1
00:00:00,480 --> 00:00:03,840
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है। 

2
00:00:32,320 --> 00:00:36,400
कंकर, कंकर में शंकर ये कहा जाता 
है हमारे शहर काशी के बारे में। 

3
00:00:37,640 --> 00:00:40,760
इस कहावत का ओरिजिन हमारे प्राणों
में ये है। 

4
00:00:40,840 --> 00:00:47,320
कि काशी धरती का पहला और सबसे 
पुराना शहर है और ये कि इसे खुद 

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00:00:47,320 --> 00:00:52,200
भगवान शंकर ने बसाया है। 
ऐसा कहा जाता है कि काशी भगवान 

6
00:00:52,200 --> 00:00:56,800
शंकर के त्रिशूल पर स्थित है। 
प्राणों में एक कन्वर्सेशन है 

7
00:00:57,360 --> 00:01:00,360
जहाँ भगवान शंकर पार्वती देवी से 
कहते हैं। 

8
00:01:00,440 --> 00:01:04,720
कि काशी दुनिया में उनकी सबसे 
फेवरिट जगह है और वो इस काशी को 

9
00:01:04,720 --> 00:01:09,200
कभी नहीं छोड़ेंगे। 
ऐसा कहा जाता है कि शंकर अब भी 

10
00:01:09,200 --> 00:01:15,160
वही बसते हैं इसलिए काशी का और एक
नाम है अविमुक्त एस इन दी सिटी 

11
00:01:15,160 --> 00:01:18,040
दट। 
इस नेवर फोरसकेन और एक नाम मतलब 

12
00:01:18,040 --> 00:01:20,320
रुद्रभासन मतलब जहाँ शिव बसते 
हैं। 

13
00:01:21,600 --> 00:01:27,840
और इसीलिए हम सबके लिए ये स्थान 
इतना पवित्र है पर इस कहानी को भी

14
00:01:28,040 --> 00:01:32,800
हर कहानी की तरह एक ट्विस्ट है। 
एक वक्त था जब भगवान शंकर को काशी

15
00:01:32,800 --> 00:01:37,080
छोड़नी पड़ी और फिर यहाँ लौटने के
लिए एफर्ट्स भी लेने पड़े। 

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00:01:38,160 --> 00:01:44,440
आज की कहानी इस रेरली हर्ट। 
एक एक्सेप्शन की एक समय था जब 

17
00:01:44,440 --> 00:01:48,200
भगवान शंकर ने काशी संभालने की 
जिम्मेदारी उनके एक चीफ फॉलोअर 

18
00:01:48,680 --> 00:01:52,560
निकुम को दी और खुद थोड़े दिन के 
लिए हिमालय चले गए। 

19
00:01:52,920 --> 00:01:58,160
तपस्या करने के लिए निकुम के 
अड्मिनिस्ट्रेशन में कुछ ऐसा हुआ।

20
00:01:58,600 --> 00:02:00,960
कि निकुम ने खुद ही काशी को श्राप
दे दिया। 

21
00:02:01,720 --> 00:02:06,320
ये श्राप था कि ये सोने से भी 
सुन्दर काशी 1 दिन बिना ह्यूमन्स 

22
00:02:06,320 --> 00:02:12,080
का टूटा खण्डर बन जाएगी। 
ये श्राप सुनते ही जनरली खुश और 

23
00:02:12,080 --> 00:02:14,600
शांत रहने वाले काशीवासियों में 
हड़बड़ मच गई। 

24
00:02:16,280 --> 00:02:19,360
बीमारियां फैलने लगी। 
और तकलीफें बढ़ती गई। 

25
00:02:21,040 --> 00:02:23,880
काशी की ये सिचुएशन देख कर सारे 
देव चिंतित हो गए। 

26
00:02:25,160 --> 00:02:30,640
भगवान शंकर भी चिंता में थे तो ये
सिचुएशन संभालने के लिए एक उपाय 

27
00:02:30,640 --> 00:02:34,920
के तौर पर सारे देव गए। 
एक राजा के पास उस राजा का नाम था

28
00:02:34,920 --> 00:02:39,640
रिपुंजय और उन्हें विनती की। 
कि वो काशी की ये दशा संभाले 

29
00:02:40,160 --> 00:02:43,520
रिपुन जै ने जड़ से हाँ कर दी पर 
एक कंडीशन रखी। 

30
00:02:44,840 --> 00:02:48,520
उन्होंने कहा कि देवों का काशी 
में होना देख रेख में बाधा डालता 

31
00:02:48,520 --> 00:02:52,040
है। 
लोग धर्म छोड़कर सिर्फ भक्ति करते

32
00:02:52,040 --> 00:02:56,040
हैं। 
कंडीशन ये थी कि सारे देव और 

33
00:02:56,040 --> 00:03:01,240
भगवान इन्क्लूडिंग भगवान शंकर 
काशी छोड़कर चले जाए और उन्हें 

34
00:03:01,240 --> 00:03:06,600
उनके हिसाब से काशी संभालने दे और
जब तक उनका राज्य सही चलता रहे, 

35
00:03:06,720 --> 00:03:10,000
देव वापस न आए। 
ये कंडीशन सुनकर भगवान शंकर बहुत 

36
00:03:10,000 --> 00:03:13,040
दुखी हुए पर सिचुएशन बहुत खराब 
थी। 

37
00:03:14,000 --> 00:03:16,440
और देवो को रेपुंजय पर भरोसा बहुत
था। 

38
00:03:18,120 --> 00:03:23,280
उन सब ने ये कंडीशन स्वीकार की और
काशी छोड़कर चले गए रेपुंजय राजा 

39
00:03:23,280 --> 00:03:27,520
का इसके बाद राज्याभिषेक हुआ और 
वो बन गए राजा दिवोदशक। 

40
00:03:28,360 --> 00:03:32,920
इनके नेतृत्व में काशी एक बार फिर
एक आइडियल राज्य बन गया। 

41
00:03:33,000 --> 00:03:39,120
एक बार फिर धर्म से भरा हुआ सारी 
बीमारियां धीरे धीरे दूर होती गई।

42
00:03:40,200 --> 00:03:43,320
निकुंभ के उस श्राप का असर धीरे 
धीरे कम होता गया। 

43
00:03:44,560 --> 00:03:47,480
रिपुंजय ने उस श्राप को मात दे 
दी। 

44
00:03:48,960 --> 00:03:52,360
काशी की सिचुएशन तो बदल रही थी पर
भगवान शंकर। 

45
00:03:52,480 --> 00:03:58,120
ने इस लाड़ डे राजा को मिस कर रहे
थे वापस आ नहीं सकते थे क्योंकि 

46
00:03:58,120 --> 00:04:02,720
राजा की कंडीशन स्वीकार की थी पर 
लोंगिंग इतनी ज्यादा थी की बाद 

47
00:04:02,720 --> 00:04:07,560
में शिव तरीके ढूंढने लगे की 
रिपुंजय को ट्रिक किया जाए और 

48
00:04:07,560 --> 00:04:11,880
काशी में वापस आया जाए। 
भगवान शंकर ने बहुत सोचा। 

49
00:04:11,960 --> 00:04:16,440
और एक पहली ट्रिक आजमाई। 
भगवान शंकर ने सबसे पहले 

50
00:04:16,440 --> 00:04:20,959
योगिनियों को भेजा काशी में 
डिस्टर्बेंस लाने के लिए अगर 

51
00:04:20,959 --> 00:04:24,520
डिस्टर्बेंस आता तो राजा की 
कंडीशन मानने की वजह नहीं बचती। 

52
00:04:25,160 --> 00:04:30,480
वो योगिनी जब काशी आई तो काशी की 
सुंदरता, शांति और पवित्रता देख 

53
00:04:30,480 --> 00:04:34,400
कर इतनी खुश हो गई। 
की डिस्टर्बेंस तो नहीं किया पर 

54
00:04:34,400 --> 00:04:37,920
वहीं सेटल हो गई। 
हमेशा के लिए शंकर भगवान ने फिर 

55
00:04:37,920 --> 00:04:40,880
ब्रह्मदेव से मदद मांगी। 
ब्रह्मदेव एक बूढ़े ब्राह्मण का 

56
00:04:40,880 --> 00:04:45,040
वेश लेकर रिपुंज्या के पास आए और 
उन्हें अश्वमेध यज्ञ करने के लिए 

57
00:04:45,040 --> 00:04:48,880
बोला। 
ये सोचकर कि अगर वो यज्ञ नहीं कर 

58
00:04:48,880 --> 00:04:53,560
पाए तो अंतरेष्ठ क्रियेट होगा। 
पर रिपुंज ने 10 अश्वमेध यज्ञ 

59
00:04:53,560 --> 00:04:59,480
किया, जो काशी का फेमस घाट है, जो
अक्सर हम फोटोस में देखते है, उसे

60
00:04:59,480 --> 00:05:03,400
10 अश्वमेध घाट कहा जाता है। 
वो इन्हीं रिपुंजय की वजह से 

61
00:05:03,720 --> 00:05:06,120
ब्रह्मदेव भी खुश होकर फिर यहीं 
बस गए। 

62
00:05:07,680 --> 00:05:11,520
शंकर भगवान अब तक। 
अपनी काशी को मिस कर ही रहे थे। 

63
00:05:12,640 --> 00:05:17,160
फिर शंकर भगवान ने अपनी बुद्धि के
देवता अपने बेटे गणेश को भेजा। 

64
00:05:18,480 --> 00:05:22,840
भगवान गणेश ने एक ज्योतिषी का भेस
लिया और धीरे धीरे राजा का भरोसा 

65
00:05:22,840 --> 00:05:27,160
जीता। 
भरोसा जीतने के बाद त्रिपुज से 

66
00:05:27,160 --> 00:05:30,440
कहा। 
की उनका काशी पर राज़ खत्म होने आ

67
00:05:30,440 --> 00:05:37,400
रहा है और एक भविष्यवाणी की की आज
से 18 दिन बाद एक ब्राह्मण आयेंगे

68
00:05:38,200 --> 00:05:40,280
जो राजा को मोक्ष का रास्ता 
दिखायेंगे। 

69
00:05:40,760 --> 00:05:44,560
थोड़े दिन बीते और जैसे भगवान 
गणेश ने बोला था विष्णु एक 

70
00:05:44,560 --> 00:05:47,880
ब्राह्मण के भेस में राजा के पास 
आये और राजा को सलाह दी। 

71
00:05:48,720 --> 00:05:54,000
कि राजा एक शिवलिंग प्रस्थापित 
करे, उसकी आराधना करें और अपनी 

72
00:05:54,000 --> 00:05:57,200
जिम्मेदारियां छोड़कर मोक्ष के 
लिए प्रिपेयर करें। 

73
00:05:57,640 --> 00:06:01,800
ज्योतिषिव बने भगवान गणेश और 
ब्राह्मण बने विष्णु पर भरोसा 

74
00:06:01,800 --> 00:06:06,920
करकर राजा ने ठीक वही किया, काशी 
में एक शिवलिंग बसाया। 

75
00:06:07,120 --> 00:06:11,800
इस शिवलिंग को दिवो देश भरा कहा 
जाता है और ये शिवलिंग अब भी काशी

76
00:06:11,800 --> 00:06:14,840
में है। 
कुछ दिन बाद भगवान शिव का एक 

77
00:06:14,840 --> 00:06:20,440
सेलेस्शियल रथ राजा को लेने आया 
और रिपुंज्या को मोक्ष मिला। 

78
00:06:20,760 --> 00:06:25,520
रिपुंज्या जाने के बाद शंकर भगवान
काशी में वापस आए और अब भी वही 

79
00:06:25,520 --> 00:06:27,880
है। 
दुनिया में जो भी सुंदर है, 

80
00:06:28,280 --> 00:06:34,720
पवित्र है, अच्छा है उस पर हर 
किसी की नजर होती है, कभी अच्छी, 

81
00:06:34,880 --> 00:06:42,080
कभी पूरी काशी को देखने, काशी में
बसने इतिहास से लेकर अब तक बार 

82
00:06:42,080 --> 00:06:49,880
बार लोग आए कुछ सीखने। 
कुछ देने और कुछ लूटने काशी ने सब

83
00:06:49,880 --> 00:06:56,760
देखा है, स्कॉलर्स भी और इनवेडर्स
भी और ये शहर अब भी उतना ही 

84
00:06:56,760 --> 00:07:00,960
महत्वपूर्ण है और जितना था और 
उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा। 

85
00:07:02,280 --> 00:07:07,000
काशी की ऐसी कई कहानियों हैं। 
काशी के बारे में कहा जाता है कि 

86
00:07:07,000 --> 00:07:12,120
काशी इतिहास से भी पहले की है। 
इट्स ओल्डर थान हिस्टरी ओल्डर थान

87
00:07:12,120 --> 00:07:17,400
ट्रेडिशन ओल्डर इवन थान लेजेंड 
अगली कहानी में जल्द मिलते हैं।

