1
00:00:00,480 --> 00:00:03,760
भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का 
स्वागत है क्नॉइस। 

2
00:00:34,240 --> 00:00:38,600
हम सब किसी न किसी पर कभी न कभी 
डिपेंड करते है, कभी गाइडेंस के 

3
00:00:38,600 --> 00:00:42,400
लिए, कभी डायरेक्शंस के लिए, कभी 
कोई और हेल्प या कभी पैसे। 

4
00:00:42,800 --> 00:00:46,840
कभी हमें ये हेल्प मिलती है। 
पर कभी कभी हमारी मदद करने वाले 

5
00:00:46,840 --> 00:00:48,880
अपनी परेशानियों में हमें भूल 
जाते हैं। 

6
00:00:50,320 --> 00:00:53,880
तो सवाल ये है कि हमारा असली साथी
कौन? 

7
00:00:55,240 --> 00:00:57,840
हम सबसे ज़्यादा किस पर डिपेंड कर
सकते हैं? 

8
00:00:58,480 --> 00:01:03,560
भगवान राम के वंश से राजा मानधवदा
की तरह आज और एक राजा की कहानी। 

9
00:01:04,080 --> 00:01:09,040
इन फैक्ट राजा के बेटे की प्राचीन
भारत में भगवान राम से कई साल 

10
00:01:09,040 --> 00:01:14,160
पहले एक राजा हुआ करते थे। 
उनका नाम था राजा दृष्ट। 

11
00:01:15,240 --> 00:01:19,960
उनके छह बेटे थे। 
इस वंश के हर राजा की तरह ये भी 

12
00:01:19,960 --> 00:01:22,200
एक बहुत सम्पन्न और आदरणीय राजा 
थे। 

13
00:01:23,160 --> 00:01:26,560
इनके राज्य में सब सूखी थे। 
सारे प्रांत के राजा राजा दृष्ट 

14
00:01:26,560 --> 00:01:30,560
का आदर करते थे। 
इस पौराणिक राजा के जीवन में सबसे

15
00:01:30,560 --> 00:01:35,240
इंटरेस्टिंग बात हुई जब वो वृद्ध 
हो गए और उन्होंने अपनी पूरी 

16
00:01:35,240 --> 00:01:37,520
संपत्ति अपने बेटों में बांटना 
शुरू किया। 

17
00:01:38,880 --> 00:01:42,880
राजा ने अपने सबसे बड़े सबसे पहले
बेटे को राज्य का राजा बनाया। 

18
00:01:44,040 --> 00:01:48,880
और बाकी चारों में किसी को प्रांत
दिए, किसी को पैसा पर। 

19
00:01:49,200 --> 00:01:54,240
इस इनहेरिटेंस के व्यवहार में 
उनका सबसे छोटा बेटा नाभाग खाली 

20
00:01:54,240 --> 00:01:58,120
हाथ रह गया। 
राजा ने उसे कुछ भी नहीं दिया। 

21
00:01:58,520 --> 00:02:03,080
ये सबसे छोटा बेटा नाभाग। 
बड़ा ही हम्बल शांत और पढ़ाकू 

22
00:02:03,080 --> 00:02:06,400
बेटा था। 
उसने ऋषियों से वेदों की शिक्षा 

23
00:02:06,400 --> 00:02:10,720
ली थी और वो बाकियों की तरह राज्य
या धन की चिंता नहीं करता था। 

24
00:02:12,160 --> 00:02:16,800
जहाँ उस वक्त के राजपुत्र अधिकार 
के पीछे भागते थे ना भाग अपना 

25
00:02:16,800 --> 00:02:21,680
वक्त ऋषियों के बीच बिताता। 
उसका मन हमेशा पढ़ाई में नॉलेज 

26
00:02:21,680 --> 00:02:26,480
गैदर करने में लगा रहता। 
कम उम्र का होने के बावजूद उसके 

27
00:02:26,480 --> 00:02:31,760
अंदर एक अलग सी गहराई थी। 
इसी तपस्वी की तरह उसे ना राज्य 

28
00:02:31,760 --> 00:02:33,600
का लोक था। 
नाही। 

29
00:02:33,600 --> 00:02:39,680
अपने भाइयों से इनहेरिटेंस के लिए
टकराने का मोटिवेशन फॉर हिं नॉलेज

30
00:02:39,840 --> 00:02:44,160
वास् एवरीथिंग। 
जब उसके पिता ने उसे कुछ नहीं 

31
00:02:44,160 --> 00:02:46,840
दिया तो उसने कोई क्वेश्चन नहीं 
किया। 

32
00:02:47,640 --> 00:02:51,280
सिर्फ पूछा कि उसे किस चीज़ की 
जिम्मेदारी लेनी चाहिए? 

33
00:02:51,720 --> 00:02:55,400
राजा दृष्ट? 
पता नहीं क्या जानते थे उन्होंने 

34
00:02:55,400 --> 00:03:00,040
अपने बेटे से राज्य छोड़कर? 
अपना समय ऋषियों के बीच उनकी सेवा

35
00:03:00,040 --> 00:03:05,560
में बिताने के लिए कहा। 
अपने पिता की आज्ञा मानकर उनका 

36
00:03:05,560 --> 00:03:10,800
सबसे छोटा बेटा नाभाग चल पड़ा। 
ऋषियों के आश्रम में आश्रम में 

37
00:03:10,800 --> 00:03:15,360
पहुँचकर अपने महल की राजपुत्र 
होने की लक्ज़रीस ना होने का 

38
00:03:15,760 --> 00:03:17,560
नाभाग को बहुत कुछ फर्क नहीं 
पड़ा। 

39
00:03:18,160 --> 00:03:20,960
वो आश्रम में भी उतना ही खुश था 
जितना महल में। 

40
00:03:21,600 --> 00:03:25,920
ऋषि दिन भर तपस्या करते, अलग अलग 
विधि करते और ना भाग उनकी सेवा 

41
00:03:25,920 --> 00:03:31,080
में लगा रहता, कभी लकड़ी तोड़कर 
लाता, कभी आश्रम साफ करता और जब 

42
00:03:31,080 --> 00:03:35,960
उसे कोई ऋषि विश्राम में मिलते तो
उनके पास बैठकर उनसे अलग अलग 

43
00:03:35,960 --> 00:03:40,720
विषयों पर सवाल करता। 
इसी रूटीन में कुछ महीने बीत गए 

44
00:03:41,560 --> 00:03:44,360
और कुछ दिनों बाद ऋषि ने एक बहुत 
बड़ा यज्ञ रचा। 

45
00:03:45,680 --> 00:03:50,280
ये यज्ञ कुछ ऐसा था कि कुछ महीने 
चलने वाला था जब आस पास के 

46
00:03:50,280 --> 00:03:53,040
प्रांतों को ये यज्ञ के बारे में 
पता चला। 

47
00:03:53,160 --> 00:03:57,240
तो उन्होंने अपनी अपनी तरफ से ढेर
सारा धन गाय ट्रेजर्स ऋषियों को 

48
00:03:57,240 --> 00:04:00,800
दान किया। 
सारी तैयारी हुई। 

49
00:04:01,560 --> 00:04:07,320
आश्रम में भारत भर से ऋषि आए और 
सब ने मिलकर 1 दिन यज्ञ की शुरुआत

50
00:04:07,320 --> 00:04:10,880
की। 
आश्रम के बीचों बीच अग्नि जलाकर 

51
00:04:10,960 --> 00:04:15,000
ये सारे ऋषि। 
अपने अपने मंत्र पढ़कर अग्नि को 

52
00:04:15,000 --> 00:04:18,720
अर्घ्य देते रहे। 
भगवान शिव की आराधना करते रहे। 

53
00:04:19,240 --> 00:04:22,240
हर एक चीज़ अग्नि के द्वार से शिव
को अर्पित करते रहे। 

54
00:04:22,960 --> 00:04:25,160
पूरे आश्रम में भक्ति का वातावरण 
था। 

55
00:04:26,120 --> 00:04:30,120
ऋषियों के मंत्र जाप से आस पास एक
अलग सी वाइब्रेशन सबको महसूस हो 

56
00:04:30,120 --> 00:04:32,840
रही थी। 
पर हर कहानी में ट्विस्ट तो होता 

57
00:04:32,840 --> 00:04:37,480
है। 
जब यज्ञ अपने अंतिम चरण पर आया तो

58
00:04:37,480 --> 00:04:43,160
टु एव्रीवन सरप्राइज़ सारे ऋषि एक
साथ ऋग्वेद का आखिरी श्लोक भूल 

59
00:04:43,160 --> 00:04:46,440
गए। 
अचानक सन्नाटा सा छा गया। 

60
00:04:47,200 --> 00:04:50,400
सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे इस 
आस में। 

61
00:04:51,160 --> 00:04:55,720
कि कोई एक ऋषि वो आखिरी श्लोक 
उच्चारण कर इस यज्ञ को पूरा 

62
00:04:55,720 --> 00:04:58,160
करेगा। 
पर सब चुप थे। 

63
00:04:59,160 --> 00:05:04,560
इस सन्नाटे में कुछ पल बीत गए। 
ऋषियों के चेहरे पर चिंता साफ 

64
00:05:04,560 --> 00:05:09,280
दिखाई दे रही थी। 
जब कोई कुछ नहीं बोला तो ना भाग 

65
00:05:09,480 --> 00:05:13,240
अपनी जगह से उठकर। 
शांति से यज्ञ की अग्नि की तरफ 

66
00:05:13,240 --> 00:05:19,480
आया अपना अर्घ्य अग्नि में अर्पित
कर उस आखरी श्लोक का उच्चारण 

67
00:05:19,480 --> 00:05:27,040
किया, यज्ञ खत्म हुआ। 
सफलता से सब ऋषियों में संतुष्टि 

68
00:05:27,040 --> 00:05:33,880
थी और उन्होंने खुश होकर। 
आया हुआ सारा धन गाय और बाकी सारे

69
00:05:33,880 --> 00:05:37,800
ट्रेजर्स ग्रैटिट्यूड के तौर पर 
नाभाग को दे दिए। 

70
00:05:38,080 --> 00:05:42,840
पर जैसे ही नाभाग ने हाथ पढ़ाया 
वो यज्ञ की अग्नि बूझ गई। 

71
00:05:43,520 --> 00:05:48,480
आश्रम में उस अग्नि का धुआँ ही 
धुआँ छा गया और उस गहरे धुंए के 

72
00:05:48,480 --> 00:05:55,360
पीछे से भगवान शिव प्रकट हुए और 
स्टर्नली नाभा को बोले ये सारा 

73
00:05:55,360 --> 00:05:58,400
दान यज्ञ में उन्हें अर्पण हुआ 
है। 

74
00:05:59,000 --> 00:06:05,560
ये दान उनका है, नाभा का नहीं, ये
दूसरी बार था कि नाभा के हाथों 

75
00:06:05,560 --> 00:06:09,240
फिर कुछ नहीं आया। 
पर पिछली बार की तरह ही नाभक को 

76
00:06:09,280 --> 00:06:12,960
इस बार भी कोई फर्क नहीं पड़ा। 
वो झट से भगवान शिव के पैर छूकर 

77
00:06:12,960 --> 00:06:18,720
बोला, महादेव आप सही कह रहे हैं, 
मेरा इस पर कोई अधिकार नहीं, ये 

78
00:06:18,720 --> 00:06:25,040
सब आप ही का है, कृपया आशीर्वाद 
दे उसका ये व्यवहार देख कर 

79
00:06:25,360 --> 00:06:29,240
नैचुरली भगवान शिव खुश हो गए। 
और वो सारा धन नाभाग को देकर चले 

80
00:06:29,240 --> 00:06:33,160
गए। 
कभी धन महल या किसी और चीज़ का 

81
00:06:33,160 --> 00:06:37,200
लोभ न करने वाला नाभाग अपने 
स्वभाव और नॉलेज से रिच हो गया। 

82
00:06:38,520 --> 00:06:42,600
कुछ महीनों बाद नाभाग का विवाह 
हुआ और उनके बेटे अम्बरीश ने आगे 

83
00:06:42,600 --> 00:06:47,120
चलकर अपना राज्य प्रस्थापित किया।
अपने पिता और दादा की तरह भक्ति 

84
00:06:47,120 --> 00:06:52,200
और राजधर्म दोनों का पालन किया। 
इंटरेस्टिंग बात ये है कि राजा 

85
00:06:52,200 --> 00:06:56,400
दृष्ट के वो बेटे जो धन लेकर 
इनहेरिटेंस के साथ जीवन में आगे 

86
00:06:56,400 --> 00:07:01,920
बढ़े वो इतिहास में कहीं खो गए 
लेकिन जीस नाभाग को कोई राज्य कोई

87
00:07:01,920 --> 00:07:05,080
इनहेरिटेंस नहीं मिला। 
वो अपने नॉलेज से। 

88
00:07:05,880 --> 00:07:07,840
हमारे प्राणों में आज भी जीवित 
है। 

89
00:07:08,200 --> 00:07:14,920
एक लेगेसी की तरह ज्ञान और आचरण 
ही समृद्धि लाता है और हमारा असली

90
00:07:14,920 --> 00:07:19,200
साथी ज्ञान ही होता है। 
अगली कहानी में जल्द मिलते हैं।

