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00:00:00,800 --> 00:00:06,200
आज मुझे एक बात समझ आई राजनीति और
धर्म पर बहस बेकार होती है। 

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00:00:07,520 --> 00:00:12,040
इंटरनेट पर धर्म की बात होते ही 
झगड़ा शुरू हो जाता है पर खाना 

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00:00:12,040 --> 00:00:15,240
बनाने या कंप्यूटर की बातों पर 
ऐसा नहीं होता। 

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00:00:15,960 --> 00:00:19,880
ऐसा क्यों होता है? 
धर्म के मामले में लोग खुद को 

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00:00:19,880 --> 00:00:23,240
ज्ञानी समझते हैं, खुद को 
एक्सपर्ट्स समझते हैं, उन्हें 

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00:00:23,240 --> 00:00:28,720
लगता है बस पक्का भरोसा ही पक्का 
बिलीफ ही काफी है और भरोसा तो 

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00:00:28,720 --> 00:00:33,080
किसी के पास भी हो सकता है। 
कंप्यूटर की बातों पर लोग बोलने 

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00:00:33,080 --> 00:00:35,800
से थोड़ा डरते हैं। 
उन्हें लगता है कि उन्हें पूरी 

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00:00:35,800 --> 00:00:39,760
जानकारी नहीं है। 
प्रधर्म के मामले में हर कोई 

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00:00:39,760 --> 00:00:43,440
एक्सपर्ट बनता है। 
राजनीति यानी पॉलिटिक्स में भी 

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00:00:43,440 --> 00:00:48,200
बिल्कुल यही परेशानी है। 
यहाँ भी राय देने के लिए पढ़ाई 

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00:00:48,200 --> 00:00:50,960
नहीं चाहिए। 
आपकी ओपिनियन के लिए पढ़ाई नहीं 

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00:00:50,960 --> 00:00:54,160
चाहिए, बस मन में एक पक्की सोच 
होनी चाहिए। 

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00:00:55,240 --> 00:00:57,480
क्या इन दोनों में कुछ एक जैसा 
है? 

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00:00:57,560 --> 00:01:02,160
शायद इनके सवालों का कोई पग का 
जवाब नहीं है, इसीलिए कोई किसी को

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00:01:02,160 --> 00:01:06,080
गलत साबित नहीं कर पाता। 
जब कोई गलत नहीं तो सबकी बात सही 

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00:01:06,080 --> 00:01:09,760
लगती है। 
इसीलिए हर कोई अपनी बात ज़ोर शोर 

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00:01:09,760 --> 00:01:13,960
से बोलता है। 
पर यह बात भी पूरी तरह सच नहीं 

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00:01:13,960 --> 00:01:17,040
है। 
राजनीति के कुछ सवालों के पक्के 

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00:01:17,040 --> 00:01:20,320
जवाब होते हैं। 
जैसे सरकारी काम में कितना पैसा 

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00:01:20,320 --> 00:01:23,360
लगेगा? 
पर लोग इन साफ बातों पर भी खूब 

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00:01:23,360 --> 00:01:27,960
झगड़ते हैं। 
मुझे लगता है धर्म और राजनीति में

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00:01:27,960 --> 00:01:32,400
एक ही बात है। 
ये दोनों चीजें हमारी पहचान हमारी

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00:01:32,400 --> 00:01:37,640
ऐडेंटिटी बन जाती है। 
जब बात आपकी अपनी पहचान की हो तो 

25
00:01:37,640 --> 00:01:41,960
बहस बेकार है। 
इंसान सिर्फ अपनी तरफ की ही बात 

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00:01:41,960 --> 00:01:45,040
सुनता है। 
झगड़ा होगा या नहीं, यह लोगों पर 

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00:01:45,040 --> 00:01:48,400
टिका है। 
पुराने जमाने की लड़ाईयों पर आज 

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00:01:48,400 --> 00:01:52,640
कोई नहीं लड़ता क्योंकि किसी को 
नहीं पता कि वो किस तरफ है। 

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00:01:52,760 --> 00:01:57,200
पराश की लड़ाई पर सब भिड़ जाते 
हैं तो असली जड़ राजनीति नहीं, 

30
00:01:57,400 --> 00:02:00,400
हमारी पहचान है, हमारी ऐडेंटिटी 
है। 

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00:02:01,360 --> 00:02:05,320
जब लोग बहस में बहुत ज्यादा 
गुस्सा करते हैं तो समझो वो सच के

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00:02:05,320 --> 00:02:10,080
लिए नहीं, अपनी पहचान के लिए अपनी
ऐडेंटिटी के लिए लड़ रहे हैं। 

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00:02:11,000 --> 00:02:14,880
लोग सोचते हैं कि जीस बात पर 
झगड़ा हो, उसका कोई सही जवाब नहीं

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00:02:14,880 --> 00:02:18,880
होता। 
यह सोचना बिल्कुल गलत है। 

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00:02:19,240 --> 00:02:22,440
जैसे कंप्यूटर की भाषा यानी 
प्रोग्रामिंग लैंगुएज को ही ले 

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00:02:22,440 --> 00:02:25,560
लीजिए। 
इसमें भी लोग अपनी पहचान जोड़ 

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00:02:25,560 --> 00:02:28,120
लेते हैं। 
उन्हें लगता है कि सब लैंग्वेजेज 

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00:02:28,120 --> 00:02:33,200
एक जैसी ही हैं पर यह सच नहीं है।
कोई चीज़ बहुत अच्छी बन सकती है 

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00:02:33,320 --> 00:02:37,920
और कोई बहुत खराब कंप्यूटर की 
लैंगुएज के साथ भी यही बात है। 

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00:02:38,480 --> 00:02:41,560
आप किसी भी चीज़ पर अच्छी बातचीत 
कर सकते हैं। 

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00:02:42,000 --> 00:02:47,000
बस उन लोगों को दूर रखिए जो अपनी 
पहचान अपनी ऐडेंटिटी के लिए लड़ते

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00:02:47,000 --> 00:02:50,240
हैं। 
एक जरूरी बात और समझ लीजिए। 

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00:02:51,040 --> 00:02:56,560
अच्छी बातचीत तभी हो सकती है जब 
हमारी पहचान हमारी आइडेंटिटी बीच 

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00:02:56,560 --> 00:03:01,000
में न आए। 
राजनीति और धर्म में बहुत खतरा है

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00:03:01,520 --> 00:03:05,480
क्योंकि लोग इन्हें अपनी पहचान 
अपनी आइडेंटिटी मान लेते हैं। 

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00:03:06,080 --> 00:03:09,400
लेकिन कुछ लोगों के साथ इन पर भी 
बात हो सकती है। 

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00:03:09,560 --> 00:03:12,320
वहीं कुछ छोटी बातों पर भी झगड़ा 
हो सकता है। 

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00:03:13,800 --> 00:03:15,760
जैसे किसी को अपनी गाड़ी बहुत 
प्यारी है। 

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00:03:15,840 --> 00:03:18,480
अगर आप गाड़ी की बुराइ करेंगे तो 
वह लड़ पड़ेगा। 

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00:03:19,560 --> 00:03:23,840
एक बहुत काम की बात और सुनिए अगर 
आप चाहते हैं कि आपका दिमाग देश 

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00:03:23,840 --> 00:03:28,720
चले तो अपनी पहचान को, अपनी 
ऐडेंटिटी को बहुत छोटा रखिए। 

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00:03:29,600 --> 00:03:34,400
जीस चीज़ को आप अपनी पहचान बना 
लेते हैं उसके बारे में आप साफ 

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00:03:34,400 --> 00:03:38,800
साफ नहीं सोच पाते। 
सिर्फ दूसरों की बात सहना काफी 

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00:03:38,800 --> 00:03:42,360
नहीं है। 
बड़ी बात तो ये है कि खुद पर कोई 

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00:03:42,600 --> 00:03:48,640
ठप्पा कोई लेवल न लगाएं, खुद को 
किसी खास ग्रुप का मत मानिए। 

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00:03:49,240 --> 00:03:54,400
आप खुद पर जीतने से आधा ठप्पे 
लगाएंगे, आपका दिमाग उतना ही कम 

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00:03:54,400 --> 00:03:55,600
काम करेगा।
