1
00:00:01,880 --> 00:00:04,880
इस किताब को अपने दिमाग को चलाने 
वाली गाइड समझिए। 

2
00:00:06,360 --> 00:00:10,320
जब हम कोई कार्य या माइक्रोवेव 
खरीदते हैं और उसके साथ उसे चलाने

3
00:00:10,320 --> 00:00:15,720
का तरीका न मिले तो हमें बुरा 
लगता है, लेकिन हमारी सबसे कीमती 

4
00:00:15,720 --> 00:00:18,720
चीज़ है हमारा शरीर और हमारा 
दिमाग। 

5
00:00:18,800 --> 00:00:21,240
बिना किसी गाइड के ही हमें मिल गए
हैं। 

6
00:00:21,920 --> 00:00:25,680
इसी वजह से हम बस अंदाजी से अपनी 
खुशी ढूंढ़ते रहते हैं। 

7
00:00:26,000 --> 00:00:30,840
कभी थोड़ी सी एक्सर्साइज़ कर ली, 
कभी अच्छा खाना खा लिया तो कभी 

8
00:00:30,840 --> 00:00:34,920
पार्टी कर ली। 
मेन जीन्स नाम किया किताब हमें वो

9
00:00:34,920 --> 00:00:38,400
बातें बताएंगे। 
जिससे हम अपने ज़िन्दगी को बेहतर 

10
00:00:38,400 --> 00:00:44,840
तरीके से चला सकें। 
जब हम कार्ड चलाते हैं तो वो वैसा

11
00:00:44,840 --> 00:00:49,280
ही करती है जैसा हम कहते हैं। 
मशीन अपनी मर्ज़ी नहीं चलाती, 

12
00:00:49,760 --> 00:00:55,080
लेकिन अगर हम अपने दिमाग से कहें 
कि कल से तला भु न खाना बंद नो 

13
00:00:55,080 --> 00:00:58,440
फैटी फूड। 
तो दिमाग हमारी बात सुनकर हंसता 

14
00:00:58,440 --> 00:01:02,760
है। 
जैसे ही सामने मीठा आता है दिमाग 

15
00:01:02,760 --> 00:01:05,319
हमें उसे खाने के लिए उकसाने लगता
है। 

16
00:01:06,480 --> 00:01:10,800
सच तो ये है कि हमारा दिमाग हमारा
कहना मानने वाला नौकर नहीं है, 

17
00:01:11,240 --> 00:01:15,080
उसकी अपनी एक अलग सोच है, एक अलग 
माइंडसेट है। 

18
00:01:16,680 --> 00:01:22,160
ऐसा मान लीजिए कि आप असल में दो 
लोग हैं, एक वो जिसकी अपनी पसंद, 

19
00:01:22,160 --> 00:01:27,640
नापसंद और सपने हैं और दूसरा आपके
शरीर के अंदर की वो मशीन यानी 

20
00:01:27,640 --> 00:01:34,120
आपका दिमाग ये मशीन हमेशा आपकी 
बात नहीं मानती और अक्सर वही जीत 

21
00:01:34,120 --> 00:01:38,600
जाती है। 
आखिर हमारी अपने आप से ही लड़ाई 

22
00:01:38,600 --> 00:01:42,480
क्यों होती है? 
हम खुद को काबू में हम खुद को 

23
00:01:42,480 --> 00:01:47,000
कंट्रोल में क्यों नहीं रख पाते? 
या कुत्ते बिल्ली भी वजन कम करने 

24
00:01:47,000 --> 00:01:50,520
या अपनी बुरी आदतों को छोड़ने के 
लिए परेशान रहते हैं? 

25
00:01:51,240 --> 00:01:55,200
नहीं तो फिर हमारे साथ ही। 
ऐसा क्यों होता है? 

26
00:01:56,920 --> 00:02:01,120
एक पुरानी डरावनी कहानी है, 
जिसमें एक लड़की को डरावने फ़ोन 

27
00:02:01,120 --> 00:02:05,160
आते हैं। 
जब पुलिस जांच पड़ताल करती है तो 

28
00:02:05,160 --> 00:02:08,479
पता चलता है कि फ़ोन करने वाला 
आदमी घर के अंदर ही है। 

29
00:02:09,400 --> 00:02:14,280
हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही है। 
हमारी सारी मुश्किलों की जड़ 

30
00:02:14,600 --> 00:02:20,480
हमारे अंदर ही है। 
हमारे जीन्स में हमारे दोस्त, 

31
00:02:20,560 --> 00:02:24,160
परिवार और टीवी 
अड्वर्टाइज़्मन्ट्स भी हमें बहकते

32
00:02:24,160 --> 00:02:28,040
हैं, लेकिन असल में हमारे अंदर की
कुछ चीजें हैं। 

33
00:02:28,080 --> 00:02:30,920
हमें वो काम करने पर मजबूर करती 
हैं। 

34
00:02:31,040 --> 00:02:35,560
जो हमारे लिए बुरे हैं। 
किसी भी किताब की दुकान पर जाकर 

35
00:02:35,560 --> 00:02:41,880
देखिए तो आपको प्यार पाने, वजन कम
करने और अमीर बनने की बहुत सारी 

36
00:02:41,880 --> 00:02:45,480
किताबें मिलेंगी। 
लेकिन क्या कभी ऐसी किताब देखी है

37
00:02:45,480 --> 00:02:49,760
जिसका नाम हो? 
पेट कैसे बाहर निकालें या पैसे 

38
00:02:49,760 --> 00:02:55,040
कैसे फालतू बड़ाए नहीं क्योंकि ये
सबका ये सब बैड हैबिट्स तो हम 

39
00:02:55,040 --> 00:02:58,800
अपने आप ही कर लेते हैं। 
इसके लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती। 

40
00:02:59,400 --> 00:03:03,680
ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे जीन्स
ही हमें ऐसी गलतियाँ करने के लिए 

41
00:03:03,680 --> 00:03:04,720
उकसाते। 
हैं। 

42
00:03:05,800 --> 00:03:10,040
आजकल रोज़ अखबारों में आता है कि।
बुढ़ापे के जीन्स मिल गए या 

43
00:03:10,160 --> 00:03:14,880
बिमारी के जीन्स मिल गए? 
इससे एक बात साफ है कि हमारे शरीर

44
00:03:14,880 --> 00:03:18,680
और बीमारियों का हमारे जीन्स से 
गहरा नाता है। 

45
00:03:20,000 --> 00:03:24,400
वैज्ञानिक हरदें नई खोज कर रहे 
हैं, जिससे आने वाले समय में बड़ी

46
00:03:24,400 --> 00:03:29,400
बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा।
लेकिन हमारी जीन्स सिर्फ 

47
00:03:29,480 --> 00:03:33,520
बीमारियों तक ही नहीं है, वो 
हमारी रोज़ की जिंदगी पर भी असर 

48
00:03:33,520 --> 00:03:36,920
डालते हैं। 
हम जो भी काम अपनी मर्जी से करते 

49
00:03:36,920 --> 00:03:41,480
हैं, उसके पीछे भी कहीं न कहीं 
हमारे जीन्स का ही हाथ होता है। 

50
00:03:42,520 --> 00:03:46,720
पिछले कुछ सालों में वैज्ञानिक ने
इस बारे में बहुत कुछ सीखा है। 

51
00:03:46,840 --> 00:03:54,160
इस किताब में हम यही देखेंगे कि 
जीन्स हमें कैसे चलाते हैं, एक 

52
00:03:54,160 --> 00:03:59,160
एग्ज़ैम्पल लेते हैं, खूबसूरती 
क्या है, ब्यूटी क्या है और इसे 

53
00:03:59,160 --> 00:04:03,320
कौन तय करता है? 
कुछ लोग कहते हैं कि ये भगवान की 

54
00:04:03,320 --> 00:04:06,080
देन है जिसे समझना मुश्किल। 
है। 

55
00:04:06,160 --> 00:04:10,200
कुछ कहते हैं कि जो फैशन की 
दुनिया में चल रहा है वही खूबसूरत

56
00:04:10,200 --> 00:04:15,560
है, लेकिन अगर ऐसा होता तो हर देश
में खूबसूरती की पसंद अलग अलग 

57
00:04:15,560 --> 00:04:17,920
होती। 
पर ऐसा नहीं है। 

58
00:04:19,320 --> 00:04:23,720
अगर आप ध्यान से देखें तो हमारा 
शरीर दोनों तरफ से एक जैसा होता 

59
00:04:23,720 --> 00:04:27,000
है। 
जैसे सीधा हाथ और उल्टा हाथ एक 

60
00:04:27,000 --> 00:04:30,920
जैसे होते हैं। 
इसे सिमिट्री यानी बराबरी कहते 

61
00:04:30,920 --> 00:04:33,840
हैं। 
हालांकि कोई भी पूरी तरह बराबर 

62
00:04:33,840 --> 00:04:37,080
नहीं होता। 
किसी का एक कान थोड़ा ऊपर हो सकता

63
00:04:37,080 --> 00:04:42,440
है या कोई और छोटा सा फर्क। 
लेकिन रिसर्च में पाया गया है कि 

64
00:04:42,440 --> 00:04:47,640
लोग उन्हें ज्यादा पसंद करते हैं।
जिनका चेहरा और शरीर दोनों तरफ से

65
00:04:47,680 --> 00:04:52,280
एक दम बराबर हो। 
जानवरों की दुनिया में भी शरीर का

66
00:04:52,280 --> 00:04:56,920
बराबर होना इस बात का सबूत है कि 
शरीर हेल्थी है। 

67
00:04:57,880 --> 00:05:02,040
हमें ये बात पता नहीं होती लेकिन 
हमारा दिमाग बिना बताए ही। 

68
00:05:02,320 --> 00:05:07,840
ऐसे लोगों को चुनने का फैसला ले 
लेता है तो बात ये है कि हमारे 

69
00:05:07,840 --> 00:05:12,640
दिमाग का अपना एक एजेंडा है। 
हमारा दिमाग एवोल्यूशन से बना है 

70
00:05:13,120 --> 00:05:18,600
बदलाव के तरीकों से जब हम इस 
बनावट को इस डिजाइन को समझ 

71
00:05:18,600 --> 00:05:21,360
जाएंगे। 
तो हमें हैरानी नहीं होगी कि 

72
00:05:21,360 --> 00:05:23,600
हमारे रिश्तों में लड़ाई क्यों 
होती है? 

73
00:05:23,960 --> 00:05:28,200
यह हमारा वजन क्यों बढ़ जाता है? 
यह हमें सादे खाने से ज्यादा 

74
00:05:28,200 --> 00:05:32,600
बर्गर क्यों पसंद आता है? 
खुद को और अपनी दुनिया को समझने 

75
00:05:32,600 --> 00:05:37,040
के लिए हमें पुराने विचारों के 
बजाए साइंस की बातों को समझना 

76
00:05:37,040 --> 00:05:43,000
होगा। 
चाहे हमें पसंद हो या ना हो, हम 

77
00:05:43,000 --> 00:05:48,440
सबके अंदर एक लड़ाई चल रही है। 
यह लड़ाई हमारे अपने ही शरारती 

78
00:05:48,440 --> 00:05:51,720
जीन्स यानी मीन जीन्स के खिलाफ़। 
है। 

79
00:05:52,400 --> 00:05:55,680
ये जीन्स बड़े चालाक और मास्टर्स 
होते हैं। 

80
00:05:55,920 --> 00:05:59,160
ये हमें मज़े और दर्द के जरिए 
कंट्रोल में रखते हैं। 

81
00:06:00,000 --> 00:06:03,400
बड़े बड़े कामयाब लोग भी इनके आगे
हार मान लेते हैं। 

82
00:06:03,920 --> 00:06:07,720
ओपरा विनफ्रे को ही देख लीजिए वो 
इतनी अमीर और ताकतवर है। 

83
00:06:08,120 --> 00:06:12,200
फिर भी उन्हें अपना वजन कम रखने 
और सेल्फ कंट्रोल पाने के लिए 

84
00:06:12,200 --> 00:06:14,720
बहुत स्ट्रगल करना पड़ता। 
है। 

85
00:06:14,840 --> 00:06:19,800
ओपरा ने सबको सच सच बताकर यह 
साबित कर दिया कि हम कोई रोबोट 

86
00:06:19,800 --> 00:06:22,760
नहीं है जो सिर्फ अपने जीन्स के 
इशारों पर नाचे। 

87
00:06:23,280 --> 00:06:28,200
हम अपनी लाइफ बदल सकते हैं। 
रोज़ की ज़िन्दगी में हमारे सामने

88
00:06:28,200 --> 00:06:33,040
दो रास्ते होते हैं। 
एक है पालतू जानवर वाला रास्ता 

89
00:06:33,040 --> 00:06:33,840
यानी। 
पेट। 

90
00:06:33,840 --> 00:06:36,680
पाथ। 
सभी जानवर इसी पर चलते हैं। 

91
00:06:36,840 --> 00:06:40,320
भूख लगी तो खली सी खाना खत्म होने
तक खाते रहिए। 

92
00:06:41,200 --> 00:06:44,720
अगर कुछ अच्छा लगे तो बार बार 
करिए और अगर दर्द हो तो उससे दूर 

93
00:06:44,720 --> 00:06:50,920
भागिए दूसरा रास्ता थोड़ा मुश्किल
है, इस पर हम अपनी मर्जी चलाते 

94
00:06:50,920 --> 00:06:53,520
हैं। 
जीन्स में हमें विलपॉवर। 

95
00:06:53,880 --> 00:06:58,320
इच्छाशक्ति भी दी है। 
इसी ताकत से हम अपनी जानवर वाली 

96
00:06:58,320 --> 00:07:03,800
आदतों से ऊपर उठ सकते हैं। 
ये किताब इसी काम के लिए आपकी 

97
00:07:03,800 --> 00:07:07,200
गाइड है। 
पहला कदम है अपनी जानवर जैसी 

98
00:07:07,200 --> 00:07:10,680
आदतों को समझिए जो हमें मुसीबत 
में डालती है। 

99
00:07:11,320 --> 00:07:15,520
दूसरा कदम है। 
इस जानकारी का इस नॉलेज का 

100
00:07:15,520 --> 00:07:19,880
इस्तेमाल करके अपनी पुरानी आदतों 
को कंट्रोल में करना सीखिए। 

101
00:07:21,320 --> 00:07:25,320
इस किताब में लेखक और जे अपनी खुद
की कहानियों भी सुनाएंगे। 

102
00:07:26,440 --> 00:07:30,720
यह कोई बोरिंग किताबी ज्ञान नहीं 
है बल्कि काम की बातें हैं। 

103
00:07:30,840 --> 00:07:33,480
जो आपकी ज़िन्दगी को बेहतर बना 
सकती है। 

104
00:07:35,840 --> 00:07:40,240
हमें लगता है कि सब कुछ 1 दिन में
ठीक हो जाएगा, लेकिन इसका कोई 

105
00:07:40,240 --> 00:07:45,080
शॉर्टकट नहीं है जैसे रेसिंग कार 
का वजन कम करने के लिए इंजीनियर 

106
00:07:45,440 --> 00:07:50,240
हजारों छोटी छोटी जगहों से। 
थोड़ा थोड़ा वजन घटाते हैं। 

107
00:07:50,400 --> 00:07:54,160
वैसे ही हमें भी अपनी ज़िन्दगी 
में छोटे छोटे बदलाव करने होंगे। 

108
00:07:55,440 --> 00:07:59,920
यह मेन जीन्स वाला तरीका रातो रात
सारी परेशानियां खत्म नहीं करेगा।

109
00:08:00,440 --> 00:08:05,600
यह तो एक चश्मे की तरह है जिससे 
दुनिया साफ दिखाई देने लगती है। 

110
00:08:06,960 --> 00:08:11,400
मुसीबतें तो वही रहेंगी पर अब आप?
उन्हें बेहतर तरीके से समझ 

111
00:08:11,400 --> 00:08:17,560
पाएंगे। 
एक एग्ज़ैम्पल देखते हैं तेरी की 

112
00:08:17,560 --> 00:08:21,760
एक दोस्त है करेन। 
वो माँ बनना चाहती थी लेकिन उससे 

113
00:08:21,760 --> 00:08:26,160
पहले थोड़ा वजन घटाना चाहती थी। 
तेरी ने उसे मना कर दिया क्यों? 

114
00:08:26,840 --> 00:08:29,960
क्योंकि हमारा शरीर आसपास के 
एनवायरनमेंट को बहुत जल्दी समझ 

115
00:08:29,960 --> 00:08:33,280
जाता है। 
पुराने जमाने में खाना बहुत कम 

116
00:08:33,280 --> 00:08:37,000
मिलता था। 
अगर वजन कम होता था तो शरीर को 

117
00:08:37,000 --> 00:08:41,480
लगता था कि बाहर अकाल पड़ा है और 
बच्चा पैदा करना खतरे से खाली 

118
00:08:41,480 --> 00:08:46,560
नहीं है। 
इसलिए जब कोई महिला वजन घटाती है।

119
00:08:46,640 --> 00:08:51,880
तो उसके माँ बनने की संभावना यानी
फर्टिलिटी कम हो जाती है तो सलाह 

120
00:08:51,880 --> 00:08:55,920
यही है कि अगर माँ बनना है तो वजन
घटाना बंद कर दे। 

121
00:08:57,200 --> 00:09:01,840
एक और छोटी प्रोग्रेस जे के पैसे 
बचाने के तरीके से सीखी जा सकती 

122
00:09:01,840 --> 00:09:06,320
है के बैंक खाते में अगर पैसे 
होते। 

123
00:09:06,560 --> 00:09:11,320
तो वो उन्हें खर्च कर देता था पर 
जे की कमी नहीं है बल्कि हम सब 

124
00:09:11,320 --> 00:09:16,320
इंसानों की पुरानी आदत है। 
पुराने जमाने में पैसा सिर्फ खाना

125
00:09:16,320 --> 00:09:21,800
होता था, खाना जल्दी खराब हो जाता
था इसलिए उसे बचाने का सबसे अच्छा

126
00:09:21,800 --> 00:09:26,480
तरीका था कि उसे खा लीजिए। 
इसलिए आज भी हमारा मन फालतू खर्च 

127
00:09:26,480 --> 00:09:31,000
करने को करता है। 
जे ने इसका एक सलूशन निकाला। 

128
00:09:32,400 --> 00:09:36,360
उन्होंने अपनी कंपनी से कहा कि 
उनकी तनख्वाह उनकी सैलरी का एक 

129
00:09:36,360 --> 00:09:39,640
बड़ा हिस्सा पहले ही अलग जमा कर 
दिया जाए। 

130
00:09:41,000 --> 00:09:43,120
अब उन्हें वो पैसे सामने दिखते ही
नहीं। 

131
00:09:43,360 --> 00:09:45,360
तो वो उन्हें खर्च भी नहीं कर 
पाते। 

132
00:09:46,040 --> 00:09:50,400
उन्होंने अपने अंदर के खर्चीले 
राक्षस यानी मॉन्स्टर से पैसे 

133
00:09:50,400 --> 00:09:56,760
छुपा दिए। 
मीन जीस का असली मकसद हमें यह 

134
00:09:56,760 --> 00:09:59,960
समझाना है ये हम इंसान ना फिर ऐसे
क्यों? 

135
00:09:59,960 --> 00:10:03,120
है। 
इसके लिए हमने दुनिया भर के अलग 

136
00:10:03,120 --> 00:10:08,000
अलग लोगों के कल्चर्स को उनके रहन
सहन को करीब से देखा है। 

137
00:10:08,800 --> 00:10:12,640
हमने सिर्फ इंसानों को ही नहीं 
बल्कि अपने करीबी रिश्तेदार 

138
00:10:12,880 --> 00:10:17,680
चिंपैंजीज़, चूहों और यहाँ तक कि 
छोटी मक्खियों यानी फ्रूट फ्लैश 

139
00:10:17,680 --> 00:10:21,720
की आदतों को भी समझा है। 
लेकिन इस पूरी किताब की सबसे 

140
00:10:21,720 --> 00:10:27,160
जरूरी चीज़ फाउंडेशन है इंसानों 
के बदलने की पुरानी कहानी यानी 

141
00:10:27,440 --> 00:10:32,760
एवोल्यूशनरी बायोलोजी। 
करीब 150 साल पहले डार्विन नाम के

142
00:10:32,760 --> 00:10:36,240
वैज्ञानिक ने बताया था कि इंसान 
धीरे धीरे बदला। 

143
00:10:36,240 --> 00:10:40,840
है। 
अब यह बात पूरी तरह साफ हो गई है 

144
00:10:40,960 --> 00:10:46,680
कि हमारा दिमाग भी उसी रिवोल्यूशन
उसी बदलाव का रिसाल्ट है, जैसे 

145
00:10:46,680 --> 00:10:52,640
हमारी आँखें, हाथ, पैर और किडनी 
नेचर ने बनाए हैं, वैसे ही हमारा 

146
00:10:52,640 --> 00:10:56,560
दिमाग भी नेचर की ही देन है। 
तो क्या हमारे मन और। 

147
00:10:56,560 --> 00:10:59,640
सोचने के तरीके को भी। 
उसी नेशर ने ढाला। 

148
00:10:59,640 --> 00:11:04,600
है। 
हमारा मानना है कि हाँ ऐसा ही है।

149
00:11:05,520 --> 00:11:08,920
बहुत से लोग इस बात का मजाक 
उड़ाते हैं या इस पर गुस्सा करते 

150
00:11:08,920 --> 00:11:13,960
हैं पर हजारों रिसर्च से अब यह 
बात साफ हो गई है कि हमारे जीन्स 

151
00:11:13,960 --> 00:11:17,920
ही हमारे ज़िन्दगी में सबसे बड़ा 
रोल निभाते हैं। 

152
00:11:20,400 --> 00:11:22,640
क्या सब कुछ जीन्स ही तय करते 
हैं? 

153
00:11:22,800 --> 00:11:26,240
बिलकुल नहीं। 
इन्वॉल्वमेंट भी बहुत जरूरी है। 

154
00:11:27,000 --> 00:11:32,760
जैसे अगर किसी बच्चे के साथ बचपन 
में बुरा बरता हो, अब्यूज हो तो 

155
00:11:32,760 --> 00:11:37,000
उसका असर उस पर ज़िन्दगी भर रहता 
है, चाहे उसके जीन्स कैसे भी हो। 

156
00:11:37,560 --> 00:11:42,840
इसी तरह अगर किसी को जीन्स की वजह
से दिल की बिमारी का खतरा है तो 

157
00:11:42,840 --> 00:11:46,440
वह अपनी अच्छी आदतों से अपनी जान 
बचा सकता है। 

158
00:11:49,280 --> 00:11:54,480
कॉलेज में पढ़ाते हैं इस साल भर 
हजारों ऐसे। 

159
00:11:54,600 --> 00:11:57,840
बोरिंग रिपोर्ट पढ़ते हैं, 
जिन्हें समझना आम आदमी के लिए 

160
00:11:57,840 --> 00:12:01,800
बहुत मुश्किल है। 
वैज्ञानिक की उन मीटिंग्स में 

161
00:12:01,800 --> 00:12:05,480
जाते हैं जहाँ बहुत भारी शब्दों 
का इस्तेमाल होता है। 

162
00:12:06,400 --> 00:12:09,720
लेकिन पिछले 40 सालों में 
वैज्ञानिक ने इंसान के बारे में 

163
00:12:09,720 --> 00:12:14,320
जो कुछ भी नया सीखा है, उससे आपकी
जिंदगी बहुत बेहतर हो सकती है। 

164
00:12:17,600 --> 00:12:22,040
जी किसी दोस्त के हाँ बढ़िया, 
दावत पर जाने से पहले पुराने और 

165
00:12:22,040 --> 00:12:26,760
सूखे बेगल क्यों खा लेते हैं और 
वो हवाई जहाज में मिलने वाले मीठे

166
00:12:26,760 --> 00:12:31,440
के परजान बूझकर मेयोनीज़ क्यों 
लगा देते हैं ताकि उसे खा ना 

167
00:12:31,440 --> 00:12:35,080
सकें? 
तेरी अपने कंप्यूटर की इंटरनेट 

168
00:12:35,080 --> 00:12:39,560
वाली तार यानी केबल फेडेक्स यानी 
करियर के जरिए वापस खुद को ही 

169
00:12:39,560 --> 00:12:43,560
क्यों भेज देते हैं ताकि वो रात 
भर इंटरनेट न चला सके। 

170
00:12:44,560 --> 00:12:48,480
ये सारी अजीब हरकतें हम इसलिए 
करते हैं क्योंकि हमें पता चल गया

171
00:12:48,480 --> 00:12:52,280
है कि हम इंसान कब और क्यों कमजोर
पड़ते हैं। 

172
00:12:52,680 --> 00:12:55,640
इंसान की नेचर शुरू से ही थोड़ी 
टेढ़ी है। 

173
00:12:56,200 --> 00:13:01,120
इसे डांट फटकार कर नहीं बल्कि 
प्यार से बहला फुसलाकर कंट्रोल 

174
00:13:01,120 --> 00:13:05,240
में करना पड़ता है। 
खुद पर काबू में रख पाना कोई 

175
00:13:05,320 --> 00:13:09,360
कैरेक्टर की कमी नहीं है बल्कि यह
एक कभी ना खत्म होने वाली लड़ाई 

176
00:13:09,360 --> 00:13:15,160
है। 
साल 2004 में एक फ़िल्म आई थी 

177
00:13:15,280 --> 00:13:20,800
जिसका नाम था सुपर स्टाइज मी। 
इसमें मॉर्गन नाम का एक आदमी पूरे

178
00:13:20,800 --> 00:13:24,480
एक महीने तक सिर्फ मैकडोनाल्ड्स 
का खाना खाता है। 

179
00:13:25,120 --> 00:13:29,320
उसने खुद के लिए कुछ अजीब नियम 
बनाए थे जैसे जब भी उसे। 

180
00:13:29,480 --> 00:13:33,880
बड़े पैचानी सुपर साइज के लिए 
पूछा जाए तो उसे हाँ ही कहना है 

181
00:13:34,160 --> 00:13:37,040
और उसे अपनी प्लेट का सारा खाना 
खत्म करना ही है। 

182
00:13:39,200 --> 00:13:43,080
रिसाल्ट क्या निकला? 
मॉर्गन खुद सुपर साइज का हो गया। 

183
00:13:43,480 --> 00:13:47,600
सिर्फ 30 दिनों में उसका वजन चार 
पांच किलो बढ़ गया। 

184
00:13:48,000 --> 00:13:50,600
आखिर इतने सारे लोग मोटे क्यों हो
रहे हैं? 

185
00:13:51,280 --> 00:13:54,680
उस फ़िल्म में बताया गया है कि 
असली दिक्कत खाने की मात्रा यानी 

186
00:13:54,680 --> 00:13:58,240
पोषण साइज है। 
रेस्टोरेंट वाले ज्यादा पैसे 

187
00:13:58,240 --> 00:14:03,240
कमाने के चक्कर में हमें बड़ा पैक
बेचते हैं और हम उसे खाकर मोटे हो

188
00:14:03,240 --> 00:14:07,040
जाते हैं। 
साल 2003 में अमेरिका के सबसे 

189
00:14:07,040 --> 00:14:12,200
बड़े डॉक्टर सर्जन जनरल ने भी यही
कहा था कि मोटापा एक बिमारी की 

190
00:14:12,200 --> 00:14:15,720
तरह फैल रहा है और इसे रोका जा 
सकता है। 

191
00:14:16,360 --> 00:14:21,240
उनका सोचने का तरीका यह था कि अगर
हम बच्चों को हेल्ती पोरशन में 

192
00:14:21,280 --> 00:14:25,560
सही मात्रा में खाना सिखाएं। 
तो इस बिमारी को रोका जा सकता है।

193
00:14:26,200 --> 00:14:29,040
पर क्या यह मेथड यह तरीका काम 
आया? 

194
00:14:29,640 --> 00:14:32,280
क्या सीखने सीखने से लोगों ने वजन
घटाया? 

195
00:14:32,440 --> 00:14:36,240
बिल्कुल नहीं। 
लोग पहले से भी ज्यादा मोटे हो गए

196
00:14:36,240 --> 00:14:39,000
हैं। 
चीन और फ्रांस जैसे देशों में भी 

197
00:14:39,000 --> 00:14:41,880
अब मोटापा बहुत तेजी से बढ़ रहा 
है। 

198
00:14:43,200 --> 00:14:47,440
अगर हम डॉक्टर के हिसाब से देखें 
तो मोटापा एक बिमारी है, लेकिन 

199
00:14:47,440 --> 00:14:52,360
अगर हम पुराने समय से चले आ रहे 
एवोल्यूशन के हिसाब से देखें तो 

200
00:14:52,360 --> 00:14:55,880
यह हमारे शरीर का खुद को बचाने का
एक तरीका है। 

201
00:14:56,840 --> 00:15:01,040
हमारे सिस्टर्स यानी पुराने दादा 
परदादाओं के समय में। 

202
00:15:01,440 --> 00:15:04,080
आज की तरह हर जगह खाना नहीं मिलता
था। 

203
00:15:04,760 --> 00:15:07,680
तब असली समस्या यह थी कि खाना 
बहुत कम था। 

204
00:15:09,000 --> 00:15:13,480
उस समय खाना रखने के लिए न तो 
बर्तन थे और ना ही फ्रिज। 

205
00:15:14,320 --> 00:15:18,320
तो जब भी खाना ज्यादा मिलता था तो
उसे बचाने का कोई रास्ता नहीं था।

206
00:15:18,920 --> 00:15:22,120
ऐसे में हमारे शरीर ने एक। 
बहुत ही बढ़िया तरीका ढूंढ 

207
00:15:22,120 --> 00:15:26,000
निकाला। 
कुछ ज्यादा खाने को शरीर की चर्बी

208
00:15:26,080 --> 00:15:32,160
बॉडी फैट के रूप में जमा कर लेना 
तो असल में हम इंसान बचत करने में

209
00:15:32,160 --> 00:15:35,800
बहुत माहिर है। 
जैसे ही हमें फालतू खाना मिलता 

210
00:15:35,800 --> 00:15:39,480
है, हमारा शरीर उसे तुरंत जमा कर 
लेता है। 

211
00:15:39,600 --> 00:15:43,520
इसके लिए हमें कोई मेहनत नहीं 
करनी पड़ती, बल्कि खाते समय हमें 

212
00:15:43,520 --> 00:15:48,840
बहुत मज़ा आता है। 
यह हमारी बनावट हमारी बायोलोजी का

213
00:15:48,840 --> 00:15:52,400
हिस्सा है। 
यही वजह है कि जीस भी देश में 

214
00:15:52,440 --> 00:15:54,800
खाना आसानी से और ज्यादा मिलता 
है। 

215
00:15:55,120 --> 00:15:59,760
वहाँ लोग मोटे होने लगते हैं। 
तो क्या अब लोग कभी पतले नहीं हो 

216
00:15:59,760 --> 00:16:05,760
पाएंगे? 
वजन कम करने के सिर्फ दो ही 

217
00:16:05,760 --> 00:16:10,560
रास्ते हैं या तो गरीब बन जाइए 
ताकि खाना न मिले या फिर इंसान के

218
00:16:10,560 --> 00:16:16,240
नेचर को बदल दीजिए। 
अभी तक कोई भी देश मोटापा कम करने

219
00:16:16,240 --> 00:16:20,480
में कामयाब नहीं हुआ है। 
दवाइयां बनाने वाली कंपनियां ऐसी 

220
00:16:20,480 --> 00:16:24,880
दवाइयां ढूंढ रही है जो हमारे 
दिमाग को धोखा दे सके और उसे लगे 

221
00:16:24,880 --> 00:16:29,920
कि बस बहुत खा लिया। 
लेकिन हमारा शरीर इतना मजबूत है 

222
00:16:30,280 --> 00:16:36,400
कि वो इन सब चीजों को मात दे देता
है पर एक अच्छी खबर भी है। 

223
00:16:36,720 --> 00:16:41,040
भले ही पूरा समाज अभी पतला नहीं 
हो पाया है, लेकिन बहुत से लोगों 

224
00:16:41,040 --> 00:16:44,760
ने अपनी कोशिश और सावधानी से वजन 
घटाया है। 

225
00:16:45,880 --> 00:16:51,280
अब एक मजेदार बात सुनिए। 
मोटापा और पैसे का मामला एक ही 

226
00:16:51,280 --> 00:16:55,360
सिक्के के दो पहलू है जैसे लोग 
ज्यादा खाते हैं। 

227
00:16:55,520 --> 00:16:58,240
वैसे ही लोग पैसे भी ज्यादा खर्च 
करते हैं। 

228
00:16:58,840 --> 00:17:03,840
हमारा शरीर तो सुपर साइज हो रहा 
है लेकिन बैंक खाता एक दम दुबला 

229
00:17:03,840 --> 00:17:07,680
होता जा रहा है। 
पर यहाँ एक बहुत बड़ा फर्क है। 

230
00:17:08,640 --> 00:17:12,440
खाने के मामले में तो पूरी दुनिया
के लोग एक जैसे हैं लेकिन पैसे 

231
00:17:12,440 --> 00:17:15,920
बचाने के समय में। 
अलग अलग देशों के लोग अलग हैं 

232
00:17:16,520 --> 00:17:20,720
जैसे चीनी या जापान में लोग अपनी 
कमाई का आधा हिस्सा बचा लेते हैं।

233
00:17:21,000 --> 00:17:24,000
ऐसा क्यों? 
क्योंकि पैसा एक नई चीज़ है। 

234
00:17:24,240 --> 00:17:28,880
एक नया इन्वेंशन है। 
हमारे जीन्स को पैसे बचाने की आदत

235
00:17:28,880 --> 00:17:32,480
नहीं है। 
खेती और पैसा तो सिर्फ कुछ 1000 

236
00:17:32,480 --> 00:17:36,880
साल पहले ही आए हैं। 
इसलिए हमारे अंदर पैसे बचाने वाले

237
00:17:36,880 --> 00:17:42,120
जीन्स नहीं है, लेकिन यही सबसे 
अच्छी खबर है क्योंकि पैसा बचाना 

238
00:17:42,120 --> 00:17:47,080
हमारी नेचुरल आदत नहीं है इसलिए 
इसे बदलना बहुत आसान है। 

239
00:17:47,600 --> 00:17:52,160
खाना कम करना मुश्किल है क्योंकि 
वो हमारे खून में है पर पैसा 

240
00:17:52,160 --> 00:17:54,600
बचाना हम। 
आसानी से सीख सकते हैं। 

241
00:17:56,120 --> 00:17:59,160
पैसे बचाने के लिए तीन जरूरी 
बातें हैं। 

242
00:17:59,760 --> 00:18:06,640
पहले बचाइए सेव फर्स्ट, फिर बार 
बार बचाइए सेव और अपनी बचत को खुद

243
00:18:06,640 --> 00:18:10,240
से ही छुपा कर रखिए। 
हाइड सेविंग्स फ्रम यूरसेल्फ़ 

244
00:18:11,320 --> 00:18:14,920
चलिए। 
सेविंग यानी बचत सीखने के लिए हम 

245
00:18:15,160 --> 00:18:19,000
जंगल चलते हैं। 
वहाँ की गिलहरियों को देखिए। 

246
00:18:19,960 --> 00:18:23,320
जब सर्दियां आने वाली होती हैं तो
वो बहुत मेहनत करती हैं। 

247
00:18:23,760 --> 00:18:28,560
सितंबर के महीने में एक गिलहरी, 
हजारों दाने और अखरोट यहाँ वहाँ 

248
00:18:28,560 --> 00:18:32,800
जमीन में छुपा देती है। 
जब कड़ाके की ठंड आती है और 

249
00:18:33,080 --> 00:18:37,040
थपेड़ों पर कुछ नहीं मिलता तब 
उनकी यह मेहनत कम आती है। 

250
00:18:37,720 --> 00:18:41,640
वो अपनी छुपाई हुई चीजों को ढूंढ 
लेती हैं और मज़े से खाती हैं। 

251
00:18:42,160 --> 00:18:44,400
यही वजह है कि वो जिंदा बच जाती 
हैं। 

252
00:18:45,320 --> 00:18:50,000
सिर्फ गिलहरी ही नहीं बहुत से 
बर्ड्स भी ऐसा ही करते हैं। 

253
00:18:50,440 --> 00:18:54,960
अगर सेविंग करने वालों को कोई 
इनाम होता तो ये जानवर जरूर 

254
00:18:54,960 --> 00:18:58,120
जीतते। 
पर हम इंसान इनसे पीछे क्यों रह 

255
00:18:58,160 --> 00:19:01,560
गए? 
आपने छींटी और टिड्डी की कहानी 

256
00:19:01,560 --> 00:19:04,760
सुनी होगी। 
छींटी गर्मियों में खाना जमा करती

257
00:19:04,760 --> 00:19:10,200
है और सर्दियों में बस जाती है। 
टेढ़ा सिर्फ खेलता है और मर जाता 

258
00:19:10,200 --> 00:19:13,160
है। 
नशेर उन्हीं को बचाती है जो 

259
00:19:13,160 --> 00:19:17,880
शेविंग करना जानते हैं, तो फिर 
हमारे अंदर यह आदत क्यों नहीं आई?

260
00:19:19,160 --> 00:19:23,680
इसे समझने के लिए हमें उन लोगों 
को देखना होगा जो हमारे पूर्वजों 

261
00:19:23,680 --> 00:19:27,040
की तरह रहते थे, जैसे साउथ 
अफ्रीका के। 

262
00:19:27,760 --> 00:19:33,000
लोग ये लोग जंगलों में रहते थे 
जहाँ पानी और खाने की बहुत कमी 

263
00:19:33,000 --> 00:19:39,120
थी, वहाँ जब कोई शिकारी किसी बड़े
जानवर जैसे जिराफ़ को मारता था तो

264
00:19:39,120 --> 00:19:44,080
उसके पास बहुत सारा मांस होता था,
लेकिन उनके पास कोई बैंक नहीं था 

265
00:19:44,200 --> 00:19:48,160
अगर वो मांस बचा कर रखते। 
तो या तो वो खराब हो जाता या 

266
00:19:48,160 --> 00:19:53,080
पड़ोसी आकर खा जाते। 
यही समय पता चलता है कि हम इंसान 

267
00:19:53,080 --> 00:19:57,240
पैसे क्यों नहीं बचा पाते। 
उस जमाने में मुश्किल समय की 

268
00:19:57,240 --> 00:20:01,480
तैयारी का मतलब बैंक में पैसा 
रखना नहीं बल्कि खूब खाना था। 

269
00:20:02,760 --> 00:20:05,680
एलिफेंट शील नाम के जानवर को 
देखिए वो। 

270
00:20:06,120 --> 00:20:11,440
मीटिंग के समय से पहले प्रजनन से 
पहले खूब खाकर अपने शरीर पर 

271
00:20:11,720 --> 00:20:14,200
हजारों किलो चर भी जमा कर लेते 
हैं। 

272
00:20:14,760 --> 00:20:19,320
फिर वो तीन महीने तक बिना कुछ 
खाये सिर्फ अपने शरीर की बचत अपने

273
00:20:19,320 --> 00:20:22,680
इस बॉडी फैट के दम पर जिंदा रहते 
हैं। 

274
00:20:23,480 --> 00:20:25,920
इंसान भी सीतराम बचत करते। 
हैं। 

275
00:20:26,040 --> 00:20:31,280
अपने पेट या जांघों को देखिए आपको
वहाँ जो चर्बी जो फैट दिख रही है 

276
00:20:31,520 --> 00:20:35,840
वो असल में आपका बचत खाता है, 
सेविंग्स अकाउंट है जिसका बैलेंस 

277
00:20:35,840 --> 00:20:40,800
लगातार बढ़ रहा है। 
एक फेमस किताब है दी मिलेनियर 

278
00:20:40,880 --> 00:20:44,320
नेक्स्ट डोर। 
इसमें बताया गया है कि अमीर लोग 

279
00:20:44,320 --> 00:20:48,080
इसलिए अमीर नहीं है क्योंकि वो 
बहुत ज्यादा कमाते है, बल्कि 

280
00:20:48,080 --> 00:20:50,560
इसलिए है क्योंकि वो खर्च कम करते
है। 

281
00:20:51,520 --> 00:20:55,360
असली अमीर लोग पुरानी कार्ड चलाते
है और महंगी घड़ियों के बजाय 

282
00:20:55,360 --> 00:21:01,560
सस्ती घड़ी पहनते है। 
आखिर हमें पैसे बचाने के लिए इतनी

283
00:21:01,560 --> 00:21:06,000
मेहनत क्यों करनी पड़ती है जब कि 
बाकी काम हम बड़ी आसानी से कर 

284
00:21:06,000 --> 00:21:09,640
लेते हैं? 
इसका जवाब यह है कि जो काम हमारे 

285
00:21:09,840 --> 00:21:14,800
पूर्व हमारे को जिंदा रखने के लिए
बहुत जरूरी थे, उन्हें सीखने की 

286
00:21:14,800 --> 00:21:19,000
जरूरत नहीं पड़ती, वह हमें अपने 
आप आते हैं। 

287
00:21:19,080 --> 00:21:23,120
हम उन पुरानी मुश्किलों को चुटकी 
में हल कर लेते हैं, लेकिन जब बात

288
00:21:23,120 --> 00:21:26,840
नई चीजों की आती है तो हमारे 
पसीने छूट जाते हैं। 

289
00:21:27,840 --> 00:21:32,920
एक एग्ज़ैम्पल से देखिए कि छोटे 
बच्चे खतरों को कैसे देखते हैं 

290
00:21:33,680 --> 00:21:37,960
अगर आप एक छोटे बच्चों के पालने 
में एक भरी हुई बंदूक रखने तो 

291
00:21:37,960 --> 00:21:41,120
बच्चा उसे खिलौना समझकर उसके साथ 
खेलने लगेगा। 

292
00:21:41,280 --> 00:21:46,560
हंसेगा और शायद उसके मुँह में भी 
डाल ले, लेकिन अगर आप उसे पालने 

293
00:21:46,560 --> 00:21:50,880
में एक प्लास्टिक का सांप रख दे 
तो बच्चा डर के मारे दुबक जाएगा। 

294
00:21:51,240 --> 00:21:54,520
चाहे कोई बच्चा अमेरिका का हो या 
जापान का। 

295
00:21:55,360 --> 00:21:59,720
सांप को देखते ही उसका दिल तेज 
धड़कने लगता है और हाथ पैर ठंडे 

296
00:21:59,720 --> 00:22:03,760
पड़ जाते हैं। 
हम सांपों से इतना क्यों डटते हैं

297
00:22:03,760 --> 00:22:08,200
और बंदूकों से क्यों नहीं? 
जबकि सच तो ये है कि बंदूकों से 

298
00:22:08,200 --> 00:22:12,200
हर साल हजारों लोग मरते हैं और 
सांपों से बहुत ही कम। 

299
00:22:13,800 --> 00:22:17,320
हमें डरना तो बंदूक से चाहिए, पर 
हम डरते सांप से हैं। 

300
00:22:17,840 --> 00:22:22,640
ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे जीन्स
हमें हमारे पुरखों से मिली है। 

301
00:22:23,520 --> 00:22:28,120
जब हमारे पुरखों जंगलों में रहते 
थे तब सांप उनके सबसे बड़े दुश्मन

302
00:22:28,120 --> 00:22:31,520
थे। 
उस समय बंदूकें भी नहीं थी इसलिए 

303
00:22:31,520 --> 00:22:35,960
हमारा दिमाग सांप को देखते ही। 
खतरा चिल्लाने लगता है, लेकिन 

304
00:22:35,960 --> 00:22:41,440
बंदूक को पहचान ही नहीं पाता। 
यही बात चिंपनजी और बंदरों के साथ

305
00:22:41,440 --> 00:22:44,440
भी है। 
जो बंदर पूरी जिंदगी चिड़ियाघर 

306
00:22:44,440 --> 00:22:49,000
में रहे हैं जू में और जिन्होंने 
कभी असली सांप नहीं देखा वो भी 

307
00:22:49,000 --> 00:22:52,440
पहली बार सांप को देखते ही बुरी 
तरह डट जाते हैं। 

308
00:22:52,600 --> 00:22:58,120
अब ज़रा सोचिए आज से 10,000 साल 
पहले आपके पास बैठे हमारे दादा 

309
00:22:58,120 --> 00:23:03,800
परदादा कैसी बातें करते होंगे? 
पति कहते हैं अजी सुनती हो। 

310
00:23:04,520 --> 00:23:09,400
मैं सोच रहा हूँ कि अपनी 25% 
सेविंग्स किसी जापानी कंपनी के 

311
00:23:09,400 --> 00:23:12,080
शेयर में लगा दूँ। 
पत्नी कहती है। 

312
00:23:12,160 --> 00:23:15,520
क्या पागलपन है? 
हम हजारों सालों से जानते हैं कि 

313
00:23:15,520 --> 00:23:19,560
पैसा उन कंपनी में लगाना चाहिए जो
नई टेक्नोलॉजी बनाती है। 

314
00:23:19,800 --> 00:23:24,320
सुना है आग बनाने वाली कंपनी के 
शेयर आजकल बहुत ऊपर जा रहे हैं। 

315
00:23:25,400 --> 00:23:29,880
हँसी आती है ना क्योंकि उस जमाने 
में पैसा या बैंक जैसी कोई चीज़ 

316
00:23:29,880 --> 00:23:33,280
थी ही नहीं। 
जब हमारे पुरखों ने कभी पैसे के 

317
00:23:33,280 --> 00:23:37,680
बारे में सोचा ही नहीं तो हमारे 
अंदर पैसे बचाने वाली अक्ल ये 

318
00:23:37,680 --> 00:23:42,080
इंस्टिंक्ट आएगी कहाँ से? 
हमारे दिमाग की बनावट आज के पैसे 

319
00:23:42,080 --> 00:23:44,400
वाले फैसलों के लिए बनी ही नहीं 
है। 

320
00:23:45,840 --> 00:23:50,240
आज हमारे पास मशीनें हैं, रिमोट 
फ़ोन, फ्रिज और कार। 

321
00:23:51,080 --> 00:23:54,720
हम बस सोफे पर या ऑफिस की कुर्सी 
पर बैठे रहते है। 

322
00:23:55,120 --> 00:23:59,000
हमारा शरीर हिलता नहीं है, पर 
खाना लगातार अंदर जा रहा है। 

323
00:24:00,440 --> 00:24:04,160
पुराने समय में वही लोग जिंदा बच 
पाए जिनके शरीर में चर्बी जमा 

324
00:24:04,160 --> 00:24:10,680
करने की ताकत थी, वही आपके पुरखे 
बने एंसेस्टर्स इसलिए हम आज भी 

325
00:24:10,680 --> 00:24:15,440
हमेशा भूखे महसूस करते हैं। 
ये भूख पहले हमें बचाने के लिए थी

326
00:24:16,120 --> 00:24:18,840
पर अब ये हमारे लिए एक प्रॉब्लम 
बन गई है। 

327
00:24:20,000 --> 00:24:23,880
आज हर चार में से एक आदमी मोटापे 
का शिकार है। 

328
00:24:25,040 --> 00:24:27,400
मोटापा कम करना सिर्फ वजन की बात 
नहीं है। 

329
00:24:27,400 --> 00:24:31,400
ये दिल की बिमारी और डायबिटीज़ से
बचने के लिए भी जरूरी है। 

330
00:24:32,040 --> 00:24:34,520
लेकिन वजन कम करना इतना मुश्किल 
क्यों है? 

331
00:24:35,360 --> 00:24:37,560
इसका एक बड़ा कारण है भूख का 
दर्द। 

332
00:24:39,640 --> 00:24:43,600
बायोस्फीयर टू नाम के एक 
एक्स्पेरमेन्ट में आठ लोग 2 साल 

333
00:24:43,600 --> 00:24:47,640
तक एक बंद जगह में रहे। 
वह खाना कम था। 

334
00:24:47,800 --> 00:24:52,800
इसलिए उनका वजन तो कम हो गया और 
वो हेल्ती भी हुए पर वो लोग बहुत 

335
00:24:53,120 --> 00:24:56,640
चिड़चिड़े हो गए। 
वो खाने के छोटे छोटे टुकड़ों के 

336
00:24:56,640 --> 00:25:01,240
लिए भी आपस में लड़ने लगे। 
जैसे ही वो बाहर आए उन सबका वजन 

337
00:25:01,240 --> 00:25:06,080
फिर से पहले जैसा हो गया। 
वैज्ञानिक ने पाया कि हमारे शरीर 

338
00:25:06,080 --> 00:25:08,400
का एक फिक्स। 
लेवल होता है। 

339
00:25:08,400 --> 00:25:13,720
एक सेट पॉइंट यह एक मशीन एक 
थर्मोस्टेट की तरह काम करता है। 

340
00:25:14,320 --> 00:25:17,840
जैसे ही हम वजन घटाते हैं हमारा 
शरीर घबरा जाता है। 

341
00:25:18,320 --> 00:25:20,720
उसे लगता है कि कोई मुसीबत आ गई 
है। 

342
00:25:21,720 --> 00:25:24,640
रिसाल्ट ये होता है कि शरीर अपना 
काम करने की। 

343
00:25:24,800 --> 00:25:29,360
रफ्तार अपनी मेटाबॉलिज्म बहुत 
धीमी कर देता है ताकि वो एक एक 

344
00:25:29,360 --> 00:25:34,200
ग्राम चर्बी को बचा सके। 
साथ ही शरीर कुछ ऐसे चेमिकल्स 

345
00:25:34,200 --> 00:25:39,760
छोड़ता है जिससे हमें मीठा और 
चिकना खाना खाने की जबरदस्त इच्छा

346
00:25:39,760 --> 00:25:44,880
यानी क्रेविंग होने लगती है। 
बहुत ज्यादा डाइटिंग करना कभी कभी

347
00:25:44,880 --> 00:25:49,400
नुकसानदेह भी हो सकता है। 
जब शरीर को लगता है कि खाना नहीं 

348
00:25:49,400 --> 00:25:54,440
मिल रहा तो वो अपने कुछ जरूरी काम
बंद कर देता है जैसे बीमारियों से

349
00:25:54,440 --> 00:26:01,840
लड़ने की ताकत कम हो जाना। 
एक्सर्साइज़ हमारे लिए अच्छी है। 

350
00:26:02,000 --> 00:26:06,000
पर पुराने समय से चले आ रही 
एवोल्यूशन ने हमें आलसी बनाया है।

351
00:26:06,800 --> 00:26:12,120
हमारे जीन्स आज भी यही सोचते हैं 
कि कभी भी आकाल कभी भी सूखा पड़ 

352
00:26:12,120 --> 00:26:15,160
सकता है। 
इसलिए जब भी मौका मिलता है वो 

353
00:26:15,160 --> 00:26:20,240
हमें सुस्त यानी एथर्जिक बना देते
हैं ताकि हम अपनी एनर्जी बचा सके।

354
00:26:21,240 --> 00:26:23,640
तो क्या हम कभी सोफे से उठ 
पाएंगे? 

355
00:26:25,040 --> 00:26:28,200
चलिए उन चूहों की बात करते हैं 
जिन्हें दौड़ना पसंद नहीं था। 

356
00:26:28,920 --> 00:26:33,000
वैसे तो वो बिना वजह नहीं दौड़ते 
पर अगर उन्हें भूख लगे तो वो दिन 

357
00:26:33,000 --> 00:26:36,480
भर दौड़ते रहते हैं क्यों? 
क्योंकि वो खाना ढूंढ रहे होते 

358
00:26:36,480 --> 00:26:39,360
हैं? 
एक स्टडी में भूखे चूहे उन चूहों 

359
00:26:39,360 --> 00:26:42,760
से दो गुना ज्यादा दौड़ें जिन्हें
भरपेट खाना मिला था। 

360
00:26:44,560 --> 00:26:47,240
एक वैज्ञानिक ने तो एक मजेदार 
स्कीम निकाली। 

361
00:26:48,440 --> 00:26:52,480
उसने चूहों के लिए ऐसा नियम बनाया
की उन्हें खाना तभी मिलेगा जब वो 

362
00:26:52,680 --> 00:26:56,000
पहिये पर दौड़ेंगे। 
चूहे जितना ज्यादा दौड़ें, उन्हें

363
00:26:56,000 --> 00:26:59,760
उतना ही खाना मिला। 
रिसाल्ट ये हुआ कि कुछ चूहे दिन 

364
00:26:59,760 --> 00:27:04,000
में 1010 घंटे दौड़ने लगे और उनका
वजन बहुत कम हो गया। 

365
00:27:04,640 --> 00:27:09,360
शायद हमें भी ऐसा टीवी या फ्रिज 
बनाना चाहिए जो तभी चले जब हम 

366
00:27:09,360 --> 00:27:15,800
एक्सर्साइज़ वाली साइकिल चलाएं। 
अपने सुस्ती दूर करने के लिए हम 

367
00:27:15,800 --> 00:27:20,080
या तो जीन से लड़ सकते हैं या 
उन्हें अपनी अकल से हरा सकते हैं।

368
00:27:20,960 --> 00:27:25,280
अगर हम एक्सर्साइज़ को किसी जरूरी
गोल से जोड़ दें तो मेहनत कम 

369
00:27:25,280 --> 00:27:30,960
लगेंगी। 
डोकोमाइन एक ऐसा केमिकल है जो 

370
00:27:30,960 --> 00:27:33,520
हमारे दिमाग में तब निकलता है जब 
हमें। 

371
00:27:33,680 --> 00:27:38,960
मज़ा आता है जब हमें प्लेज़र आता 
है, चाहे वो सिक्स हो, जितना हो 

372
00:27:39,040 --> 00:27:44,120
या अच्छा खाना, पुराने समय में यह
केमिकल इसलिए था ताकि हम वो काम 

373
00:27:44,120 --> 00:27:46,920
बार बार करें जिससे हम जिंदा रह 
सके। 

374
00:27:47,400 --> 00:27:52,480
इसे नया इलाका ढूंढ़ना या खाना 
तलाशना हमारे ये सिस्टर्स बहुत 

375
00:27:52,480 --> 00:27:56,400
रिस्क लेते थे। 
और उनके उससे निडर स्वभाव की वजह 

376
00:27:56,400 --> 00:28:02,120
से हम आज यहाँ है। 
लेकिन आज ड्रग्स और नशीली चीजें 

377
00:28:02,120 --> 00:28:06,680
इस सिस्टम को हाईजैक कर लेती हैं।
वो बिना कोई मेहनत किए हमारे 

378
00:28:06,680 --> 00:28:12,440
दिमाग को नकली प्रेशर देती हैं। 
यही बात फालतू रिस्क लेने के बारे

379
00:28:12,440 --> 00:28:16,920
में भी सच है। 
तो क्या पैसा खुशियां खरीद सकता 

380
00:28:16,920 --> 00:28:19,520
है? 
रिसर्च कहती है, नहीं। 

381
00:28:20,520 --> 00:28:24,280
एक बार जब हमारी जरूरतें पूरी हो 
जाती हैं तो ज्यादा पैसा हमें 

382
00:28:24,280 --> 00:28:28,200
ज्यादा खुश नहीं बनाता। 
फिर भी हमें हमेशा और ज्यादा 

383
00:28:28,200 --> 00:28:32,160
चाहिए होता है। 
जीन्स के हिसाब से। 

384
00:28:32,480 --> 00:28:38,920
होने से ज्यादा जरूरी पाना है। 
हमारा दिमाग ऐसे मना है कि जैसे 

385
00:28:38,920 --> 00:28:42,960
ही हमें कुछ मिलता है, हमें थोड़ी
देर के लिए खुशी होती है पर फिर 

386
00:28:42,960 --> 00:28:46,760
वो गायब हो जाती है। 
हमारे जीन्स नहीं चाहते कि हम 

387
00:28:46,760 --> 00:28:51,720
हमेशा खुश और आराम से रहे क्योंकि
अगर हम खुश होकर बैठ गए। 

388
00:28:51,760 --> 00:28:54,000
तो हम आगे बढ़ने की कोशिश छोड़ 
देंगे। 

389
00:28:54,520 --> 00:29:00,240
इसलिए वो हमें बार बार मज़े का 
लालच यानी रिवॉर्ड देकर काम 

390
00:29:00,240 --> 00:29:07,240
करवातें रहते हैं। 
तब एक बड़ा सवाल उठता है अगर 

391
00:29:07,480 --> 00:29:11,040
एवोल्यूशन हमें बेहतर बनाना चाहती
थी तो उसने हमें? 

392
00:29:11,160 --> 00:29:15,240
नशेड़ी को बनाया। 
इसे समझने के लिए हमें मज़े और 

393
00:29:15,320 --> 00:29:17,880
दर्द के पीछे की वजह को समझना 
होगा। 

394
00:29:18,480 --> 00:29:22,280
आखिर हमारे शरीर में मज़ा यानी 
प्लेज़र में महसूस करने की ताकत 

395
00:29:22,280 --> 00:29:26,400
क्यों है? 
चलिए इसकी शुरुआत एक कॉफी से करते

396
00:29:26,400 --> 00:29:29,720
हैं कैफीन इतना अच्छा क्यों लगता 
है? 

397
00:29:31,400 --> 00:29:36,000
फेमस कॉमेडियन डेविड लेटरमैन कहते
हैं, अगर कॉफी ना होती तो मेरी 

398
00:29:36,000 --> 00:29:40,160
कोई पहचान ही नहीं होती। 
कैफीन दुनिया में सबसे ज्यादा 

399
00:29:40,160 --> 00:29:44,360
इस्तेमाल होने वाला नशा है। 
पानी के बाद लोग सबसे ज्यादा चाय 

400
00:29:44,360 --> 00:29:49,520
पीते हैं और उसके बाद कॉफी। 
अमेरिका में मिलने वाली 19% कोल्ड

401
00:29:49,520 --> 00:29:55,640
ड्रिंक्स में कैफीन होता है एवरेज
अमेरिकी साल भर में करीब 380 लीटर

402
00:29:55,640 --> 00:29:59,760
एसिड ड्रिंक्स पी जाता है। 
बड़े बड़े लेखेकों और वैज्ञानिक 

403
00:29:59,800 --> 00:30:04,240
ने माना है कि कॉफी उनके दिमाग को
तेज करने के लिए बहुत जरूरी चीज़ 

404
00:30:04,240 --> 00:30:07,720
है। 
सैकड़ों सालों से लोग कॉफी की 

405
00:30:07,720 --> 00:30:10,800
तारीफ कर रहे हैं। 
इसका असर सिर्फ इंसानों पर ही 

406
00:30:10,800 --> 00:30:16,120
नहीं जानवरों पर भी होता है। 
चूहों को जब भूल भुलैया का रास्ता

407
00:30:16,120 --> 00:30:20,760
सिखाया जाता है तो कॉफी पीने वाले
चूहे से जल्दी सीख जाते हैं और 

408
00:30:21,040 --> 00:30:25,640
ज़्यादा समय तक याद रखते हैं। 
साइकिल चलाने वाले खिलाड़ियों ने 

409
00:30:25,640 --> 00:30:30,880
देखा कि कॉफ़ी पीने के बाद वो 20%
ज़्यादा समय तक साइकिल चला सकते 

410
00:30:30,880 --> 00:30:34,640
हैं। 
यहाँ तक कि इंसान इस पंप भी कैफीन

411
00:30:34,640 --> 00:30:38,760
मिलने पर ज़्यादा तेजी से तैरने 
लगते हैं जिससे बच्चे पैदा होने 

412
00:30:38,760 --> 00:30:43,640
की प्रोबेबिलिटी बढ़ जाती है। 
सबसे अच्छी बात यह है कि कैफीन 

413
00:30:43,640 --> 00:30:48,600
ज्यादातर लोगों के लिए सेफ है। 
अगर आप इसे बहुत ज्यादा न पिएं तो

414
00:30:48,600 --> 00:30:51,920
इससे दिल या फेफड़ों की बिमारी का
कोई खतरा नहीं होता। 

415
00:30:54,080 --> 00:30:56,720
तो कैफीन अपना जादू कैसे चलाता 
है? 

416
00:30:57,320 --> 00:31:01,280
जब तक हम जागे रहते हैं, हमारा 
दिमाग कड़ी मेहनत करता है। 

417
00:31:01,400 --> 00:31:05,640
हमारे आसपास की हजारों बातें 
दिमाग तक सेल्स के जरिए पहुंचती 

418
00:31:05,640 --> 00:31:09,280
हैं। 
जैसे स्वेटर चुभ रहा है, धूप बहुत

419
00:31:09,280 --> 00:31:14,600
तेज है, बॉस चिल्ला रहा है। 
इटी से यह सारा काम हमारे दिमाग 

420
00:31:14,600 --> 00:31:19,000
की छोटी सेल्स करती हैं, जिन्हें 
न्यूरॉन्स कहते हैं। 

421
00:31:19,160 --> 00:31:22,880
जब ये सेल्स काम करती हैं तो 
इनमें से कचरा निकलता है। 

422
00:31:23,520 --> 00:31:28,760
इसे चलती कार से धुआँ निकलता है। 
इस कचरे को एडेनोसिन कहते हैं। 

423
00:31:29,520 --> 00:31:33,960
जब ये कचरा दिमाग में जमा हो जाता
है तो हमारा शरीर हमें सोने का 

424
00:31:33,960 --> 00:31:37,080
इशारा देता है ताकि बैटरी चार्ज 
हो सके। 

425
00:31:39,320 --> 00:31:44,240
खुद हमें नींद नहीं दिलाता, वो बस
पास की सेल्स को शांत हो जाओ का 

426
00:31:44,240 --> 00:31:49,320
मैसेज भेजता है। 
कैफीन इसी मैसेज को बीच में ही 

427
00:31:49,320 --> 00:31:53,800
रोक देता है। 
कैसे देखिए दिमाग की सेल्स एक 

428
00:31:53,800 --> 00:31:58,120
दूसरे को मैसेज भेजने के लिए एक 
लॉक एंड की एक ताले और। 

429
00:31:58,280 --> 00:32:00,880
चाबी वाले मेथड का इस्तेमाल करती 
हैं। 

430
00:32:01,920 --> 00:32:06,920
डेनोसिन एक चाबी की तरह है जो के 
ताले यानी रिसेप्टर में फिट हो 

431
00:32:06,920 --> 00:32:10,240
जाता है। 
जैसे ही ताला खुलता है, हमें नींद

432
00:32:10,240 --> 00:32:15,000
आने लगती है, लेकिन जब हम कॉफी 
पीते हैं तो कैफीन दिमाग में 

433
00:32:15,000 --> 00:32:19,160
पहुँच जाता है। 
कैफीन का शेप एडेनोसिन की चाबी से

434
00:32:19,160 --> 00:32:23,520
बहुत मिलती जुलती है। 
यह नकली चाबी की तरह रिसेप्टर में

435
00:32:23,520 --> 00:32:28,400
जाकर बैठ जाता है और असली 
एडेनोसिन को अपनी जगह नहीं मिलती 

436
00:32:28,400 --> 00:32:31,520
और वो दिमाग को सोने का मैसेज 
नहीं दे पाता। 

437
00:32:31,920 --> 00:32:35,680
नतीजा यह होता है कि हम थके होने 
के बावजूद भी बहुत। 

438
00:32:35,960 --> 00:32:40,840
अलर्ट महसूस करते हैं। 
कैफीन हमारे शरीर के नेचुरल 

439
00:32:40,840 --> 00:32:44,320
सिग्नल्स को रोककर हमारे दिमाग को
धोखा देता है। 

440
00:32:44,720 --> 00:32:48,600
ज्यादातर ड्रग्स इसी तरह हमारे 
दिमाग को बेवकूफ बनाते हैं। 

441
00:32:51,080 --> 00:32:55,080
क्या दिमाग की कुछ छोटी सी सेल्स।
चश्मे हमारे मूड या व्यवहार को 

442
00:32:55,080 --> 00:32:56,200
बदल सकती। 
हैं। 

443
00:32:57,200 --> 00:33:02,200
1950 के समय में एक वैज्ञानिक ने 
चूहों के दिमाग में कुछ तार लगाए,

444
00:33:02,320 --> 00:33:06,880
कुछ इलेक्ट्रोड्स। 
उन्होंने देखा कि दिमाग के एक खास

445
00:33:06,880 --> 00:33:12,240
हिस्से जिसे हाइपोथैलमस कहते हैं 
वहाँ हल्का सा करंट देने से। 

446
00:33:12,880 --> 00:33:16,920
चूहे बहुत ज्यादा खुश हो गए। 
खुश कहना तो बहुत कम होगा। 

447
00:33:16,920 --> 00:33:20,200
वो पागलपन वाली खुशी महसूस करने 
लगे। 

448
00:33:21,400 --> 00:33:25,760
बाद में एक मजेदार रिसर्च हुई। 
चूहों को एक पहेली सुलझाने को दी 

449
00:33:25,760 --> 00:33:29,000
गई। 
जब वो रास्ता ढूंढ लेते तभी 

450
00:33:29,000 --> 00:33:33,480
उन्हें वो करेंट वाला ही न मिलता।
चुहै ने मेहनत से काम करने लगे कि

451
00:33:33,480 --> 00:33:37,000
उन्होंने वो रास्ते में ढूंढ लिए 
जो इंसानों के लिए भी बहुत 

452
00:33:37,000 --> 00:33:41,560
मुश्किल होते। 
लेकिन चूहों को वो काम करना पसंद 

453
00:33:41,560 --> 00:33:44,400
नहीं था। 
उन्हें तो बस वो दिमाग का मज़ा 

454
00:33:44,400 --> 00:33:49,520
चाहिए था जब चूहों को खुद वो बटन 
दबाने का मौका दिया गया जिससे 

455
00:33:49,520 --> 00:33:52,520
उन्हें मज़ा मिलता था। 
तो वो सब कुछ भूल गए। 

456
00:33:53,120 --> 00:33:57,360
उन्होंने खाना पीना छोड़ दिया, 
अपने दोस्तों को भूल गए और बस 1 

457
00:33:57,360 --> 00:34:00,040
मिनट में 100 बार वो बटन दबाने 
लगे। 

458
00:34:00,440 --> 00:34:04,200
वो भूखें मर गए, पर उन्होंने बटन 
दबाना नहीं छोड़ा। 

459
00:34:05,680 --> 00:34:08,920
अगर हमारे पास भी ऐसा बटन हो तो 
हम क्या करेंगे? 

460
00:34:09,600 --> 00:34:15,120
सस्ती ये है कि हमारे पास भी ऐसे 
बटन हैं जैसे ऑर्गिसम जब हमें 

461
00:34:15,120 --> 00:34:18,960
बहुत अच्छा महसूस होता है तो असल 
में हमारे दिमाग में कुछ चेमिकल्स

462
00:34:18,960 --> 00:34:22,760
निकलते हैं जो हमें चूहों की तरह 
ही पागल कर देते हैं। 

463
00:34:23,480 --> 00:34:27,520
इन हिस्से को हम इसे फिर से करो 
वाली सेंटर कह सकते हैं। 

464
00:34:27,719 --> 00:34:33,040
डू इट अगेन सेंटर्स ये मज़ा ये 
ब्लेज़र हमें उस काम की याद 

465
00:34:33,040 --> 00:34:39,760
दिलाता है जिससे वो मज़ा मिला। 
ऐसा समझिए कि आपके दिमाग में अलग 

466
00:34:39,760 --> 00:34:45,120
अलग आकार के स्लॉट्स बने हैं। 
सेक्स करना एक स्क्वायर पे एक 

467
00:34:45,159 --> 00:34:49,040
चौकोर टुकड़े की तरह है जो उस 
खाँचे में फिट हो सकता है। 

468
00:34:49,239 --> 00:34:54,639
उस स्लॉट में हमें मज़ा आता है और
हमारा दिमाग कहता है इसे फिर से 

469
00:34:54,639 --> 00:34:58,760
करो। 
जब हम मज़े ले रहे होते हैं, तब 

470
00:34:58,760 --> 00:35:01,240
हमारे जीन्स पीछे बैठकर हंस रहे 
होते। 

471
00:35:01,240 --> 00:35:04,720
हैं। 
उनका माइंडसेट ये है कि मज़ा लो 

472
00:35:04,720 --> 00:35:08,400
ताकि बच्चे पैदा हो और हम अगले 
पीढ़ी तक पहुँच सकें। 

473
00:35:09,520 --> 00:35:13,920
जीन्स ने हमें जिंदा रखने के लिए 
कई ऐसे स्लॉट्स बनाए हैं। 

474
00:35:15,080 --> 00:35:19,440
जब हम मीठा खाते हैं तो कैलोरी 
ढूंढने वाला स्लॉट भर जाता है और 

475
00:35:19,440 --> 00:35:23,920
हमें खुशी मिलती है। 
जब हम किसी से आगे निकलते हैं तो 

476
00:35:23,920 --> 00:35:27,680
स्टेटस वाला स्लॉट भर जाता है और 
हम प्राउड महसूस। 

477
00:35:27,680 --> 00:35:31,320
करते हैं। 
जीन्स ने ये मज़े वाला तरीका ये 

478
00:35:31,320 --> 00:35:36,880
सिस्टम इसलिए बनाया ताकि हम वो 
काम करें जो उनके लिए जरूरी है। 

479
00:35:38,800 --> 00:35:41,840
कोई भी व्यक्ति जीन्स को आगे 
बढ़ाने के लिए बच्चा पैदा नहीं 

480
00:35:41,840 --> 00:35:46,160
करता, वो तो बस मज़ा ढूंढता है और
दर्द से बचता है। 

481
00:35:46,280 --> 00:35:48,840
पर अनजाने में जीन्स का काम हो 
जाता है। 

482
00:35:50,760 --> 00:35:55,240
नशीली चीजें यानी ड्रग्स हमारे 
इसी नेचुरल सिस्टम को हैचैक कर 

483
00:35:55,240 --> 00:35:58,960
लेते हैं। 
हमारे पुरखों को मज़ा पाने के लिए

484
00:35:58,960 --> 00:36:03,880
मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन 
ड्रग्स के साथ बिना कोई अच्छा काम

485
00:36:03,880 --> 00:36:06,880
किए ही। 
दिमाग के उन मज़े वाले सेंटर को 

486
00:36:07,000 --> 00:36:11,520
जगाया जा सकता है। 
जुगनू यानी फायरफ्लाई की कहानी से

487
00:36:11,520 --> 00:36:15,080
इसे समझिए। 
रात के अंधेरे में जुगनू अपनी 

488
00:36:15,080 --> 00:36:18,520
पूंछ से रौशनी की एक खास कोडिंग 
भेजते हैं। 

489
00:36:18,600 --> 00:36:22,480
एक मोर्स कोड ताकि वो अपना साथी 
ढूंढ सके। 

490
00:36:23,680 --> 00:36:27,800
लेकिन कुछ छला शिकारी जानवर उसी 
रौशनी की नकल करते हैं। 

491
00:36:28,240 --> 00:36:32,160
बेचारा जुगनू प्यार की तलाश में 
वहाँ पहुंचता है और शिकारी का 

492
00:36:32,160 --> 00:36:36,400
खाना बन जाता है। 
हमारे दिमाग के साथ भी ऐसा ही 

493
00:36:36,400 --> 00:36:39,560
होता है। 
जब हम कोई अच्छा काम करते हैं तो 

494
00:36:39,560 --> 00:36:43,280
हमारे दिमाग में। 
मैसेज भेजने वाले चेमिकल्स निकलते

495
00:36:43,280 --> 00:36:45,960
हैं, जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर 
कहते हैं। 

496
00:36:46,440 --> 00:36:51,520
ड्रग्स चाहे वो कोकेन हो या 
कैफीन, इन चेमिकल्स की नकल करते 

497
00:36:51,520 --> 00:36:54,280
हैं। 
दिमाग को लगता है कि हमने कोई 

498
00:36:54,280 --> 00:36:58,800
बहुत बड़ा काम किया है जैसे खाना 
ढोढ़ना जबकि हम शायद किसी। 

499
00:36:59,000 --> 00:37:01,680
गंदी जगह बैठकर नशा कर रहे होते 
हैं। 

500
00:37:02,320 --> 00:37:05,840
दिमाग को तो बस उन चेमिकल्स का 
मज़ा दिखता है। 

501
00:37:08,440 --> 00:37:12,120
चूहों वाले उस मज़े के पीछे डोपे 
में नाम का एक केमिकल था। 

502
00:37:12,560 --> 00:37:18,360
इसे खुशीवाला संदेश या हैपीनेस 
न्यूरोट्रांसमिटर कह सकते हैं। 

503
00:37:19,560 --> 00:37:23,720
जब यह निकलता है तो हमें बहुत 
अच्छा लगता है लेकिन ये खुशी बहुत

504
00:37:23,760 --> 00:37:28,960
छोटी होती है क्योंकि दिमाग तुरंत
उस डोपेमिन को वापस सूख लेता है, 

505
00:37:31,160 --> 00:37:36,080
कोकेन डोपेमिन को वापस सूखने वाले
रास्ते को ब्लॉक कर देती है। 

506
00:37:36,840 --> 00:37:41,280
अब दिमाग में डूबा रहता है और 
इंसान को लगता है कि बस मज़े ही 

507
00:37:41,280 --> 00:37:44,640
मज़े हैं। 
डिप्रेशन की दवा यानी ऐंटी 

508
00:37:44,640 --> 00:37:49,840
डिप्रेशन, ये सेरोटोनिन नाम के 
दूसरे खुशी वाले केमिकल के साथ भी

509
00:37:49,840 --> 00:37:53,000
ऐसा ही करती है, जिससे इंसान खुश 
रहता। 

510
00:37:53,000 --> 00:37:57,440
है। 
इन डॉल्फिन ये हमारे शरीर के 

511
00:37:57,440 --> 00:38:02,440
नेचुरल पेन किलर्स दवा है। 
जब हमें बहुत चोट लगती है या हम 

512
00:38:02,440 --> 00:38:05,320
बहुत दौड़ते हैं तो शरीर इन्हें 
छोड़ता है। 

513
00:38:05,840 --> 00:38:11,200
अफीम, यानेओपियम और हीरोइन इसी की
नकल करते हैं। 

514
00:38:11,280 --> 00:38:15,000
पर इनका असर शरीर के नेचुरल 
सिस्टम से कहीं ज्यादा तेज होता 

515
00:38:15,000 --> 00:38:20,000
है। 
सिगरेट या निकोटीन यह हमारे दिमाग

516
00:38:20,000 --> 00:38:23,520
में ऐड्रेनिलिन और डोपेमिन को 
बढ़ा देती है। 

517
00:38:23,960 --> 00:38:27,960
शुरू में मज़ा आता है पर धीरे 
धीरे दिमाग को इसकी लत लग जाती है

518
00:38:27,960 --> 00:38:30,320
और मज़ा कम होने लगता। 
है। 

519
00:38:30,920 --> 00:38:35,400
शराब दी ग्रेट इमपेरसोनटोर है 
यानी सबका भाव। 

520
00:38:36,520 --> 00:38:40,200
शराब एक ऐसी चीज़ है जो एक साथ कई
चेमिकल्स की नकल करती है। 

521
00:38:40,800 --> 00:38:43,040
ये हमारे दिमाग को सुस्त कर देती 
है। 

522
00:38:43,360 --> 00:38:46,000
ये कोकेन की तरह थोड़ा सा नशा 
देती है। 

523
00:38:46,280 --> 00:38:49,040
ये हीरोइन की तरह दर्द को कम करती
है। 

524
00:38:49,160 --> 00:38:52,080
ये डिप्रेशन की दवा की तरह खुश 
रखती है। 

525
00:38:53,200 --> 00:38:57,480
इतने सारे मज़े एकसाथ मिलने की 
वजह से ही लोग शराब की तरफ खींचे 

526
00:38:57,480 --> 00:39:00,600
चले जाते हैं। 
लेकिन जब एक ग्लास से शुरू हुई 

527
00:39:00,600 --> 00:39:05,200
बात बहुत आगे बढ़ जाती है तो असल 
मुसीबत शुरू होती है। 

528
00:39:06,840 --> 00:39:10,200
अमेरिका के स्कूलों में करीब 
5,00,000 स्टूडेंट्स अपनी बॉडी 

529
00:39:10,200 --> 00:39:12,840
बनाने के लिए स्टेरॉएड्स लेते 
हैं। 

530
00:39:13,680 --> 00:39:17,480
मान लीजिए कैप्टन अमेरिका नाम का 
एक लड़का अपनी मसल्स को बढ़ाने के

531
00:39:17,480 --> 00:39:21,680
लिए बाहर से टस्टोस्टरॉन के 
इंजेक्शन लगता है। 

532
00:39:22,320 --> 00:39:24,720
कैप्टन अमेरिका तगड़ा तो हो जाता 
है। 

533
00:39:24,840 --> 00:39:29,600
लेकिन उसके शरीर की मशीन सोचने 
लगती है कि अरे इतना सारा जुइस 

534
00:39:29,600 --> 00:39:32,720
बाहर से आ रहा है तो मुझे बनाने 
की क्या जरूरत? 

535
00:39:33,840 --> 00:39:39,080
शरीर एक बहुत ही समझदार मशीन है। 
वो अपनी तरफ से यह जुइस बनाना बंद

536
00:39:39,080 --> 00:39:42,320
कर देता है। 
रिसाल्ट ये होता है कि कैप्टन 

537
00:39:42,320 --> 00:39:44,480
अमेरिका बाहर से तो चौड़ा हो जाता
है। 

538
00:39:44,880 --> 00:39:49,920
पर उसके शरीर के असली अंग जो यह 
जुइस बनाते थे, वह सुकड़ कर गायब 

539
00:39:49,920 --> 00:39:54,480
हो जाते हैं। 
हमारे शरीर को चेंज पसंद नहीं है।

540
00:39:54,480 --> 00:40:00,080
हमारा शरीर एक तय सीमा एक फिक्स्ड
रेंज के अंदर ही काम करना चाहता 

541
00:40:00,080 --> 00:40:03,200
है। 
जैसे कार चाहे ठंडी हो या गर्म 

542
00:40:03,200 --> 00:40:06,680
हो, जल जाती है। 
पर हमारा शरीर अगर दो तीन डिग्री 

543
00:40:06,680 --> 00:40:09,960
भी ज्यादा गर्म या ठंडा हो जाए तो
हम मर सकते हैं। 

544
00:40:10,680 --> 00:40:14,920
इसलिए हमारा शरीर किसी भी बाहरी 
चेंज के खिलाफ़ लड़ता है। 

545
00:40:15,680 --> 00:40:18,920
अगर आप डाइट शुरू करते हैं तो 
शरीर अपना काम करने की 

546
00:40:19,160 --> 00:40:22,240
मेटाबोलिज्म यानी रफ्तार धीमी कर 
देता है। 

547
00:40:22,400 --> 00:40:25,120
ताकि वो आपकी मेहनत को बेकार कर 
सके। 

548
00:40:33,510 --> 00:40:36,110
हमें खतरों में मज़ा क्यों आता 
है? 

549
00:40:37,030 --> 00:40:41,670
ज़्यादातर जानवर खतरा डालते हैं 
जैसे दोबारा सीने लड़ने से पहले 

550
00:40:41,670 --> 00:40:46,310
बस एक दूसरे को देख कर शोर मचाते 
हैं, जो छोटा होता है वो डर कर 

551
00:40:46,310 --> 00:40:49,680
भाग जाता है। 
वो बिना लड़े ही हार मान लेता है 

552
00:40:49,680 --> 00:40:54,120
ताकि उसे चोट ना लगे। 
पर कभी कभी जानवर जानलेवा रिस्क 

553
00:40:54,120 --> 00:40:57,760
भी लेते है। 
एक छोटी मकड़ी की कहानी को सुनिए 

554
00:40:58,760 --> 00:41:02,400
जब एक बड़ी मकड़ी वह होती है तब 
भी छोटी मकड़ी भागने के बजाय 

555
00:41:02,400 --> 00:41:05,480
लड़ती है। 
उसे पता है कि अगर वो अभी पीछे हट

556
00:41:05,480 --> 00:41:06,880
गई तो उसे। 
दोबारा। 

557
00:41:06,960 --> 00:41:11,000
कभी साथ ही नहीं मिलेगा। 
वो अपने जान पर खेल जाती है ताकि 

558
00:41:11,000 --> 00:41:15,920
उसके बच्चे दुनिया में आ सके। 
जो डर गए उनके जीन्स खत्म हो गए, 

559
00:41:16,280 --> 00:41:22,320
जो लड़के और जीत गए, हम उन्हीं के
बच्चे हैं, इंसान भी ऐसे ही हैं। 

560
00:41:22,920 --> 00:41:26,480
हजारों साल पहले जो लोग अपनी 
गुफाओं में डर कर बैठे रहे। 

561
00:41:26,720 --> 00:41:31,200
वो कहीं नहीं पहुँच पाए, लेकिन इन
लोगों ने खतरा उठाया और नई जगहों 

562
00:41:31,200 --> 00:41:33,960
की खोज की। 
उन्होंने पूरी दुनिया को बसा 

563
00:41:33,960 --> 00:41:37,400
दिया। 
आज भी खुशखबीलों में जो आदमी सबसे

564
00:41:37,400 --> 00:41:42,080
ज्यादा लड़ाई करता है और खतरा मोल
लेता है, उससे उतनी ही ज्यादा 

565
00:41:42,080 --> 00:41:46,360
पत्नियां और बच्चे मिलते हैं। 
यानी खतरा उठाना हमारे। 

566
00:41:46,920 --> 00:41:52,280
के लिए फायदेमंद का सौदा था। 
इसलिए आज भी हम जब कोई रिस्क लेते

567
00:41:52,280 --> 00:41:58,000
हैं तो हमारा दिमाग हमें मज़े का 
नाम यानी रिवॉर्ड देता है। 

568
00:41:59,360 --> 00:42:03,560
हमारे जीन्स हमें रिस्क लेने के 
लिए उकसाते हैं, क्योंकि उन्हें 

569
00:42:03,560 --> 00:42:08,480
खतरे के खेल में मज़ा आता है। 
जब हम तेज मोटरसाइकिल चलाते हैं 

570
00:42:08,480 --> 00:42:12,240
या ऊंचे झूले पर बैठते हैं तो 
हमारे दिमाग में एक खास केमिकल 

571
00:42:12,240 --> 00:42:14,320
निकलता है जिसे अड्डों पे कहते 
हैं। 

572
00:42:14,680 --> 00:42:17,880
ये हमें बहुत ही बढ़िया महसूस 
कराता है। 

573
00:42:19,640 --> 00:42:22,680
हमारे जीन्स हमें जरूरत से ज्यादा
भरोसा भी दिलाते। 

574
00:42:22,680 --> 00:42:25,320
हैं। 
हमें लगता है कि हम दूसरों से 

575
00:42:25,320 --> 00:42:28,560
ज्यादा जीएंगे। 
हमें बीमारियां कम होंगी और हम 

576
00:42:28,560 --> 00:42:34,600
बाजार में बढ़िया शेयर चुनेंगे। 
एक बार जब आदमियों से पूछा गया तो

577
00:42:34,600 --> 00:42:38,560
19 4% ने कहा कि वो खेलकूद में 
बाकी सबसे बेहतर है। 

578
00:42:39,160 --> 00:42:43,520
मैथ के हिसाब से सब लोग एवरेज से 
ओपेन नहीं हो सकते, लेकिन हमारे 

579
00:42:43,520 --> 00:42:45,720
जीन्स हमें ऐसा ही यकीन दिलाते 
हैं। 

580
00:42:45,880 --> 00:42:53,000
ताकि हम और रिस्क ले सके। 
हमारे पूर्वजों के लिए समाज में 

581
00:42:53,000 --> 00:42:58,160
गलती करना जानलेवा हो सकता था। 
अगर आप अपने कबीले के किसी गलत 

582
00:42:58,160 --> 00:43:02,680
आदमी को गुस्सा दिला देते तो शायद
आपको मार दिया जाता। 

583
00:43:02,880 --> 00:43:07,520
इसलिए हमारे जीन्स हमें बहुत संभल
कर रहना सिखाते हैं, लेकिन आज की 

584
00:43:07,520 --> 00:43:11,120
दुनिया अलग है। 
अगर आप किसी नौकरी में फैल भी हो 

585
00:43:11,120 --> 00:43:15,640
जाते हैं तो आपकी जान नहीं जाएगी।
आप दूसरी नौकरी ढूंढ लेंगे। 

586
00:43:16,320 --> 00:43:20,400
अपनी नौकरी और काम के मामले में 
अक्सर हम अपने पुराने डर। 

587
00:43:20,400 --> 00:43:27,360
की वजह से बहुत पीछे रह जाते हैं।
हमारे जीन्स ने हमें ऐसा क्यों 

588
00:43:27,360 --> 00:43:31,960
बनाया कि हम कभी पूरी तरह खुश 
होकर नहीं बैठते और हमेशा कुछ 

589
00:43:31,960 --> 00:43:37,080
पाने की तलाश में रहते हैं? 
डॉग रेसिंग करवाने वाले लोग एक 

590
00:43:37,080 --> 00:43:41,480
छलासी करते हैं, वो कुत्तों के 
आगे एक नकली खरगोश दौड़ाते। 

591
00:43:41,480 --> 00:43:43,640
हैं। 
कुत्तों को लगता है कि वो उसे 

592
00:43:43,640 --> 00:43:48,960
पकड़कर आ जाएंगे, पर वो खरगोश 
हमेशा उनसे थोड़ा आगे ही रहता है।

593
00:43:49,680 --> 00:43:52,440
हमारी खुशियां भी उस नकली खरगोश 
जैसे ही है। 

594
00:43:53,000 --> 00:43:57,400
हमारे जीन्स खुशियों को एक और 
जारे का टूल की तरह इस्तेमाल करते

595
00:43:57,400 --> 00:44:01,360
हैं ताकि हम वो काम करें जिससे 
उनका फायदा हो। 

596
00:44:02,120 --> 00:44:06,520
हमें लगता है कि अगर बस थोड़ा सा 
और मिल जाए तो हम हमेशा के लिए 

597
00:44:06,520 --> 00:44:10,440
खुश हो जाएंगे। 
हमें लगता है कि अगली तरक्की, 

598
00:44:10,600 --> 00:44:14,920
अगला प्रमोशन ये लॉटरी के बाद 
सारी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी। 

599
00:44:15,680 --> 00:44:19,960
पर हमारे सपने हमेशा एक कदम आगे 
रहते हैं ताकि हम कभी रुके नहीं 

600
00:44:19,960 --> 00:44:24,480
और मेहनत करते रहे। 
इस सिस्टम की वजह से हम अपनी 

601
00:44:24,480 --> 00:44:28,120
अच्छी किस्मत के भी बहुत जल्दी 
आदी हो जाते हैं। 

602
00:44:29,800 --> 00:44:34,240
कितना भी मिल जाए कम ही है। 
हम एक्स्ट्रा पैसे पाकर बहुत मज़ा

603
00:44:34,240 --> 00:44:37,960
आता है, पर थोड़े समय बाद वो मज़ा
खत्म हो जाता है। 

604
00:44:37,960 --> 00:44:40,960
यह एक। 
ऐसी मशीन की तरह है जीस पर हम 

605
00:44:40,960 --> 00:44:45,240
भागते तो बहुत हैं पर अपनी जगह से
एक इंच भी आगे नहीं बढ़ते। 

606
00:44:46,360 --> 00:44:50,280
ऐसा क्यों है? 
क्योंकि वो एक कॉम्पिटिशन है। 

607
00:44:50,800 --> 00:44:55,800
लिहाज़िद उसकी नहीं होती जिसके 
पास एनफ हो, जिसके पास काफी हो। 

608
00:44:56,360 --> 00:44:59,880
ये तुसकी होती है जिसके पास दूसरे
से ज्यादा हो। 

609
00:45:01,040 --> 00:45:05,320
हमारे पूर्वज वो लोग थे जिन्होंने
सबसे ज्यादा बच्चे पैदा किए और 

610
00:45:05,320 --> 00:45:12,040
सबसे ज्यादा खाना जमा किया। 
रिसर्च में ये भी देखा गया कि अगर

611
00:45:12,040 --> 00:45:16,040
किसी को जमीन पर गिरा हुआ 10 पैसे
का सिक्का भी मिल गया। 

612
00:45:16,160 --> 00:45:20,400
तो वो पूरे दिन के लिए खुद को 
बहुत खुश महसूस करने लगता है। 

613
00:45:21,800 --> 00:45:26,040
एक पुरानी कहानी है। 
एक किसान अपने छोटे से घर और शोर 

614
00:45:26,040 --> 00:45:30,360
मचाते परिवार से बहुत दुखी था। 
वो एक फिलॉसफर के पास गया। 

615
00:45:30,360 --> 00:45:34,200
उस आदमी ने कहा। 
अपने बकरे भी घर के अंदर ले आओ। 

616
00:45:34,240 --> 00:45:36,760
किसान परेशान हो गया पर उसने ऐसा 
ही किया। 

617
00:45:37,440 --> 00:45:40,800
अगले हफ्ते उस आदमी ने कहा अब 
अपनी गाय भी अंदर ले आओ। 

618
00:45:41,840 --> 00:45:46,280
घर में बहुत गंदगी और भीड़ हो गई।
आखिर में उस आदमी ने कहा अब सारे 

619
00:45:46,280 --> 00:45:51,120
जानवरों को बाहर निकाल दो। 
किसान वापस आया और बोला अरे वाह। 

620
00:45:51,200 --> 00:45:54,320
अब हमारा घर कितना बड़ा और खुला 
खुला लग रहा है। 

621
00:45:54,920 --> 00:45:59,880
घर तो उतना ही बड़ा था पर किसान 
का सोचने का तरीका बदल गया। 

622
00:46:02,160 --> 00:46:06,600
अगर आप किसी को ₹800 का गिफ्ट 
देना चाहते हैं तो उसे एक बार में

623
00:46:06,600 --> 00:46:10,360
देने के बजाय 600 का एक दीजिए और 
बाकी के 200 के। 

624
00:46:10,920 --> 00:46:13,120
छोटेछोटे सरप्राइज़ बाद में 
दीजिए। 

625
00:46:13,760 --> 00:46:16,520
बारबार मिलने वाली खुशी ज्यादा 
बड़ी होती है। 

626
00:46:18,000 --> 00:46:21,960
अगर आपको कोई बड़ा काम करना है 
जैसे पूरी किताब लिखना तो उसे 

627
00:46:21,960 --> 00:46:27,200
छोटेछोटे हिस्सों में बांट दीजिए।
हर छोटा हिस्सा पूरे होने पर आपको

628
00:46:27,200 --> 00:46:33,000
प्रोग्रेस का अहसास होगा। 
खाली बैठकर ये आलस करके लोग खुश 

629
00:46:33,000 --> 00:46:37,200
नहीं होते। 
असली खुशी तब मिलती है जब हम किसी

630
00:46:37,200 --> 00:46:41,800
काम में पूरी तरह हो जाते हैं और 
अपनी काबिलियत का इस्तेमाल करते। 

631
00:46:41,800 --> 00:46:49,080
हैं। 
सारे जानवर बच्चा पैदा करने का 

632
00:46:49,080 --> 00:46:53,560
खेल खेलते हैं। 
एक फ़िल्म है ईडी टी वि। 

633
00:46:53,560 --> 00:46:56,920
इसमें हीरो अपनी गर्लफ्रेंड को 
धोखा देते हुए पकड़ा जाता है। 

634
00:46:58,000 --> 00:47:02,280
जब उससे पूछा गया कि उसने ऐसा 
क्यों किया तो वो कहता है मैं 

635
00:47:02,280 --> 00:47:07,720
लड़का हूँ, मैं रुकता नहीं, ये 
औरतों का काम है, हम गैस है और वो

636
00:47:07,720 --> 00:47:10,640
ब्रेक। 
आखिर लड़के और लड़कियों के बारे 

637
00:47:10,640 --> 00:47:16,480
में हमारी ये सोच कहाँ से आई? 
हम इंसानों के बारे में एक छोटे 

638
00:47:16,480 --> 00:47:19,600
से कीड़े बस क्रिकेट से बहुत कुछ 
सीख सकते हैं। 

639
00:47:20,360 --> 00:47:24,600
इन कीड़ों में एक अजीब बात है जब 
ये बच्चा पैदा करने के लिए मिलते 

640
00:47:24,600 --> 00:47:28,640
हैं तो मेल क्रिकेट अपने वजन का 
चौथा हिस्सा निकाल देता है। 

641
00:47:29,320 --> 00:47:32,160
यह फीमेल क्रिकेट के लिए खाने की 
तरह होता है। 

642
00:47:34,120 --> 00:47:38,440
अगर इंसानों में ऐसा होता तो एक 
आदमी को एक बार में करीब 23 किलो 

643
00:47:38,440 --> 00:47:42,920
का सीमेन निकालना पड़ता। 
अगर मर्दों के साथ ऐसा होता तो 

644
00:47:42,920 --> 00:47:45,800
क्या वो आज भी ऐसे ही होते? 
जवाब ही नहीं। 

645
00:47:46,880 --> 00:47:49,680
फीमेल क्रिकेट के लिए यह खाना 
बहुत जरूरी चीज़ है। 

646
00:47:50,240 --> 00:47:54,160
उसे जितना ज्यादा खाना और इस पर 
मिलता है वो उतने ही ज्यादा बच्चे

647
00:47:54,160 --> 00:47:57,840
पैदा कर पाती है। 
इसलिए मेल क्रिकेट अपनी पसंद को 

648
00:47:57,840 --> 00:48:02,600
लेकर बहुत सावधान रहते हैं। 
वो सिर्फ उन बड़ी फीमेल्स को 

649
00:48:02,600 --> 00:48:05,160
चुनते हैं जो ज्यादा बच्चे दे 
सके। 

650
00:48:05,920 --> 00:48:08,360
यहाँ फीमेल क्रिकेट मेल को रह 
जाती है। 

651
00:48:08,720 --> 00:48:11,560
अगर वो बोल। 
पाती तो शायद मेल क्रिकेट से 

652
00:48:11,560 --> 00:48:14,920
वफादारी और प्यार के झूठे वादे भी
करती। 

653
00:48:16,520 --> 00:48:22,680
इसके उलट इंसान के मेल मर्द बड़े 
इजी होते। 

654
00:48:22,680 --> 00:48:25,680
हैं। 
वो बिना सोचे समझे सेक्स बनाने के

655
00:48:25,680 --> 00:48:31,160
लिए तैयार हो जाते हैं। 
एक स्टडी में कॉलेज के 75% लड़कों

656
00:48:31,160 --> 00:48:35,000
ने एक अजनबी लड़की के साथ जाने के
लिए फौरन हाँ कह दिया। 

657
00:48:35,400 --> 00:48:39,760
वहीं जब लड़कियों से पूछा गया तो 
एक भी लड़की राजी नहीं हुई। 

658
00:48:42,240 --> 00:48:45,880
कल्चर। 
समाज लोग अक्सर हमें अलग तरह से 

659
00:48:45,880 --> 00:48:49,360
पालते हैं। 
पहले औरतों को वोट देने का हक 

660
00:48:49,360 --> 00:48:52,240
नहीं था, ये उन्हें जज नहीं बनाया
जाता था। 

661
00:48:52,760 --> 00:48:56,880
हमें लगता था कि ये नेचुरल है पर 
असल में ये समाज की बंदिशों की 

662
00:48:56,880 --> 00:49:00,680
वजह से था। 
लेकिन क्या ऐसी कुछ चीजें हैं जो 

663
00:49:00,680 --> 00:49:02,760
सच में हमारे जीन्स की वजह से अलग
हैं? 

664
00:49:03,040 --> 00:49:12,520
जवाब है हाँ मर्दों का वजन औरतों 
से ऑन एवरेज 20% ज्यादा होता है 

665
00:49:12,520 --> 00:49:15,240
और उनकी मसल से ज्यादा मजबूत होती
है। 

666
00:49:15,640 --> 00:49:19,200
मर्द औरतों से करीब पांच इंच 
ज्यादा लंबे होते। 

667
00:49:19,200 --> 00:49:22,200
हैं। 
अगर हम दोतीन साल के छोटे बच्चों 

668
00:49:22,200 --> 00:49:26,400
को देखें, जिन्हें अभी समाज ने 
ज्यादा कुछ सिखाया नहीं है तो भी 

669
00:49:26,400 --> 00:49:30,720
19% लड़के लड़कियों से ज्यादा दूर
तक बॉल फेंक सकते हैं। 

670
00:49:31,280 --> 00:49:35,600
यहाँ तक कि माँ की कोख में। 
कुंभ में भी लड़की के हाथ की 

671
00:49:35,720 --> 00:49:39,840
हड्डियों लड़की के मुकाबले शरीर 
के हिसाब से बड़ी होती हैं। 

672
00:49:40,800 --> 00:49:44,960
यानी पैदा होने से पहले ही लड़कों
के पास कुछ फायदे होते हैं। 

673
00:49:46,120 --> 00:49:50,560
एक मजेदार सबूत यह है कि अगर 
मर्दों के शरीर से मेलहार्मोन 

674
00:49:51,120 --> 00:49:55,440
टेस्टोस्टोरोन को कम कर दिया जाए 
तो वो 15 साल से ज्यादा जी सकते 

675
00:49:55,440 --> 00:49:56,360
हैं। 
यानी। 

676
00:49:56,640 --> 00:50:01,360
लंबे समय तक जीने के लिए औरत का 
शरीर बेहतर तरीके से बना है। 

677
00:50:04,320 --> 00:50:09,080
मर्दों को क्या चाहिए? 
अगर आप आज की मिस अमेरिका को 

678
00:50:09,080 --> 00:50:11,760
देखें तो खूबसूरती की एक 
एग्ज़ैम्पल है। 

679
00:50:12,480 --> 00:50:16,480
20 साल पुराने विनर को देखें। 
तो वो थोड़ी अलग और शायद पतली 

680
00:50:16,480 --> 00:50:21,680
दिखेगी और 1920 की विनर्स तो 
थोड़ी गोलमटोल भी हो सकती है 

681
00:50:22,600 --> 00:50:25,840
लेकिन अगर आप ध्यान से 
इन्वेस्टिगेशन करें तो इन सब में 

682
00:50:25,840 --> 00:50:30,280
एक ही चीज़ बिल्कुल एक जैसी है। 
भले ही लड़कियों का शरीर छोटा या 

683
00:50:30,280 --> 00:50:35,000
बड़ा रहा हो लेकिन उनकी सेब। 
हमेशा ही एक जैसी रही। 

684
00:50:35,800 --> 00:50:41,080
1920 से लेकर 1980 तक की 60 से 
ज्यादा विनर की कमर उनकी वेस्ट 

685
00:50:41,080 --> 00:50:44,240
हो। 
जब उनके हिप्स से नापा गया तो 

686
00:50:44,240 --> 00:50:50,440
नतीजा हमेशा 0.7 के आसपास ही आया।
इसका मतलब क्या है? 

687
00:50:51,120 --> 00:50:55,760
चाहे कमर? 
26 इंच और हिप्स 37 इंच या फिर 

688
00:50:55,760 --> 00:51:02,080
कमर 22 और हिप्स 31 इंच। 
मर्दों को शरीर की बनावट यानी आवर

689
00:51:02,080 --> 00:51:04,960
ग्लास शेप पसंद आती है, साइज 
नहीं। 

690
00:51:06,840 --> 00:51:11,640
हाइबरन से लेकर मर्लिन मुनरो तक 
सबका यही हिसाब था। 

691
00:51:12,520 --> 00:51:16,360
वैज्ञानिक ने पाया कि ऐसी बनावट 
वाली औरतों के माँ बनने की 

692
00:51:16,440 --> 00:51:21,760
संभावना सबसे ज्यादा होती है 
इसलिए मर्दों की जींस इस खास 

693
00:51:21,760 --> 00:51:27,000
बनावट की तरफ खींचे चले जाते हैं।
मर्दों को जवान लड़कियां और उनके 

694
00:51:27,000 --> 00:51:30,680
चेहरे के कुछ खास निशान पसंद आते 
हैं। 

695
00:51:30,800 --> 00:51:34,800
जैसे भरे हुए होंठ, बड़ी आँखें और
चमकते बाल। 

696
00:51:35,720 --> 00:51:40,680
ऐसा इसलिए नहीं कि जवानी में कोई 
जादू है बल्कि इसलिए क्योंकि 

697
00:51:40,680 --> 00:51:47,320
जवानी का मतलब है बच्चा पैदा करने
का सबसे सही समय लिपस्टिक से होंठ

698
00:51:47,320 --> 00:51:52,440
जवान लगते हैं और क्रीम से। 
स्किन साफ दिखती है जिससे हमारी 

699
00:51:52,440 --> 00:51:56,120
जीन्स बिमारी से मुक्त यानी 
हेल्थी पड़ते हैं। 

700
00:51:57,200 --> 00:52:02,800
इसीलिए ईजिप्ट के राजाओं के समय 
से ही लोग सजने धवरने का काम कर 

701
00:52:02,800 --> 00:52:06,560
रहे हैं। 
एक और मजेदार बात। 

702
00:52:06,600 --> 00:52:10,480
मर्दों को वो औरतें पसंद आती हैं 
जो उनमें इंट्रेस्ट दिखाती हैं। 

703
00:52:11,200 --> 00:52:15,760
जब कोई महिला किसी मर्द को पसंद 
करती है तो उसकी आँखों की 

704
00:52:15,760 --> 00:52:18,240
पुतलियां, उसकी प्यूपिल्स बड़ी हो
जाती। 

705
00:52:18,240 --> 00:52:21,600
हैं। 
एक्ट्रेस में देखा गया है कि जब 

706
00:52:21,600 --> 00:52:25,240
औरतों ने आँखों में दवा डालकर 
पुतलियों को बड़ा कर लिया। 

707
00:52:25,360 --> 00:52:28,640
तो मर्द उनकी तरफ बहुत ज्यादा 
खिचे चले आते हैं। 

708
00:52:30,120 --> 00:52:34,640
मुनरो के बारे में कहा जाता है कि
उन्होंने तब तक जॉन ऐफ़ कैनेडी के

709
00:52:34,640 --> 00:52:38,520
साथ सेक्स नहीं किया जब तक वो 
राष्ट्रपति नहीं बन गए। 

710
00:52:39,240 --> 00:52:43,000
बहुत से जानवरों में फीमेल सिर्फ 
उन्हीं मर्दों को चुनती है। 

711
00:52:43,080 --> 00:52:49,520
जिनका स्टेटस सबसे ऊंचा हो। 
इंसानों में स्टेटस बहुत मायने 

712
00:52:49,520 --> 00:52:53,160
रखता है। 
ये औरतें पढ़ी लिखी और ऊंचे रुतबे

713
00:52:53,160 --> 00:52:57,480
वाले मर्दों से शादी करती हैं। 
वो अक्सर ज्यादा खुश रहते हैं और 

714
00:52:57,480 --> 00:52:59,280
उनके ज्यादा बच्चे होते। 
हैं। 

715
00:52:59,760 --> 00:53:03,680
औरतों के लिए पैसा और कामयाबी? 
बहुत बड़ा अट्रैक्शन। 

716
00:53:03,680 --> 00:53:06,680
है। 
एक टेस्ट में देखा गया कि औरतों 

717
00:53:06,680 --> 00:53:11,960
को एक बदसूरत आदमी रोलक्स घड़ी 
पहनना ज्यादा पसंद आया बजाए एक 

718
00:53:11,960 --> 00:53:15,360
हैंडसम आदमी के, जिसने मामूली 
कपड़े पहने थे। 

719
00:53:19,760 --> 00:53:24,120
जब मर्द और औरत से पूछा गया जो 
उन्हें साथी में उन्हें मेट में 

720
00:53:24,120 --> 00:53:27,120
क्या चाहिए? 
तो दोनों का पहला जवाब था 

721
00:53:27,280 --> 00:53:32,920
काइंडनेस एंड अंडरस्टैंडिंग, 
दयालु और समझने वाला और जब औरतों 

722
00:53:32,920 --> 00:53:37,120
ने स्पम बैंक से स्पम चुना तो 
उन्होंने भी उन मर्दों को पसंद 

723
00:53:37,120 --> 00:53:39,960
किया जो ईमानदार और। 
भरोसेमंद थे। 

724
00:53:40,200 --> 00:53:48,360
ऑन ए स्टोर डिपेंडेबल तो भले ही 
हम अपने जीन्स नहीं बदल सकते पर 

725
00:53:48,360 --> 00:53:50,200
हम अच्छे इंसान तो बन ही सकते 
हैं। 

726
00:53:50,400 --> 00:53:55,120
खुश रहना, सेहत का ध्यान रखना और 
दूसरों की इज्जत करना। 

727
00:53:55,280 --> 00:53:59,400
ये वो रास्ते हैं जो किसी को भी 
सबसे ज्यादा सुंदर बना सकते हैं। 

728
00:54:02,160 --> 00:54:07,400
लियो टॉलेस्टाइन नाम के एक बड़े 
लेखक ने कहा था, सारे खुश परिवार 

729
00:54:07,400 --> 00:54:11,920
एक जैसे होते हैं पर हर दुखी 
परिवार की अपनी अलग ही कहानी होती

730
00:54:11,920 --> 00:54:16,120
है। 
जीतने भी खुश लोग हैं। 

731
00:54:16,280 --> 00:54:21,200
उनमें एक बात कॉमन होती है। 
उनका अपनी इच्छाएं अपने पैशन्स पर

732
00:54:21,280 --> 00:54:26,760
सेल्फ कंट्रोल होता है। 
अब सबके अंदर कुछ ऐसे काम करने की

733
00:54:26,760 --> 00:54:30,520
इच्छा होती है जिन्हें करने के 
बाद हमें पछतावा होता है। 

734
00:54:31,120 --> 00:54:35,360
अगर हम खाने सिक्स। 
यह पैसे के लालच जैसी बुरी आदतों 

735
00:54:35,360 --> 00:54:39,240
से बच सके, तभी हम एक सुखी 
ज़िन्दगी जी सकते हैं। 

736
00:54:40,080 --> 00:54:43,160
हम अपनी बुरी आदतों को ना क्यों 
नहीं कह पाते? 

737
00:54:43,920 --> 00:54:46,800
अगर हम खुद के मालिक नहीं हैं तो 
फिर कौन है? 

738
00:54:50,360 --> 00:54:54,080
हमारे मुश्किल यह है कि हमारा 
शरीर एक बहुत ही कॉम्प्लिकेटेड 

739
00:54:54,080 --> 00:55:00,760
मशीन है, जिसका बहुत पुराना 
इतिहास है, पर हमें इसे चलाने का 

740
00:55:00,760 --> 00:55:05,360
तरीका किसी ने नहीं सिखाया। 
हम अक्सर गलतियाँ करके ही सीखते 

741
00:55:05,360 --> 00:55:08,240
हैं, इसलिए हम बहुत बार फेल होते 
हैं। 

742
00:55:08,800 --> 00:55:13,040
अब्राहम लिंकन को ही देख लीजिए। 
प्रेसिडेंट बनने से पहले वो अपनी 

743
00:55:13,040 --> 00:55:16,680
जिंदगी में कई बार हारे। 
वो कई चुनाव हारे पर उन्होंने 

744
00:55:16,680 --> 00:55:20,480
कोशिश नहीं छोड़ी। 
हम सब की जिंदगी में भी ऐसी ही 

745
00:55:20,480 --> 00:55:22,800
बड़ी बड़ी लड़ाईयां चलती रहती 
हैं। 

746
00:55:23,560 --> 00:55:26,520
दिक्कत सिर्फ ये नहीं है कि हमें 
चीजें सीखनी। 

747
00:55:26,520 --> 00:55:29,880
पड़ती हैं। 
असल मुसीबत तो ये है कि हमें लगता

748
00:55:29,880 --> 00:55:34,280
है कि हमारा खुद पर बहुत काबू है 
और सच में ऐसा नहीं है। 

749
00:55:35,480 --> 00:55:37,480
वैज्ञानिक ने एक एक्स्पेरमेन्ट 
किया। 

750
00:55:37,680 --> 00:55:41,880
उन्होंने लोगों को एक मशीन के 
अंदर रखा और कहा, आप अपनी मर्जी 

751
00:55:41,880 --> 00:55:46,760
से लेफ्ट या राइट बटन दबाइए और 
हमें बताइए कि आपने फैसला कब 

752
00:55:46,760 --> 00:55:50,000
लिया? 
रिज़ल्ट बहुत चौंकाने वाला था। 

753
00:55:50,560 --> 00:55:54,520
लोगों को यह लगा कि उन्होंने 
फैसला लिया है उससे सात सेकंड 

754
00:55:54,520 --> 00:55:57,120
पहले ही उनके दिमाग में फैसला कर 
लिया था। 

755
00:55:57,240 --> 00:56:01,880
मतलब हमारा दिमाग हमारे सोचने से 
पहले ही काम कर देता है। 

756
00:56:01,960 --> 00:56:05,560
हमें बस धोखा दिया जाता है कि 
फैसला हमने। 

757
00:56:05,560 --> 00:56:10,080
लिया है। 
जबकि वो काम हमारा सब कॉन्शस पहले

758
00:56:10,080 --> 00:56:15,080
ही कर चुका होता है। 
अपनी आदतों को बदलने में तीन बड़ी

759
00:56:15,080 --> 00:56:20,320
रुकावटें आती हैं। 
प्लेज़र यानी मज़ा बुरी आदतें 

760
00:56:20,320 --> 00:56:24,880
हमें बहुत मज़ा देती हैं क्योंकि 
वो दिमाग में नाम का एक केमिकल 

761
00:56:24,880 --> 00:56:29,720
छोड़ती हैं। 
दूसरा कंट्रोल की कमी क्योंकि वो 

762
00:56:29,720 --> 00:56:32,880
चीजें अच्छी लगती हैं इसलिए हम 
खुद को रोक नहीं पाते। 

763
00:56:33,680 --> 00:56:39,720
तीसरा, जरूरत से ज्यादा भरोसा 
ऑप्टिमिस्म हमें लगता है कि जब हम

764
00:56:39,720 --> 00:56:44,240
चाहे खुद को रोक लेंगे, पर असल 
में हमारी विलपॉवर हमारी 

765
00:56:44,240 --> 00:56:50,160
इच्छाशक्ति बहुत कमजोर होती है। 
खुद पर काबू पाने के चार तरीके 

766
00:56:50,160 --> 00:56:54,040
हैं फॉर स्ट्रेटेजीज सिगरेट 
छोड़ना बहुत आसान है। 

767
00:56:54,040 --> 00:56:58,840
मैंने इसे सैकड़ों बार छोड़ा है। 
यह मजाक हमें बताता है कि खुद पर 

768
00:56:58,960 --> 00:57:03,560
कंट्रोल करना कितना मुश्किल है पर
हम अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते

769
00:57:03,560 --> 00:57:06,040
हैं। 
इसके लिए चार तरीके काम आते हैं। 

770
00:57:06,440 --> 00:57:13,520
तरीका एक पहला तरीका विलपॉवर 
इच्छाशक्ति यह तरीका काम करता है 

771
00:57:13,520 --> 00:57:17,640
पर यह सबसे मुश्किल है। 
अगर आप किसी पुरानी आदत से जूझ 

772
00:57:17,640 --> 00:57:22,040
रहे हैं तो शायद आप इस तरीके को 
पहले ही आजमा चूके होंगे और फैल 

773
00:57:22,040 --> 00:57:25,640
हुए होंगे। 
दूसरा तरीका है अल्टरनेटिव। 

774
00:57:25,880 --> 00:57:30,760
यानी बेहतर रास्ता कोई ऐसा रास्ता
ढूंढिए जो बुरा ना हो पर मज़ा तो 

775
00:57:30,760 --> 00:57:36,720
नहीं दे जैसे नशे के बजाय रोलर 
कोस्टर की सवारी करना शुगर के 

776
00:57:36,720 --> 00:57:42,720
बजाय बिना कैलोरी वाली मीठी चीजें
खाना तीसरा तरीका रास्ता ही बंद 

777
00:57:42,720 --> 00:57:46,200
कर देना। 
बुरी आदत का मौका ही मत दीजिए, 

778
00:57:47,080 --> 00:57:52,040
रात को फ्रिज पर ताला लगा दीजिए, 
जुआ खेलने जाइए तो क्रेडिट कार्ड 

779
00:57:52,120 --> 00:57:55,560
घर छोड़ दीजिए। 
सिगरेट पीने वाले दोस्तों से दूर 

780
00:57:55,560 --> 00:58:00,200
रहिए, चौथा तरीका पहले ही मन बदल 
लेना। 

781
00:58:00,880 --> 00:58:03,760
फैसला लेने के समय से पहले ही कुछ
ऐसा करिए। 

782
00:58:03,840 --> 00:58:08,800
कि आपकी इच्छा बदल जाए, जैसे किसी
दावत में किसी पार्टी में जाने से

783
00:58:08,800 --> 00:58:13,280
पहले कुछ हेल्ती खा लीजिए ताकि 
वहाँ जाकर आप जंक फूड पर न टूट 

784
00:58:13,280 --> 00:58:16,640
पड़ें। 
बैंक से पैसे कटकर सीधे सेविंग 

785
00:58:16,640 --> 00:58:20,840
अकाउंट में चले जाएं ताकि आपके 
हाथ में फालतू पैसे ना रहें। 

786
00:58:22,920 --> 00:58:27,240
हमारी प्रोब्लम्स असल में उन 
आदतों की वजह से है जिन्होंने 

787
00:58:27,240 --> 00:58:31,360
हमारे पूर्वजों, हमारे एंसेस्टर्स
को जिंदा रखने में मदद की थी। 

788
00:58:32,560 --> 00:58:37,280
हमें खुद का स्टूडेंट बनना होगा 
और यह समझना होगा कि हम खुद को 

789
00:58:37,280 --> 00:58:41,120
कैसे आउट स्मार्ट कर सकें। 
चकमा दे सकते हैं? 

790
00:58:41,960 --> 00:58:48,160
हमारे हमारी इच्छाएं बहुत ताकतवर 
और जिद्दी हैं पर हमारा हारना तय 

791
00:58:48,160 --> 00:58:52,200
नहीं है। 
हमारे पुराने और सेल्फिश जीन्स 

792
00:58:52,320 --> 00:58:56,200
स्वार्थी जीन्स हमें हर दिन 
प्रभावित करते हैं। 

793
00:58:56,840 --> 00:59:01,120
पर अगर हम उनके सोचने का तरीका 
समझ ले, उनका माइंडसेट समझ ले। 

794
00:59:01,600 --> 00:59:06,880
तो हम अपनी अक्ल और डिसिप्लिन से 
एक अच्छी और खुशहाल जिंदगी जी 

795
00:59:06,880 --> 00:59:17,140
सकते हैं। 
इस बुक में बस इतना ही हम फिर 

796
00:59:17,140 --> 00:59:22,620
मिलेंगे आपसे एक नए एपिसोड में एक
नई किताब के साथ मेरा नाम है 

797
00:59:22,620 --> 00:59:25,460
रोहित और आप सुन रहे थे सिलेबस 
विथ रोहित? 

798
00:59:25,800 --> 00:59:26,520
धन्यवाद।
