1
00:00:02,040 --> 00:00:06,720
सेशिया में आप सबों की सलामती हो।
फसल और सच्चाई सेशिया के मार से 

2
00:00:06,800 --> 00:00:09,120
पहुंची। 
उसकी मामूली में से हम सब ने 

3
00:00:09,120 --> 00:00:13,720
पाया। 
यानी फसल पर फसल तो वह सबसे पहले 

4
00:00:14,080 --> 00:00:18,520
याकूब के नाम का मुखाग्फा 
प्रकाशन। 

5
00:00:19,000 --> 00:00:24,240
इब्रानी में यानी इब्रानी में 
हिब्रो में याकूब के नाम का मतलब 

6
00:00:24,240 --> 00:00:30,200
क्या है? 
तो पहला याकूब के नाम का शब्द है 

7
00:00:30,360 --> 00:00:38,840
युद्ध युद्ध है कुदा का हाथ, कुदा
का बुलंद हाथ? 

8
00:00:38,880 --> 00:00:45,080
बुलवंत हाथ फतेमंदी का हाथ यानी 
बेटा। 

9
00:00:45,800 --> 00:00:54,760
इसका मतलब है बेटा आयन का मतलब है
खुदा की यानी खुदा की सात आँखें 

10
00:00:54,760 --> 00:00:58,480
यानी सात रूहें और कौफ का मतलब 
है। 

11
00:00:59,720 --> 00:01:04,959
सुबह का चढ़ता हुआ सूरज अब सूरज 
का काम क्या है? 

12
00:01:05,000 --> 00:01:06,720
सूरज किस लिए है? 
फिर? 

13
00:01:06,720 --> 00:01:11,200
परमेश्वर ने कहा दिन को रात से 
अलग करने के लिए आकाश के अंतर में

14
00:01:11,200 --> 00:01:17,440
ज्योतियां हो और वह चिन्हों किसको
चिन्हों और। 

15
00:01:18,280 --> 00:01:29,240
नियत यानी निर्धारित तय हुए समूह 
और दिनों और वर्षों के कारण हो और

16
00:01:29,240 --> 00:01:35,800
वह ज्योतियां आकाश के अंतर में 
पृथ्वी पर प्रकाश देने वाले भी 

17
00:01:35,800 --> 00:01:44,160
ठहरे। 
पहले निशान चिन्ह और निर्धारित 

18
00:01:44,160 --> 00:01:52,040
समा दिन और वर्ष का कारण हो और 
फिर वो ज्योति आकाश के अंतर में 

19
00:01:52,040 --> 00:01:55,280
पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी 
ठहरें। 

20
00:01:56,600 --> 00:02:02,360
और वैसा ही हो गया। 
तब परमेश्वर ने दो बड़ी जोतियां 

21
00:02:02,360 --> 00:02:06,760
बनाई। 
उनमें से बड़ी ज्योति को दिन पर 

22
00:02:07,160 --> 00:02:13,080
प्रभुता करने के लिए और छोटी 
ज्योति को रात पर प्रभुता करने के

23
00:02:13,080 --> 00:02:19,680
लिए बनाया या। 
कभी खुदा ने एक कौम को किसी दूसरी

24
00:02:19,680 --> 00:02:27,280
कौम के बीच से निकालने का इरादा 
करके इम्तिहानो और निशानों और 

25
00:02:27,280 --> 00:02:33,000
मौजू और जंग और जोरावर हाथ और 
बुलंद। 

26
00:02:33,200 --> 00:02:41,240
बाजू जोरावर हाथ यानी बुलंद बाजू 
का मतलब है युद्ध और हौल नाक मंजू

27
00:02:42,000 --> 00:02:48,640
के वसीले से उनको अपनी खातिर 
बरगजीदा करने के लिए वो काम किए 

28
00:02:48,640 --> 00:02:53,840
जो खुदावन तुम्हारे खुदा ने। 
तुम्हारी आँखों के सामने मिस्र 

29
00:02:53,840 --> 00:03:01,720
में तुम्हारे लिए किए ठीक है, 
यानी कौफ कौफ का मतलब है निशान 

30
00:03:01,720 --> 00:03:06,280
दिखाना खुदा के हाथों के काम 
दिखाना। 

31
00:03:10,760 --> 00:03:20,440
और कौफ और बैथ बैथ है। 
बैथ का मतलब है खुदा का घर यानी 

32
00:03:20,440 --> 00:03:26,080
खुदा के घर का रोशन चिराग जाकूब 
के नाम का मतलब है इब्रानी में 

33
00:03:26,480 --> 00:03:30,400
यानी खुदा के घर का रोशन चिराग 
जीस पर। 

34
00:03:30,760 --> 00:03:37,840
चिराग मतलब सूरज जीस पर खुदा का 
हाथ है और निगाह है और जिसके 

35
00:03:38,080 --> 00:03:44,600
वसीले खुदा अपने हाथ के काम 
ज़ाहिर करता है यानी अपने हाथ के 

36
00:03:44,600 --> 00:03:51,040
कामों को निशानों को, मौजों को। 
ज़ाहिर करता है याकूब के नाम का 

37
00:03:53,160 --> 00:03:57,120
इजराइल मेरा पुत्र वर्ण मेरा जेठा
है। 

38
00:03:57,120 --> 00:04:04,480
यानी पहले युद्ध यानी अपना हाथ का
अपना बुलवंत हाथ का जब इजराइल 

39
00:04:04,480 --> 00:04:10,520
बालक था तब मैं। 
ने उससे प्रेम किया और अपने पुत्र

40
00:04:10,520 --> 00:04:16,519
को मिस्र से बुलाया, क्योंकि जिसे
खुदाबंद मोहब्बत रखता है, उसे 

41
00:04:16,519 --> 00:04:22,680
तंबी भी करता है और जीसको बेटा 
बना लेता है, उसके कोड़े भी लगाता

42
00:04:22,680 --> 00:04:25,880
है। 
अब इजराइल के नाम का मुक़ाजफा 

43
00:04:25,880 --> 00:04:32,360
इब्रानी में। 
युद्ध यानी खुदा का बुलंद बाजू 

44
00:04:32,480 --> 00:04:38,880
फतेमंदी का हाथ यानी बेटा यानी सो
मैं अपना हाथ बढ़ाऊंगा और मिस्टर 

45
00:04:38,880 --> 00:04:44,520
को उन सब अजायब से जो मैं उसमें 
करूँगा मुसीबत में। 

46
00:04:44,600 --> 00:04:48,520
डाल दूंगा। 
इसके बाद वो तुमको जाने देगा। 

47
00:04:48,960 --> 00:04:55,360
तब मैं मिसर को हाथ लगाऊंगा। 
यानी युद्ध लगाऊंगा और उसे बड़ी 

48
00:04:55,360 --> 00:05:04,160
बड़ी सजाएं देकर अपने लोगों बनी 
इजराइल के जत्थों को मुल के मिसर 

49
00:05:04,160 --> 00:05:09,600
से। 
निकाल लूँगा सो तू बनी इजरायल से 

50
00:05:09,600 --> 00:05:16,400
कह कि मैं खुदावन हूँ और मैं 
तुमको मिस्रियों के बोझों के नीचे

51
00:05:16,400 --> 00:05:21,520
से निकाल लूँगा और मैं तुमको उनकी
गुलामी से आजाद करूँगा और मैं 

52
00:05:21,520 --> 00:05:24,000
अपना हाथ बढ़ाकर यानी युद्ध 
बढ़ाकर। 

53
00:05:24,400 --> 00:05:28,600
और उनको बड़ी बड़ी सजाएं देकर 
तुमको रिहाई दूंगा। 

54
00:05:29,160 --> 00:05:35,600
दूसरा है शिम की जो पिक्टोग्राफी 
तस्वीर है वो है दांत और इसका 

55
00:05:35,600 --> 00:05:42,720
दांतों के साथ चबाकर खाना यानी 
खत्म करना यानी मिस्र को। 

56
00:05:44,280 --> 00:05:51,720
जिसमें इजराइल गुलाम था। 
उसको गुलामी से आजाद किया और खत्म

57
00:05:51,720 --> 00:06:00,040
किसको किया मिस्र को मिस्र की 
गुलामी को क्योंकि किताबे मुकद्दस

58
00:06:00,040 --> 00:06:02,360
ने फ्रिओन से कहा गया है कि 
मैंने। 

59
00:06:02,720 --> 00:06:08,560
इसलिए तुझे खड़ा किया कि तेरी वजह
से अपनी कुदरत ज़ाहिर करूँ और 

60
00:06:08,560 --> 00:06:13,120
मेरा नाम तमाम रोए। 
जमीन पर मशहूर हो बस वो जीस पर 

61
00:06:13,120 --> 00:06:18,800
चाहता है, रहम करता है और जिसे 
चाहता है उसे सख्त कर देता है। 

62
00:06:19,040 --> 00:06:24,240
सो खुदावन ने उस दिन इजराइलियों 
को मिस्रियों के हाथ से इस तरह 

63
00:06:24,280 --> 00:06:32,360
बचाया और इजराइलियों ने मिस्रियों
को समुंदर के किनारे मरे हुए पड़े

64
00:06:32,360 --> 00:06:38,440
देखा इसलिए की मैं उस रात मुल के 
मिस्र में से होकर गुजरूंगा और। 

65
00:06:38,800 --> 00:06:44,760
इंसान और हैवान के सब पेलटों को 
जो मुल्के मिसर में है मारूंगा 

66
00:06:44,760 --> 00:06:51,480
यानी क्षण करूँगा और मिसर के सारे
देवताओं को भी सजा दूंगा। 

67
00:06:51,480 --> 00:07:00,920
मैं खुदावन हूँ रैश का मतलब है 
आदमी का सिर इज्ज़त यानी मुखिया 

68
00:07:01,320 --> 00:07:08,640
मालिक लीडर सर बुलंद करना और 
खुदाबन तुमको सिर ठहराएगा यानी 

69
00:07:08,640 --> 00:07:15,360
लीडर यानी इज्जत देगा और याकूब 
यानी इजराइल एक आदमी है, आदमी का 

70
00:07:15,360 --> 00:07:17,920
सर मसीह है और मसीह का सिर खुदा 
है। 

71
00:07:18,560 --> 00:07:24,280
एल ऐफ़ का मतलब है खुदा एक है 
लामत का मतलब है खुदा चरवाहा है 

72
00:07:25,000 --> 00:07:33,640
इजरायल का जो इब्रानी तर्जमा है 
की खुदा अपने बुलंद हाथ से 

73
00:07:33,960 --> 00:07:41,640
मिस्रियों को खत्म करके। 
गुलामी से आज़ाद करवाएगा किसको 

74
00:07:41,760 --> 00:07:51,320
इजराइल को इजराइल को और उनकी 
अच्छे चरवाहे की तरह गल्ला बानी 

75
00:07:51,320 --> 00:07:54,120
करेगा? 
ये इजराइल का इब्रानी तर्ज़ुमा 

76
00:07:54,120 --> 00:07:58,080
है। 
खुदावन मेरा चौपान है, ये सुनेगा 

77
00:07:58,080 --> 00:08:05,120
अच्छा चरवाहा मैं हूँ तुझमें ए 
इजरायल मैं अपना जियाल ज़ाहिर 

78
00:08:05,120 --> 00:08:11,680
करूँगा और याकूब अकेला रह गया और 
पांव फटने के वक्त तक एक शख्स 

79
00:08:12,080 --> 00:08:20,000
वहाँ उससे कुश्ती लड़ता रहा। 
जब उसने देखा कि वो उस पर गालिब 

80
00:08:20,000 --> 00:08:26,720
नहीं होता तो उसकी रानी को अंदर 
की तरफ से छूआ और जाकूब की रानी 

81
00:08:26,720 --> 00:08:32,240
की नस उसके साथ कुश्ती करने में 
चढ़ गई और उसने कहा। 

82
00:08:32,360 --> 00:08:38,640
मुझे जाने दे क्योंकि पॉप फट चली।
याकूब ने कहा कि जब तक तू मुझे 

83
00:08:38,640 --> 00:08:41,520
बरकत ना दे, मैं तुझे जाने नहीं 
दूंगा। 

84
00:08:41,919 --> 00:08:45,000
तब उसने उससे पूछा कि तेरा क्या 
नाम है? 

85
00:08:45,280 --> 00:08:50,880
उसने जवाब दिया याकूब, उसने कहा। 
कि तेरा नाम आगे कोई याकूब नहीं 

86
00:08:50,880 --> 00:08:56,840
बल्कि इजराइल होगा क्योंकि तुने 
खुदा और आदमियों के साथ जोरा जमाई

87
00:08:57,120 --> 00:09:03,160
की और गालिब हुआ। 
तब याकूब ने उससे कहा कि मैं तेरी

88
00:09:03,160 --> 00:09:06,440
मेहनत करता हूँ कि तू? 
मुझे अपना नाम बता दे। 

89
00:09:06,440 --> 00:09:11,480
उसने कहा कि तू मेरा नाम क्यों 
पूछता है और उसने उसे वहाँ बरकरार

90
00:09:11,480 --> 00:09:19,520
दी और याकूब ने उस जगह का नाम 
फानिएल रखा और कहा कि मैंने खुदा 

91
00:09:19,520 --> 00:09:24,200
को रूबरू देखा। 
फानियल का इब्राहिम मतलब है कि 

92
00:09:24,200 --> 00:09:30,400
खुदा को रूबरू देखना तो भी मेरी 
जान बची रही फानियल का मतलब है 

93
00:09:30,400 --> 00:09:36,920
खुदा को रूबरू देखना। 
उसने रहम में अपने भाई की एड़ी 

94
00:09:36,920 --> 00:09:41,760
पकड़ी और वो अपनी। 
तवनाई के अय्या में खुदा से 

95
00:09:42,120 --> 00:09:46,680
कुश्ती लड़ा। 
हाँ वो रिश्ते से कुश्ती लड़ा और 

96
00:09:46,680 --> 00:09:53,240
गाली बहाया यानी जीत गया। 
उसने रोकर और ये कुश्ती कैसे लड़ी

97
00:09:53,600 --> 00:09:58,880
रोकर कैसे लड़ी रोकर मुन्नाजिद 
की। 

98
00:09:59,120 --> 00:10:08,120
उसने उसे बैत तेल को कहते हैं 
खुदा का घर बैत कहते हैं खुदा का 

99
00:10:08,120 --> 00:10:13,840
घर बैतेल इब्रानी में खुदा का घर 
बैतेल में पाया और वहाँ वो उसे हम

100
00:10:13,840 --> 00:10:19,200
कलम हुआ। 
यानी खुदाबंद रबल अफवाज़ यह वह 

101
00:10:19,360 --> 00:10:24,320
उसकी यादगार है। 
वस्तु अपनी खुदा की तरफ रजूला 

102
00:10:24,320 --> 00:10:29,520
नेकी और रास्ते पर कायम और हमेशा 
अपनी खुदा का उम्मीदवार है। 

103
00:10:29,920 --> 00:10:34,720
और एक मुद्दत के बाद यूँ हुआ कि 
मिस्टर का बादशाह मर गया। 

104
00:10:34,840 --> 00:10:39,920
और बनी इजराइल अपनी गुलामी के सबब
से आह भरने लगे। 

105
00:10:40,760 --> 00:10:46,760
क्या करने लगे, आह भरने लगे और 
रोए यानी खुदा से कुश्ती करने 

106
00:10:46,760 --> 00:10:50,840
लगे। 
रोए और उनका रोना जो उनकी गुलामी 

107
00:10:50,840 --> 00:10:58,040
के बहस्ता खुदा तक पहुंचा। 
खुदा ने उनका कराहना सुना और खुदा

108
00:10:58,040 --> 00:11:03,480
ने अपने अहद को जो अब्राहम और 
इज्जाक और याकूब के साथ था याद 

109
00:11:03,480 --> 00:11:08,760
किया और खुदा ने बनी इजरायल पर 
नजर की और उनके हाल को मालूम 

110
00:11:08,760 --> 00:11:11,240
किया। 
इसी तरह इसी तरह। 

111
00:11:11,520 --> 00:11:14,760
रूह भी हमारी कमजोरी में मदद करती
है। 

112
00:11:15,160 --> 00:11:20,280
जीस तौर से हमको दुआ मांगनी 
चाहिए, वो नहीं आती मगर रूह खुद 

113
00:11:20,360 --> 00:11:24,920
ऐसी आहें भर भर के हमारी शफात 
करती है। 

114
00:11:25,680 --> 00:11:30,280
यानी खुदा के साथ कुश्ती लड़ती 
है, जिनका बयान नहीं हो सकता। 

115
00:11:30,600 --> 00:11:35,360
रूहानी कुश्ती और दिलों का परखने 
वाला जानता है के रूह की क्या 

116
00:11:35,360 --> 00:11:40,640
नीयत है क्योंकि वो खुदा की मर्जी
के मुनाफ़े के मुकद्दशों की ससात 

117
00:11:40,640 --> 00:11:46,240
सिफारिश करता है और हमको मालूम है
कि सब चीजें। 

118
00:11:46,360 --> 00:11:49,920
मिलकर खुदा से मोहब्बत रखने वालों
के लिए भलाई पैदा करती है। 

119
00:11:49,920 --> 00:11:55,400
यानी उनके लिए जो खुदा के इरादे 
मुहाफिक बुलाये गए कौन है जो 

120
00:11:55,400 --> 00:11:58,760
मुजरिम ठहराएगा मसीह ये सू वो है 
जो मर गया। 

121
00:11:58,840 --> 00:12:04,200
बल्कि मर्दों में से जीभ उठा और 
खुदा की दाईनी तरफ है और हमारी 

122
00:12:04,280 --> 00:12:10,680
शफात भी करता है, तो रूह कौन है 
मसीह यशव जो हमारी शफात करता है, 

123
00:12:10,680 --> 00:12:16,200
खुदा से रूहानी कुश्ती लड़ता है 
हमारे लिए, क्योंकि मेरे। 

124
00:12:16,880 --> 00:12:24,640
खाने की जगह मेरी आहें, मेरे खाने
की जगह मेरी आयें और मेरा कराहना 

125
00:12:24,640 --> 00:12:32,600
पानी की तरह जारी है, मैं नईफ और 
मिहायत कुचला हुआ हूँ और दिल की 

126
00:12:32,840 --> 00:12:40,320
बेचैनी के सबब से कराहता रहा। 
ए खुदावन मेरी सारी तमन्ना तेरे 

127
00:12:40,320 --> 00:12:46,960
सामने और मेरा कराहना तुझसे छिपा 
नहीं ए खुदावन मेरी बातों पर कान 

128
00:12:46,960 --> 00:12:54,280
लगा मेरी आहों पर तवज्जो कर। 
मैं कराते कराते थक गया, मैं अपना

129
00:12:54,280 --> 00:13:01,840
पलंग आंसू से भिगोता हूँ, हर रात 
मेरा बिस्तर तैरता है उसने अपनी 

130
00:13:02,000 --> 00:13:07,560
बाशरियत के दिनों में ये सुमसीह 
ने अपनी बाशरियत के दिनों में जब 

131
00:13:07,560 --> 00:13:14,480
जमीन पर अपनी ज़िन्दगी। 
बसर कर रहे थे तो क्या हुआ ज़ोर 

132
00:13:14,480 --> 00:13:20,560
ज़ोर से पुकारकर और आंसू बहा 
बहाकर उसे दुआएं और इम्तिजाएं की 

133
00:13:20,560 --> 00:13:26,640
जो उसको मौत से बचा सकता था और 
खुदा तरस के सबब उसकी सुनेंगे और 

134
00:13:26,640 --> 00:13:33,520
बावजूद बेटा होने के उसने। 
दुख उठा उठाकर फर्माबरदारी सीखी 

135
00:13:33,600 --> 00:13:39,840
और कामिल बनकर अपने सब फरमान 
वरदारों के लिए अब दिन जात का बहस

136
00:13:39,840 --> 00:13:49,120
हुआ और उसे खुदा की तरफ से मल्के 
सिद्ध के तरीके के सरदार का खिताब

137
00:13:49,120 --> 00:13:53,120
मिला। 
इसलिए जो उसके वसीले से खुदा के 

138
00:13:53,120 --> 00:13:59,280
पास आते हैं वो उन्हें पूरी पूरी 
निजात दे सकता है क्योंकि वो उनकी

139
00:13:59,280 --> 00:14:04,400
शफात के लिए हमेशा जिंदा है, जो 
किसके वसीले खुदा के पास आते हैं?

140
00:14:04,480 --> 00:14:07,960
यस्वा मसीह के वसीले से यानी फसल 
और सच्चाई के वसीले से। 

141
00:14:07,960 --> 00:14:15,360
क्योंकि फसल और सच्चाई तो वो पूरी
पूरी निजात दे सकता है क्योंकि वो

142
00:14:15,360 --> 00:14:20,400
उनकी शफात के लिए हमेशा जिंदा है।
उसने कहा तेरा नाम अब याकूब नहीं,

143
00:14:20,400 --> 00:14:24,320
परन्तु इजरायल होगा क्योंकि तू 
परमेश्वर से और मनुष्य से भी। 

144
00:14:24,440 --> 00:14:30,200
युद्ध करके प्रबल हुआ। 
ईमान की अच्छी कुश्ती लड़ कौनसी 

145
00:14:30,200 --> 00:14:34,440
कुश्ती लड़ी? 
उसने ईमान की अच्छी कुश्ती लड़ उस

146
00:14:34,440 --> 00:14:40,320
हमेशा की जिंदगी पर कब्जा कर ले, 
जो वो कर चुका, जिसके लिए तू 

147
00:14:40,320 --> 00:14:44,840
बुलाया गया था। 
जो कोई खुदा से पैदा हुआ है वो 

148
00:14:44,840 --> 00:14:49,480
दुनिया पर गालिब आता है और वो 
गलबा जिससे दुनिया मगलुब हुई 

149
00:14:49,480 --> 00:14:52,360
हमारा ईमान है और ईमान शून्य से 
पैदा होता है। 

150
00:14:52,360 --> 00:14:59,360
सुन्ना मसीह के कलाम से ईमान के 
पानी काम करने वाले मसीह येशुआ को

151
00:14:59,360 --> 00:15:01,880
ताकते रहे। 
और फिर ये है कि मैं। 

152
00:15:02,320 --> 00:15:10,040
उस पर भरोसा रखूँगा और फिर ये की 
देख मैं उन लड़कों समेत जिन्हें 

153
00:15:10,040 --> 00:15:15,520
खुदा ने मुझे दिया, सूरत में की 
लड़के खून और गोश्त में शरीक हैं 

154
00:15:15,720 --> 00:15:19,160
तो वो खुद भी उनकी तरह उनमें शरीक
हुआ। 

155
00:15:19,240 --> 00:15:23,640
ता की मौत के वसीले से उसको जिससे
मौत पर कुदरत हासिल थी, यानी 

156
00:15:23,720 --> 00:15:30,000
अब्लिस को तबाह कर दे और जो उम्र 
भर मौत के डर से गुलामी में 

157
00:15:30,000 --> 00:15:35,360
गिरफ्तार रहे, उन्हें छुड़ा ले। 
क्योंकि जरूर है ये फानी जिस्म 

158
00:15:35,480 --> 00:15:38,600
बका के जामा पहने और ये मरने वाला
जिस्म। 

159
00:15:38,800 --> 00:15:45,760
हमेशा की जिंदगी का जामा पहने और 
जब ये फनी जिस्म बकाया का जामा 

160
00:15:45,760 --> 00:15:51,440
पहन चूकेगा और ये मरने वाला जिस्म
हमेशा की जिंदगी का जामा पहन 

161
00:15:51,440 --> 00:15:56,560
चूकेगा, तो वो जिसके पास बेटा है,
उसके पास जिंदगी है, जिसके पास 

162
00:15:56,560 --> 00:15:58,600
बेटे की रूनी, उसके पास ज़िन्दगी 
नहीं। 

163
00:15:58,840 --> 00:16:05,720
तो वो कॉल पूरा होगा जब आपके पास 
बेटे का रू आपके पास आएगा तो वो 

164
00:16:05,720 --> 00:16:10,320
कॉल पूरा होगा जो लिखा है की मौत 
फतेह का लुकमा हो गई। 

165
00:16:10,320 --> 00:16:14,800
ए मौत तेरी फतेह कहा रही ए मौत 
तेरा डंक कहा रहा मौत का डंक 

166
00:16:14,800 --> 00:16:18,520
गुनाह और गुनाह का ज़ोर शरीयत है 
यानी। 

167
00:16:18,880 --> 00:16:23,200
मगर खुदा का शुक्रिया, जो हमारे 
खुदा उन सुमसी के वसीले से हमको 

168
00:16:23,440 --> 00:16:28,960
फते बख्शता है, जिसके कारण वो 
सुने की रुक्लिसियाँ उसे क्या 

169
00:16:28,960 --> 00:16:32,280
कहती है? 
जो गाली बाय, मैं उसे पोशीदा मन 

170
00:16:32,280 --> 00:16:34,680
में से दूंगा और एक सफेद पत्थर 
दूंगा। 

171
00:16:34,840 --> 00:16:38,120
उस पत्थर पर एक नया नाम लिखा हुआ 
होगा। 

172
00:16:39,280 --> 00:16:45,280
जिससे उसके पाने वाले के सिवा कोई
ना जानेगा जो गाली बाय मैं उसे 

173
00:16:45,280 --> 00:16:50,280
अपने साथ अपने तख्त पर बिठाऊंगा 
जीस तरह मैं गाली बार कर अपने बाप

174
00:16:50,280 --> 00:16:55,680
के साथ उसके तख्त पर बैठ गया। 
जिसके कान हो वो सुने कि 

175
00:16:55,680 --> 00:16:59,040
रूकलिसियों से क्या कहती है? 
जेश्या में आप समंगी सलाम।

