1
00:00:00,680 --> 00:00:06,960
चलो सेशा में आप सबगी सलामती हो 
तो आज का जो विषय है उसका टाइटल 

2
00:00:06,960 --> 00:00:15,240
है चुना जाना मुलाहट इफ्तार और 
सिफा कलाम सुनने से नहीं, सच्चाई 

3
00:00:15,240 --> 00:00:21,520
की रूह से कबूल करने से। 
काम करता है। 

4
00:00:22,440 --> 00:00:33,800
कलाम सुनने से नहीं सच्चाई की रूह
से रूआख से कबूल करने से काम करता

5
00:00:33,800 --> 00:00:39,560
है। 
सारा ने जब खुदा के वादों को। 

6
00:00:41,000 --> 00:00:49,360
कलाम को सच्चाई के रूह से कबूल 
किया तब ही मरे हुए शरीर में 

7
00:00:50,200 --> 00:00:56,120
मुर्दा गर्भ में उसने संतान को 
पैदा करने की ताकत पाई। 

8
00:00:57,800 --> 00:01:06,080
तो मसला कलाम सुनने का नहीं है, 
मसला है, कलाम को सच्चाई की रू से

9
00:01:06,080 --> 00:01:12,600
कबूल करने का है। 
सच्चाई की रू से कबूल करोगे तो ही

10
00:01:12,600 --> 00:01:18,960
मुर्दापन जो है। 
हमेशा की अपनी जिंदगी में बदलेगा 

11
00:01:19,640 --> 00:01:29,240
मुर्दा सेहत जिंदगी में बदलेगी। 
मसला ये है कि आपका दिल कहाँ लगा 

12
00:01:29,240 --> 00:01:35,440
हुआ है। 
बस दिल की हिफाजत करें वही जिंदगी

13
00:01:35,440 --> 00:01:43,200
का सर चश्मा है तो ये श मसीहा 
राफेल आलोही में दो नई है तो जब 

14
00:01:43,560 --> 00:01:48,680
आपका दिल कलाम में होगा तो सच्चाई
से कुबूल करोगे तो कलाम मुजिस्म 

15
00:01:48,680 --> 00:01:54,520
होगा आपकी जिंदगी में और आप? 
में भी काम करेगा और आपके लिए काम

16
00:01:54,520 --> 00:02:00,880
करेगा, आपके वसीले काम करेगा। 
उसी तरह मेरा कलाम जो मेरे मुँह 

17
00:02:00,880 --> 00:02:10,320
से निकलता है होगा वो बेइंज़ाम 
मेरे पास वापस ना आएगा बल्कि जो 

18
00:02:10,320 --> 00:02:14,160
कुछ। 
मेरी ख्वाहिश होगी वो उसे पूरा 

19
00:02:14,160 --> 00:02:22,320
करेगा और उस काम में जिसके लिए 
मैंने उसे भेजा मुअस्सिर होगा 

20
00:02:22,720 --> 00:02:29,320
क्योंकि तुम खुशी से निकलोगे और 
सलामती के साथ रवाना किए जाओगे। 

21
00:02:29,920 --> 00:02:40,440
मसलन एक तरफ आपको बहुत तेज भूख 
लगी है और आपके मनपसंद का लज़ीज़ 

22
00:02:40,440 --> 00:02:48,280
खाना है और दूसरी तरफ खुदा का 
कलाम और बीच में है दिल तो दिल से

23
00:02:48,280 --> 00:02:52,160
ये तो। 
होगा कि आपका दिल कहाँ है? 

24
00:02:53,200 --> 00:03:00,000
लज़ीज़ खाने की तरफ खाने का भूखा 
है या वचन सुनने का? 

25
00:03:00,960 --> 00:03:08,280
बेशक जितनी मर्जी ऊंची आवाज़ में 
कलाम सुनाओ, वो आपके सामने बहरे। 

26
00:03:09,000 --> 00:03:16,160
की माननिंद है, क्योंकि हमारा दिल
लज़ीज़ खाने की तरफ होगा। 

27
00:03:16,800 --> 00:03:25,160
अब इसके उलट दुनिया भर के बड़े से
बड़े चेफ आपके लिए खाना उन्होंने 

28
00:03:25,160 --> 00:03:29,000
बनाया हो। 
और दुनिया का लज़ीज़ खाना अगर 

29
00:03:29,000 --> 00:03:37,520
आपका दिल खुदा के कलाम में लगा 
हुआ है तो वो खाना और शेफ कुछ 

30
00:03:37,520 --> 00:03:41,760
मायने नहीं रखते। 
कुछ भी नहीं तो मसला हमारे दिल का

31
00:03:41,760 --> 00:03:44,000
है। 
मसीह में तो हैं। 

32
00:03:44,160 --> 00:03:52,280
मसीह में हमें हमारी बुलाहट का 
कालिंग का पता होना बहुत जरूरी है

33
00:03:52,520 --> 00:03:58,520
और उस बुलाहट में हमें क्या 
इख्तियार है किस बारे में 

34
00:03:58,520 --> 00:04:03,880
इख्तियार है इसके बारे में आसमान 
से आसमानी बाप से मसीहेश में 

35
00:04:03,880 --> 00:04:07,560
इख्तियार का ज़ाहिर होना बहुत 
जरूरी है। 

36
00:04:07,960 --> 00:04:14,640
हमें बच्चन को अपनी कालिंग के 
मुताबिक फॉलो करना है जो इख्तियार

37
00:04:14,800 --> 00:04:22,840
कुदरत मसी में मसी से मसी में 
हासिल है उसके मुताबिक मसीह में 

38
00:04:22,840 --> 00:04:29,760
मसीह के रू में चलना है रुलकुच की
हदई से सजाई के रू से ना के अंधे,

39
00:04:30,080 --> 00:04:36,480
ना समझ गुमराह मसीह की तरह। 
बगैर कालिंग के बगैर विज़न के, 

40
00:04:37,880 --> 00:04:41,520
मसी ज़िन्दगी, गैर मसीह से भी 
बेकार है। 

41
00:04:42,360 --> 00:04:51,800
बगैर कालिंग के बगैर विज़न के 
मसीह लाइफ गैर मसीह से भी बेकार 

42
00:04:51,800 --> 00:04:56,520
है। 
लिखा है जहाँ रोया नहीं, जहाँ 

43
00:04:56,520 --> 00:05:02,760
विजन नहीं, जहाँ कॉलिंग नहीं वहाँ
लोग बेकैद हो जाते हैं यानी 

44
00:05:02,760 --> 00:05:10,760
बेकाबू यानी कहने से बाहर हुक्म 
से बाहर ना फरमानी के बेटे। 

45
00:05:12,440 --> 00:05:18,080
स्वाभाविक मुख़ालिफ़े मसीह तबई 
मोहम्मद से खाली रूल कुच के 

46
00:05:18,080 --> 00:05:24,760
मुखालिफ सच्चाई किरू के मुखालिफ 
जोआना ने जवाब में कहा इंसान कुछ 

47
00:05:24,760 --> 00:05:29,840
नहीं पा सकता जब तक उसको आसमान से
न दिया जाए। 

48
00:05:31,120 --> 00:05:39,200
ये सु ने उससे जवाब दिया कि अगर 
तुझे ऊपर से ना दिया जाता तो तेरा

49
00:05:39,200 --> 00:05:45,960
मुझ पर कुछ तैयार ना होता, तुमने 
मुझे नहीं चुना बल्कि मैंने 

50
00:05:45,960 --> 00:05:49,400
तुम्हें चुन लिया और तुमको 
मुकर्रर किया कि जाकर। 

51
00:05:49,560 --> 00:05:56,120
फल, लव और तुम्हारा फल कायम रहता 
कि मेरे नाम से जो कुछ बाप से 

52
00:05:56,120 --> 00:06:02,280
मांगो वो तुमको दे बस मैं जो 
खुदावन में कैदी हूँ तुमसे 

53
00:06:02,280 --> 00:06:07,160
इल्तिमाज़ करता हूँ कि जीस बुलावे
से बुलाहट में कालिंग से तुम 

54
00:06:07,160 --> 00:06:14,320
बुलाए गए थे। 
उसके मुनासिब चाल चलो की हदायत से

55
00:06:14,800 --> 00:06:22,480
मसीह के रूह में सच्चाई के रूह 
में मगर जैसा खुदावन ने हर एक को 

56
00:06:22,520 --> 00:06:27,640
हिस्सा दिया है और जीस तरह खुदा 
ने हर एक को बुलाया है। 

57
00:06:30,240 --> 00:06:36,560
ईमान के अंदाजे के मुआफिक ईमान के
अंदाजे के मुआफिक बुलाया है, उसी 

58
00:06:36,560 --> 00:06:44,920
तरह वो चले, नाके अंधे और गुमराह 
मसीह की तरह जीसको अपनी कालिंगा 

59
00:06:44,920 --> 00:06:48,680
कुछ पता नहीं। 
और जिसके पास रोया नहीं है, विज़न

60
00:06:48,680 --> 00:06:57,360
है ही नहीं लेकिन तुम एक बरगुजीदा
नस्ल शाही कहिनों का फिरका 

61
00:06:57,360 --> 00:07:03,920
मुकद्दस कौम और ऐसी मत हो जो खुदा
की खास मल्कीयत है तांकी उसकी 

62
00:07:03,920 --> 00:07:08,440
खूबियाँ ज़ाहिर करो। 
जिसने तुम्हें तारीकी से अपनी 

63
00:07:08,440 --> 00:07:17,920
अजीब रौशनी में बुलाया है, बल्कि 
तुम पहले उसकी बादशाती यानी रूल 

64
00:07:17,920 --> 00:07:22,400
को सच्चाई की रू हिकमत की रू 
मुक्कास्वा की रू बादशाहत खुदा की

65
00:07:22,400 --> 00:07:26,480
रू। 
और उसकी रास्तबाजी यानी रास्तबाजी

66
00:07:26,480 --> 00:07:35,000
जो ईमान से है, ईमान से है, ईमान 
के वसीले है, ईमान की रास्तबाजी 

67
00:07:35,000 --> 00:07:39,880
की तलाश करो, तो ये सब चीजें भी 
तुम्हें मिल जाएंगी। 

68
00:07:40,080 --> 00:07:47,720
किसकी तलाश करनी है बादशाहत? 
और ईमान की रास्तेबाजी की तो ये 

69
00:07:47,720 --> 00:07:53,040
सब चीजें भी तुम्हें मिल जाएंगी, 
लेकिन आज लोग अपने बदन की मशक्कत 

70
00:07:53,040 --> 00:07:59,120
से चीजों को पाना चाहते हैं। 
शरीयत के मुताबिक पुराने कानून को

71
00:07:59,760 --> 00:08:02,680
10 हुक्मों को मानकर पाना चाहते 
हैं। 

72
00:08:03,680 --> 00:08:11,640
नहीं आसी लोग ए भाइयों, अपने 
बुलाए जाने पर तो निगाह करो की 

73
00:08:11,640 --> 00:08:17,480
जिस्म के लिहाज़ से बहुत से हाकिम
बहुत से इख्तियार वाले बहुत से 

74
00:08:17,480 --> 00:08:22,720
अशरफ नहीं बुलाए गए बल्कि खुदा ने
दुनिया के बेवकूफों। 

75
00:08:23,600 --> 00:08:30,480
को चुनरिया की हाकीमों को 
शर्मिंदा करे और खुदा ने दुनिया 

76
00:08:30,480 --> 00:08:35,480
के कमजोरों को, चुनिया की 
जोरावरों को शर्मिंदा करे और खुदा

77
00:08:35,480 --> 00:08:41,960
ने दुनिया के कमीनों और हाकीरों 
को बल्कि बेवजहों को चुन लिया की 

78
00:08:42,320 --> 00:08:50,520
मज़दूरों को निस्ता करे ताकि कोई 
बशर खुदा के सामने फक्र घमंड ना 

79
00:08:50,520 --> 00:08:56,600
करे, लेकिन तुम उसकी तरफ से मसीह 
यशव में हो जो हमारे लिए खुदा की 

80
00:08:56,600 --> 00:09:00,960
तरफ से हिकम ठहरा यानी रास्तेबाजी
और पाकीज़गी और मक्लसी? 

81
00:09:01,360 --> 00:09:08,960
ताकि जैसा लिखा है वैसा ही हो की 
जो फक्र करे, घमंड करे वो कुदावन 

82
00:09:09,160 --> 00:09:14,120
पर फक्र करे। 
नेमते यानी कालिंग की बात हो रही 

83
00:09:14,120 --> 00:09:20,600
है बुलाहट की बात हो रही है नेमते
तो तारा तारा की हैं, मग रू एक ही

84
00:09:20,600 --> 00:09:24,720
है। 
और खिदमतें भी तरह तरह की हैं मगर

85
00:09:24,720 --> 00:09:31,560
खुदाबंद एक ही है यानी कालिंग की 
बात हो रही है और तासीरें भी तरह 

86
00:09:31,560 --> 00:09:37,720
तरह की है मगर खुदा एक ही है जो 
सब में हर तरह का अस्त्र पैदा 

87
00:09:37,720 --> 00:09:42,440
करता है। 
लेकिन हर शख्स में रू का जहूर 

88
00:09:42,760 --> 00:09:48,720
फायदा पहुंचाने के लिए होता है, 
क्योंकि एक को रू के वसीले से 

89
00:09:48,760 --> 00:09:53,920
हिकमत का कलाम इनायत होता है और 
दूसरे को उसी रू की मर्जी के 

90
00:09:54,080 --> 00:09:59,080
इलमियाद का कलाम किसी को उसी रू 
से ईमान। 

91
00:09:59,600 --> 00:10:07,800
और किसी को उसी एक रूह से शिफा 
देने की तौफीक किसी को मौजजों की 

92
00:10:07,800 --> 00:10:15,040
कुदरतें, किसी को नबूवत, किसी को 
रूहों की इम्तियाज़ किसी को। 

93
00:10:15,360 --> 00:10:21,480
तरह तरह की जबानी किसी को जुबानों
का तर्जमा करना लेकिन ये सब 

94
00:10:21,480 --> 00:10:28,920
तसीरें वही एक रू करती है और 
जीसको जो चाहती है बांटती है। 

95
00:10:30,080 --> 00:10:36,240
और हम में से हर एक परमसी की 
बख्शिश के अंदाज़े के मुहाफिक फजल

96
00:10:36,240 --> 00:10:42,120
हुआ है इसी वास्ते वो कहता है कि 
जब वो आर्मी बाला पर चढ़ा तो 

97
00:10:42,120 --> 00:10:48,000
कैदियों को साथ ले गया और आदमियों
को इनाम दिए उसके। 

98
00:10:48,720 --> 00:10:54,720
चढ़ने से और क्या पाया जाता है? 
सिवा इसके कि वो जमीन के नीचे के 

99
00:10:55,280 --> 00:11:02,080
इलाके में उतरा भी था और ये उतरने
वाला वो ही है जो सारे आसमानों से

100
00:11:02,080 --> 00:11:05,880
भी ऊपर चढ़ गया ताकि सब चीजों को 
करे। 

101
00:11:06,160 --> 00:11:12,880
और उसी में बांस को रसूल रसूल 
होता है जो रूल कुछ की हदाय से 

102
00:11:12,880 --> 00:11:24,080
चलता है। 
रसूल और बांस को 90 और बांस को 

103
00:11:24,680 --> 00:11:30,200
मुबाशिर। 
और बांस को चरवाहा और उस्ताद 

104
00:11:30,200 --> 00:11:36,320
बनाकर दे दिया, ताकि मुकद्दस लोग 
का मिल बने और खिदमत गुजारी का 

105
00:11:36,320 --> 00:11:42,280
काम किया जाए और मसीह का बदन 
तरक्की पाए यानी क्लीसिया। 

106
00:11:42,440 --> 00:11:48,000
जब तक हम सब के सब खुदा के बेटे 
के ईमान और उसकी पहचान में एक ना 

107
00:11:48,000 --> 00:11:53,400
हो जाए और कामिल इंसान ना बने 
यानी ईमान के बानी और कामिल करने 

108
00:11:53,400 --> 00:12:00,000
वाले मसेयसिया को तख्त रहे यानी 
कामिल इंसान ना बने यानी मसीह के।

109
00:12:00,240 --> 00:12:07,240
पूरे कद के अंदाज़े तक ना पहुँच 
जाए और खुदा ने कलिसिया में अलग 

110
00:12:07,240 --> 00:12:13,800
अलग शख्स मुकरर की है। 
पहले रसूल दूसरे नब्बी, तीसरे 

111
00:12:13,800 --> 00:12:18,280
उस्ताद फिर मौजिज़े दिखाने वाले, 
फिर शिफा देने वाले। 

112
00:12:20,240 --> 00:12:27,320
मददगार मुन्ताजिम तरह तरह की 
ज़बानें बोलने वाले क्या सब रसूल 

113
00:12:27,360 --> 00:12:31,320
है? 
कहने का मतलब है कि क्या सबको यही

114
00:12:31,320 --> 00:12:37,560
कालिंग है? 
क्या सब नबी हैं क्या सब उस्ताद? 

115
00:12:38,600 --> 00:12:43,960
क्या सब मौजाद दिखने वाले हैं? 
क्या सब को इशफा देने की कुबती 

116
00:12:43,960 --> 00:12:47,840
नायत हुई क्या? 
सब तरह तरह की जुबानी बोलते हैं 

117
00:12:48,480 --> 00:12:53,360
क्या सब पर जुमा करते हैं? 
तुम बड़ी से बड़ी नीमों की अर्दू 

118
00:12:53,360 --> 00:12:55,560
रखो। 
फिर उसने अपने। 

119
00:12:55,840 --> 00:12:59,240
12 शगिरतों को पास पहले क्या 
किया? 

120
00:12:59,240 --> 00:13:06,520
पास बुलाया पास बुलाकर उन्हें 
नापाक रूहों पर इख्तियार बख्शा। 

121
00:13:06,520 --> 00:13:11,440
क्या बख्शा? 
इख्तियार बक्सा गुलाहट इख्तियार 

122
00:13:12,160 --> 00:13:18,680
कि उनको निकालें। 
और हर तरह की बिमारी हर तरह की 

123
00:13:18,680 --> 00:13:25,480
कमजोरी को दूर करें। 
पहले बुलाया इख्तियार बक्सा और ये

124
00:13:25,480 --> 00:13:30,560
एक बुलाहट है, कालिंग है और 
इख्तियार है पहले बुलाहट है और 

125
00:13:30,560 --> 00:13:34,600
फिर इख्तियार है और इख्तियार किन 
चीजों पर दिया। 

126
00:13:35,920 --> 00:13:44,320
नापाक रूहों पर और हर तरह की 
बिमारी और हर तरह की कमजोरी को 

127
00:13:44,320 --> 00:13:50,840
दूर करें। 
किसी को चंगा करना और नापाक रूह 

128
00:13:52,080 --> 00:13:58,040
इख्तियार ये। 
खुदा की कुदरत है, यानी नापाक 

129
00:13:59,120 --> 00:14:05,080
रूहों से लोगों को आजाद करना। 
शिफा बक्शना यानी मौजजा ये एक 

130
00:14:05,080 --> 00:14:10,800
बुलाहट है। 
खुदा की कुदरत है, बक्शिश फजल है।

131
00:14:11,000 --> 00:14:17,200
हर तरह की बिमारी और तरह की 
कमजोरी को दूर करें तो सबसे पहले 

132
00:14:17,200 --> 00:14:23,800
अपनी कालिंग को बुलाहट को पहचानना
बहुत जरूरी है और मसीह यशया की 

133
00:14:23,800 --> 00:14:27,600
तरफ से इख्तियार मिलना बहुत जरूरी
है। 

134
00:14:28,120 --> 00:14:34,720
सिंपल शब्दों में अगर कोई पुलिस 
ऑफिसर है जीस, किसी भी ओहदे पर 

135
00:14:35,120 --> 00:14:43,120
हो, आर्मी ऑफिसर हो, जब तक हैयर 
अथॉरिटी से उनको ऑर्डर नहीं आ 

136
00:14:43,120 --> 00:14:47,920
जाता, वो अपनी मर्जी से ऑफिसर 
होते हुए भी। 

137
00:14:48,200 --> 00:14:56,240
लाचार है या उन्हें कोई भी अक्शॅन
लेने के लिए हर डिपार्टमेंट को जो

138
00:14:56,240 --> 00:15:07,560
उनके ऊपर अथॉरिटी है, उससे इजाजत 
लेनी पड़ती है बिना इजाजत के फिर?

139
00:15:08,120 --> 00:15:15,040
उस काम के मुताबिक उसका एक 
एक्स्पर्ट एक्सपीरियंस ऑफिसर 

140
00:15:15,040 --> 00:15:23,840
नियुक्त किया जाता है और उसके साथ
उसके अंडरस्टैंडिंग की टीम इसी 

141
00:15:23,840 --> 00:15:26,840
तरह। 
हमारे बच्चे हैं, स्कूल में पढ़ते

142
00:15:26,840 --> 00:15:32,360
हैं या कोई भी किसी तरह की स्टडी 
कर रहे हैं या कोई स्किल सीख रहे 

143
00:15:32,360 --> 00:15:36,440
हैं? 
आप अपने बच्चे के लिए जीस 

144
00:15:36,440 --> 00:15:41,000
सब्जेक्ट में इन्ट्रेस्ट रखता है 
उसके लिए उस सब्जेक्ट। 

145
00:15:41,080 --> 00:15:43,800
का है। 
एक्सपीरियंस्ड टीचर एक्स्पर्ट को 

146
00:15:43,800 --> 00:15:49,640
नियुक्त करेंगे। 
स्किल के तौर पर बच्चा म्यूसिक 

147
00:15:49,640 --> 00:15:53,080
में इंटरेस्ट रखता है तो म्यूसिक 
में आ म्यूसिक में। 

148
00:15:53,080 --> 00:16:00,480
सास है, आवाज़ है और रिदम है। 
तो जो हमारा बच्चा सीखना चाहता 

149
00:16:00,480 --> 00:16:05,080
है, जिसमें हमारे बच्चे का 
इंट्रेस्ट है, हम उस टीचर से 

150
00:16:05,080 --> 00:16:11,280
उस्ताद से सिखाएंगे तो इस 
एग्ज़ैम्पल से दृष्टा से आपको समझ

151
00:16:11,960 --> 00:16:15,760
आ जाना चाहिए कि मैं क्या कहने की
कोशिश कर रहा हूँ। 

152
00:16:15,760 --> 00:16:20,520
समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि। 
हम मसीह में होते हुए कुछ भी अपनी

153
00:16:20,520 --> 00:16:26,080
मर्जी से नहीं कर सकते। 
कुदरत तो मसीह के नाम में है, मगर

154
00:16:26,280 --> 00:16:34,040
उस कुदरत से अगर हम इजाज़त लिए 
बिना उस कुदरत। 

155
00:16:34,480 --> 00:16:41,920
जैसे कलाम लेखा ने खुदा का व्यर्थ
नाम ना लो खुदा का व्यर्थ नाम ना 

156
00:16:41,920 --> 00:16:48,960
लो और वो इख्तियार दिया जाता है 
ठीक है वो इख्तियार आसमान से दिया

157
00:16:48,960 --> 00:16:54,440
जाता है कुदरत ने। 
आपको इख्तियार दिया जाता है उस 

158
00:16:54,440 --> 00:17:05,240
कुदरत का, क्योंकि पहले खुदा 
चुनता है, ठीक है हम खुदा को नहीं

159
00:17:05,240 --> 00:17:10,400
चुनते, खुदा हमें चुनता है, मर्जी
खुदा की है, हमारी नहीं। 

160
00:17:11,480 --> 00:17:14,720
हमने रूल कुश की हदई से चलना है 
ना की रूल। 

161
00:17:14,720 --> 00:17:21,599
कुश ने हमारी हदई से चलना है अगर 
आप मसीह में होते हुए अपनी मर्जी 

162
00:17:22,119 --> 00:17:27,440
के मुताबिक चल रहे हैं। 
अपने स्वाभाविक सोच के मुताबिक 

163
00:17:28,280 --> 00:17:30,880
अपनी मर्जी से कुछ भी किए जा रहे 
हैं। 

164
00:17:32,400 --> 00:17:38,000
कि दिमाग में एक इल्ल्यूशन क्रिएट
किया उसके हिसाब से करना शुरू कर 

165
00:17:38,000 --> 00:17:39,320
दिया। 
इंसान ने। 

166
00:17:39,320 --> 00:17:45,240
रूस स्वाभाविक इरादे से तो उसका 
खामियाजा खामियाजा बोल रहा हूँ। 

167
00:17:45,240 --> 00:17:49,800
उसका खामियाजा भी उस इंसान को 
भुगतना पड़ेगा। 

168
00:17:51,880 --> 00:17:58,880
तो भी उसने हमारी मशक्कतें उठा 
लीं और हमारे गमों को बर्दाश्त 

169
00:17:58,880 --> 00:18:04,520
किया पर हमने उसे खुदा का मारा 
कूटा सताया हुआ समझा। 

170
00:18:04,840 --> 00:18:09,160
हालांकि वो हमारी कथाओं के सबब से
घायल किया गया और हमारी। 

171
00:18:09,280 --> 00:18:14,360
बद किरदार के 22 कुचला गया। 
हमारी ही सलामती के लिए उस पर 

172
00:18:14,360 --> 00:18:18,480
सियासत हुई ताकि उसके मार खाने से
हम शिपा पाएं। 

173
00:18:19,920 --> 00:18:27,640
वो टूटे दिलवालों को चंगा करता है
और उनके घावों पर पट्टी बांधता 

174
00:18:27,640 --> 00:18:31,320
है। 
हे मेरे दिल यहवा की स्तुति कर और

175
00:18:31,320 --> 00:18:38,560
उसके किसी उपकार को ना भूलना वही 
तो तेरे सब पापों को शमा करता है 

176
00:18:38,880 --> 00:18:46,320
और तेरे सब रोगों को चंगा करता है
ये यहवा मुझे चंगा कर, तब मैं 

177
00:18:46,320 --> 00:18:52,920
चंगा हो जाऊंगा। 
मुझे बचा तब मैं बच जाऊंगा 

178
00:18:53,560 --> 00:19:00,680
क्योंकि मैं तेरी स्तुति करता हूँ
ए मेरे बेटे मेरी बातों पर तवज्जो

179
00:19:00,680 --> 00:19:06,920
कर फोकस ध्यान दे मेरे कलाम पर 
कान। 

180
00:19:08,160 --> 00:19:17,200
कॉल लगा उसको अपनी आँख से, अपनी 
सोच से, ख्याल से, विज़न से थॉट 

181
00:19:17,200 --> 00:19:24,320
प्रोसेसर से, विचारों से ओझल ना 
होने दे, उसको अपने दिल में रख। 

182
00:19:25,080 --> 00:19:33,640
क्योंकि जो इसको पा लेते हैं, ये 
उनकी हयात है यानी जिंदगी है और 

183
00:19:33,640 --> 00:19:40,480
उनके सारे जिस्म की सेहत है अपने 
दिल की खूबी फज़द कर क्योंकि 

184
00:19:40,480 --> 00:19:44,800
जिंदगी का सर चश्मा वही है खुदावन
उसे। 

185
00:19:45,040 --> 00:19:51,800
बिमारी के बिस्तर पर संभालेगा तो 
कलाम क्या कहता है की जो बिमारी 

186
00:19:51,800 --> 00:19:59,080
का बिस्तर है तू उसकी बिमारी में 
उसके पूरे बिस्तर को ठीक करता है?

187
00:19:59,800 --> 00:20:04,600
ए प्यारे, मैं ये दुआ मांगता हूँ 
कि जीस तरह तू रूहानी तरक्की कर 

188
00:20:04,600 --> 00:20:07,680
रहा है। 
इसी तरह तू सब बातों में तरक्की 

189
00:20:07,680 --> 00:20:14,080
करे और तंदरुस्त रहे। 
जब हम रूहानी तरक्की करते जाते 

190
00:20:14,080 --> 00:20:20,480
हैं तो ही तंदरुस्त रहेंगे। 
ए प्यारे, मैं ये दुआ मांगता हूँ 

191
00:20:20,480 --> 00:20:26,600
कि जीस तरह तू रूहानी तरक्की कर 
रहा है, रूहानी तरक्की कर रहा है 

192
00:20:26,720 --> 00:20:32,720
यानी कर रहा है। 
इसी तरह तू सब बातों में तरक्की 

193
00:20:32,720 --> 00:20:37,520
करे और तंदरुस्त रहे। 
यानी रूहानी तरक्की। 

194
00:20:37,600 --> 00:20:44,440
जैसे जैसे करोगे तो तंदरुस्त 
रहोगे, क्योंकि मैं फिर तुझे 

195
00:20:44,600 --> 00:20:49,160
तंदरुस्ती और तेरे जख्मों से शिफा
बख्शूंगा खुदावन फरमाता है। 

196
00:20:50,280 --> 00:20:56,240
कहने का मतलब अगर तंदरुस्त इंसान 
नहीं है तो वो। 

197
00:20:57,160 --> 00:21:04,440
रूहानी तरक्की में नहीं है। 
अगर रूहानी तरक्की है तो ही 

198
00:21:04,440 --> 00:21:10,400
तंदरुस्ती उसमें कायम रहती है की 
मैं फिर तुझे तंदरुस्ती और तेरे 

199
00:21:10,400 --> 00:21:13,280
जख्मों से शिफा बख्शूँगा खुदावन 
फरमाता है। 

200
00:21:13,760 --> 00:21:18,680
अगर तू दिल लगाकर खुदावन अपनी 
खुदा की बात सुनें ईमान सुनने से 

201
00:21:18,680 --> 00:21:23,760
पैदा कर सुन ना मसीह के कलाम से 
और उसको सच्चाई के रूह से कबूल 

202
00:21:23,760 --> 00:21:28,920
करना है सिर्फ सुनना नहीं है और 
वो ही काम करे जो उसकी नजर में 

203
00:21:28,920 --> 00:21:33,200
भला है और उसके हुक्मों को माने 
और उसके। 

204
00:21:33,400 --> 00:21:39,840
ऐन पर अमल करे तो मैं अब हुक्म 
क्या है? 

205
00:21:39,840 --> 00:21:46,200
रूलकुस की हदाय से मोहब्बत करना 
रूलकुस की वसीले खुदा की मोहब्बत 

206
00:21:46,200 --> 00:21:49,040
हमारे दिलों में डाल गई। 
जब हुक्म आता है तो लोगों के 

207
00:21:49,040 --> 00:21:53,320
मैएंड में 10 हुक्म आते हैं। 
वो हम उसके अधीन नहीं है। 

208
00:21:53,320 --> 00:21:58,280
इस वक्त सलीब के बाद सलीबी 
कुर्बानी के बाद हम उसके पूरी 

209
00:21:58,360 --> 00:22:01,080
दुनिया आदमजात उसके अधीन नहीं 
रहे। 

210
00:22:01,200 --> 00:22:09,720
जब हुक्म का मकसद है बेरिया ईमान,
बेरिया मान नेक नियत। 

211
00:22:10,880 --> 00:22:14,600
और पाक दिल से मोहब्बत पैदा हो 
रूलकुच के वसीले खुदा की 

212
00:22:14,600 --> 00:22:19,200
मोहब्बतें हमारे दिलों में डाली 
गई है तो हुक्म को माने यानी 

213
00:22:19,200 --> 00:22:26,040
रूलकुच के वसीले मोहब्बत करें और 
उसके ऐन पर अमल करें तो मैं उन 

214
00:22:26,040 --> 00:22:31,320
बीमारियों में से जो। 
मैंने मिस्रियों पर यानी मिश्राइन

215
00:22:31,320 --> 00:22:38,680
का जो मतलब है वो है दोगुना 
स्ट्रेस, जिस्मानी स्ट्रेस, 

216
00:22:39,120 --> 00:22:46,840
डिप्रेशन, टेंशन जो मैंने गुलामी 
मिसर। 

217
00:22:47,080 --> 00:22:55,680
गुलामी का निशान है तो मैंने 
मिस्रियों पर जो बीमारियां भेदी 

218
00:22:55,680 --> 00:23:02,000
यानी बीमारियां कहाँ पर है जिस्म 
में तो मिस्रियों पर भेदी तुझ पर 

219
00:23:02,280 --> 00:23:06,360
कोई ना भेजूंगा क्योंकि मैं खुदा 
हूँ, तेरा शाफी हूँ। 

220
00:23:07,880 --> 00:23:12,280
वो आप हमारे गुनाहों को अपने बदन 
पर लिए हुए सलीब पर चढ़ गया ताकि 

221
00:23:12,280 --> 00:23:16,160
हम गुनाहों के अतबार से मरकर 
रास्तेबाजी के अतबार से जिए और 

222
00:23:16,160 --> 00:23:22,240
उसके मार खाने से तुमने सिफा पाई 
तो उसने तो सिफा दे दी। 

223
00:23:22,240 --> 00:23:25,560
क्या आपने सच्चाई के रूप में सिफा
कबूल की? 

224
00:23:27,280 --> 00:23:35,520
मसला ये है कि आप ने शिफा कबूल की
या नहीं की सच्चाई के रूह से वो 

225
00:23:35,520 --> 00:23:40,280
अपना कलम नाज़िल फरमा कर उनको 
शिफा देता है। 

226
00:23:41,240 --> 00:23:51,280
क्या कर कर कलम नाज़िल फरमा कर? 
और उनको उनकी हलाकत से रिहाई 

227
00:23:51,280 --> 00:23:56,960
बख्शता है और वो कलाम है मासी 
येशा फजल और सच्चाई से मामूर कलाम

228
00:23:57,680 --> 00:24:01,240
उसकी मामूरी में से हम सबने पाए। 
यानी फसल पर फसल क्योंकि फसल और 

229
00:24:01,240 --> 00:24:06,440
सच्चाई। 
हे मेरे परमेश्वर एथोनाई एलोहिम 

230
00:24:06,440 --> 00:24:13,960
यौवा मैंने सहायता के लिए तुझको 
पुकारा और तुने मुझे चंगा किया 

231
00:24:13,960 --> 00:24:19,040
है। 
जब शाम हुई तो उसके पास बहुत से 

232
00:24:19,120 --> 00:24:24,160
लोगों। 
को लाए, जिनमें बदरूएं थीं। 

233
00:24:24,480 --> 00:24:31,560
उसने रूहों को जबान ही से कहकर 
निकाल दिया और सब बीमारों को 

234
00:24:31,560 --> 00:24:37,360
अच्छा कर दिया ताकि जो ये साया 
नबी की इमारत कहा गया था वो पूरा 

235
00:24:37,360 --> 00:24:44,400
हो कि उसने आप हमारी। 
कमजोरियां ले ली और बीमारियां उठा

236
00:24:44,400 --> 00:24:49,960
ली, क्योंकि मैं फिर तुझे 
तंदरुस्त और तेरे जख्मों से 

237
00:24:50,240 --> 00:24:54,040
सिफाबख्शुंगा खुदाबुद फरमाता है, 
बस। 

238
00:24:54,240 --> 00:24:59,160
जब हमारा एक ऐसा बड़ा सरदार काही 
है जो आसमानों से गुजर गया यानी 

239
00:24:59,160 --> 00:25:06,800
खुदा का बेटा यसू तो आओ हम अपने 
इकरार पर टाइम रहे क्योंकि हमारा 

240
00:25:06,800 --> 00:25:11,520
ऐसा सरदार काही नहीं जो हमारी 
कमजोरियों यानी बीमारियों में 

241
00:25:11,520 --> 00:25:17,680
हमारा हमदर्द ना हो सके। 
बल्कि सारी बातों में हमारी तरह 

242
00:25:17,680 --> 00:25:22,880
आजमाया गया था। 
हम बेगुनाह रहा, बस आओ हम फसल के 

243
00:25:22,880 --> 00:25:28,280
तख्त के पास दिलेरी से चले ताकि 
हम पर रहम हो और वो फसल हासिल 

244
00:25:28,280 --> 00:25:31,720
करें जो जरूरत के वक्त हमारी मदद 
करें। 

245
00:25:32,160 --> 00:25:36,560
इसलिए हम। 
हिम्मत नहीं हारते बल्कि गो हमारी

246
00:25:36,840 --> 00:25:43,200
सारी इंसानियत जायिल होती जाती है
फिर भी हमारी बातीनी इंसानियत 

247
00:25:43,200 --> 00:25:50,840
रोज़ ब रोज़ नहीं होती जाती है 
क्योंकि हमारी दम भर की हल्की सी 

248
00:25:50,840 --> 00:25:56,600
मुसीबत हमारे लिए। 
अजहदत भारी और अवधि जलाल पैदा 

249
00:25:56,600 --> 00:26:02,400
करती जाती है जीस हाल में की हम 
देखी हुई चीजों पर नहीं बल्कि 

250
00:26:02,400 --> 00:26:06,400
अनदेखी चीजों पर नजर करते हैं 
क्योंकि देखी हुई चीजें चंद रोजा 

251
00:26:06,400 --> 00:26:08,600
है मगर अनदेखी चीजें अवधि हैं।
