1
00:00:00,400 --> 00:00:08,520
एल ऐफ़ तब पंजाबी कायदा एल ऐफ़ तब
पंजाबी कायदा नाम तो लाइव है। 

2
00:00:09,200 --> 00:00:18,240
यशरी मेल ए फ्लिपकार्ट, जेडी 
शॉपिंग एप्लिकेशन या। 

3
00:00:19,640 --> 00:00:30,640
फ्लिपकार्ट और अमेज़ॅन दे तो सी 
बाई कर सक देओ, खरीद सक देओ, उस 

4
00:00:30,680 --> 00:00:36,840
ऐप्लिकेशैन तो ऑर्डर कर सक देओ, 
शब्द है जो इंग्लिश जुबान में तो 

5
00:00:36,840 --> 00:00:47,720
तू सी जरूर। 
सुनयें समझ देवियो अपोस्टल यानी 

6
00:00:47,720 --> 00:00:57,160
हिंदी विच प्रेरित उर्दू विच रसूल
यानी रूहानी असूल। 

7
00:01:03,080 --> 00:01:10,760
रूहानी असूल सिखाने वाला बताने 
वाला सुनाने वाला जीतने रूल कुछ 

8
00:01:10,760 --> 00:01:13,960
के हद से चलते है। 
वो ही खुदा के बेटे है। 

9
00:01:16,040 --> 00:01:27,240
इब्रानी में अपोस्टल को प्रेरित 
को कहते हैं शैली आंख शैली आंख आह

10
00:01:28,040 --> 00:01:35,360
जो इब्रानी में पूरा शब्द है रू 
आंख यानी स्पिरिट। 

11
00:01:35,920 --> 00:01:47,480
यानी रूह कुत की हदई से चलने वाला
शैलिया यानी रुआख मतलब यानी जो 

12
00:01:47,480 --> 00:01:53,840
रूह में एक हो जिसमें खुदा की 
रुहिल कुत हो, सो। 

13
00:01:56,200 --> 00:02:06,440
अब आ मैं तुझे फिर उनके पास भेजता
हूँ इब्रानी का शब्द है शैलिया 

14
00:02:07,840 --> 00:02:11,400
खुदा रूह की तरफ से भेजा गया 
व्यक्ति। 

15
00:02:13,920 --> 00:02:19,440
कि तू मेरी कॉम बनी इजराइल को 
मिस्र से निकाल ले, किसको कहा 

16
00:02:20,160 --> 00:02:29,600
नूसा मोशेको देखो मैं अपने रसूल 
यानी शैलिया शैलिया रुएलकुस की 

17
00:02:29,600 --> 00:02:34,080
हदाय से। 
चलने वाला रूलकुत की हदाय देने 

18
00:02:34,080 --> 00:02:45,640
वाला शैली आंख जो भेजूंगा यानी 
भेजा हुआ और वो मेरे आगे राह 

19
00:02:45,640 --> 00:02:48,720
दुरुस्त करेगा। 
यानी ये जो। 

20
00:02:49,760 --> 00:02:56,920
बुक्तिस्मा देने वाला यानी शरियत 
का आखिरी नबी, शरियत का शरियत तो 

21
00:02:56,920 --> 00:02:59,840
मूसा की मार फट दी गई। 
शरियत का आखिरी नबी यन्ना 

22
00:02:59,840 --> 00:03:05,880
बुक्तिस्मा देने वाला के हक में 
लिखा गया है, जो एलिया की रूह में

23
00:03:06,240 --> 00:03:11,840
चला जब से। 
तुम्हारे बाबदादा मूल के मिस्र से

24
00:03:12,360 --> 00:03:20,840
निकल आई अब तक मैंने तुम्हारे पास
अपने सब खादिमोई यानी नभियों को 

25
00:03:20,840 --> 00:03:27,200
भेजा, मैंने उनको हमेशा बरबख्त 
भेजा। 

26
00:03:27,920 --> 00:03:34,840
लेकिन उन्होंने मेरी ना सुनी और 
कान न लगाया बल्कि अपनी गर्दन 

27
00:03:34,840 --> 00:03:43,920
सख्त की। 
उन्होंने अपने बाप दादा से बुराइ 

28
00:03:44,640 --> 00:03:48,520
की। 
और अगर हमारी खुशखबरी पर पर्दा 

29
00:03:48,520 --> 00:03:59,000
पड़ा है तो हलाक होने वालों ही के
वास्ते यानी उन बेईमानों के 

30
00:03:59,000 --> 00:04:05,520
वास्ते जिनकी अकल को इस जहाँ के 
खुदा ने अंधा कर दिया। 

31
00:04:08,800 --> 00:04:17,839
तांकी मसीह जो खुदा की सूरत है, 
उसके जलाल की खुशखबरी कि रौशनी उन

32
00:04:17,839 --> 00:04:21,839
पर न पड़े। 
यानी आँखों को बंद किया हुआ। 

33
00:04:22,040 --> 00:04:27,520
इस तरह पहले जमीनी जिस्मानी आदम 
और हवा की आँखों को बंद किया गया 

34
00:04:27,520 --> 00:04:37,200
था और उसने फरमाया जा और इन लोगों
से क्या है कि तुम सुना करो पर 

35
00:04:37,200 --> 00:04:40,760
समझो नहीं तुम देखा करो और भूजो 
नहीं। 

36
00:04:41,960 --> 00:04:54,200
तू इन लोगों के दिलों को चरबा दे 
और उनके कानों को भारी कर और उनकी

37
00:04:54,200 --> 00:04:58,680
आंखें बंद कर दे, तना हो कि वो 
अपनी आँखों से देखे और। 

38
00:04:59,160 --> 00:05:06,480
अपने कानों से सुनें और अपने 
दिलों से समझ लें और बाज आएं और 

39
00:05:06,480 --> 00:05:13,360
शिफा पर उन्हें छोड़ दो। 
वो अंधेरा बताने वाले हैं और अगर 

40
00:05:13,360 --> 00:05:18,760
अंधे को अंधा रहा बताएगा तो दोनों
गड़े में गिर पड़ेंगे। 

41
00:05:20,600 --> 00:05:31,720
और उनके हक में यशा या यानी यशया 
कि ये पशनगोई पूरी होती है कि तुम

42
00:05:31,720 --> 00:05:35,280
कानों से सुनोगे और हरगिज न 
समझोगे। 

43
00:05:36,120 --> 00:05:42,680
और आँखों से देखोगे और हरगिज 
मालूम ना करोगे क्योंकि इस उम्मद 

44
00:05:42,680 --> 00:05:50,320
के दिल पर चर्बी छा गई है और वो 
कानों से ऊंचा सुनते हैं और 

45
00:05:50,320 --> 00:05:54,680
उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली 
है। 

46
00:05:55,600 --> 00:06:01,840
कहीं ऐसा ना हो कि आँखों से मालूम
कर और कानों से सुनें और दिल से 

47
00:06:01,840 --> 00:06:07,240
समझे और रज़ूल है और मैं उन्हें 
शिफाबकचू लेकिन मुबारक हैं 

48
00:06:07,240 --> 00:06:12,800
तुम्हारी आँखें इसलिए कि वो देखती
हैं और तुम्हारे कान जिसके कान हो

49
00:06:12,800 --> 00:06:15,200
वो सुने रूक्लिसियों से क्या कहते
हैं? 

50
00:06:15,280 --> 00:06:20,520
और तुम्हारे कान इसलिए कि वो 
सुनते हैं कि मैं तुमसे सच कहता 

51
00:06:20,520 --> 00:06:30,240
हूँ कि बहुत से डबियों और रास्ते 
बाजों को आरज़ू थी कि जो बातें 

52
00:06:30,320 --> 00:06:34,720
तुम देखते हो देखें मगर ना देखें 
और जो बातें तुम सुनते हो। 

53
00:06:35,200 --> 00:06:39,480
सुने मगर ना सुने यानी फ़ज़ल और 
सच्चाई की बात है फ़ज़ल और सच्चाई

54
00:06:39,480 --> 00:06:44,160
के प्रकाशन। 
मगर आज तक जब कभी मूसा की किताब 

55
00:06:44,160 --> 00:06:47,120
पढ़ी जाती यानी शरियत तो मूसा की 
मार फट दी गई। 

56
00:06:48,280 --> 00:06:52,720
यानी मूसा की पहली पांच किताबें 
यानी तोरा तो उनके दिल पर पर्दा 

57
00:06:52,720 --> 00:06:57,480
पड़ा रहता है। 
लेकिन जब कभी उनका दिल खुदावन की 

58
00:06:57,480 --> 00:07:02,720
तरफ फेरेगा यानी फसल और सच्चाई के
अधीन हो जाएगा दिल दिल की बात हो 

59
00:07:02,720 --> 00:07:06,640
रही है जिस्म की नहीं वो पर्दा उठ
जाएगा। 

60
00:07:07,840 --> 00:07:13,120
अगले जमाने में खुदा ने बाब दादा 
से हिस्सा बाहिस्सा और तरह बतरहा।

61
00:07:13,240 --> 00:07:20,800
नबियों की मार्फत कलम करके इस 
जमाने के आखिर में हमसे बेटे की 

62
00:07:20,800 --> 00:07:27,240
मार्फत कलम किया बेटे की रूह, 
जिसे उसने सारी चीजों का वारिस 

63
00:07:27,240 --> 00:07:32,760
ठहराया और जिसके वसीले से उसने 
आलम भी पैदा किए। 

64
00:07:33,440 --> 00:07:38,200
वो उसके जलाल का प्रस्ताव और उसकी
ज़ात का नक्श होकर सब चीजों को 

65
00:07:38,200 --> 00:07:40,480
अपनी कुदरत के कलाम से संभालना 
है। 

66
00:07:41,880 --> 00:07:46,560
वो गुनाहों को धोकर आलमी बाला पर 
कीबिया की दानी तरफ़ जा बैठा और 

67
00:07:46,560 --> 00:07:50,000
रिश्तों से इस कदर बुजुर्ग हो 
गया। 

68
00:07:50,120 --> 00:07:53,520
जीस कदर। 
उसने मिरास में उनसे अफज़ल नाम 

69
00:07:53,520 --> 00:08:02,200
पाया अफज़ल है मोहब्बत मोहब्बत है
खुदा उस वक्त उस वक्त मैंने 

70
00:08:02,760 --> 00:08:07,200
खुदावन की आवाज़ सुनी जिसने 
फरमाया मैं किसको भेजूं? 

71
00:08:07,200 --> 00:08:12,360
यानी शैलिया। 
और हमारी तरफ से कौन जगा? 

72
00:08:12,360 --> 00:08:16,480
तब मैंने अर्ज की। 
मैं हाजिर हूँ, मुझे भेज इब्रानी 

73
00:08:16,480 --> 00:08:23,080
में शैलियां बस जगीदों ने आपस में
कहा, क्या कोई उसके लिए कुछ खाने 

74
00:08:23,080 --> 00:08:28,640
को लाया है या सुने? 
उनसे कहा, मेरा खाना यह है कि 

75
00:08:28,640 --> 00:08:37,559
अपने भेजने वाले यानी शैलिया की 
भेजने वाला शैलिया की मर्जी के 

76
00:08:37,559 --> 00:08:43,960
मुआफिक अमल करो और उसका काम करो। 
पसियेसु ने हेकल में तालीम देते 

77
00:08:43,960 --> 00:08:50,720
वक्त पुकार कर कहा कि। 
तुम मुझे भी जानते हो और ये भी 

78
00:08:50,720 --> 00:08:59,080
जानते हो कि मैं कहाँ का हूँ और 
मैं आप से नहीं आया, मगर जिसने 

79
00:08:59,400 --> 00:09:07,800
मुझे भेजा यानी शैलियाक है वो। 
सच्चा यानी सच्चाई को इब्रानी में

80
00:09:07,800 --> 00:09:17,800
कहते हैं अमित यानी अमित, वो 
सच्चा है, उसको तुम नहीं जानते। 

81
00:09:19,440 --> 00:09:24,560
मैं उसे जानता हूँ इसलिए कि मैं 
उसकी तरफ से हूँ और उसी ने मुझे 

82
00:09:24,560 --> 00:09:27,720
भेजा क्योंकि मैं आसमान से उतरा 
हूँ। 

83
00:09:27,920 --> 00:09:32,120
ना इसलिए कि अपनी मर्जी के माफी 
अमल करूँ बल्कि इसलिए कि अपनी 

84
00:09:32,120 --> 00:09:38,160
भेजने वाली यानी इब्रानी में 
शैलिया की मर्जी के माफी अमल 

85
00:09:38,160 --> 00:09:41,000
करूँ। 
और मेरे भेजने वाले की मर्जी ये 

86
00:09:41,000 --> 00:09:46,160
है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है 
मैं उसमें से कुछ खो ना दू बल्कि 

87
00:09:46,200 --> 00:09:52,000
उसे आखिरी दिन फिर जिंदा करूँ। 
आखिरी दिन सलीब के बाद शुरू होता 

88
00:09:52,000 --> 00:09:58,400
है यानी ये शमशी केजी उठने से के 
दिन शुरू होते हैं। 

89
00:09:59,440 --> 00:10:05,120
यसु ने उनसे कहा, अगर खुदा 
तुम्हारा बाप होता तो तुम मुझसे 

90
00:10:05,240 --> 00:10:09,760
मोहब्बत रखते हो, इसलिए कि मैं 
खुदा में से निकला और आया हूँ 

91
00:10:10,480 --> 00:10:14,160
क्योंकि मैं आप से नहीं आया बल्कि
उसी ने मुझे भेजा। 

92
00:10:14,160 --> 00:10:19,600
यानी शैलिया मैं और बाप एक। 
क्या तू यकीन नहीं करता कि मैं 

93
00:10:20,000 --> 00:10:25,480
बाप में हूँ और बाप मुझमें ये 
बातें जो मैं तुमसे कहता हूँ, 

94
00:10:25,480 --> 00:10:32,760
अपनी तरफ से नहीं कहता, लेकिन बाप
मुझमें रहकर अपने काम करते, मेरा 

95
00:10:32,760 --> 00:10:41,320
यकीन करो कि मैं बाप में हूँ। 
और बाप मुझमें है, मेरा यकीन करो 

96
00:10:41,320 --> 00:10:47,480
कि मैं बाप में हूँ और बाप मुझमें
बाप मुझमें रहकर अपने काम करता 

97
00:10:47,480 --> 00:10:51,600
है। 
और उन दिनों में ऐसा हुआ कि वो 

98
00:10:52,040 --> 00:10:58,240
पहाड़ पर दुआ मांगने को निकला। 
और खुदा से दुआ मांगने में सारी 

99
00:10:58,240 --> 00:11:05,120
रात गुजारी। 
जब दिन हुआ तो उसने अपने शगिरदों 

100
00:11:05,120 --> 00:11:15,560
को पास बुलाकर उनमें से 12 चुन्नी
और उनको रसूल का लकप दिया। 

101
00:11:16,160 --> 00:11:24,240
रूल कुत्स की अदाई से चलने वाले 
रसूल ने फिर उनसे कहा कि तुम्हारी

102
00:11:24,240 --> 00:11:29,320
सलामती हो जीस तरह बाप ने मुझे 
भेजा है उसी तरह मैं भी तुम्हें 

103
00:11:29,320 --> 00:11:32,520
भेजता हूँ यानी शैलियाक ने मुझे 
भेजा। 

104
00:11:32,520 --> 00:11:35,160
उसी तरह मैं भी तुम्हें भेजता 
हूँ। 

105
00:11:35,960 --> 00:11:44,480
और ये कहकर उन पर फूंका, ये कहकर 
पर फूंका और उनसे कहा कि रूह कुछ 

106
00:11:44,720 --> 00:11:53,960
लोग यानी कदूस यानी पवित्र पाक और
जब तक। 

107
00:11:54,040 --> 00:11:58,600
वो भेजे न जाएं। 
मनादी क्यों कर करें जो नाच लिखा 

108
00:11:58,600 --> 00:12:04,000
है कि क्या ही खुशनुमा है उनके 
कदम जो अच्छी चीज़ों की खुशखबरी 

109
00:12:04,000 --> 00:12:09,000
देते यानी जो शैलियाक की तरफ से 
भेजे हुए होते हैं जीस तरह यशवमसी

110
00:12:09,000 --> 00:12:13,840
और यशवमसी के भेजे हुए। 
वो अच्छी चीजों की खुशखबरी देते 

111
00:12:13,840 --> 00:12:23,560
हैं, घबरा नहीं देते, डराते नहीं 
हैं, दोष नहीं लगाते, वो दोषी व 

112
00:12:23,560 --> 00:12:29,000
एक नहीं पैदा करते, वो खुशखबरी 
देते हैं, आजाद करते हैं। 

113
00:12:31,160 --> 00:12:39,040
फिर उसने जाते में एक शख्स को 
देखा जो जन्म का अंधा था और उसके 

114
00:12:39,280 --> 00:12:46,560
शगिरदों ने उससे पूछा कि ए रब्बी 
उस्ताद किसने गुनाह किया था, जो 

115
00:12:46,560 --> 00:12:53,160
ये अंधा पैदा हुआ इस शख्स ने? 
या इसके माँ बाप देखो उस वक्त 

116
00:12:53,760 --> 00:12:56,840
शरियत का वक्त था, सब लोग शरियत 
के अधीन था। 

117
00:12:56,840 --> 00:13:00,760
वो शरियत का वक्त है। 
सलीब से पहले यस्सु ने जवाब क्या 

118
00:13:00,760 --> 00:13:09,360
दिया कि ना इसने गुनाह किया था, 
ना इसने गुनाह किया था? 

119
00:13:09,480 --> 00:13:16,440
ना इसके माँ बाप, अब ये शमसीह 
अनुग्रह पर अनुग्रह अनुग्रह और 

120
00:13:16,440 --> 00:13:21,200
सच्चे अनुग्रह क्या बोल रहा है 
अलफताब क्या बोल रहा है? 

121
00:13:21,640 --> 00:13:26,760
बल्कि ये इसलिए हुआ कि खुदा के 
काम उसमें ज़ाहिर हों। 

122
00:13:29,440 --> 00:13:34,520
जिसने मुझे भेजा यानी शैलियाक ने 
जिसने मुझे भेजा है, हमें उसके 

123
00:13:34,520 --> 00:13:38,080
काम दिन ही दिन में करने जरूरी 
है। 

124
00:13:38,960 --> 00:13:43,000
वो रात आने वाली है जिसमें कोई 
शख्स काम नहीं कर सकता। 

125
00:13:43,000 --> 00:13:46,680
वो इस रात की बात नहीं कर रहा है 
जो हमारे ऊपर आती है। 

126
00:13:46,680 --> 00:13:52,560
संसारिक रात दिन की नहीं। 
यानी नूर के फर्ज़द नूर के फर्ज़द

127
00:13:54,640 --> 00:14:00,120
जब तक मैं दुनिया में हूँ, दुनिया
का नूर हूँ और हम भी हैं फसलों और

128
00:14:00,120 --> 00:14:04,520
सच्चाई के यदि जिसमें जिनमें बेटे
की रूप है जिनमें जिंदगी की रूप 

129
00:14:04,520 --> 00:14:14,560
है ये कहकर। 
उसने जमीन पर थूका और थूक से 

130
00:14:14,560 --> 00:14:25,960
मिट्टी सानी और वो मिट्टी अंधे की
आँखों पर लगाकर उससे कहा जा शिलो 

131
00:14:26,480 --> 00:14:32,480
शैलियाँ। 
शिलोग के हौज में धोले जिसका 

132
00:14:32,480 --> 00:14:41,040
दर्ज़मा भेजा हुआ है बस यानी भेजा
हुआ यानी अपोस्टल यानी शैलिया 

133
00:14:41,200 --> 00:14:47,200
यानी प्रेरित यानी रसूल बस उसने 
जाकर। 

134
00:14:47,320 --> 00:14:53,560
धोया और बीना होकर वापस आया ये 
निशान किनको दिखाया गया यहूदियों 

135
00:14:53,560 --> 00:14:58,920
को क्योंकि यहूदी निशान चाहते हैं
और देखो उसी दिन उनमें से दो आदमी

136
00:14:58,920 --> 00:15:04,960
उस गांव की तरफ जा रहे थे जिसका 
नाम इम्माउस है, वो यरुश्लेम से 

137
00:15:04,960 --> 00:15:10,480
कोई साथ मील के। 
फासले पर है और वो इन सब बातों के

138
00:15:10,480 --> 00:15:15,160
बाबत जो वाकया हुई थी आपस में 
बातचीत करते जाते थे। 

139
00:15:15,720 --> 00:15:22,880
जब वो बातचीत और पूछ्ताछ कर रहे 
थे तो ऐसा हुआ कि येसु आप नजदीक 

140
00:15:22,880 --> 00:15:26,400
आकर उनके साथ हो लिया, लेकिन 
उनकी? 

141
00:15:26,720 --> 00:15:32,200
आँखें बंद की गई थी कि उसको ना 
पहचान। 

142
00:15:33,120 --> 00:15:38,640
उसने उनसे कहा ये क्या बात है जो 
तुम चलते चलते आपस में करते हो? 

143
00:15:39,560 --> 00:15:45,440
वो गमगीन से खड़े हो गए। 
फिर एक ने जिसका नाम। 

144
00:15:45,520 --> 00:15:51,240
क्लिप था। 
जवाब में उससे कहा यशमसी से जो 

145
00:15:51,240 --> 00:15:54,440
तीसरे दिन मुर्दा में से जिंदा हो
चुका है। 

146
00:15:55,240 --> 00:16:01,840
शरीयत के मुताबिक सब काम को पूरा 
करके क्या तू यरु शिलम में अकेला 

147
00:16:01,840 --> 00:16:08,680
मुसाफिर है, जो नहीं जानता कि। 
इन दिनों उसमें क्या क्या हुआ है?

148
00:16:09,640 --> 00:16:15,080
उसने उनसे कहा क्या हुआ है? 
उन्होंने उससे कहा ये सुनासरी का 

149
00:16:15,080 --> 00:16:22,200
मजारा जो खुदा और सारी उन्मद के 
नजदीक काम और कलाम। 

150
00:16:22,520 --> 00:16:29,080
कुदरत वाला नबी था और सरदार 
काहिनो और हमारे हाकिमों ने 

151
00:16:29,080 --> 00:16:35,840
हुकूमत किसकी थी? 
उस वक्त रोमियो की उसको पकड़वा 

152
00:16:35,840 --> 00:16:41,280
दिया ताकि उस पर कतल का हुक्म 
दिया जाए और उसे सलीब दिलाई। 

153
00:16:42,000 --> 00:16:46,920
लेकिन हमको उम्मीद थी कि इजरायल 
को मखलसी यहीं देगा। 

154
00:16:47,320 --> 00:16:55,280
और इलावा इन सब बातों के इस मझारे
को आज तीसरा दिन हो गया और हम में

155
00:16:55,280 --> 00:16:59,880
से चंद औरतों ने भी हमको हैरान कर
दिया है। 

156
00:17:00,720 --> 00:17:06,920
जो सवेरे की खबर पर गई थीं और जब 
उसकी लाश ना पाई तो ये कहती हुई 

157
00:17:06,920 --> 00:17:11,480
आई कि हमने रोया में फरिश्ते को 
भी देखा। 

158
00:17:11,599 --> 00:17:18,200
उन्होंने कहा कि वो जिंदा है। 
प्रभास हमारे साथियों में से कब्र

159
00:17:18,200 --> 00:17:22,000
पर गए और। 
जैसा औरतों ने कहा था, वैसा ही 

160
00:17:22,000 --> 00:17:34,520
पाया मगर उसको ना देखा। 
उसने उनसे कहा कि ए यानी यशवंत की

161
00:17:34,520 --> 00:17:40,680
ए नदानु। 
और नदियों की सारी बातों को मानने

162
00:17:40,680 --> 00:17:53,520
में सुस्त इतका दो अनाधानु और 
नदियों की सारी बातों के मानने 

163
00:17:53,520 --> 00:18:00,760
में सुस्त ईमान वालो। 
जो ईमान में सोए हुए है। 

164
00:18:03,480 --> 00:18:08,880
क्या मसीह को ये दुख उठा कर अपनी 
जलाल में दाखिल होना जरूरत ना था?

165
00:18:09,840 --> 00:18:14,280
फिर मूसा यानी मूसा की पहली पांच 
किताबें से? 

166
00:18:15,040 --> 00:18:21,320
और सब नबियों से शुरू करके सारे 
नवविश्तों में जितनी बातें उसके 

167
00:18:21,320 --> 00:18:24,440
हक में लिखी हुई हैं, उनको समझा 
दी। 

168
00:18:25,240 --> 00:18:31,520
इतने में वो उस गांव के नजदीक 
पहुँच गए जहाँ जाते थे और उसके 

169
00:18:31,520 --> 00:18:35,760
ढंग से ऐसा मालूम हुआ कि। 
वो आगे बढ़ना चाहता है। 

170
00:18:36,720 --> 00:18:44,720
उन्होंने उसे ये कहकर मजबूर किया 
कि हमारे साथ रह कि शाम हुआ चाहती

171
00:18:44,720 --> 00:18:50,600
है और दिन अब बहुत ढल गया। 
बस वो अंदर गया ताकि उनके साथ 

172
00:18:50,600 --> 00:18:54,680
रहे। 
जब वो उनके साथ खाना खाने को बैठा

173
00:18:54,680 --> 00:19:01,600
तो ऐसा हुआ कि उसने रोटी लेकर 
बरकत चली और तोड़कर उनको देने 

174
00:19:01,600 --> 00:19:08,120
लगा। 
इस पर उनकी आंखें खुल गईं और 

175
00:19:08,120 --> 00:19:16,200
उन्होंने उसको पहचान लिया। 
और वो उनकी नजर से गायब हो कि 

176
00:19:16,200 --> 00:19:21,040
हमारे खुदा उन युसुमसीह का खुदा 
जो जलाल का बाप है। 

177
00:19:21,160 --> 00:19:29,640
अब्बा हाशमई अब्बा उर तुम्हें 
अपनी पहचान में हकमत और मुगाशिफे 

178
00:19:29,720 --> 00:19:34,320
की रू बक्शे। 
और तुम्हारे दिल की आँखें रोशन हो

179
00:19:34,320 --> 00:19:40,080
जाएं ताकि तुमको मालूम हो कि उसके
बुलवाने से कैसी कुछ उम्मीद है। 

180
00:19:40,080 --> 00:19:47,120
यानी बुलाहट यानी कालिंग और उसकी 
मिराज़ के जलाल की दौलत जलाल के 

181
00:19:47,120 --> 00:19:55,840
दौलत प्रकाश के दौलत। 
मुकदसों में कैसी कुछ है और हम 

182
00:19:55,840 --> 00:20:00,480
इमान लाने वालों के लिए उसकी बड़ी
कुदरत क्या है? 

183
00:20:00,480 --> 00:20:07,520
बेहद उसकी बड़ी कुवत की तासीर के 
माफिक, जो उसने मशीन में की, 

184
00:20:08,080 --> 00:20:11,760
जबकि। 
उसे मुर्दोमे से जिलाकर अपनी 

185
00:20:11,760 --> 00:20:15,080
दाईनी तरफ आसमानी मुकाम पर 
बैठाया। 

186
00:20:16,240 --> 00:20:24,280
अपोस्टल शब्द को अगर हम तीन भाग 
करें यानी तीन भाग करके एक प्रॉपर

187
00:20:24,280 --> 00:20:29,760
सेन्टेन्स के तौर पर समझे। 
आ? 

188
00:20:29,760 --> 00:20:40,280
यानी ए यानी एक यानी वो कोई भी हो
सकता है यानी एक व्यक्ति और वो 

189
00:20:40,280 --> 00:20:45,000
कोई भी हो सकता है। 
पोस्ट यानी मसीयशुआ की खुशखबरी। 

190
00:20:46,640 --> 00:20:50,800
टेल का मतलब है सुनाने वाला बताने
वाला। 

191
00:20:51,760 --> 00:20:54,680
अब हम इसको पूरे प्रॉपर सेन्टेन्स
में समझें। 

192
00:20:55,520 --> 00:21:04,560
वो एक व्यक्ति शल्याक यानी पोस्टर
ए पोस्ट टेल ए पोस्ट टेल। 

193
00:21:06,360 --> 00:21:09,160
वो एक व्यक्ति वो कोई भी हो सकता 
है। 

194
00:21:09,840 --> 00:21:20,280
ए पोस्ट टेल यानी वो एक व्यक्ति 
रूल कुसदा ममूर्या वो एक व्यक्ति 

195
00:21:20,720 --> 00:21:25,120
वो कोई भी हो सकता है जो रूल 
कुत्से ममूर्या जो खुशखबरी। 

196
00:21:25,240 --> 00:21:33,120
का यानी मसीह यशव की खुशखबरी का 
प्रचार सुनाता है, बताता है, 

197
00:21:33,120 --> 00:21:43,760
फैलाता है जैसे हमारे यहाँ पोस्ट 
ऑफिस पोस्टमैन है। 

198
00:21:44,200 --> 00:21:51,600
यानी डाकिया चिट्ठी लेके आने वाला
मैसेज पहुंचाने वाला ये ग्रीक 

199
00:21:51,600 --> 00:21:58,480
शब्द अपोस्टोलॉज से निकला है। 
इसका मतलब है भेजा गया व्यक्ति 

200
00:21:59,880 --> 00:22:04,320
संदेशवाहक। 
खुदा के बेटे यसुन से की खुशखबरी 

201
00:22:04,320 --> 00:22:10,000
का शुरू यसु ने क्लील में आकर 
खुदा की खुशखबरी की, मनादी की और 

202
00:22:10,000 --> 00:22:17,960
कहा कि वक्त पूरा हो गया है और 
खुदा की बादशाह नजदीक आ गई। 

203
00:22:17,960 --> 00:22:26,520
यानी रूल कुछ तौबा करो। 
और खुशखबरी को मानो खुशखबरी को 

204
00:22:26,520 --> 00:22:33,520
मानना ही तोब करना है। 
लेकिन जब वक्त पूरा हो गया तो 

205
00:22:33,520 --> 00:22:39,600
खुदा ने अपने बेटे को भेजा जो औरत
से पैदा हुआ। 

206
00:22:39,760 --> 00:22:45,800
और शरीयत के मताहत पैदा हुआ ताकि 
शरीयत के मतदातों को मोल लेकर 

207
00:22:45,800 --> 00:22:47,640
छुड़ा ले। 
अब हो क्या रहा है? 

208
00:22:49,240 --> 00:22:56,560
कहा ये जा रहा है कि खुशखबरी पर 
इमाम तौबा करो मगर सुनाई शरीयत जा

209
00:22:56,560 --> 00:22:59,720
रही है। 
10 सुख मुँह का प्रचार हो रहा है 

210
00:23:02,200 --> 00:23:05,080
ताकि शरियत के मताहतों को मूल 
लेकर छुड़ा ले। 

211
00:23:06,000 --> 00:23:11,400
इसी शरियत से छुड़ाने के लिए तो 
यशव ने इतना दुख सहा। 

212
00:23:11,400 --> 00:23:16,720
इतनी पीड़ा इतनी करूरता से ही 
अपनी बदन पर लेकिन प्रचार फिर भी 

213
00:23:16,720 --> 00:23:21,560
10 सुख मोगा रहा है। 
मूसा की शरियत का ताकि शरियत के 

214
00:23:21,560 --> 00:23:30,360
मताहतों को मोल लेकर, शरियत के 
मताहतों को मूल लेकर और हमको 

215
00:23:30,520 --> 00:23:35,440
लपालक होने का दर्जा मिले। 
और क्योंकि तुम बेटे हो इसलिए 

216
00:23:35,440 --> 00:23:40,920
खुदा ने अपने बेटे के रूप हमारे 
दिलों में भेजी जो अब्बा यानी है।

217
00:23:40,920 --> 00:23:45,760
बाप कह कहकर पुकारना है। 
बस अब तो गुलाम नहीं बल्कि बेटा 

218
00:23:45,760 --> 00:23:50,960
है जो शरीयत के दीन है, वो गुलाम 
है और जब बेटा हुआ तो खुदा के 

219
00:23:50,960 --> 00:23:55,360
सुबह बारिश भी हुआ। 
इसलिए की शरियत तो मूसा की मार फत

220
00:23:55,360 --> 00:24:00,000
दी गई, मगर फ़ज़ल और सच्चाई 
मसीहैशा की मार फत पहुंची और कलाम

221
00:24:00,000 --> 00:24:04,360
जसिम हुआ और फ़ज़ल और सच्चाई से 
महमूर होकर हमारे दरमियां रहा और 

222
00:24:04,360 --> 00:24:08,480
हमने उसका ऐसा जलाल देखा जैसा बाप
के कहौते का जलाल क्योंकि उसकी 

223
00:24:08,480 --> 00:24:10,880
महमूरी में से हम सबने पाए यानी 
फ़ज़ल पर फ़ज़ल। 

224
00:24:11,600 --> 00:24:15,680
चुनौती इब्राहिम खुदा पर ईमान 
लाया और ये उसके लिए रास्तेबाजी 

225
00:24:15,680 --> 00:24:19,040
गिना गया। 
पर जानलों की जो इमान वाले हैं, 

226
00:24:19,560 --> 00:24:23,440
वही इब्राहिम के फरज़ाने और 
किताबें मुकद्दस ने पेशदस्त ये 

227
00:24:23,440 --> 00:24:26,840
जानकर कि खुदा गैर खोमो को ईमान 
से रास्तबाज़ ठहराएगा। 

228
00:24:27,520 --> 00:24:31,080
पहले ही से इब्राहिम को ये 
खुशखबरी सुना दी। 

229
00:24:31,800 --> 00:24:36,720
कि तेरे बॉस सारी कौमे बरकत 
पाएगी। 

230
00:24:36,920 --> 00:24:41,400
तेरे 22 सारी कौमे बरकत पाएगी पर 
जो इमान वाले वो ईमानदार इब्राहिम

231
00:24:41,400 --> 00:24:44,720
के साथ बरकत पाते हैं, जो रूल कुत
की हदाय से चलते हैं वो ही खुदा 

232
00:24:44,720 --> 00:24:48,240
के बेटे हैं। 
मैं दाजुक करता हूँ, हैरान होता 

233
00:24:48,240 --> 00:24:51,800
हूँ। 
कि जिसने तुम्हें मसीह के फसल से 

234
00:24:51,800 --> 00:24:56,560
बुलाया, उसे तुम इस कदर जल्द फिर 
कर किसी और तरह की खुशखबरी की तरफ

235
00:24:56,560 --> 00:25:00,520
माइल होने लगे। 
मगर वो दूसरी बत्ताबाज ऐसे है जो 

236
00:25:00,520 --> 00:25:05,400
तुम्हें घबरा देते हैं और मसीह की
खुशखबरी को क्या करना चाहते हैं? 

237
00:25:05,400 --> 00:25:08,400
बिगाड़ना चाहते हैं? 
लेकिन अगर हम या आसमान का कोई 

238
00:25:08,440 --> 00:25:12,520
रिश्ता भी। 
उस खुशखबरी के सिवा जो हमने 

239
00:25:12,520 --> 00:25:19,160
तुम्हें सुनाई कोई और खुशखबरी 
तुम्हें सुनाई तो मालून हो लान्ती

240
00:25:19,160 --> 00:25:26,040
हो जैसा हम बेशर कह चूके हैं वैसा
ही अब मैं फिर कहता हूँ, अब मैं 

241
00:25:26,040 --> 00:25:30,520
फिर कहता हूँ। 
उस खुशखबरी के सिवा जो तुमने 

242
00:25:30,520 --> 00:25:36,760
कुबूल की थी अगर कोई तुम्हें और 
खुशखबरी सुनाता है तो मालूम साबित

243
00:25:36,800 --> 00:25:40,160
हो। 
मैं तुम्हें जताया देता हूँ कि जो

244
00:25:40,160 --> 00:25:45,760
खुशखबरी मैंने सुनाई वो इंसान की 
सीन नहीं क्योंकि वो मुझे। 

245
00:25:46,160 --> 00:25:55,760
सच्चाई की रू से बाप की रू से 
इंसान की तरफ से नहीं पहुंची और 

246
00:25:56,000 --> 00:26:02,480
ना मुझे सिखाई गई वो बाप की रू से
सच्चाई की रू से बल्कि यश मसीह की

247
00:26:02,480 --> 00:26:07,680
तरफ से। 
मुझे उसका मुक्काफा हुआ क्योंकि 

248
00:26:07,680 --> 00:26:13,680
ऐसे लोग झूठे रसूल और दगाबाज़ी से
काम करने वाले हैं और अपने आप को 

249
00:26:13,680 --> 00:26:19,120
मसीह के रसूलों के हम शक्ल बना 
लेते हैं और कुछ अजब नहीं। 

250
00:26:20,120 --> 00:26:24,760
कुछ हैरान होने की बात नहीं। 
क्योंकि शैतान भी अपने आप को 

251
00:26:24,760 --> 00:26:27,400
नूरानी रिश्ते का हमशक्ल बना लेता
है। 

252
00:26:28,280 --> 00:26:33,960
बस अगर उसके खादमीरात बाजी के 
खादिमों के हमशक्ल बन जाए तो कुछ 

253
00:26:33,960 --> 00:26:38,920
बड़ी बात नहीं है, लेकिन उनका 
अंजाम उनके कामों के माफिक होगा। 

254
00:26:39,600 --> 00:26:44,680
क्या सबरजूल है? 
क्या सब नबी है, क्या सब उस्ताद 

255
00:26:44,680 --> 00:26:47,920
है? 
क्या सब मुआवजा दिखाने वाले है 

256
00:26:49,520 --> 00:26:53,720
क्या सबको शिपा देने की कुबतें 
नायत हुई क्या? 

257
00:26:53,720 --> 00:26:58,560
सब तरह तरह की जमाने बोलते हैं, 
क्या सब तर्जमा करते हैं? 

258
00:26:59,280 --> 00:27:04,040
कैसे लोग झूठे, रसूल और दगाबाजी 
से काम करने वाले और अपने आपको के

259
00:27:04,040 --> 00:27:10,160
रसूलों के हमशक्ल बना लेते है? 
क्योंकि शैतान भी अपने आपको 

260
00:27:10,160 --> 00:27:12,360
नूरानी रिश्ते का हमशक्ल बना लेता
है। 

261
00:27:12,880 --> 00:27:16,480
बस अगर उसके खादिम भी रास्तेबाजी 
के खादिमों के हमशक्ल बन जाए तो 

262
00:27:16,480 --> 00:27:20,080
कुछ बड़ी बात नहीं। 
लेकिन उनका अंजाम उनके कामों की 

263
00:27:20,080 --> 00:27:20,800
माफी को।
