझ 

63
00:05:34,280 --> 00:05:37,640
गए थे। 
उन्होंने ऋषि दधी जीके बारे में 

64
00:05:37,640 --> 00:05:42,160
बताया। 
दधी जी एक ब्रह्मर्षि थे। 

65
00:05:42,960 --> 00:05:46,680
हमारी पहली कहानी में विश्वामित्र
और वशिष्ट भी ब्रह्मर्षि थे। 

66
00:05:46,840 --> 00:05:51,880
बस उन्हीं की तरह उन्हें न 
राजनीति में रुचि थी, न युद्ध 

67
00:05:51,880 --> 00:05:54,360
में। 
उन्होंने जीवन सरस्वती नदी के 

68
00:05:54,360 --> 00:06:00,160
किनारे तपस्या में लगा दिया था। 
कहा जाता है कि दधीची वेदिक ज्ञान

69
00:06:00,160 --> 00:06:04,560
के महान गुरु थे, एस्ट्रोनोमी और 
स्पिरिचुअलिटी के काफी सिद्धांतों

70
00:06:04,560 --> 00:06:09,240
में उनका योगदान था। 
दधीची का पूरा बैकग्राउंड सुनकर 

71
00:06:09,880 --> 00:06:14,280
सहमे हुए इन्द्र। 
और सारे देव पहुंचे उन ऋषि के पास

72
00:06:15,680 --> 00:06:17,600
और पहुँच कर युद्ध के बारे में 
बताया। 

73
00:06:18,360 --> 00:06:23,880
इन्द्र के शब्द थरथरा रहे थे। 
देवों के राजा की आवाज़ पहली बार 

74
00:06:23,880 --> 00:06:27,800
कमजोर थी। 
इनर कॉनफ्लिक्ट आवाज़ में साफ दिख

75
00:06:27,800 --> 00:06:30,880
रहा था किसी को उनकी हड्डियों 
मांग दा। 

76
00:06:30,960 --> 00:06:33,240
मतलब सीधे सीधे उनका जीवन मांगना 
है। 

77
00:06:34,280 --> 00:06:40,400
ये मुश्किल था पर कॉनफ्लिक्ट के 
साथ इंद्र ने दादी जी को बताया कि

78
00:06:40,400 --> 00:06:44,840
युद्ध में देव कैसे रोज़ हार रहे 
हैं और जीत की उम्मीद हर पल कम 

79
00:06:44,840 --> 00:06:48,560
होती जा रही है। 
फिर बताया उनका इंटरैक्शन विष्णु 

80
00:06:48,560 --> 00:06:53,400
भगवान से बस। 
यहाँ तक बात आते आते दधीची समझ गए

81
00:06:53,400 --> 00:06:56,120
थे कि ये सब उन्हें क्यों बताया 
जा रहा है? 

82
00:06:56,840 --> 00:07:00,200
वो ये भी समझ गए थे कि ये बात 
सिर्फ युद्ध में कौन जीतता है, 

83
00:07:00,200 --> 00:07:04,960
उसकी नहीं बल्कि धर्म की है। 
दी राइट साइड इट शुड ऑल्वेज़ विन 

84
00:07:06,840 --> 00:07:10,480
जब तक इंद्र कुछ आगे बोल पाते ऋषि
ने खुद कहा। 

85
00:07:11,160 --> 00:07:15,000
कि वो उनका शरीर त्याग करने के 
लिए तैयार हैं ताकि इंद्र को उनकी

86
00:07:15,000 --> 00:07:18,760
हड्डियाँ मिल सके। 
बस बोले कि उन्हें कुछ समय चाहिए 

87
00:07:19,720 --> 00:07:23,640
ताकि वो अपनी पूरी शक्ति, अपना 
लाइफ फोर्स अपने स्पाइनल कॉर्ड 

88
00:07:23,640 --> 00:07:26,200
में अपनी हड्डियों में केंद्रित 
कर सके। 

89
00:07:28,440 --> 00:07:32,920
दधीची का सैक्रिफ़ाइस देख कर 
देवताओं ने आदर में अपना सर 

90
00:07:32,920 --> 00:07:38,880
झुकाया, दधीजी गहन ध्यान में चले 
गए। 

91
00:07:40,360 --> 00:07:43,520
ये समय आश्रम में एक अलौकिक शांति
ले आया। 

92
00:07:44,400 --> 00:07:49,480
अगले कुछ दिनों तक उनके आश्रम से 
एक प्रकाश मंडल निकलता रहा। 

93
00:07:50,640 --> 00:07:54,360
जैसे उनकी तपस्या की सारी शक्ति 
अब शरीर के अंदर हड्डियों में 

94
00:07:54,360 --> 00:07:59,720
सिमट रही हो। 
अंत में जब समय सही लगा उन्होंने 

95
00:07:59,720 --> 00:08:05,600
अपनी आँखें बंद की, एक धीमी सी 
मुस्कान दी और इच्छा मृत्यु से 

96
00:08:06,080 --> 00:08:12,480
अपने प्राण त्याग दिए। 
कहा जाता है उस समय आश्रम में एक 

97
00:08:12,480 --> 00:08:15,920
ऐसी एनर्जी थी जैसे कभी किसी ने 
देखी ना हो। 

98
00:08:17,320 --> 00:08:22,880
उनका शरीर निश्चल था पर हड्डियों 
चमक रही थी जैसे उनमें अग्नि और 

99
00:08:22,880 --> 00:08:28,160
बिजली दोनों बंध हो। 
उनकी ये दिव्य हड्डियों लेकर 

100
00:08:28,440 --> 00:08:31,920
देवताओं ने और एक कृषि की मदद से 
वज्र बनाया। 

101
00:08:32,120 --> 00:08:36,960
जब वज्र बना और इंद्र ने पहली बार
उसे यूज़ किया तो ऐसा लगा था कि 

102
00:08:36,960 --> 00:08:40,200
जैसे पूरे यूनिवर्स की बिजली 
इन्द्र की मुठ्ठी में हो। 

103
00:08:41,480 --> 00:08:44,560
इन्द्र अब ये वज्र लेकर युद्ध में
वापस गए। 

104
00:08:44,800 --> 00:08:50,040
वृद्ध सामने था। 
अपनी पूरी सेना के साथ कॉन्फिडेंट

105
00:08:50,440 --> 00:08:54,800
कि उसे कोई हरा नहीं सकता। 
इंद्र ने वज्र से अटैक किया। 

106
00:08:55,680 --> 00:09:01,640
उनका हाथ जैसे ही वृत की ओर उठा 
आकाश चीरते हुए कई थंडरबोल्ट्स 

107
00:09:01,640 --> 00:09:04,600
निकले और वृत पल में ही राख हो 
गया। 

108
00:09:07,080 --> 00:09:11,040
एक इतना बड़ा प्रहार देखकर असुरों
ने अपनी हार मान ली। 

109
00:09:12,120 --> 00:09:22,200
नदियाँ बहने लगीं, देव जीत गए, 
स्वर्ग वापस मिला यही वज्र फिर बन

110
00:09:22,200 --> 00:09:24,320
गया इंद्रदेव का वेपन हमेशा के 
लिए। 

111
00:09:25,360 --> 00:09:28,560
और महिषासुर के वध के लिए 
इंद्रदेव ने यही वज्र दिया। 

112
00:09:28,560 --> 00:09:32,560
दुर्गा देवी को कितनी सरप्राइजिंग
बात है। 

113
00:09:32,960 --> 00:09:36,720
हमारे हर सिंबल के पीछे एक 
इंटरेस्टिंग सी कहानी है त्याग 

114
00:09:36,720 --> 00:09:44,160
की, हेरोइस्म की, ब्रवेरी की। 
वज्र को हिंदू धर्म में शक्ति और 

115
00:09:44,160 --> 00:09:48,400
जीत का प्रतीक माना जाता है और 
बुद्धिस्म में भी वज्र को एक 

116
00:09:48,400 --> 00:09:51,520
स्पिरिचुअल सिंबल ऑफ़ अनब्रेकेबल 
ट्रुथ माना जाता है। 

117
00:09:52,120 --> 00:09:56,840
बुद्धिस्म की एक शाखा वज्र एंड 
बुद्धिस्म इस नेम्ड आफ्टर दी वेपन

118
00:09:56,840 --> 00:10:01,640
वज्र ऋषि दधीचि की ये कहानी हम 
किस तरह देखे? 

119
00:10:02,080 --> 00:10:06,680
ये हम्पर है एक ऋषि जिन्होंने 
सैक्रिफ़ाइस कर दिया फॉर दी 

120
00:10:06,680 --> 00:10:11,640
ग्रेटर गुड ऑर प्रिपेरिंग 
यूरसेल्फ़ फॉर दी अल्टीमेट पर्पस 

121
00:10:14,280 --> 00:10:18,480
अगली बार दुर्गा देवी के हाथ में 
वज्र देखो तो दधीचि और उनके 

122
00:10:18,480 --> 00:10:23,160
सैक्रिफ़ाइस को जरूर याद करना। 
मिलते हैं अगली कहानी में जल्दी।

