1
00:00:01,080 --> 00:00:10,920
ब्लड ऑफ कैबिनेट खुदा के सात 
आसमानी बाप के साथ हमारा रिश्ता 

2
00:00:11,000 --> 00:00:14,520
ईमान के वसीले मसीह के रू के 
वसीले खून का रिश्ता। 

3
00:00:16,720 --> 00:00:20,520
इसलिए कि आज के इस टॉपिक का नाम 
रखा है। 

4
00:00:20,520 --> 00:00:24,160
उसकी मेमोरी में से हम सब ने पाए।
यानी फसल पर फसल, फसल और सच्चाई 

5
00:00:24,160 --> 00:00:29,800
इमारत पहुंची। 
के रिश्ते जन्म। 

6
00:00:31,720 --> 00:00:38,560
सांझा वंछा या वंछावली के माध्यम 
से व्यक्तियों के बीच के संबंधों 

7
00:00:38,560 --> 00:00:45,960
को कहते हैं। 
जिनमें माता पिता, भाई, बहन, बुआ,

8
00:00:45,960 --> 00:00:50,840
चाचा और चचेरे भाई बहन शामिल है। 
पंजाबी में। 

9
00:00:51,000 --> 00:01:00,880
पगड़ी का अदान परदान जिससे पगड़ी 
बदलना, एक्स्चेंज करना कहा जाता 

10
00:01:00,880 --> 00:01:05,480
है। 
पंजाब की एक गहरी जड़ें जमाई हुई 

11
00:01:06,560 --> 00:01:13,680
संस्कृति है, शरा है, परंपरा है। 
जो एक स्थाई भाईचारा के रिश्ते को

12
00:01:14,040 --> 00:01:20,280
मजबूत करने का प्रतीक है, जिसे 
आमतौर पर भाईचारा कहा जाता है। 

13
00:01:20,920 --> 00:01:25,640
पगड़ी का ये आदान प्रदान दो 
व्यक्तियों और उनके परिवारों को 

14
00:01:25,640 --> 00:01:29,040
अक्सर पीढ़ियों तक एक साथ बांधता 
है जो। 

15
00:01:29,440 --> 00:01:38,400
हर परिस्थिति में सुख दुख सांझा 
करने की प्रतिबन्धता को दर्शाता 

16
00:01:38,400 --> 00:01:43,640
है। 
पगड़ी का प्रतीकात्मक महत्त्व 

17
00:01:43,640 --> 00:01:48,200
पगड़ी पुरुष के समान आदर और गरिमा
का प्रतीक है। 

18
00:01:48,760 --> 00:01:56,840
इसे धारण करना उस सम्मान को साझा 
करने और दूसरे व्यक्ति को भाई के 

19
00:01:56,840 --> 00:02:02,800
रूप में स्वीकार करने का संकेत है
यानी साइन है, सिंबल है भाईचारा 

20
00:02:02,800 --> 00:02:07,480
और सम्मान एक बार पगड़ी का आदान 
प्रदान हो जाने के बाद दोनों। 

21
00:02:08,240 --> 00:02:19,160
पुरुष एक दूसरे को खून के भाई की 
तरह मानते हैं और उनके परिवार भी 

22
00:02:19,160 --> 00:02:26,080
एक दूसरे को प्रति समान सम्मान 
प्रदर्शित करते हैं। 

23
00:02:26,920 --> 00:02:31,560
इतिहास के संदर्भ हालांकि इसे 
अक्सर मित्रता से जोड़ा जाता है, 

24
00:02:31,800 --> 00:02:38,000
लेकिन ऐतिहासिक रूप से इस कार्य 
ने गठबंधन और भाईचारों को मजबूत 

25
00:02:38,000 --> 00:02:43,200
किया जिससे आपसी समर्थन और 
सुरक्षा सुनिश्चित हुई। 

26
00:02:45,480 --> 00:02:52,960
मुँह बोला भाई का अर्थ है ऐसा भाई
जो यानी वाचा मुँह की वाचा जुबान 

27
00:02:52,960 --> 00:02:59,080
की वाचा ऐसा भाई जो सगा रक्त 
संबंधी न हो, जिसके साथ ब्लड 

28
00:02:59,080 --> 00:03:04,480
रिलेशनशिप कुछ नहीं है बल्कि 
स्नेह सामान्य वचन के कारण बनाया 

29
00:03:04,480 --> 00:03:07,760
गया हो। 
ये एक पवित्र रिश्ता है जिसमें 

30
00:03:07,760 --> 00:03:12,840
बिना खून के रिश्ते के भी भाई बहन
की तरह प्यार और सुरक्षा की 

31
00:03:12,840 --> 00:03:19,920
जिम्मेदारी निभाई जाती है। 
इसे बनाया हुआ है भाईया दीन भाई 

32
00:03:22,200 --> 00:03:26,880
धर्मी साधक। 
भाई भी कहा जाता है। 

33
00:03:28,040 --> 00:03:33,520
मुँह बोला भाई का अर्थ जो खून का 
रिश्ता ना होने पर भी मुँह से 

34
00:03:33,520 --> 00:03:43,200
कहकर भाई माना गया है भावर्त जिसे
सगा ना होते हुए वे दिल से भाई 

35
00:03:43,200 --> 00:03:47,040
बनाया हो। 
और डॉक्टर ब्रदर। 

36
00:03:49,400 --> 00:03:53,880
अब कलाम के मुताबिक और तकरीबन 
सारी चीजें शरीयत के मुताबिक खून 

37
00:03:53,880 --> 00:03:58,800
से पाक की जाती है यानी आदमा 
इब्रानी में कहते हैं और बगैर खून

38
00:03:58,800 --> 00:04:04,000
बहे मुनाफी नहीं होती नहीं होता 
क्योंकि जिस्म की जान खून में। 

39
00:04:04,640 --> 00:04:11,640
है और मैंने मजबा पर तुम्हारी 
जानों के कफारे के लिए उसे तुम को

40
00:04:12,440 --> 00:04:16,959
दिया है कि उससे तुम्हारी जानों 
के लिए कफारा हो, क्योंकि जान 

41
00:04:17,760 --> 00:04:20,640
रखने ही के सबब से खून कफारा देता
है। 

42
00:04:21,040 --> 00:04:26,040
इब्राहिम, जो मेरा दोस्त है। 
और ये नवस्ता पूरा हुआ कि 

43
00:04:26,040 --> 00:04:31,920
इब्राहिम खुदा पर इमाल लाया और ये
यानी उनके वादों को सच्चा माना 

44
00:04:31,920 --> 00:04:38,080
सच्चाई के रू से कुबूल किया और ये
उसके लिए रास्तेबाजी गिना गया और 

45
00:04:38,080 --> 00:04:44,320
वो खुदा का दोस्त कहलाया और मैं 
अपने और तेरे दरमियां और तेरे बा 

46
00:04:44,320 --> 00:04:49,760
तेरी नस्ल के दौरान उनकी सब 
पुस्तों के लिए अपना अहद जो अबदी 

47
00:04:49,760 --> 00:04:56,640
अहद होगा हमेशा का अहद होगा बंदू 
गा ता की मैं तेरा और तेरे बा, 

48
00:04:56,640 --> 00:05:01,320
तेरी नस्ल का खुदा रहूँ और मैं 
तुझको और तेरे बा तेरी नस्ल को 

49
00:05:01,320 --> 00:05:05,840
कनन का तमाम मुल्क। 
जिसमें तू परदेसी है, ऐसा दूंगा 

50
00:05:05,840 --> 00:05:11,000
कि वो दाहिमी मल्कियत हो जाए और 
मैं उनका खुदा होऊंगा। 

51
00:05:11,000 --> 00:05:18,280
फिर खुदा ने अब्राहम से कहा कि तू
मेरे अहद को मान और तेरे बा, तेरी

52
00:05:18,280 --> 00:05:22,840
नस्ल पुश्त दर पुश्त उसे माने और 
मेरा अहद जो। 

53
00:05:23,360 --> 00:05:28,480
मेरे और तेरे दरमियां और तेरे बात
तेरी नस्ल के दरमियां है और जिसे 

54
00:05:28,480 --> 00:05:35,000
तुम मानोगे सो ये है कि तुम में 
से हर एक फरजंदे नरीना का। 

55
00:05:35,080 --> 00:05:41,120
हतना किया जाए और तुम अपने बदन की
खलड़ी का खतना किया करना और ये उस

56
00:05:41,120 --> 00:05:47,360
आहट का निशान होगा जो मेरे और 
तुम्हारे दरमयान है तुम्हारे यहाँ

57
00:05:47,360 --> 00:05:51,920
पुष्प, हर लड़के का खतना जब वो आठ
रोज़ का हो। 

58
00:05:52,240 --> 00:05:55,880
किया जाए। 
ख्वा वो घर में पैदा हो ख्वा उसे 

59
00:05:55,880 --> 00:06:03,400
किसी परदेसी से खरीदा हो, जो तेरी
नस्ल से नहीं लाजिमी है कि तेरे 

60
00:06:04,840 --> 00:06:11,080
खानाजाद और तेरे जरखिरत का खतना 
किया जाए। 

61
00:06:11,160 --> 00:06:16,840
और मेरा अहद तुम्हारे जिस्म में 
अब्दी अहद होगा और वो फरजंदे 

62
00:06:16,840 --> 00:06:22,120
नरीना जिसका खतना ना हुआ हो, अपने
लोगों में से काट डाला जाए, 

63
00:06:22,120 --> 00:06:25,960
क्योंकि उसने मेरा अहद तोड़ा। 
खुदाबंद फरमाता है। 

64
00:06:25,960 --> 00:06:30,760
क्योंकि तुने यह काम किया कि अपने
बेटे को भी जो तेरा इकलौता है, 

65
00:06:30,760 --> 00:06:37,520
दरज न रखा है इसलिए मैंने भी अपनी
जात की कसम खाई है कि मैं तुझे 

66
00:06:37,520 --> 00:06:40,400
बरकत पर बरकत दूंगा और तेरी नस्ल 
को। 

67
00:06:40,720 --> 00:06:45,160
बढ़ाते बढ़ाते आसमान के तार और 
समुंदर के किनारों की रेत की 

68
00:06:45,640 --> 00:06:54,080
माननी कर दूंगा और तेरी औलाद अपने
दुश्मनों के फाटक की मालिक होगी 

69
00:06:54,080 --> 00:06:58,920
और तेरी नस्ल के वसीले से जमीन की
सबक में। 

70
00:06:59,280 --> 00:07:03,720
बरकत पाएंगे। 
क्योंकि तुने मेरी बात मानी और ना

71
00:07:03,760 --> 00:07:09,200
इब्राहिम की नस्ल होने के सब से 
सब फर्जंद ठहरे बल्कि बल्कि ये 

72
00:07:09,200 --> 00:07:13,120
लिखा है कि इस हाक ही से तेरी 
नस्ल कहलाएगी बस। 

73
00:07:13,160 --> 00:07:16,200
इब्राहिम और उसकी नस्ल से वादे 
किए गए। 

74
00:07:16,200 --> 00:07:21,160
वो ये नहीं कहता कि नस्लों से 
जैसा बहुतों के वास्ते कहा जाता 

75
00:07:21,160 --> 00:07:27,200
है, बल्कि जैसा एक के वास्ते की 
तेरी नस्ल को और वो मसीह है और 

76
00:07:27,200 --> 00:07:31,680
जो। 
मसीका है अगर उसमें मसीकी रू है 

77
00:07:31,680 --> 00:07:35,520
तो वो मसीका है अगर मसीकी रू 
नहीं, वो मसीका नहीं। 

78
00:07:37,920 --> 00:07:42,880
मेरा ये मतलब है कि जीस आहत की 
खुदा ने पहले से तसदीक की थी। 

79
00:07:43,120 --> 00:07:48,120
उसको शरियत 430 बरस के बाद आकर 
बात नहीं कर सकती कि वो वादा ला 

80
00:07:48,120 --> 00:07:52,040
हासिल हो। 
ना खत, ना कोई चीज़ है ना नमक 

81
00:07:52,040 --> 00:07:55,600
तुनी बल्कि खुदा के हुक्मों पर 
चलना ही सब कुछ है। 

82
00:07:55,920 --> 00:07:59,560
हर शख्स जीस। 
हालत में बुलाया गया हो, उसी में 

83
00:07:59,560 --> 00:08:05,040
रहे पर मसीयश्या में ना तो खतना 
कुछ काम का है, मसीयश्या में ना 

84
00:08:05,040 --> 00:08:07,680
खतना कुछ काम का है, ना ना 
मक्तूनी। 

85
00:08:07,680 --> 00:08:12,280
मगर इमान जो मोहब्बत की राह से 
असर करता है, इमान जो मोहब्बत की 

86
00:08:12,280 --> 00:08:15,960
राह से असर करता है क्योंकि ना 
खतना कुछ चीज़ है। 

87
00:08:16,840 --> 00:08:22,160
ना ना बल्कि नए सिरे से मख़लुक 
होना जो कोई मसीम है वो नहीं 

88
00:08:22,160 --> 00:08:26,000
श्रेष्ठ है इसलिए कि अगर कोई मसीम
में आया तो वो नया मख़लुक है। 

89
00:08:26,240 --> 00:08:30,760
पुरानी चीजें जाती रही देखो वो 
नहीं हो गई और सब चीजें खुदा की 

90
00:08:30,760 --> 00:08:34,320
तरफ से है जिसने मसीह के वसीले से
अपने साथ। 

91
00:08:35,120 --> 00:08:39,760
हमारा मेल मिलाप कर लिया और मेल 
मिलाप की खिदमत हमारे स्पर्द्ध 

92
00:08:39,760 --> 00:08:41,919
की। 
इस वास्ते वो निरास ईमान से मिलती

93
00:08:41,919 --> 00:08:46,320
है ताकि फसल के तौर पर हो और वो 
वादा कुल नस्ल के लिए कायम रहे। 

94
00:08:46,320 --> 00:08:50,160
ना सिर्फ उस नस्ल के लिए जो शरियत
वाली है बल्कि उसके लिए भी जो 

95
00:08:50,160 --> 00:08:54,760
इब्राहिम की मानद ईमान वाली है, 
वो ही हम सबका बाप है। 

96
00:08:54,840 --> 00:08:58,920
बस क्या ये मुबारकवादी मक्तुनों 
ही के लिए है या नामक तुनों के 

97
00:08:58,920 --> 00:09:01,480
लिए भी? 
क्योंकि हमारा दावा ये है कि 

98
00:09:01,480 --> 00:09:04,440
इब्राहिम के लिए उसका इमार रास्त 
बाजी गिना गया? 

99
00:09:04,880 --> 00:09:10,360
बस किस हालत में गिना गया मक्तुनी
में या नामक तुनि में मक्तूनी में

100
00:09:10,360 --> 00:09:13,080
नहीं बल्कि नामक तुनि में और 
उसने? 

101
00:09:14,000 --> 00:09:19,320
खतना का निशान पाया कि उस ईमान की
रास्तेबाजी पर मोहर हो जाए जो उसे

102
00:09:19,560 --> 00:09:25,760
नामकतुनी की हालत में हासिल था 
ताकि वो उन सब का बाग ठहरे जो 

103
00:09:25,760 --> 00:09:31,640
बावजूद नामकतुं होने के ईमान लाते
हैं और उनके लिए भी रास्तेबाजी 

104
00:09:31,920 --> 00:09:37,200
महसूस की जाए। 
और उन मकतूनों का बाप हो जो ना 

105
00:09:37,200 --> 00:09:44,200
सिर्फ मकतून है बल्कि हमारे बाप 
इब्राहिम के उस ईमान की भी पैरवी 

106
00:09:45,200 --> 00:09:50,840
करते हैं जो उसे ना मकतूनी की 
हालत में हासिल था क्योंकि यह 

107
00:09:51,280 --> 00:09:54,640
वादा कि वो। 
दुनिया का वारिस होगा, ना 

108
00:09:54,640 --> 00:10:00,200
इब्राहिम से, ना उसकी नस्ल से 
शरियत के वसीले से किया गया था। 

109
00:10:00,200 --> 00:10:04,520
बल्कि ईमान की रास्तेबाजी के 
वसीले से क्योंकि अगर शरियत वाले 

110
00:10:04,520 --> 00:10:08,600
ही वारिस हों। 
तो ईमान बेफाईदा रहा और वादा ल 

111
00:10:08,600 --> 00:10:11,600
हासिल ठहरा। 
क्योंकि शरियत और गजब पैदा करती 

112
00:10:11,600 --> 00:10:15,440
है और जहाँ शरियत नहीं वहाँ अदूल 
हुक्मी भी नहीं। 

113
00:10:15,760 --> 00:10:20,080
इस वास्ते वो मिरास ईमान से मिलती
है ताकि फसल के तौर पर हो और वो 

114
00:10:20,080 --> 00:10:25,320
वादा कुल नस्ल के लिए कायम रहे। 
ना सिर्फ उस नस्ल के लिए जो शरियत

115
00:10:25,320 --> 00:10:29,800
वाली है बल्कि उसके लिए भी जो 
इब्राहिम की मानद ईमान वाली है वो

116
00:10:29,800 --> 00:10:35,720
ही हम सब का बाप है। 
खतरे से फायदा तो है बशर्ते कि तू

117
00:10:36,040 --> 00:10:39,480
शरियत पर अमल करे। 
लेकिन जब तू ने शरियत से अधूल 

118
00:10:39,480 --> 00:10:43,360
किया तो तेरा। 
खतना नामक तुनी डेरापस अगर नामक 

119
00:10:43,360 --> 00:10:48,560
तुन शरियत के हुक्मों पर अमल करे 
तो क्या उसकी नामक तुनी खतने के 

120
00:10:48,800 --> 00:10:53,680
बराबर ना गिनी जाएगी? 
और जो शख्स कौमियत के सबब से नामक

121
00:10:53,680 --> 00:10:59,440
तू रहा अगर वो शरियत को पूरा करे 
तो? 

122
00:11:00,000 --> 00:11:07,080
क्या तुझे जो बावजूद कलाम और 
खत्ने के शरीर से अदूल करता है? 

123
00:11:07,320 --> 00:11:12,480
कसूरवार ना ठहराएगा क्योंकि वो 
यहूदी नहीं जो ज़ाहिर का है और ना

124
00:11:12,480 --> 00:11:17,040
वो खतना है जो जहरी और जिसमानी है
बल्कि यहूदी। 

125
00:11:17,320 --> 00:11:23,320
वो ही है जो बात इन में और खतना 
वही है जो दिल का और रूहानी है ना

126
00:11:23,320 --> 00:11:27,040
की लफ्ज़ी। 
ऐसे की तारीफ आदमियों के तरफ से 

127
00:11:27,040 --> 00:11:29,200
नहीं बल्कि खुदा की तरफ से होती 
है। 

128
00:11:29,880 --> 00:11:34,560
उसी में तुम्हारा ऐसा खतना हुआ जो
हाथ से नहीं होता यानी मसीह का 

129
00:11:34,560 --> 00:11:38,240
खतना। 
जिससे जिस्मानी बदन उतारा जाता है

130
00:11:38,240 --> 00:11:46,200
और उसी के साथ में दफन हुए और 
इसमें खुदा की कुवत पर ईमान लाकर 

131
00:11:46,200 --> 00:11:50,200
जिसने उसे मुर्दो में से जलाया, 
उसके साथ जी भी उठे। 

132
00:11:50,560 --> 00:11:55,440
और उसने तुम्हें भी जो अपने 
कसूरों और जिस्म की नामक तुनी के 

133
00:11:55,440 --> 00:12:01,120
सबब से मुर्दा थे उसके साथ जिंदा 
किया और हमारे सब कसूर मुहाव् 

134
00:12:01,120 --> 00:12:05,920
किये और हुक्मों की वह दस्तावेज 
मिटा डाली जो हमारे नाम पर और 

135
00:12:05,920 --> 00:12:10,360
हमारे खिलाफ़ थी। 
और उसको सलीब पर कीलों से जड़कर 

136
00:12:10,360 --> 00:12:15,200
सामने से हटा दिया। 
उसने हुकूमतों और इकतियारों को 

137
00:12:15,200 --> 00:12:21,400
अपने ऊपर से उतारकर उनका बरमाला 
तमाशा बनाया और सलीब के सबब से उन

138
00:12:21,400 --> 00:12:27,360
पर फतेहाबी का शादियां न बजाया। 
फिर उसने अहदनामा लिया। 

139
00:12:28,120 --> 00:12:33,800
और लोगों को पढ़कर सुनाया। 
उन्होंने कहा कि जो कुछ खुदाबों 

140
00:12:33,800 --> 00:12:39,080
ने फ़रमाया शरिया तो मूसा की 
मारफत दी गई कुछ खुदाबों ने 

141
00:12:39,080 --> 00:12:47,400
फ़रमाया उस सबको हम। 
करेंगे और ताबी रहेंगे कि जो कुछ 

142
00:12:47,400 --> 00:12:53,960
खुदा ने शरीयत में मूसा की मारफत 
फरमाया है, उस सबको हम करेंगे और 

143
00:12:53,960 --> 00:12:58,240
ताबी रहेंगे। 
तब मूसा ने उस खून को लेकर लोगों 

144
00:12:58,240 --> 00:13:02,160
पर छिड़का और कहा, देखो, ये उस 
अहद का खून है। 

145
00:13:03,000 --> 00:13:07,760
जो खुदा ने इन सब बातों के बारे 
में तुम्हारे साथ बांधा है। 

146
00:13:08,080 --> 00:13:15,360
तब मूसा और हारून और नदाब और 
अबीहो और बनी इजरायल के 70 

147
00:13:15,360 --> 00:13:19,920
बुजुर्ग ऊपर गए। 
और उन्होंने इजरायल के खुदा को 

148
00:13:19,920 --> 00:13:26,080
देखा और उसके पांव के नीचे नीलम 
के पत्थर का चबूतरा सा था जो 

149
00:13:26,080 --> 00:13:31,920
आसमान की मानिन शफाफ था। 
लेकिन जब मसीह आइंदा की अच्छी 

150
00:13:31,920 --> 00:13:39,320
चीजों का सरदार काइन होकर आया तो 
उस बुजुर्ग तर और कामिल तर खेमे 

151
00:13:39,320 --> 00:13:44,560
की राह से जो हाथों का बना हुआ 
यानी इस दुनिया का नहीं और बकरों 

152
00:13:44,560 --> 00:13:49,880
और बछड़ों का खून लेकर नहीं बल्कि
अपना ही खून लेकर पाक मकान में एक

153
00:13:49,880 --> 00:13:53,880
ही बार दाखिल हो गया और अब दी 
खलासी कराई क्योंकि जब बकरों और 

154
00:13:53,880 --> 00:13:58,400
बैलों के खून और गायें की राख 
नापाकों पर छिड़के जाने से ज़ाहिर

155
00:13:58,400 --> 00:14:02,840
पकीज़ की हासिल होती है तो मसीह 
का खून जिसने अपने आप को अजली 

156
00:14:02,840 --> 00:14:06,800
रुके वसीले खुदा के सामने ब्याब 
कुर्बान कर दिया। 

157
00:14:07,040 --> 00:14:11,760
तुम्हारे दिलों को मुर्दा कामों 
से क्यों ना पाक करेगा ताकि जिंदा

158
00:14:11,760 --> 00:14:18,120
खुदा की इबादत करें और इसी सबब से
वो नए इहता का दरमियानी है ताकि 

159
00:14:18,120 --> 00:14:23,920
उस मौत के वसीले से जो पहले के 
वक्त के कसूरों की माफी के लिए 

160
00:14:23,920 --> 00:14:29,680
हुई है, बुलाए हुए लोग वादे के बा
मुजीब अब्दी को हासिल करें 

161
00:14:29,680 --> 00:14:32,520
क्योंकि जहाँ वसीयत है, वहाँ 
वसीयत। 

162
00:14:33,400 --> 00:14:36,600
करने वाले की मौत भी साबित होनी 
जरूर है। 

163
00:14:37,720 --> 00:14:43,400
इसलिए की वसीयत मौत के बाद ही 
जारी होती है और जब तक वसीयत करने

164
00:14:43,400 --> 00:14:48,000
वाला जिंदा रहता है, उसका इजरा 
नहीं होता। 

165
00:14:48,280 --> 00:14:52,960
इसीलिए पहला अहद भी बगैर खून के 
नहीं बांधा गया। 

166
00:14:53,560 --> 00:14:58,920
चुनाची जब मूसा तमाम उम्मद को 
शरियत का हर एक हुक्म सुना चुका 

167
00:14:59,320 --> 00:15:05,880
तो बछड़ों और बकरों का खून लेकर 
पानी और लाल ऊन और जूफा के साथ उस

168
00:15:05,880 --> 00:15:12,560
किताब और तमाम उम्मद पर छिड़क 
दिया और कहा कि ये उस सेहत का खून

169
00:15:12,560 --> 00:15:19,440
है जिसका हुक्म खुदा ने तुम्हारे 
लिए दिया है और इसी तरह उसने खेमे

170
00:15:19,440 --> 00:15:26,280
और इबादत की तमाम चीजों पर खून 
छिड़का और तकरीबन सारी चीजें 

171
00:15:26,560 --> 00:15:29,720
शरियत के मुताबिक खून से पा की 
जाती है। 

172
00:15:29,840 --> 00:15:35,280
और बगैर खून बहाए माफी नहीं होती।
पर जरूर था कि आसमानी चीजों की 

173
00:15:35,280 --> 00:15:38,760
नकलें तो इनके वसीले से पाग की 
जाए। 

174
00:15:38,920 --> 00:15:44,680
मगर खुद आसमानी चीजें इनसे बेहतर 
कुर्बानियों के वसीले से क्योंकि 

175
00:15:45,280 --> 00:15:49,240
मसीह उस। 
हाथ के बनाए हुए पाक मकान में 

176
00:15:49,240 --> 00:15:52,840
दाखिल नहीं हुआ, जो हकीकी पाक 
मकान का नमूना है। 

177
00:15:52,880 --> 00:16:02,120
बल्कि आसमान ही में दाखिल हुआ था 
कि अब खुदा के रूबरू हमारी खातिर 

178
00:16:02,120 --> 00:16:06,680
हाजिर हो क्योंकि मुमकिन नहीं। 
कि बैलों और बकरों का खून गुनाहों

179
00:16:06,680 --> 00:16:10,040
को दूर करें। 
इसलिए वो दुनिया में आते वक्त 

180
00:16:10,040 --> 00:16:14,480
कहता है कि तुने कुर्बानी और नजर 
को पसंद ना किया बल्कि मेरे लिए 

181
00:16:14,480 --> 00:16:18,520
एक बदन तैयार किया। 
पूरी शोकतनी, कुर्बानियों और 

182
00:16:18,520 --> 00:16:21,000
गुनाह की कुर्बानियों से तू कुछ 
ना हुआ। 

183
00:16:21,000 --> 00:16:24,000
उस वक्त मैंने कहा कि देख मैं आया
हूँ। 

184
00:16:24,440 --> 00:16:28,960
किताब के वर्करों में मेरी निजबत 
लिखा हुआ है ताकि ये खुदा तेरी 

185
00:16:28,960 --> 00:16:32,920
मर्जी पूरी करूँ। 
बस जीस तरह की रूल कुछ फरमाता है।

186
00:16:32,920 --> 00:16:36,520
अगर आज तुम उसकी आवाज सुनो तो 
अपने दिलों को सख्त ना करो। 

187
00:16:36,520 --> 00:16:40,600
जीस तरह की गुस्सा दिलाने के वक्त
आजमाइश के दिन जंगल में किया था। 

188
00:16:40,800 --> 00:16:44,960
जहाँ तुम्हारे बाप दादा ने मुझे 
जांचा और आजमाया और 40 बरस तक 

189
00:16:44,960 --> 00:16:51,960
मेरे काम देखे इसीलिए मैं उस पुश 
से नाराज हुआ और कहा कि इनके दिल 

190
00:16:51,960 --> 00:16:56,360
हमेशा गुमराह होते रहते हैं और 
इन्होंने मेरी राहों को नहीं 

191
00:16:56,360 --> 00:17:01,920
पहचाना यानी ईमान की राह को। 
ने कहा, राहक जिंदगी मैं हूँ यानी

192
00:17:02,360 --> 00:17:08,480
चुनाची मैंने अपने गज़ब में कसम 
खाई ये मेरे आराम में दाखिल ना 

193
00:17:08,560 --> 00:17:13,160
होने पाएंगे। 
ए भाइयों खबरदार तुम में से किसी 

194
00:17:13,160 --> 00:17:18,240
का ऐसा बुरा और बेईमान दिल ना हो 
जो जिंदा खुदा से फिर जाए बल्कि 

195
00:17:18,240 --> 00:17:21,720
जीस। 
रोज़ तक आज का दिन कहा जाता है। 

196
00:17:21,720 --> 00:17:27,079
हर रोज़ आपस में नसीहत किया करो 
ताकि तुम में से कोई गुनाह के 

197
00:17:27,079 --> 00:17:33,280
फरेब में आकर सख्त दिल ना हो जाए 
क्योंकि हम मसीह में शरीक हुए 

198
00:17:33,280 --> 00:17:35,200
हैं। 
बाशर्ते की। 

199
00:17:35,400 --> 00:17:40,920
अपने इब्तदायी भरोसे पर आखिर तक 
मजबूती से कायम रहे चुनाची कहा 

200
00:17:40,920 --> 00:17:45,440
जाता है कि अगर आज तुम उसकी आवाज 
सुनो तो अपने दिलों को सख्त ना 

201
00:17:45,440 --> 00:17:47,360
करो। 
जीस तरह की गुस्सा दिलाने के वक्त

202
00:17:47,360 --> 00:17:50,440
किया था। 
किन लोगों ने आवाज सुनकर गुस्सा 

203
00:17:50,440 --> 00:17:53,280
दिलाया? 
क्या उन सबने नहीं जो मूसा के 

204
00:17:53,280 --> 00:18:00,320
वसीले मिसर से निकले थे और वो किन
लोगों से 40 बरस तक नाराज रहा? 

205
00:18:00,560 --> 00:18:05,960
क्या उनसे नहीं जिन्होंने गुनाह 
किया और उनकी लाशें भी या बान में

206
00:18:05,960 --> 00:18:09,680
पड़ी रही? 
और किनकी बाबत उसने कसम खाई कि वो

207
00:18:09,680 --> 00:18:13,840
मेरे आराम में दाखिल ना होने 
पाएंगे, सिवा उनके जिन्होंने ना 

208
00:18:13,840 --> 00:18:23,240
फरमानी की गरज हम देखते हैं कि वो
बेईमाननी के सबक दाखिल ना हो सके 

209
00:18:24,200 --> 00:18:27,240
अब से। 
मैं तुम्हें नौकर ना कहूंगा 

210
00:18:27,440 --> 00:18:31,920
क्योंकि नौकर नहीं जानता कि उसका 
मालिक क्या करता है बल्कि तुम्हें

211
00:18:32,240 --> 00:18:36,840
मैंने दोस्त का है इसलिए कि जो 
बातें मैंने अपने बाप से सुनी वो 

212
00:18:36,840 --> 00:18:40,760
सब तुमको बता दी। 
तुमने मुझे नहीं चुना बल्कि मैंने

213
00:18:40,760 --> 00:18:45,640
तुम्हें चुन लिया और तुमको मुकरर 
किया कि जाकर फलो और तुम्हारा फल 

214
00:18:45,640 --> 00:18:50,920
कायम रहता कि मेरे नाम से जो कुछ 
बाप से मांगो वो तुमको दे, मैं 

215
00:18:50,920 --> 00:18:56,400
तुमको इन बातों का हुक्म इसलिए 
देता हूँ कि तुम एक दूसरे से 

216
00:18:56,400 --> 00:19:01,440
मोहब्बत रखो। 
इसी तरह उसने खाने के बाद प्याला 

217
00:19:01,440 --> 00:19:05,960
भी लिया और कहा कि ये प्याला मेरे
खून में नया अहद है। 

218
00:19:06,440 --> 00:19:12,320
जब कभी पियो, मेरी यादगीदी के लिए
यही किया करो, क्योंकि जब कभी तुम

219
00:19:12,320 --> 00:19:15,360
ये रोटी खाते और इस प्याले में से
पीते हो। 

220
00:19:15,600 --> 00:19:17,640
तो खुदावन की मौत का इजहार करते 
हो। 

221
00:19:17,640 --> 00:19:23,440
जब तक वो ना आए फिर उसने रोटी ली 
और शुक्र करके तोड़ी और ये कहकर 

222
00:19:23,440 --> 00:19:27,920
उनको दी कि ये मेरा बदन है जो 
तुम्हारे वास्ते दिया जाता है 

223
00:19:27,920 --> 00:19:32,200
मेरी यादगिरी के लिए। 
यही किया करो और इसी तरह खाने के 

224
00:19:32,200 --> 00:19:36,880
बाद प्याला ये कह कर दिया कि ये 
प्याला मेरे उस खून में नया अहद 

225
00:19:36,880 --> 00:19:39,120
है जो तुम्हारे वास्ते बहाया जाता
है। 

226
00:19:39,120 --> 00:19:40,960
शेरशाह में आप सबों की सलामती हो।
